वाह वाह ताऊ क्या लात है? में श्री दिगंबर नासवा


होली के रंग में रंगे हुये रामप्यारे और मिस रामप्यारी दोनों ने आज इतनी भांग डकार ली कि दोनों बेसुध पडे हुये हैं.  "चैन से होली मनाना है तो ताऊ की  भंग पी जाईये" कार्यक्रम वाला मैं   रमलू सियार ताऊ टीवी के कार्यक्रम वाह वाह ताऊ क्या लात है? में आपका स्वागत करता हूं.

मित्रों, अभी तक ताऊ टीवी की सभी सनसनी खेज खबरे और चमकाने धमकाने के काम करने वाला मैं रमलू सियार हूं. मुझे मनोरंजक कार्यक्रम पेश करने का ज्यादा अनुभव नही है अत: किसी भी गडबडी के लिये आपसे पहले ही क्षमा याचना कर लेता हूं.

वैसे कुछ ज्यादा गडबड नही करूंगा...बस कुछ फ़ोटो इधर उधर लग जायें तो ध्यान मत दिजियेगा...राज की बात यह है कि मैने भी थोडी सी भांग चढा रखी है.....

आपका समय खराब नही करते हुये अब सीधे चलते हैं "वाह वाह ताऊ क्या लात है?" कार्यक्रम में.....



 आज के कार्यक्रम की शुरूआत कर रहे हैं मशहूर ब्लागर और हास्य कवि श्री दिगंबर नासवा ....आईये दिगंबर साहब ...और माईक थामकर....सर्व प्रथम  जिसका जो भी सूजाना हो वह  सुजा कर  कार्यक्रम का जय श्री गोबर गणेश करिये.......




"वाह वाह ताऊ क्या लात है?" में कवि श्री दिगंबर नासवा

ब्लागर साथियों,  "ताऊ टीवी फ़ोडके चैनल" के "वाह वाह ताऊ क्या लात है? कार्यक्रम में आते ही मुझे भंग पिला दी गई है,  परंपरा के नाम पर..... मुझे मालूम होता तो मैं आने के पहले एंटी भंग डोज लेके आता...खैर   होली के विभिन्न रंग लिये  रचना पेश कर रहा हूं....दाद दिजियेगा...... सुनिये...

तो कविता से पहले पेश हैं तीन लाइनें ...

पिछवाड़ा है सूजा सूजा चिंता की तो बात है
बुरा न मानो भईया ये तो होली की सौगात है
ताई भी गुर्राती है अब वाह ताऊ क्या लात है

तो इब पेश है कविता या यूं कहो हमारी दास्तां ... की आपकी भौजाई के ताई
बनने से पहले क्या क्या गुल खिले थे ...

अब तो जो भी कहता हूं सारी बातें है मान रही
होली के दिन काहे बिल्लो तू हमसे अंजान रही

तेरा भाई तो गुंडों को
होली के दिन लाया था
पर मेरे यारों ने मिल कर
उनका बैंड बजाया था

रंग लगाया था उस दिन चाहे आफत में जान रही
होली के दिन काहे बिल्लो तू हमसे अंजान रही

डर न जाऊं इसी लिए मैं
भांग चढा के आया था
सबको कीचड़ पर तेरे
गालों पे रंग लगाया था

गुस्से में था ताऊ पर ताई बन के दरबान रही
होली के दिन काहे बिल्लो तू हमसे अंजान रही

ताऊ घर पे आया ओ’
मेरे अब्बू से बात करी
सब ने मिल के थप्पड़ मुक्के
लातों की बरसात करी

तुझको पाना है बस तब से तू मेरा ईमान रही
होली के दिन काहे बिल्लो तू हमसे अंजान रही

ओर अब तो वो बिल्लो दो दो बच्चों की माँ है ... वैसे ही पटाखा है ...
जैसे ताऊ के ज़माने में थी ...

भंग के सरूर में  होली की शुभकामनायें ... सभी को ...

दिगंबर

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इसके पहले आपने सुश्री सतीशा देवी का "दो चोटी तोड डांस" देखा था. कौन होगी "नाच मेरी बुलबुल" प्रतियोगिता की विजेता? यह भविष्य का सवाल है. ज्यों ज्यों प्रतियोगिता आगे बढती जायेगी, सभी की धडकने भी बढती जायेगीं.

और दर्शकों अब दिल थाम के बैठिये...कहीं आपका दिल टपक ना जाये....अब प्रतियोगिता की प्रबल दावेदार...ब्लागिस्तान की मशहूर बुलबुलों की बुलबुल.....चमेलियों की चमेली.... सुश्री दिगंबरा देवी...जो आपके सामने पेश करने जा रही हैं... चमेली बाग में अपना प्रसिद्ध  चमेली  नृत्य..... 


सुश्री दिगंबरा देवी "नाच मेरी बुलबुल" प्रतियोगिता में चमेली डांस करते हुये



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मित्रों, अभी तक आप  ब्लागिस्तान की मशहूर नृत्यांनाओं.....मटका तोड  डांसर सुश्री अजया देवी, बेलन तोड डांसर सुश्री रूपा देवी, चिमटा तोड डांसर सुश्री दिगंबरा देवी, दिल तोडू लठ्ठ डांस की मल्लिका सुश्री काजल देवी और चोटी तोड डांसर  सुश्री सतीशा देवी के जलवे देख चुके हैं......... 

कौन होगी अगली नृत्यांगना? आप  कहीं भी जाये...पर दोस्तों हमारे कार्यक्रम के अगले भाग में....देखना ना भूलियेगा.......हमारी अगली प्रतियोगी .... ताजातरीन....गुलों की महफ़िलों की बुलबुल.... "..........डांस"""""   की मल्लिका .....................???????

"वाह वाह ताऊ क्या लात है?" में श्री सतीश सक्सेना

हाय...अंक्ल्स...आंटीज... भैयाज एंड  दीदीज...मैं मिस रामप्यारी,  "ताऊ टीवी फ़ोडके चैनल" के होली कार्यक्रम "वाह वाह ताऊ क्या लात है?"  में  अपने कैमरामैन रामप्यारे के साथ आपका बादाम बजा लाती हूं. आप सोच रहे होंगे कि ये  मिस रामप्यारी अचानक कहां से आ टपकी? तो चिंता मत किजिये मैं दिमाग खाने और फ़ालतू बकवास करने का  हाई डिग्री कोर्स करने विदेश गई थी जहां से अपना कोर्स पूरा करके वापस आ गई हूं. अब मैं अक्सर आपका दिमाग खाती ही रहुंगी. 
वैसे तो लोग कहते हैं कि मिस. रामप्यारी को चूहे खाने में बहुत मजा आता है पर सच बताऊं,  मुझे जो मजा लोगों का  दिमाग  खाने में  आता है ना...उससे ज्यादा स्वाद  किसी और चीज में नही आता...और अब तो मैने इसमे बिलायती डिग्री भी हासिल कर ली है.  पर आप घबराईये मत, आज मैं आपका दिमाग  नही खाते हुये  सीधे  लिये चलती हुं "वाह वाह ताऊ क्या लात है?" कार्यक्रम में.....

