कालिया ने की गब्बर से बगावत : ताऊ की शोले



ताऊ की शोले (एपिसोड - 5)
लेखक व निर्देशक : ताऊ रामपुरिया और अनिता कुमार,
सगीत निर्देशक : दिलिप कवठेकर

आप पहले पढ चुके हैं कि कालिया रेल्वे टेशन बसंती के साथ गया था गोला बारुद की खेप लेने..वापस लौटते मे पुलिस मुठभेड मे कालिया अरेस्ट होकर जेल पहुंच गया..तांगा और धन्नों गोला बारुद सहित जब्त होगये..बसंती किसी तरह भागने मे कामयाब होगई थी जिसका अभी तक पता नही चला. अब आगे पढिये........

अंग्रेजों के जमाने के जेलर साहब जेल मे तशरीफ़ लाते हैं. जो ब्लागिंग के भयंकर लती हैं. साथ मे चार सिपाही हैं. और उनका खासमखास जासूस हरीराम भी साथ ही है. कैदी लाईन मे खडे हैं. जेलर साहब मुआयना करते हुये कालिया के पास आकर रुकते हैं.

जेलर : हूंss..तो कालिया कितनी पोस्ट लिखी थी?

कालिया : हुजुर कहां लिखी? अबकि तो लिखने के पहले ही यहां पहुंच गया? पर मैं कुछ समझा नही?

जेलर : हाsआ...सब समझ जाओगे कालिया...हरीराम.. अरे.. ओ हरीराम...जेलर साहब ने आवाज लगाई..

हरीराम : आया हुजुर...मेरे आका..हुकुम किजिये...

जेलर ने उसको अपने पीछे आने का इशारा किया और तेजी से अपने आफ़िस की तरफ़ बढ गया.
जेलर साहब अपने आफ़िस में पांव मेज पर रख कर पीठ कुर्सी पर टिकाये बैठे हैं....डण्डा मेज पर रख दिया है..हरीराम कुर्सी के पीछे आकर उनके सर पर चंपी मालिश कर रहा है. और कालिया की तरफ़ देखकर कुटिल हंसी हंस रहा है.
जेलर - हरीराम...तुमने कालिया को मुझसे यहां आकर मिलने को कह दिया कि नही?
हरीराम : हेsहे..हुजुर..बस कालिया आता ही होगा.
इतनी देर मे कालिया अंदर प्रवेश करता है.
कालिया : नमस्ते जेलर साहब....मुझे क्युं याद फ़रमाया था हुजुर?

जेलर : हरीराम अब तुम जावो..और हरीराम बाहर चला जाता है.

अब जेलर ने कालिया की तरफ़ मुखातिब होते हुये कहा : कालिया, देखो ...हमको पहले ही मालूम था कि गब्बर तुमको यहां से छुडवायेगा नही. और हम तुमको ऐसे ही छोडेंगे नही.

कालिया - माई बाप...मुझे जाने दो..मेरे छोटे छोटे बच्चे हैं...हुजुर..वो रोते होंगे?

जेलर - चुप बे कालिया..ज्यादा नौटंकी नही..हमको क्या बडे बडे बच्चे हैं? अरे बच्चे है तो छोटे ही होंगे ना? अरे घोडा घास से यारी करेगा तो भूखा मरेगा...हम गब्बर से पूरा हिसाब किये बिना तुमको नही जाने देंगे...


कालिया : हुजुर..आप को विश्वास दिलाता हूं मुझे जाने दिजिये..मैं आपकी एक एक पाई का हिसाब गब्बर से करवा दूंगा....हुजुर..मैने सुरंग भी खोद ली है...

जेलर - तुम्हारी ये मजाल...सुरंग भी खोद ली और बिना हमको बताये ही? ये तो बहुत नाइंसाफ़ी है...नही कालिया नही...तुम बहुत बडा खतरा मोल ले चुके हो..पर तुमने सुरंग खोदी कैसे?

कालिया - हुजुर वो पिछले सप्ताह जो दो नये कैदी आये थे ना...उनके साथ गब्बर ने औजार भिजवाये थे. हुजुर...आपकी कसम..और गब्बर ने कहलवाया था कि आपका पिछला सारा हिसाब किताब चुका देगा.

जेलर - कालिया..तुम तो महा मुर्ख हो...अरे तुम्हारे अंदर अक्ल नाम की चीज नही है...बावलीबूच...समझता कोनी के? गब्बर अब तेरे को नही छुडवायेगा कालिया...

कालिया - हुजुर क्या बात होगई ऐसी..मैने कुछ गुस्ताखी कर डाली क्या?

जेलर - अरे मुर्ख...हम अंगरेजों के जमाने के जेलर हैं इसलिये सब समझते हैं...गब्बर अब तुमको रास्ते से हटाना चाहता है..अरे मुर्ख जैसे ही तू भागेगा..पुलिस तुम्हारा एनकाऊंटर कर देगी..समझा क्या?

कालिया - अरे नही हुजुर..

जेलर - नही हुजुर क्या? तेरे को मालूम नही...ठाकुर इन कामों मे माहिर है...तू तो गया काम से...तेरा एनकाऊंटर गब्बर और ठाकुर के इशारे पर ही किया जायेगा...यानि रास्ते का कांटा साफ़...