आज के कार्यक्रम की शुरूआत कर रहे हैं मशहूर ब्लागर और मार्मिक गीतकर. श्री सतीश सक्सेना अंकल....आईये अंकल...और माईक थामकर....सर्व प्रथम  गुरू घंटालों की आरती उतार कर कार्यक्रम का फ़नाफ़िल्ला कर दिजिये.......


प्यारे ब्लागर साथियों,  "ताऊ टीवी फ़ोडके चैनल" के "वाह वाह ताऊ क्या लात है? कार्यक्रम में आने से पहले ही एंटी भांग डोज लेकर आया हूं....इसीलिये  ताऊ टीवी की स्वागत परंपरा में  भांग के पांच  गिलास खींचने के बाद भी सही सलामत हूं और  होली के विभिन्न रंग लिये एक रचना पेश कर रहा हूं....दाद दिजियेगा...... सुनिये...


नमन करूं ,
गुरु घंटालों को !
पाओं छुऊँ , 
भूतनियों  के !
ताऊ चालीसा को पढ़ते,खेलें  ब्लोगिंग होली है !  
आओ छींटें मारे, रंग के,  बुरा न मानो होली है !

गुरु है, गुड से 
चेला शक्कर 
गुरु के अली 
पटाये जाकर  ! 
गुरु भाई से राज पूंछकर, गुरु की गैया, दुह ली है !
तीखे तीरंदाज़ ,सह्रदय , रंग मिज़ाज  त्रिवेदी हैं !  

ब्लोगिंग करते 
सब चलता है !
कुछ भी लिखदो 
सब छपता है !
जिनको कहीं न सुनने वाले,यहाँ पर बजतीं ताली हैं !
यहाँ पन्त जी और  मैथिली , अक्सर भरते पानी  हैं !

चार कोस पे 
पानी बदले ,
आठ कोस  
पर   बानी  !
देसी बानी,पढ़ी न जानी , अर्थ  अनर्थ  पहेली है  !!
किसके कपडे साफ़ बचे हैं,किसकी रंगत गोरी है ! 

कचरा लिख दो ,
कूड़ा लिख दो !
कुछ ना आये ,
कविता लिख दो 
कवि बैठे हैं, माथा पकडे , कविता  कैसी  हो ली  है !
एक पंक्ति में,दो शब्दों की, माला  लगती सोणी है !

कापी कर ले 
जुगत  भिडाले  
ब्लोगर बनकर  
नाम कमा  ले ,
मधुर गीत की बातें अब तो , बात पुरानी हो ली है !
ताऊ ने हाइकू लिखमारा,शिकी की गागर फोड़ी है ! 
 
अधर्म करते 
धर्म सिखाते  
बड़े रसीले ,
शीर्षक लिखते  !
नज़र बचाके ,कैसे उसने ,दूध में गोली, घोली है !  
नया मुखौटा लगा के देखो,पीठ में मारी गोली है !

गुरुजन  बैठे  ,
आस लगाये !
इतना लिखा 
न कोई आये !
नज़र  न आये  कोई भौजी  ,किससे खेले ? होली है  !
कुछ आहट दरवाजे आई,कहीं तो पायल छनकी है !

ब्लू लेवल की 
बोतल आई ,
नई कार 
बीबी भी लायी
बाबू जी का, टूटा चश्मा ,माँ की साडी आनी है  !
समय ने, बूढ़े आंसू देखे,यही तो प्यारे होली है !

 हौंसला अफ़्जाई का शुक्रिया साथियों....आपकी वंस मोर...वंस मोर की आवाज मुझ तक आ रही है...पर क्या करूं...मुझे  लगता है कि होली की भांग के पांचवें गिलास का असर हो रहा है...अत: इसी के साथ विदा चाहुंगा...आपको होली की हार्दिक शुभकामनाएं.

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ब्रेक के बाद आपका स्वागत है.... ताऊ टीवी के नृत्य संगीत  कार्यक्रम  "नाच मेरी बुलबुल" प्रतियोगिता की पिछली महफ़िल में  हरियाणा का  मशहूर "ठेका नृत्य" प्रस्तुत किया था  मिस. दराला  ने ....और संगत की थी ...ब्लागिस्तान के मशहूर ठेका नृत्य सम्राट  श्री सतीश महाराज  और बोतल तोड नृत्य सम्राट श्री समीर महाराज...  ने,



आज की  "नाच मेरी बुलबुल" प्रतियोगिता में ब्लागिस्तान की मशहूर चोटी तोड डांस की मल्लिका सुश्री सतीशा देवी पेश करने जा रही हैं "दो चोटी तोड डांस".....दर्शकों दिल थाम कर बैठिये और मजा लिजिये सुश्री सतीशा देवी के  "दो चोटी तोड डांस"  का.......


चोटी नृत्य में सुश्री अजया देवी, सुश्री रूपा देवी, सुश्री सतीशा देवी,
सुश्री दिगंबरा देवी और सुश्री काजल देवी

ब्लागिस्तान की मशहूर नृत्यांनाएं.....मटका तोड  डांसर सुश्री अजया देवी, बेलन तोड डांसर सुश्री रूपा देवी, चिमटा तोड डांसर सुश्री दिगंबरा देवी और हुजूर दिल थाम के देखिये ...दिल तोडू लठ्ठ डांस की मल्लिका सुश्री काजल देवी को... जो आज सुश्री सतीशा देवी के साथ संगत कर रही हैं.......... 

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अब हम एक दीर्घ विराम लेते हैं और कुछ समय पश्चात लौटेंगे....तब तक आप  कहीं भी कुछ भी... करके  लौट  आईयेगा...तब तक के लिये मिस रामप्यारी की रामराम..........

(शेष भाग अगले अंक में....)