कालिया - हुजुर आपने मुझे चेता दिया..आपका यह एहसान मैं कभी नही भूलूंगा...हुजुर..इस गब्बर की तो ऐसी तैसी....हुजुर एक स्कीम आई है मेरे दिमाग में.

जेलर - बताओ कालिया..तुम्हारी फ़ूटी खोपडी मे क्या आईडीया आया है?

कालिया - हुजुर आप साथ दें तो..मैं ही एक नया गैंग बना लू हुजुर,,,कसम से ..हुजुर...आपको गब्बर इकन्नी भी पूरी नही देता इमानदारी से? जबकी बदले में आप उसका कितना खयाल रखते हैं...मैं आपको पूरे चवन्नी का हिस्सेदार बनाता हूं...हुजुर विचार कर लिजिये.....हो मंजूर तो हाथ मिलाईये हुजुर..

जेलर - कालिया..तुम्हारी खुपडिया तो तेज है..पर तुम गैंग बनाने के लिये आदमी कहां से लावोगे?

कालिया - हुजुर...वो अपना सांभा है ना मरदूद...बस उसको ज्यादा टीप्पणियों का लालच दूंगा... बहुत लालची है ससूरा टिप्पणीयों का.. और वो टूट कर आगया तो समझो कि गब्बर के सारे काम के आदमी तोड लायेगा हुजुर...यूं समझ लिजिये कि टिप्पणियों का इतना लालची है कि ससुरा गिन गिन कर हिसाब रखता है. और टिप्पणियों के मामले में सख्ती से थ्री किक फ़ार्मुला लागू करता है हुजुर.

जेलर आश्चर्य से - कालिया ये क्या बक बक कर रहा है? ये कोई कुश्ती का अखाडा है क्या? जो थ्री किक फ़ार्मुला लगाता है? साफ़ साफ़ बता ये थ्री किक क्या है? ताऊ की तरह पहेलिया मत बुझा.

कालिया - हुजुर..ये ससूरा कोई हरयाणवी फ़ार्मुला है..मुझे आज तक समझ नही आया..आप तो एक बार सांभा को अंदर करलो..फ़िर हुजुर उससे ही कबूलवा लिजियेगा ये फ़ार्मुला. पर हुजुर वो मेरी गैंग का क्या सोचा? हुजुर सच कहता हूं आप साथ दे दिजिये..गब्बर का तख्ता पलट कर मैं बनूंगा सरदार और आपकी तो चांदी ही चांदी होगी सरकार.

जेलर - बात तो तुम्हारी ठीक है कालिया..हमको भी अब गब्बर पर यकीन नही रहा..आजकल वो हिसाब मे इमानदारी नही रखता. तुम नई गैंग बनाने की तैयारी करो. अब तो इस गब्बर का इलाज करना ही पडेगा..बहुत तेज चलता है..सारी टिप्पणीयां अकेला ही बांट आता है..देख लूंगा गब्बर...तुझे देख लूंगा...

कालिया - हुजुर की जय हो...हुजुर के बाल बच्चे जीये...बडे होकर आपका खून पीये...

जेलर - अबे बावली बूच..क्या बकता है? हम अभी तक ब्रह्मचारी है...कालिया...

कालिया - माफ़ी हुजुर..माफ़ी..ऊ ससुरी जबान फ़िसल गई थी...तकिया कलाम मे...हुजुर की जय हो...हा..हा...अब मैं सरदार बनूंगा...

जेलर - हां जरा अपने तकिया को संभाल कर रखा करो कालिया....और आगे की तैयारी करो.

कालिया - ठीक है हुजुर..मुझे जरा सांभा से..आपके मोबाईल पर बात करवा दिजिये हुजुर..जरा बाल बच्चों का हाल पूछ लूं और..उधर का हाल चाल भी ले लूं. और सांभा का मन भी टटोल लूं जरा.
जेलर सांभा का नंबर लगाकर कालिया को देता है...उधर फ़ोन गब्बर उठाता है..पर कालिया समझ रहा है कि वो सांभा से बात कर रहा है.

कालिया.- हैल्लो..हैल्लो अरे सांभा भाई...रामराम...कैसे हो? ठीक हो? अरे सांभा भाई...सुनो...हमने जेलर से सब बात करली है...हुजुर तैयार हैं ..अरे नही भाई...जेलर साहब अपने गांव के ही हैं यार सांभा भाई.. कसम भवानी की...जेलर साहब तैयार होगये अब बस आप तैयार हो जाओ तो अलग गैंग शुरु कर देते हैं..ऐसी तैसी इस गब्बर के बच्चे की...अब और इसके जुल्म नही सहेंगे यार... यार सांभा भाई.. नई गैंग का सब काम आपको ही संभालना पडेगा...

उधर से सांभा की जगह गब्बर की आवाज आती है...हूंs तो कालिया अब नया गैंग बनायेगा? पिछले जन्म की गोलियां जो तेरी खोपडी मे उतारी थी..लगता है वो भूल गया...हूंs...अरे ओ सांभा....लगा फ़ोन जरा ऊ जेलरवा को..और करवाय दे एनकाऊंटर इस कालिया का....
कालिया को अब समझ आया कि उसने सांभा समझ कर गब्बर से बात करली और डरता हुआ अपनी बात सुधारने की गरज से बोला....
कालिया - सरदार...अरे सरदार सुनो तो..हम तो ऊ जरा जेलर को बेवकूफ़ बना रहे थे सरदार..हम आपसे कैसे गद्दारी कर सकते हैं? सरदार...हम तो आपका जन्मों से नमक खाये हैं सरदार...हमें माफ़ करो सरदार...
अपने नमक का कर्ज उतारने का एक मौका और दो सरदार...आपने पिछली बार भी धोखे से गोली मार दी थी....इस बार ऐसा मत करना सरदार...(कालिया बुरी तरह डरा हुआ है)



गब्बर की डरावनी आवाज आती है...हूंs..तूने सिप्पी साहब की शोले मे भी गोली खाई थी...लगता है भूल गया उस गोली की आवाज को? .अब ताऊ की शोले मे भी गोली खा कालिया....अरे ओ सांभा...लगा निशाना इसकी खुपडिया पर...

सांभा - जी सरदार...और सांभा के हाथ से पिस्तौल की लिबलिबी दब जाती है..और जोर की आवाज आती है...ठांय..ठांय.....

मध्यांतर........


ताऊ साप्ताहिक पत्रिका अंक -38

प्रिय बहणों, भाईयो, भतिजियों और भतीजो आप सबका ताऊ साप्ताहिक पत्रिका के 38 वें अंक मे हार्दिक स्वागत है.

38 वां अंक मतलब आज से 38 सप्ताह पहले हमने इस पत्रिका की शुरुआत की थी. फ़िर सुश्री अल्पना जी, सुश्री सीमाजी, श्री आशीष जी, सुश्री विनिताजी, सुश्री प्रेमलताजी और अंत मे श्री समीरलाल जी इससे जुडे. और ये कारवां बनता गया. सभी की सामूहिक लगन और मेहनत के परिणाम स्वरूप ताऊ साप्ताहिक पत्रिका नई सजधज के साथ आपके सामने हर सप्ताह पेश होती रही. आप सभी के हम हृदय से आभारी हैं.

आज इस 38 सप्ताह की पेशकश के बाद हम एक विराम दे रहे हैं इस ताऊ साप्ताहिक पत्रिका को. यकीन रखिये ये सिर्फ़ एक विराम है. ताऊ साप्ताहिक पत्रिका अपनी नई सजधज के साथ आपके सामने जल्दी ही फ़िर पेश होगी.

आप जानते हैं कि यह एक श्रम साध्य कार्य है. इसमें काफ़ी समय देना पडता है. हम अपने निजी स्वास्थ्य कारणों से फ़िलहाल पत्रिका को ज्यादा समय नही दे पारहे हैं, इस वजह से यहां एक विराम दे रहे हैं इसे.

ताऊ पहेली पुर्ववत चलती रहेगी. और उम्मीद है उसे आपका प्यार और आशीर्वाद ऐसे ही मिलता रहेगा.

आपका सप्ताह शुभ हो.

इब आज की रामराम !

-ताऊ रामपुरिया


"सलाह उड़नतश्तरी की" -समीर लाल

The first step in the acquisition of wisdom is silence, the second listening, the third memory, the fourth practice, the fifth teaching others.

-Solomon Ibn Gabriol

अर्थात

विवेकशीलता हासिल करने और ज्ञानार्जन के लिए प्रथम चरण मौन, द्वितीय श्रवण, तृतीय याददाश्त, चतुर्थ अभ्यास और पंचम चरण दूसरों को अर्जित ज्ञान बांटना है.
किन्तु आजकल जल्द से जल्द, इस दिखावे की दुनिया में, अपने आप को स्थापित करने के लिए हम इस सिद्धांत को बिल्कुल उलट कर रख दे रहे हैं. बस, नाम की चाह बच रही है, ज्ञान की नहीं..विवेक की तो बात ही मत करिये.
आज जिसे देखें, आये और बिना कुछ जाने सुने, लगे ज्ञान बांटने. विरोध हुआ तो विवाद कैसे बढ़ाना है, उसका अभ्यास पूरी तरह से कर लेंगे.

फिर याद करेंगे कि इस तरह के पूर्व विवादों में विवाद किस तरह भड़का था और उस रास्ते पर चल पड़ेंगे और फिर जब विवाद भड़क जायेगा तब सुन सुना कर मौन धर लेंगे.
विद्वान यूँ ही नहीं कह गये हैं. उनको सुनो और उनके सिद्धांतो का पालन करो. सुखी रहोगे.

The more a man knows, the more he forgives.

-Catherine the Great

अर्थात

जितना ज्ञान अर्जित करोगे, उतना क्षमाशील बनोगे.

बाकी अगली बार:


वो

आँखों से

बात करते हैं..

मुट्ठी में
इन्कलाब रखते हैं...