वाह वाह क्या लात है? में हास्य कवि डा. टी. एस. दराल


"ताऊ टीवी फ़ोडके चैनल"  की तरफ़ से मैं  रामप्यारे अपने   कैमरामैन श्यामप्यारे  के साथ दर्शकों का   बाअदब, बा-मुलाहिजा स्वागत करता हूं.

प्यारे  दर्शकों आप जानते ही हैं कि ताऊ टीवी  के खास होली कार्यक्रम 
 "वाह वाह ताऊ क्या लात है?" के अंतर्गत हम ब्लाग  होली के विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत करते आये हैं. 

इस साल कविता पाठ के साथ साथ  "नाच मेरी बुलबुल" प्रतियोगिता  भी
अपनी टी आर पी के उच्च स्तरों को छू रही है. इसके प्रतिभागियों में खासा उत्साह है और ग्रांड फ़िनाले में पहूंचने के लिये सबने जी जान लडा रखी है. सभी प्रतियोगी अभ्यास में जुटे हुये हैं. 


आज के हमारे लोकप्रिय कार्यक्रम "वाह वाह ताऊ क्या लात है?" की  शुरूआत ब्लाग  रत्न, मशहूर हास्य कवि रत्न  
डा. टी. एस. दराल कर रहे हैं. आईये दराल साहब .....माईक थामिये और अपनी भडास निकालिये.

 वाह वाह क्या लात है? में कविता पाठ करते हुये डा. दराल

प्यारे ब्लागर साथियों, मैं ताऊ टीवी के "वाह वाह ताऊ क्या लात है? कार्यक्रम में आ तो गया हूं पर यहां आते ही मेरा स्वागत भांग के गिलास से किया गया. इसी भांग के नशे में अपनी पहली रचना पेश कर रहा हूं...लिजिये सुनिये...

ताऊ गए परदेश छोड़
ताई होली में। 

ताऊ की देखै बाट 
ताई होली में। 

लट्ठ नै पिलावे तेल 
ताई होली में। 

ताऊ नै मिलावे फोन
ताई होली में।  

ताऊ करै ना याद
ताई होली में । 

बता करै के जतन   
ताई होली में। 

अगली रचना पेश करता हू.....


होली के हुडदंग में, सबसे आगे ताऊ 

ताऊ के संग में , भंगमस्त हैं  बाऊ। 

भंगमस्त हैं बाऊ, चढ़ा दो दो गिलास,

गिलास तीसरा पीते ही हो गए खलास। 

कह ताई मुए काहे भिगोई मेरी चोली 

ताऊ बोले ताई से, होली है ताई होली।    

हौसला अफ़्जाई का शुक्रिया दोस्तों.....भांग का नशा सर चढने लगा है और ये सर से नीचे उतरे उसके पहले ही गायब हुये ताऊ को मैने खोज लिया है जो ताई को अकेली छोडकर जंगल में मंगल मना रहा है. पेश है ताऊ का हाल जंगल में....

अभी अभी देखा मैने एक सपना

सपने में आ गया ताऊ अपना

ताई को छोडकर ताऊ गया जंगल

जंगल में वो मना रहा था   मंगल

जंगल में बना  रखा था एक झौंपडा 

पर हाय, 

ताई के बजाय साथ थी क्रियंका चौपडा

और इसी के साथ विदा चाहुंगा. आप सबको होली की हार्दिक शुभकामनाएं......!

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ब्रेक के बाद आपका स्वागत है.... ताऊ टीवी के नृत्य संगीत  कार्यक्रम  "नाच मेरी बुलबुल" प्रतियोगिता में हरियाणा का  मशहूर "ठेका नृत्य" प्रस्तुत कर रही हैं मिस. दराला....और संगत कर रहे हैं...ब्लागिस्तान के मशहूर ठेका नृत्य सम्राट  श्री सतीश महाराज  और बोतल तोड नृत्य सम्राट श्री समीर महाराज...     




ठेका नृत्य करती हुई मिस दराला, संगत करते श्री समीर महाराज और श्री सतीश महाराज 


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(शेष भाग अगले अंक में....)


पुरूष दिवस की हार्दिक बधाई ताऊ...

सभी तो  नही पर  कुछ पढी लिखी और  आत्म निर्भर महिलाओं के लिये  तो अमूमन नित्य ही महिला दिवस रहता है. उस वर्ग विशेष में पुरूष दिवस मनाने की मांग जोर शोर से चल रही है और कुछ ताई जैसी निहायत शरीफ़ किस्म की महिलाओं ने सहर्ष त्याग पूर्वक  यह महिला दिवस अब पुरूषों  को समर्पित कर दिया है .

वैसे हकीकत यह है कि आज भी अधिकतर महिलाएं दमित और शोषित हैं और उनको पूरा पूरा हक है महिला दिवस मनाने का. आखिर खुशी तो  खुशी ही होती है भले ही  एक रोज  मिले.

ताई ने महिला दिवस नजदीक आते ही महिला दिवस मनाने की मांग कर डाली. ताऊ ने समझाया की अबकि बार महिला दिवस मनाना स्थगित कर दे, मेरी पीठ में बहुत ज्यादा दर्द रहता है. पर ताई ने तर्क दिया कि त्योंहार तो मनाना ही पडेगा तुम्हारी पीठ के दर्द के कारण कोई त्योंहार मनाना बंद नहीं किया जा सकता, आखिर सगुन शाश्त्र भी तो  कोई चीज होती है. मैं तो बारह महिने का त्योंहार बिना मनाए नही मानूंगी. तुम्हारी पीठ के दर्द का क्या और चार दिन ज्यादा रह लेगा. मैने पिछली बार तेज बुखार के बावजूद भी करवा चौथ का त्योंहार मनाया था कि नही?

सही बात है पीठ दर्द जैसी मामूली बीमारी के लिये करवा चौथ से भी बडा त्योंहार ताई बिना मनाये मानने वाली नही थी और ताई के तर्क यूं भी अकाट्य ही रहते हैं सो ताऊ के पास सिर्फ़ सहमति के कोई चारा नही था.

महिला दिवस शुरू होते ही चौबीस घंटे के लिये ताई का त्योंहार शुरू हो गया.   ताऊ एक शरीफ़ पति की तरह सुबह छ बजे ही उठ गया. उठते ही चाय बनाकर ताई के सामने पेश की. ताई अभी भी सो ही रही थी. ताऊ द्वारा जगाने पर गुस्से से बोली - अभी मुझे आठ बजे तक सोना है, चाय आठ बजे लाना और सुनो मुझे डिस्टर्ब मत करना. 