-समीर लाल 'समीर'


"मेरा पन्ना" -अल्पना वर्मा


हरियाणा

हरियाणा के नाम का अर्थ है " यह परमेश्वर का निवास " से हरि ( हिंदू देवता विष्णु ) और आयन ( घर )!
हरियाणा का इतिहास वैदिक काल से आरंभ होता है. यह राज्‍य पौराणिक भरत वंश की जन्‍मभूमि माना जाता है जिसके नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा. हमारे महान महाकाव्‍य महाभारत में हरियाणा की चर्चा हुई है. जैसा कि बहुत से लोग जानते हैं कि कौरवों और पांडवों की युद्धभूमि कुरूक्षेत्र हरियाणा में ही है. मुसलमानों के आगमन और दिल्‍ली के भारत की राजधानी बनने से पहले तक भारत के इतिहास में हरियाणा अग्रणी भूमिका निभाता रहा इसके बाद हरियाणा दिल्‍ली का ही एक हिस्‍सा बन गया और 1857 में स्‍वतंत्रता के प्रथम महासंग्राम से पहले तक यह गुमनाम बना रहा.

सन 1857 के विद्रोह के दमन के बाद जब ब्रिटिश प्रशासन फिर से स्‍थापित हुआ तो झज्‍झर और बहादुरगढ़ के नवाबों, बल्‍लभगढ़ के राजा त‍था रिवाड़ी के राव तुलाराम की सत्ता छीन ली गई. उनके क्षेत्र या तो ब्रिटिश क्षेत्रों में मिला लिए गए या पटियाला, नाभ और जींद के शासकों को सौंप दिए गए. इस तरह हरियाणा पंजाब प्रांत का हिस्‍सा बन गया.

यह राज्य उत्तर भारत का एक राज्य है जिसे १९६६ में पंजाब से अलग कर के बनाया गया था. पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ है जिस के बारे में हम पहले आप को विस्तार से बता चुके हैं. इस राज्य की सीमायें पंजाब ,हिमाचल प्रदेश ,उत्तर प्रदेश,और उत्तराँचल से लगी हुई हैं. सरकार कोई भी हो हरियाणा विकास के क्षेत्र में अग्रणी है. गुडगाँव यहाँ का आधुनिक और तेजी से विकसित होता हुआ शहर है.

सूचना पौद्योगिकी में जिस प्रकार कि प्रगति हरियाणा ने कि है वह सराहनीय है.कंप्‍यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 23,000 से अधिक सरकारी कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है!‘ ई-दिशा एकल सेवा केंद्र’ के नाम केंद्र’ के नाम से 1159 ग्रामीण और 104 शहरी सामान्‍य सेवा केंद्र स्‍थापित किये जा रहे हैं.
हरियाणा का औद्योगिक विकास भी किसी से छुपा नहीं है.राज्‍य में 1,343 बड़ी और मंझोली तथा 80,000 लघु अद्योग इकाइयां हैं. हरियाणा ऑटोमोबाइल , साइकिलों, रेफ्रिजरेटरों, वैज्ञानिक उपकरणो आदि का सबसे बड़ा उत्‍पादक है. हरियाणा विश्‍व बाजार में बासमती चावल का सबसे बड़ा निर्यातक तो है ही पानीपत का पचरंगा अचार भी निर्यात होता है और बहुत मांग में है..यहाँ भी बहुत पसंद किया जाता है..इस के अलावा पानीपत की हथकरघे की बनी वस्‍तुएं और कालीन विश्‍व भर में प्रसिद्ध है.

यह सच में आश्चर्यजनक और ख़ुशी कि बात है राज्य हरियाणा देश का ऐसा पहला राज्‍य है जहां 1970 में ही सभी गांवों में 100 प्रतिशत बिजली पहुंचा दी गई थी! राज्य में सभी गाँव पक्की सड़कों से जुड़े हैं.यहाँ कि आर्थिक निर्भरता कृषि पर ६५ % है.
प्रति व्यक्ति औसत आय में भी इस राज्य की गणना पहले ५ राज्यों में होती है.
फरीदाबाद सब से बड़ा शहर है. पानीपत , पंचकूला और फरीदाबाद भी औद्योगिक केन्द्र हैं, पानीपत रिफाइनरी दक्षिण एशिया में दूसरी सबसे बड़ी रिफाइनरी है.
इस राज्य में कुल २१ जिले हैं.

हरियाणा जाने के लिए आप को सभी राज्यों से बस , रेल सेवा और विमान सेवा मिल जायेगी. देश की राजधानी दिल्ली निकटम होने के कारण भी हरियाणा पहुंचना बेहद सुगम है.
साल में कभी भी जाएँ.
हरियाणा पर्यटन सम्बन्धी किसी भी जानकारी के लिए आप यहाँ [मुख्य दफ्तर ] से संपर्क कर सकते हैं-
Haryana Tourism Corporation Limited
SCO 17-19, Sector 17-B, Chandigarh-160017
Tel : 0172-20702955-57, 0172-2720437.
Fax : 0172-2703185, 2702783
Email : haryanatourism@gmail.com

पर्यटन स्थल-

१-कुरुक्षेत्र में ब्रह्म सरोवर,सिटी ऑफ़ पार्क,शेख चिल्ली का मकबरा,बुद्धिस्ट मोनुमेंट ,पुरातत्व स्थल,कृष्ण म्यूज़ियम हैं.