ताऊ चुपचाप जाकर झाडू बुहारी करने लगा. आठ बजते ही फ़िर से चाय बनाकर पेश की. ताई ने बिस्तर में बैठे बैठे ही कप पकडा और एक घूंट लिया और चिल्लाई - ये क्या चाय बनाई है? शक्कर की जगह नमक डाला है क्या? और उठाकर एक लठ्ठ ताऊ को दे मारा. पीठ दर्द के मारे ताऊ कराह उठा पर क्या करता, आखिर महिला दिवस त्योंहार के सगुन तो करने ही थे. ताऊ फ़िर से रसोई में गया, शक्कर ढूंढ  ढांड कर फ़िर से चाय बनाकर लाया.

चाय पीते हुये ताई ने मौके का फ़ायदा उठाते हुये कहा - देखो आज मेरे पैर बहुत दुख रहे हैं जरा तेल की मालिश कर दो.  ताऊ ने बिल्कुल प्रसन्नता पूर्वक यह काम भी किया, दोपहर का खाना भी बनाया, बर्तन भी धोये, कपडे भी धो दिये, यानि घर के सारे काम कर डाले.

ताई बडी प्रसन्न थी, वो सोच रही थी काश यह महिला दिवस का त्योंहार रोज ही आ जाये तो इस निगोडे का क्या बिगड जाता? ताई का आज का दिन बडा शाही रूप से बीत रहा था.   ताऊ को परेशान करने के जितने भी  ढंग ताई  जानती थी वो सारे आजमा लिये.  दिन भर में बात बेबात ताऊ को चिमटे बेलन और लठ्ठ से भी ठोंक बजा लिया. पर ताऊ की हिम्मत की भी  दाद देनी पडेगी उसने उफ़्फ़ तक भी नही की. पूरी तरह से त्योंहार धर्म का पालन किया.
शाम होकर रात होने को आ गई. अब ताई को कल की चिंता सताने लगी कि अब यह त्योंहार तो बारह महिने बाद ही आयेगा, सारी कसर आज ही निकालनी पडेगी. ताई का दिमाग तेजी से सोचने लगा क्योंकि अब समय काफ़ी कम रह गया था.

ताई की फ़रमाईश पर  रात को ताऊ ने टेबल पर डिनर लगा दिया. ताई ने टेबल पर नजर घुमाई. टेबल पर सब कुछ करीने से उसकी फ़रमाईश के मुताबिक ही था. ताई ने सोचा अब क्या कमी निकालूं? 

अचानक ताई के खुराफ़ाती दिमाग में एक आईडिया कौंधा और उसने ताऊ से पूछा -  क्यों ये कौन सा डिनर है? ताऊ बोला - भागवान ये डिनर कौनसा से तुम्हारा क्या मतलब? डिनर तो डिनर ही होता है. ये कोई मार्निंग डिनर या मिड-डे डिनर थोडे ही होता है. आराम से खाओ.......

ताऊ के और कुछ बोलने के पहले  ताई ने आव देखा ना ताव, लठ्ठ उठाकर दे दनादन ताऊ की धुनाई करती हुई बोली -  बदतमीज..बदजबान..मुझसे जबान लडाता है? तेरी हिम्मत कैसे हुई? आज त्योंहार का सगुन देखते हुये तुमको टेबल पर कैंडल जलानी थी...कुछ तो त्योंहार के  सगुन का ख्याल किया होता...आज के दिन कैंडल लाईट डिनर होता है....त्योंहार का सब मजा खराब करके रख दिया.

ताऊ दिन भर से ठुकते पिटते अब थक चुका था..... पीठ बुरी तरह दर्द कर रही थी ....सो   अब ताऊ से रहा नही गया और बोला - इब घणी अति कर दी सै तन्नै...पर तू नू समझ ले कि तेरा यो महिला दिवस त्योंहार  तो साल म्ह एक बार ही आवै सै ....बाकी के 364  दिन तो पुरूष  दिवस ही हौवैं सैं.... 

ताई सुबह की चाय देने  ताऊ को उठा रही थी तभी ताऊ  नींद से उठते समय उपरोक्त वाक्य बड बडा  रहा था जो ताई ने सुन लिये.....ताई ने आव ताव देखा ना ताव, लठ्ठ उठाकर फ़टकारने वाली ही थी कि कुछ सोच कर रूक गई... चाय का कप उठाकर एक तरफ़ रखा और ताऊ को बडे प्यार से बोली - देखो तुम्हारी पीठ मे बहुत दर्द हो  रहा  होगा...पहले चाय पी लो..फ़िर मैं तुम्हारी पीठ पर आईडेक्स लगा देती हु. और सुनो आज तुम पुरूष  दिवस त्योंहार मना लो... मैं और मेरा लठ्ठ तो बाकी के 364 दिन महिला दिवस मनाते ही रहेंगे......बेचारा ताऊ....सपने मे भी पिटा और आज का दिन छोडकर बाकी के 364 दिन भी पिटेगा.


पीठ का दर्द आदमी को नाकारा बना देता है ताऊ.

नाना पाटेकर की किसी फ़िल्म का डायलाग है "साला एक मच्छर आदमी को हिजडा बना देता है" पर ताऊ का कहना है कि पीठ का दर्द आदमी को नाकारा बना देता है. पिछले दिनों अचानक पीठ का दर्द शुरू हुआ और इस कदर मेहरवान हुआ कि ब्लाग पर होली कवि सम्मेलन की सारी पोस्ट आधी अधूरी रह गई. लेपटाप बेचारा अनछुआ सा कोने में दुबका रहा, उसने भी सोचा होगा चलो इस जालिम ताऊ से कुछ दिन तो पीछा छूटा. ऐसे मे मोबाईल से ब्लाग वाचन तो चलता रहा, पर मोबाईल से टिप्पणी करना और पोस्ट लिखना ताऊ के बूते का काम नही है.

ऐसे में किताबे ही एक सहारा रह गयी. किसी भी विषय की किताबे खरीदने और पढने का पुराना शौक रहा है, जब जैसा मूड आ जाये. कुछ ही दिन पहले ”पं. डी. के. शर्मा वत्स” ने एक किताब का नाम सुझाया था, यहां सब जगह तलाश करवाया तो कहीं भी नही मिली. आन लाईन आर्डर किया पर तीन दिन बाद जवाब आया कि किताब स्टाक में नही है, आपका रूपया 10 - 12 दिन में वापस भिजवा देंगे. इसके बाद एक स्थानीय बुकसेलर को आर्डर किया, जिसने सप्ताह भर में बुलवाने का आश्वासन दिया.