२-थानेसर.
-कुरुक्षेत्र से एक दम साथ जुडी हुई जगह है.यहाँ स्थानेस्वर [महादेव] भगवान् का और माँ भद्र काली का मंदिर है.और एक गुरुद्वारा भी है.प्राचीन समय में यह स्थान एक प्रमुख शैक्षिक केंद्र हुआ करता था. राजा हर्ष वर्धन के राज्य में थानेसर राजधानी हुआ करती थी.

३-ज्योतिसर.-यहाँ पर एक बरगद का वृक्ष है जहाँ माना जाता है कि भगवान् कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था. उन्हें पूरी गीता सुनाई थी. सम्बंधित लाइट और साउंड शो भी दिखाया जाता है.

४-पंचकुला
में देखें चंडी मंदिर और कालका देवी का मंदिर.

५-पेहोवा.

६-गोल्फ के चाहने वालों के लिए हरियाणा सरकार ' गोल्फ पर्यटन 'के तहत यहाँ के बहुत ही सुन्दर विश्वस्तरीय गोल्फ के मैदानों को प्रमोट करती है. प्रमुख अरावली गोल्फ कोर्स ,और 'करना झील' के किनारे हाईवे गोल्फ कोर्स [delhi-अम्बाला मार्ग पर] हैं.

७-इसके अलावा आप हरियाणा में ट्रेक्किंग,बोटिंग आदि भी खूब कर सकते हैं.

८-सूरजकुंड का मेला-रंग बिरंगा. आकर्षक!



हर साल एक फरवरी से १५ फरवरी तक लगने वाला यह मेला पर्यटकों को बहुत आकर्षित करता है.
हर साल किस एक थीम पर यह मेला लगता है इस साल मध्य प्रदेश राज्य की झलकियां हस्त-शिल्प आदि यहाँ दिखाये गए थे.
-हरियाणा के लोक गीत और लोक नृत्य बहुत ही लोकप्रिय हैं.
अब कुछ जानकारी शेख चिल्ली के मकबरे के बारे में-


शेख चिल्ली का मकबरा -

शेख चिल्ली का नाम सुनते ही शेखी बघारने वाले किसी व्यक्ति का ध्यान आ जाता है.क्योंकि अक्सर किसी गप्पेबज़ ,और झूटी शेखी बघारने वाले को शेख चिल्ली कह दिया जाता है..मगर हाँ यहाँ किसी ऐसे शेख चिल्ली की बात नहीं कर रहे.
यह शेख चिल्ली तो तो एक बड़े सूफी संत थे.
यह मकबरा हरयाणा के थानेसर जिले में है और भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है.
मुख्य द्वार पर लगे सरकारी पटल के अनुसार शेख चिल्ली का नाम अब्दुर रहीम उर्फ़ अब्दुल करीम उर्फ़ अब्दुर रजाक बताया जाता है.मुग़ल राजकुमार दारा शिकोह [१६५०] द्वारा यह इमारत बनवाई गयी थी.[इस इमारत को किस ने बनवाया था इस में बहुत से इतिहासकारों में मतभेद हैं]

शेख चिल्ली उनके आध्यात्मिक गुरु थे और उन के जीते जी दारा शिकोह ने यह इमारत बनवाई जहाँ वह महीनो अपने गुरु के पास रहा कर शिक्षा लिया करते थे.शेख चिल्ली कि मृत्यु के बाद उन्हें इसी इमारत के नीचे तहखाने में दफना दिया गया था और यह इमारत शेख चिल्ली के मकबरे के नाम से मशहूर हो गयी.



मुख्य इमारत ताजमहल की तरह संगमरमर से बनी है और ऊपर एक गुम्बद भी दिखता है.बीच में बना लॉन हरा भरा और बेहद खूबसूरत है.तहखाने में ६ कब्र हैं जिन में से शेख चिल्ली कि एक है और बाकि पांच किस की हैं इस बारे में कहीं उल्लेख नहीं है.एक सूखा तलाब भी यहाँ दिखता है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कभी यहाँ पानी लेने के लिए नहर का भी इंतजाम रहा होगा.

इमारत में नौ मेहराबें हैं और बारह छतरियां हैं.इमारत पर की गयी कलाकारी पर्शियन प्रभाव की लगती है.
अपनी अनूठी और सुन्दर वास्तुकला के लिए इस इमारत को ताजमहल के बाद दूसरा स्थान दिया जाता है.मकबरे के पश्चिम में पुरातत्व विभाव को खुदाई में राजा हर्ष के टीले के अवशेष मिले हैं.

एक स्थान पर मैं ने यह भी पढ़ा है कि यह भी माना जाता है कि सूफी संत शेख चिल्ली ने ही भारत में सबसे पहले मुग़ल शासन की समाप्ति की भविष्यवाणी की थी और उन्होंने दारा शिकोह को सलाह दी थी कि जो भी काम करने हैं अपने जीवन में कर लो...और इसीलिए दारा शिकोह ने अपने उस्ताद के जीवित रहते ही उनके इस मकबरे का निर्माण करवा दिया था!

यह स्थान छात्रों में भी लोकप्रिय है क्योंकि पढने के लिए बहुत ही शांत जगह है.
इस स्थान को देखने के लिए टिकट लगता है.
सप्ताह में हर दिन सुबह ९ से शाम ५ बजे तक खुल रहता है.[कन्फर्म कर लें]
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“ दुनिया मेरी नजर से” -आशीष खण्डेलवाल



विराम के बाद फ़िर मुलाक़ात होगी.. हैपी ब्लॉगिंग.


"मेरी कलम से" -Seema Gupta

भारत के एक गरीब चिड़ियाघर में , दिन प्रति दिन एक शेर बहुत कुंठित हो रहा था क्योंकि उसे एक दिन में 1 किलो से ज्यादा मांस नहीं दिया जा रहा था .

शेर ने सोचा कि शायद उसकी प्रार्थना सुनी जायेगी, ये सोच जब एक दिन एक दुबई चिड़ियाघर प्रबंधक ने चिड़ियाघर का दौरा किया शेर ने चिड़ियाघर प्रबंधन से अनुरोध किया कि दुबई के चिड़ियाघर में स्थान्तर किया जाये . और शेर की बात मान ली गयी.

अब शेर ने वहां एक अच्छा ठंडा पर्यावरण और एक या दो बकरी प्रतिदिन की कल्पना शुरू कर दी. दुबई पहुंचने के पहले दिन शेर को एक सील बंद बेग नाश्ते के लिए दिया गया, शेर ख़ुशी ख़ुशी उस पर टूट गया और खोलते ही आवक रह गया क्योंकि उसमे सिर्फ कुछ केले थे.

इस पर शेर ने सोचा की उसे अभी अभी भारत से लाया गया है तो जगह बदली के कारण वे लोग उसके पेट के बारे मे चिंतित होंगे और उसे मॉस नहीं दिया गया होगा खाने को.

लकिन ये क्या अगली सुबह भी वही हुआ और उसके अगले दिन भी वही केले से भरा बेग उसके सामने था.
अगले दिन शेर बहुत गुस्से में था और उसने खाना वितरण करने वाले लडके को रोका और जोर से गुर्राया
'क्या तुम जानते हो कि मैं शेर ... जंगल का राजा हूँ . तुम्हारे प्रबंधन को क्या हुआ है? ये सब क्या बकवास है? मुझे खाने को केले क्यों दिये जा रहे है?.
लड़के ने विनम्रता पूर्वक कहा, 'सर, मैं जानता हूँ कि आप जंगल के राजा हैं
लेकिन .....आप. को एक बदर के वीजा पर यहां लाया गया है!! '

कहानी का नैतिक मूल्य

बेहतर है अपने ही घर में शेर बन कर रहना बजाये इसके कहीं बन्दर बन के रहना




"हमारा अनोखा भारत" -सुश्री विनीता यशश्वी



यमुनोत्तरी

जिस स्थान से यमुना नीचे आती है उस स्थान को यमुनोत्तरी कहा जाता है। यमुना का उद्गम कालिंदी पर्वत से माना जाता है। इसीलिये यमुना को कालिंदी नाम से भी जाना जाता है। केदारखंड के अनुसार माना जाता है कि - सूर्य की दो पत्नियां थी संज्ञा और छाया। संज्ञा ने गंगा को जन्म दिया तथा छाया ने यमुना व यमराज को।

कहा जाता है कि छाया ने यमराज का तिरस्कार कर दिया था जिस कारण उन्हें पृथ्वी पर आना पड़ा। परन्तु सूर्य ने यमुना को भी पृथ्वी का उद्धार करने के लिये ही धरती पर भेजा। यमुनोत्तरी के विशाखयूप पर्वत पर पांडवों ने एक वर्ष बिताया था।

यमुनोत्तरी मंदिर यमुना के बांये तट पर स्थित है। इस मंदिर के कपाट वैशाख महीने कह शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया को खुलते हैं और कार्तिक मास में आने वाली यम की द्वितीया को यह कपाट बंद हो जाता है। यमुनात्तरी के लकड़ी के मंदिर को 1885ई. में गढ़वाल के राजा सुदर्शनशाह ने बनवाया था और उसमें यमुना की मूर्ति की स्थापना करवाई।

इस समय जो मंदिर यहां पर है इसे प्रतापशाह ने बनवाया था। इस मंदिर को सन् 1999 में एक बार फिर ठीक किया गया। मंदिर के गर्भ में एक सिंहासन है जिसमें काले रंग की यमुना व सफेद गंगा व सरस्वती की मूर्तियां रखी हैं। यमुनोत्तरी में पूजा करने वाले ब्राहम्ण ग्रहस्थ हैं और इन ब्राहम्णों को पूजा करने का अवसर बारी-बारी से मिलता है। ये ब्राहम्ण पीढ़ियों से मंदिर की पूजा करते आ रहे हैं।