पं. डी. के. शर्मा ”वत्स” एक आस्ट्रोलाजर ही नही बल्कि तत्वज्ञानी पुरूष हैं. सुझायी गई किताब भी इसी विषय की थी. पं. डी. के. शर्मा वत्स” के द्वारा सुझायी गई किताब पढने की जिज्ञासा इसलिये भी प्रबल थी कि उनके द्वारा सुझायी गई किताब निहायत ही बहुमूल्य होगी. पं. डी. के. शर्मा ”वत्स” से मेरी जान पहचान एक सामान्य ब्लागर स्तर की जान पहचान से हुई थी जो समय के साथ साथ घनिष्टता में बदल गई.. उन्होंने मेरी ज्योतिष संबंधी भ्रामक धारणाओं को एक वैज्ञानिक आधार में बदल दिया. आज मैं उनको गुरूवत मानता हूं. 

अभी सप्ताह भर पहले ही किताब आ गई और ताऊ उस किताब में रम गये. पीठ का दर्द मालूम ही नही पडा. उस किताब को  पढते पढते ही एक मित्र कुछ नज्म/गजल/कविता संग्रह की किताबे दे गये थे. गजल का संबंध ताऊ से सिर्फ़ नीरज  गोस्वामीजी के ब्लाग तक ही है, ताऊ को ज्यादा  समझ नही है गजल ...काफ़िये और बहर की... बस कामचलाऊ ही समझ लें.

मित्र द्वारा दी गई   गुलजार साहब  की किताब खोलते ही  एक रचना पर नजर पडी. उसे पढते पढते युवावस्था से आज तक के जीवन की पूरी तस्वीर आंखों में घूम गई. गुलजार साहब की रचना सरलता और सटीकता से  भावों को अभिव्यक्ति करते हुये पाठक को उसी दुनियां में खींच ले जाती हैं. रचना  पढते हुये जैसे एक अलग ही दुनियां आंखों के सामने थी. पीठ का दर्द ठीक हो जाये तो अब पुरानी किताबों की धूल झाडनी पडेगी, क्या पता कोई प्रेम पत्र बिन बांचा ही रह गया हो?:)

लीजिये आप भी गुलजार साहब की रचना की चंद पंक्तियां  पढिये और अपनी किताबों की आलमारी में रखी किताबों को टटोल लिजिये...क्या पता  आपको भी कोई बिन बांचा रूक्का ...सूखे फ़ूल या इत्र का फ़ाहा मिल ही जाये.:)



किताबें झांकती हैं बंद अलमारी के शीशों से
बड़ी हसरत से तकती हैं
महीनों अब मुलाकातें नहीं होती
जो शामें इनकी सोहबतों में कटा करती थीं,
अब अक्सर गुज़र जाती हैं 'कम्प्यूटर' के पर्दों पर
बड़ी बेचैन रहती हैं किताबें...
इन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई हैं,
बड़ी हसरत से तकती हैं,

ज़ुबान पर ज़ायका आता था जो सफ़हे पलटने का
अब ऊँगली 'क्लिक'करने से अब
झपकी गुज़रती है
बहुत कुछ तह-ब-तह खुलता चला जाता है परदे पर
किताबों से जो ज़ाती राब्ता था, कट गया है
कभी सीने पे रख के लेट जाते थे
कभी गोदी में लेते थे,
कभी घुटनों को अपने रिहल की सुरत बना कर
नीम सज़दे में पढ़ा करते थे, छूते थे जबीं से
वो सारा इल्म तो मिलता रहेगा बाद में भी
मगर वो जो किताबों में मिला करते थे सूखे फूल
और महके हुए रुक्के
किताबें मांगने, गिरने, उठाने के बहाने रिश्ते बनते थे
उनका क्या होगा ?
वो शायद अब नहीं होंगे. 









वाह वाह ताऊ क्या लात है? : ताऊ टीवी


"ताऊ टीवी फ़ोडके चैनल"  के दर्शकों को रामप्यारे और कैमरामैन श्यामप्यारे  का बेअदब, नामुलाहिजा  गुस्ताखी भरा नमस्कार.

प्यारे  दर्शकों आप जानते ही हैं कि ताऊ टीवी ब्लाग सरोकार, फ़टाफ़ट ब्रेक लेने और आपके मनोरंजन की मनगढंत सामग्री परोसने में हमेशा से अग्रणी रहा है. दर्शक जानते  हैं कि ताऊ टीवी अपने दर्शको का कितना ख्याल रखता है और ऐसी ऐसी फ़टाफ़ट खबरें आप तक पहुंचाता है जिनका कोई सर पैर भी नही होता. इन खबरों को हमारे रिपोर्टर जान जोखिम में डालकर, चौबीसों घंटे सिर्फ़ और सिर्फ़ आपके लिये तैयार करते हैं.

इसी तारतम्य में हम आपको ताऊवुड के बसंत से होली तक के कार्यक्रमों की एक झलक दिखा रहे हैं. आपमें से जो भी सज्जन या दुर्जन ताऊ टीवी के होली कार्यक्रमों में भाग लेना चाहें वो अपना रजिस्ट्रेशन करा लें. बाद में ताऊ टीवी पर कोई यह आरोप ना लगाये कि बिना किसी सूचना के रजिस्ट्रेशन चालू और  बंद कर दिये गये.

ताऊ टीवी के होली कार्यक्रमों की शुरूआत ताऊ टीवी के लोकप्रिय प्रोग्राम "वाह वाह ताऊ क्या लात है?" से होगी. इस कार्यक्रम की शुरूआत  दीप प्रज्वलित करते हुये  कुख्यात ब्लागर कवियित्री सुश्री सतीशा सक्सेना ने अपनी निम्न कव्वाली कम गजल से की...पेश है एक बानगी.....

कुख्यात कवियत्री सुश्री सतीशा सक्सेना

बड़ा छिछोरा ताऊ आया
रंग लगाये, होली है !

बदतमीज़ हैं आशिक ताऊ
संस्कार की होली है !

लैला मजनू पढता ताऊ !
यही तो प्यारे होली है !

चुभती ठंडक के मौसम में
तपता प्रेमी ताऊ है !

एक बार में जन्मे छः हैं !
बात न माने ताऊ है!

ताई रोये, देख फसल को !
बुरा न मानो होली है!


हम लेते हैं एक लंबा सा ब्रेक....

जहां इच्छा हो वहां किसी के ब्लाग पर मुंह मारकर या गरिया कर वापस आने की पूरी छूट है.....ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...


ब्रेक के बाद आपका स्वागत है...."वाह वाह ताऊ क्या लात है?" कार्यक्रम देखिये आगामी 29 फ़रवरी को......

ताऊ टीवी के नृत्य संगीत के कार्यक्रम  "नाच मेरी बुलबुल" प्रतियोगिता में अपना आडीशन देकर आप भी हिस्सा ले सकते हैं. वाईल्ड कार्ड इंट्री मिली है कुख्यात बुलबुलों की बुलबुल  मिस समीरा टेढी को...जो अपना प्रसिद्ध केविकोल नत्य प्रस्तुत करेंगी....

मिस समीरा टेढी "नाच मेरी बुलबुल" प्रतियोगिता मे केविकोल नत्य करते हुये


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ताऊ टीवी के अन्य रंगारंग होली कार्यक्रमों के लिये अपनी रचनाएं भिजवा सकते हैं. बाकी सभी कार्यक्रमों की जानकारी ब्रेक के बाद......इंतजार करते रहिये या कहीं पर बिना पोस्ट बांचे  टिप्पणी ठोक आईये.

ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...ब्रेक...


नोट:- 
"वाह वाह ताऊ क्या लात है?" कार्यक्रम के अंतर्गत अगली पोस्ट मे  
कुख्यात ब्लागर कवियित्री सतीशा सक्सेना 
की रचना पेश की जायेगी. 

(धन्यवाद सतीश सक्सेना जी, आपकी रचना "ताऊ टीवी" को प्राप्त हो गई है. जिन सज्जनों/दुर्जनों की रचनाएं ताऊ टीवी को प्राप्त हो गई हैं उन्हें व्यक्तिगत  सूचना जल्द दी जा रही है.)

छिछोरापन, टंगडी खींच युद्ध, मौज अपनी





1
छिछोरापन
टंगडी खींच युद्ध
मौज अपनी


2
बदतमीज
आशिक जमाने में
संस्कार कहाँ


3
लैला मजनूं
मुश्किल में युगल
पंच निर्णय


4
चुभती ठंड
बसंत का मौसम
तपते प्रेमी


5
तू मेरी जान
दो से हो गये चार
होश में आए



रहनुमा हैं, रक्त पिपासु लोग, पसरा तम




1.
रहनुमा हैं
रक्त पिपासु लोग
 पसरा तम


2.
इंसानी बस्ती
फ़ितरती शैतान
अमन खत्म


3.
खून खराबे
लोगों का शोरगुल
आज का धर्म


4.
झेड सुरक्षा
धवल वस्त्रों को
नवाज़िश है


5.
फ़ुगां को सुनो
मेहरबाँ  हाकिम
फ़र्मान छोडो

ताऊ और ताई का वेलेंटाईन डे....




ताऊ को सुबह ताई ने
बेलन की जगह चिमटे से
चिमटी काटते हुये 
प्यार से उठाया

आंखे खोलते ही देखा
सामने ताई मुस्कराते हुये 
चिमटा लिये खडी थी

ताऊ का माथा ठनका
ताई का स्वर खनका
बोली - आज वेलेंटाईन डे है
हम भी मनायेंगे
आज दिन भर  करेंगे
प्यार की बातें
लठ्ठ नही चलायेंगे

पर हाय री किस्मत
मिड डे तक ही चल पाया 
दोनों का वेलेंटाईन डे
उसके बाद दोनों में पूर्ववत
वाकयुद्ध छिड गया

फ़िर लठ्ठ और चिमटे की 
मधुर स्वर लहरियां  गूंजने लगी
ताऊ और ताई का युगल स्वर
एक महाराग पैदा कर रहा था.

गीत संगीत मय महफ़िल की गूंज
पडौसी सतीश सक्सेना तक पहुंची
संगीत के कद्रदान सक्सेना जी
अपने आपको रोक ना पाये

सीधे आ पहुंचे 
ताऊ और ताई की 
महा संगीत महफ़िल में
आकर दोनों को समझाने लगे
वेलेंटाईन का महत्व बताने लगे

काफ़ी देर बाद 
दोनों से बर्दाश्त नही हुआ
तब ताऊ बोला - अरी भागवान
हम तो रोज ही लठ्ठ और चिमटे से 
महा संगीत बजाते हैं
ये सक्सेना जी कब कब आते हैं?

ताई ने समझा इशारा
लठ्ठ बजाया करारा
दोनों ने मिलकर 
सक्सेना जी को बजा डाला
एक महान संगीत रच डाला 

तेरी ऐसी की तैसी ताऊ की….. नागपत्नि

ब्लागिंग के ठंडेपन से  निराश हताश  ताऊ तपस्या करने जंगल की और  चला जा रहा था. रास्ते में ठंड और बर्फ़ीली हवाओं  की वजह से परेशान था. पर ब्लागर की यात्रा जारी रही. थोडी देर बाद बरसात भी होने लगी तो मन मारकर  ब्लागर ताऊ वहीं एक बूढे बरगद के तने के सहारे बैठ गया. ताऊ आगे बढने के लिये बरसात बंद होने का इंतजार करने लगा तभी वहीं पास में एक  बडे से शाही नाग देवता  भी बैठे दिखाई दिये. उसे देखकर पहले तो ताऊ डरा फ़िर यह सोचकर मुस्कराया कि इससे क्या डरना? यह तो अपनी ही प्रजाति का भाई बंद है.


ताऊ ने उससे राम राम की. बदले में नागराज ने भी जय श्री राम का उद्घोष किया. मालूम पडा कि नाग देवता का बिल वहां से काफ़ी दूर था इस वजह से वह भी यहां बरसात रूकने का इंतजार कर रहा था. समय काटने के लिये दोनों आपस में बातचीत करने लगे.

नाग बोला – हे मनुष्य तुम कौन हो? शक्ल से कुछ कुछ बंदर जैसे दिखाई देते हो पर मनुष्यों जैसी पगडी और लठ्ठ  धारण किये हुये हो? तुम मनुष्य हो या बंदर?

ताऊ ने जवाब दिया – हे सर्पराज, मेरे पूर्वज बंदर थे और मैं अपने पूर्वजों के कुछ ज्यादा ही नजदीक हूं इसलिये आधा बंदर और आधा मनुष्य दिखाई देता हूं. पर हकीकत यह है कि मैं ना बंदर हूं और ना मनुष्य हूं.