इस मंदिर के पास एक गरम पानी का कुंड है जिसे सूर्यकुंड कहा जाता है। केदारखंड में इसे ब्रह्मकुंड नाम से भी जाना जाता है। इस कुड के पानी का तापमान 90 डिग्री सेल्सीयस के आसपास रहता है। इस कुंड में यात्री आलू, चावल को पोटली बनाकर डाल कर पकाते हैं और उसे ही प्रसाद माना जाता है।

इस स्थान से कुछ दूरी पर एक कुंड और है जिसका नाम गौरीकुंड है। इसका पानी सूर्यकुंड से थोड़ा ठंडा है। इसमें यमुना का ठंडा पानी मिलता है जिस कारण इसके चारों ओर हर समय भाप का घेरा बना रहता है।



"नारीलोक" -प्रेमलता एम. सेमलानी



कुछ दिनो से हमारी लाडली दुलारी रामप्यारी मेरे से नाराज है. जब मैने उसे इस नाराजगी का कारण पुछा तो बडी ही चुटकीले अन्दाज मे बोली-"प्रेमा आन्टी! मै आपसे कुट्टी हू......आप हमेसा ही बडॆ लोगो के लिए खाने की चटपटी रेसिपि बताती है. हम बच्चो के लिऎ चाकलेट, आईसक्रिम की तो बात ही नही करती है.....जब देखो ताई, ताऊ के लिऎ दाल बाटी चुरमा ही बनाकर खिलाती है. जब तक आप चाकलेट आईसक्रिम बिस्किट बनाने की विधि नही बताएगी मै आपसे बात नही करुगी." तो रामप्यारी! आज तेरे लिऎ “टॉफी“‘बना रही हू. अब तो खुश हो जा.....
टमाटर की चाकलेट
सामग्री

लालटमाटर 250 ग्राम
चीनी 2 चम्मच (Table spoom)
सोडीयम बेन्जोएट(sodium benzoate) 50 मिलीग्राम
इलायची पाउडर थोडा
बनाने की विधी-:
टमाटर को काटकर उबाल ले.
अब छानकर रस निकाल ले.
चीनी, सोडीयम बेन्जोएट, इलायची पाउडर मिलाए.
थाली मे घी लगाकर मिश्रण किया हुआ रस उसमे डाल दे.
तथा परत थॊडी मोटी रखे.
धुप मे सूखाकर अब उसे मनचाहे आकार मे काट ले.
स्वादिष्ट पाचक “टमाटरटॉफी“ रामप्यारी सहीत सभी बच्चो एवम बडो को भी बहुत पसन्द आएगी.

अब कुछ बाते टमाटर से:-
शक्ति धर, टमाटर

मानव जीवन के लिए जिन-जिन तत्वो की आवश्यकता होती है, वे प्राय: सब तत्व इसमे निहित है. लोहे की मात्रा इसमे दूध की अपेक्षा दुगुनी होती है. चूना भी इसमे प्रचुर मात्रा मे पाया जाता है जो हड्डियो को मजबूत बनाता है. टमाटर मे ए-बी-सी (A, B, C ) तीनो विटामिन पाये जात है. इसमे पाए जाने वाले विटामिन्स मे यह विशेषता होती है की अन्यत्र पाए जाने वाले विटामिन्स आग लग जाने के बाद नष्ट हो जाते है. डॉक्टर क्रिनसन ने यह प्रमाणीत किया है कि जो विटामिन्स ताजे टमाटर मे वही टमाटर के अन्य प्रकारो सूखे हुऎ आचार,मुरब्बा, एवम चटनी मे पाए जाते है.इससे यह प्रमाणित होता है की टमाटर बहूत ही उपयोगी एवम लाभकारी फ़ल है.
प्रात: दो टमाटर खाकर दूध पीने से रक्त शुद्धि एवम वृद्धि होती है.
मधुमेह: डाक्टर पी.जे. केवेजने लन्दन रिपोर्ट मे लिखा है कि मधुमेह के लिए टमाटर से अधिक लाभप्रद कोई अन्य खाध पदार्थ नही है. धीरे-धीरे शक्कर की मात्रा न्यून होते होते मधुमेह स्वत समाप्त हो जाता है.
नैत्र विकृति: भी टमाटर खाने से ठीक हो जाती है.
हानि: वात-पित्त प्रधान व्यक्तियो के लिऎ टमाटर हानिप्रद है.

चलते चलते:-

जिन्दगी अजबी होती है,
कभी हार कभी जीत होती है.
तमन्ना रखो समन्दर की गहराई को छूने की,
क्यो कि किनारो पर तो जिन्दगी की शुरुआत होती है.
नमस्कार.
प्रेमलता एम. सेमलानी


सहायक संपादक हीरामन मनोरंजक टिपणियां के साथ.
"मैं हूं हीरामन"

अरे हीरू..कहां मर गिया…देख ये मुरारी अंकल को…एक ही जगह सूई अटक गई..

अबे पीरू..मैं तो शेफ़ाली दीदी की टिपप्णी पढी रिया हूं…जो आज दिमाग चलाने को मना कर रही हैं.

अरे पेलवान..देख..राठौड अंकल को नींद आने लग गई..
और शाश्त्री अंकल को तो बुखार ही चढ गिया रे!

 

 Blogger Murari Pareek said...