सांप ने विस्मय पूर्वक पूछा –  तुम  तो बडे दार्शनिक भाव से बात कर रहे हो? तुम्हारा नाम क्या है? क्या तुम्हारी बंदरिया तुम्हें छोड कर भाग गई या कुछ और हुआ है जो तुम इस बियाबान और खतरनाक जंगल में चले आये हो? यहां पग पग पर मौत खडी रहती है, फ़िर भी तुमने यहां आने का साहस किया है, इसके पीछे कोई बडा गहरा राज होगा? मुझे भी  जानने की इच्छा हो रही है.

ताऊ बोला –  मेरा नाम ताऊ है सर्पराज. यह भी जान लिजिये कि   ना तो मेरी बंदरिया कहीं भागी है, और ना मैं उससे पिटने की वजह से भागा हूं. ये बात अलग है कि आज कल महिला अधिकार कुछ ज्यादा ही बढ गये हैं. इस वजह से  पहले तो वो  मुझे दिन भर में चार छ लठ्ठ ही मारा करती थी पर आजकल जब उसका मूड चाहे मुझे कूट पीट देती है और मैं चूं तक नही कर सकता. और सच कहूं तो अपनी बंदरिया से आठ दस लठ्ठ खाए बिना आजकल मेरी पीठ भी सीधी नही होती, बस यूं समझ लिजिये कि आदत सी पड गई है पर ये  मेरी परेशानी का कारण नही है.

सांप ने बीच में ही टोका – यार ताऊ, तुम अजीब आदमी हो? तुम्हारी बंदरिया तुम्हें सरे आम दिन दहाडे मारती है और तुम्हारा घर छोडने का यह कारण भी नही है? मेरी उत्सुकता और बढ गई है? कहीं चोरी डकैती… की वजह से फ़रारी काटने तो नही आ गये हो?   

ताऊ बोला – नही नही…चोरी डकैती तो मैं वर्षों पहले छोड चुका हूं…और मेरी कोई सरकारी सजा भी बाकी नही है…

नाग देवता की उत्सुकता बढती ही जा रही थी उन्होंने पूछा – तो ताऊ, फ़िर तुम जरूर कोई सरकारी मंत्री संत्री रहे होगे और कोई घोटाला करके आये हो? सुना है आजकल घोटाले बाजों और रिश्वतखोरों के खिलाफ़ सख्त माहोल बना हुआ है?

ताऊ ने जवाब दिया – नाग देव, आप भी  अजीब सी बाते कर रहे हैं? अफ़्सोस तो यही है कि मुझे घोटाले और रिश्वत खोरी का मौका ही नही मिला वर्ना मैं यहां जंगल में क्या करता? कही विदेश में जाकर अपनी बंदरिया के साथ  छुट्टियां बिता रहा होता. काश घोटाले और भ्रष्टाचार करने के मौके मुझे मिल गये होते.

सर्पराज ने पूछा – ताऊ, अब मुझे सच सच बताओ……मेरी उत्सुकता बढती ही जा रही है…तुम जरूर किसी महिला उत्पीडन के मामले में फ़ंस कर यहां आये हो……साधारण स्थिति में कोई इस जंगल में आने की हिम्मत नही करता….तुम सही बात जल्दी से बताओ…

ताऊ बोला – नागराज, आप मुझ पर सरासर गलत शक कर रहें हैं…मैं तो अपनी बंदरियां के अलावा सबको मां बहन बेटी समझता हूं. असल में मैं अपनी बंदरिया के लठ्ठ की वजह से इतना डरता हूं कि ऐसे कामों के बारे में सपने में भी नही सोच सकता.

सर्पराज ने पूछा – तो  तुम करते क्या हो?  लगता है कहीं गहरी चोट खाई है?

ताऊ ने जवाब दिया – करने के नाम पर तो मैं बस  ब्लागिंग करता हूं और अब इससे निराश हो चला हूं इसलिये परेशान होकर इस भयानक जंगल में तपस्या करने चला आया हूं.

सांप ने पूछा – ब्लागिंग से परेशान होने की क्या बात है? वो तो तुम यहां से भी कर सक सकते हो. मेरे बिल में हाईस्पीड नेट कनेक्शन और कंप्यूटर सब कुछ है. कुछ दिन के लिये  मेरे घर चलो वहां  मुझे भी ब्लागिंग सिखा देना…

ताऊ बोला – सर्पराज, अब ब्लागिंग में क्या रखा है? ब्लागिंग का स्वर्णयुग तो कभी का खत्म हो चुका है….अब तो सारे ब्लागर फ़ेसबुक की और फ़ेस कर चुके हैं …कुछ ट्विटर पर टर टरा लेते हैं…..

बीच में ही नाग देवता बोले – नही नही ताऊ….तुम्हें कुछ दिन मेरा आतिथ्य तो स्वीकार करना ही पडेगा और मुझे ब्लागिंग भी सिखानी पडेगी. अब बरसात भी बंद हो चुकी है और रात गहराने लगी है. इस जंगल में अब कहां जाओगे…बेवजह किसी शेर चीते का शिकार बन जाओगे…अब जल्दी चलो.

ताऊ ने जल्दी से अपना लठ्ठ उठाया और नाग देवता के पीछे पीछे हो लिया. रास्ते में नागदेवता ने पीछे मुडकर ताऊ के हाथ में लठ्ठ देखा तो बोला – ताऊ, इस लठ्ठ को तुरंत फ़ेंक दो…तुम्हारा क्या भरोसा? आदमी की जात के हो…कहीं पीछे से मेरे सर पर ही मार दो..तो? मेरे पिताजी ने कहा था कि आदमी का कभी भरोसा मत करना. ताऊ ने मौके की नजाकत देखकर अपना लठ्ठ दूर फ़ेंक दिया.

नाग देवता के घर पहुंचते ही ताऊ दंग रह गया. बिल क्या…यह तो आलीशान नाग महल था. वहां पहुंचते ही नाग देवता की पत्नि ने इठलाते हुये बडे प्रेमपूर्वक नाग देव का स्वागत किया……और ताऊ को देखकर थोडा सकुचा कर ठिठकी तो नागराज ने कहा – डरो मत, ये मित्र ताऊ है….रात के डिनर की व्यवस्था करो. 

नागराज की पत्नि एक आदर्श पत्नि की तरह मेहमान नवाजी की तैयारियों में लग गई. पास के ही कक्ष में नागराज के  वृद्ध माता पिता रजाई में दुबके हुये  आराम फ़रमा रहे थे वहीं दूसरी तरफ़ उनके बाल बच्चे धमाचौकडी मचाये हुये थे. नाग राज ने सबका ताऊ से परिचय कराया और ड्राईंग रूम में बैठकर दोनो गप शप करने लगे.

डिनर खत्म होने के बाद नागराज ने अपना कंप्यूटर चालू किया और  बोले – ताऊ अब मुझे ब्लागिंग सिखाओ कि कैसे क्या करना है?

जैसे कोई कनिष्ठ ब्लागर अपने वरिष्ठ ब्लागर को गुरूवर के संबोधन से  नवाजता हुआ कुछ सलाह मांगता है. इस तरह की खुशी ताऊ ने महसूस की.  ताऊ को भी ऐसी खुशी  काफ़ी समय बाद मिल रही थी सो  इसे चूकना नही चाहता था. 

ताऊ ने ब्लागर पर नाग राज का अकाऊंट बनाकर ब्लाग तैयार किया और सर्पराज को ब्लागिंग के गुर सिखाने लगा कि कहां कहां टिप्पणी देने जाना है…किसके यहां नही जाना है…किसकी टंगडी खींचनी है… किसकी वाह वाही करनी है…बेनामी टिप्पणी कैसे करनी है…. ब्लागिंग के कौन कौन से मठाधीश हैं? कौन सा मठाधीश अपने गुट का है? कौन सा दुश्मन गुट का है? किससे सतर्क रहना है…इत्यादि इत्यादि….

ठंड काफ़ी हो रही थी सो नागराज ने गर्मागर्म काफ़ी बुलवायी. थोडी ही देर में नागपत्नि काफ़ी लेकर आ गयी. ताऊ और नागराज को ब्लागिंग पर बातें करते सुनकर नागपत्नि का माथा ठनक गया और वो फ़ुफ़कारने लगी. ताऊ डर गया…थोडी देर पहले ही जो निहायत ही  आज्ञाकारी पत्नि  और सर्पसुंदरी दिखाई दे रही थी उसका रूप अब बदल चुका था, नागराज भी अपनी पत्नि का यह ताई छाप रूप देखकर सहमें हुये थे. नागराज ने पत्नि से इशारों में ही पूछा कि बात क्या है?

नागपत्नि बोली – नही नही…तुम ब्लागिंग नही करोगे नागराज. और ताऊ की तरफ़ मुखातिब होकर बोली - ताऊ, तुम जानते नही हो…पिछले जन्म में मैं तुमसे भी बडी ब्लागर थी. तुम्हारे सारे मठाधीश मेरी चिलम भरा करते थे…….

ताऊ ने बीच में ही टोका – भाभीजी, फ़िर आप इतना नाराज क्यों हो रही हैं? जब  आप स्वयं ब्लागर थी तो अब भाई साहब को ब्लागिंग करने दिजिये..आजकल हिंदी ब्लागरों का यों भी टोटा हो गया है.

नागपत्नि बोली – ताऊ तुम क्या जानो ब्लागिंग का दर्द? तुमको तो  ब्लागिंग की वजह से ताई  दो चार लठ्ठ ही मारती है पर मुझे तो जिंदा जलना पडा था पिछले जन्म में…. मुझे ब्लागिंग का इतना बडा नशा था कि मैं चौबीस घंटे बस उसी में खोयी रहती थी. दिन रात ब्लागिंग सेवा में ही लगी रहती……

ताऊ ने बीच में ही टोक कर पूछा – तो भाभीजी इसमें बुराई क्या थी? ब्लागिंग का जल कर मरने से क्या संबंध? आजकल भी कई ब्लागर चौबीसों घंटे ब्लागिंग करते हैं? तो उनको क्या जलकर मरना पडेगा? मैं तो खुद कभी चौबीस क्या बल्कि  अडतालीस घंटे ब्लागिंग किया करता था.

नागपत्नि बोली – ताऊ, असल में ब्लागिंग तो एक बहाना भर था. सत्य यह था कि मैं दहेज कम लायी थी. शादी के समय कम दहेज की वजह से मेरी सास मुझसे बहुत ज्यादा नाराज  रहती थी. बस हर समय मुझे ताने दिया करती थी. और मैं सास के तानों से अपना दिमाग हटाने के लिये ब्लागिंग में डूबी रहती. उसको मुझमें बुराई निकालने का इससे बडा और क्या बहाना मिलता?  एक दिन जब मैं बेनामी टिप्पणियां करने  में मशगूल थी तब चुपचाप पीछे से आकर  मेरी सास ने  मुझ पर केरोसिन डाल कर आग लगा दी और मुझे संभलने का मौका तक नही मिला…. और इस जन्म में मैं यहां हूं… ताऊ, तुम हमें माफ़ करो और अपने घर जावो… हमें नही करनी ब्लागिंग… हमें अपनी दुनियां में ही खुश रहने दो….

ताऊ को ऐसा झटका लगा जैसे आसमान से जमीन पर गिरा हो. नागराज जैसा सुलझा हुआ एक ब्लागर चेला हाथ से निकला जा रहा था...…क्योंकि नागराज जैसा दबंग चेला हो तो बडे बडे मठाधीशों के मठों की बैंड आसानी से बजायी जा सकती है सो नागपत्नि को समझाने के उद्देष्य से ताऊ बोला – भाभी जी आप मेरी बात तो सुनिये…. आज हिंदी की सेवा के लिये नये और भाई साहब जैसे  सुलझे हुये ब्लागरों की सख्त आवश्यकता है…

ताऊ के इतना कहते ही नागपत्नि फ़ुफ़कारते हुये बोली – तेरी ऐसी की तैसी ताऊ की….. तुझे मालूम नही है कि इस जन्म में भी मेरे बाप ने दहेज नही दिया है और ये रजाई में दुबक कर बैठी मेरी जिंदा  सास अभी भी नाराज होकर ताने मारती रहती है. पिछले जन्म में भी जला कर मारी गई हूं....…इस जन्म में नहीं जलना चाहती…..

ताऊ इस हाथ आये ब्लागर को छोडना नही चाहता था सो कुछ बोलता इसके पहले ही नागपत्नि फ़ुफ़कारते हुये लहरायी और पास पडा लठ्ठ उठाकर ताऊ की टांगों पर दे मारा. ताऊ चीखते हुये झटके से उठा तो देखा  सामने ताई दूसरा  लठ्ठ मारने को तैयार खडी चिल्ला रही थी….सबेरे के नौ बज गये…अब तक नही उठा..आफ़िस क्या तेरा ताऊ जायेगा?