रामप्यारी के सवाल पर |
मेरा जवाब
मेरा जवाब
मेरा जवाब
मेरा जवाब
khi....khi..khi..khe..khe..khe..hi..hi..

September 5, 2009 8:19 AM

Blogger Shefali Pande said...

taau ,, aaj ke din to dimaag chalane ko mat kaho ..ek din rest ka

September 5, 2009 8:08 PM

 

 

 Blogger नरेश सिह राठौङ said...

मैने पूरा गूगल अर्थ छान मारा नीन्द भी आने लग गयी नही पता चला ।

September 5, 2009 8:59 PM

 

 Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

ताऊ!
मगजपच्ची करते-करते बुखार आ गया है।
शायद कल को पोस्ट भी नही लिख पाऊँगा।

September 5, 2009 8:00 PM

 

चल पीरू..जल्दी चल अब आफ़िस मे काम बहुत पडा है…

हां पेलवान..निकल ले..सीधे रस्ते से…



ट्रेलर : - पढिये : श्री विवेक रस्तोगी से ताऊ की खास बातचीत
"ट्रेलर"

गुरुवार शाम को ३: ३३ पर ताऊ की खास भेंट का ब्यौरा : श्री विवेक रस्तोगी से...पढना ना भुलियेगा.

ताऊ : ताऊ : हमने सुना है कि आप बचपन मे बहुत शरारती थे?

विवेक रस्तोगी : जी, यह सही है. शरारत का कोई मौका नही छोडा.

ताऊ : हमने सुना है कि आपने एक बार स्कूल के अपने सहपाठियों को जहरीले काजू खिलवा दिये थे?

विवेक रस्तोगी : ???????????????????

जानिये गुरुवार शाम ३ : ३३ ताऊ डाट इन पर





अब ताऊ साप्ताहिक पत्रिका का यह अंक यहीं समाप्त करने की इजाजत चाहते हैं. संपादक मंडल के सभी सदस्यों की और से आपके सहयोग के लिये आभार.

संपादक मंडल :-
मुख्य संपादक : ताऊ रामपुरिया
वरिष्ठ संपादक : समीर लाल "समीर"
विशेष संपादक : अल्पना वर्मा
संपादक (तकनीकी) : आशीष खण्डेलवाल
संपादक (प्रबंधन) : Seema Gupta
संस्कृति संपादक : विनीता यशश्वी
सहायक संपादक : मिस. रामप्यारी, बीनू फ़िरंगी एवम हीरामन
स्तम्भकार :-
"नारीलोक" - प्रेमलता एम. सेमलानी

ताऊ पहेली -३८ की विजेता सुश्री प्रेमलता पांडे

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम !

कल की ताऊ पहेली - ३८ का सही उत्तर है शेखचिल्ली का मकबरा थानेसर (कुरुक्षेत्र) हरियाणा. जिसके बारे मे कल ताऊ साप्ताहिक पत्रिका में विस्तार से बता रही हैं सुश्री अल्पना वर्मा. .

अब बात करते हैं ताऊ पहेली - ३८ के परिणामों की.

 

 

सुश्री प्रेमलता पांडे

 

प्रथम विजेता हार्दिक बधाई

अंक १०१

द्वितिय विजेता  श्री विवेक रस्तोगी अंक १००

तृतिय विजेता श्री संजय बेंगाणी अंक ९९


आईये अब क्रमश: आज के अन्य माननिय विजेताओं से आपको मिलवाते हैं.

 

 

 



छपते छपते :
श्री अविनाश वाचस्पति जी का भी सही जवाब आया है. आपको दिये जाते हैं पूरे ४९ नम्बर. बधाई.

इसके अलावा निम्न महानुभावों ने भी इस पहेली अंक मे शामिल होकर हमारा उत्साह बढाया. जिसके लिये हम उनके हृदय से आभारी हैं.

श्री पंकज मिश्रा, सुश्री निर्मला कपिला, सुश्री पूजा उपाध्याय, श्री अनिल पूसदकर, श्री दीपक तिवारी "साहब",
श्री सोनू, श्री लालों के लाल इंदौरीलाल, श्री मकरंद, श्री नीरज जाटजी, श्री दिगम्बर नासवा, श्री राज भाटिया, श्री कुश, सुश्री शेफ़ाली पांडे, श्री नरेश सिंह राठौड और श्री स्मार्ट ईंडियन

आपका सबका तहेदिल से शुक्रिया.


हाय…गुड मोर्निंग एवरी बडी…आई एम राम..की प्यारी… रामप्यारी.

हां तो आज के सवाल का पूरा उत्तर तो किसी ने नही दिया. दूसरे पार्ट का सही उत्तर नही मिला. हालांकि विभिन्न दृष्टिकोण सभी ने रखे. तो आज जिन्होने भी इस में भाग लिया उन सभी को मिलते हैं पूरे तीस तीस नम्बर. और अब मैं आपको सरल और शुद्ध हिंदी में सही उत्तर बता देती हूं.

जहां से पश्चिम और पूर्व का विभाजन होता है अर्थात जिसके एक और एक तिथि पीछे होती है और दूसरी और एक तिथि आगे,यह कहलाती है तिथि रेखा.

यह किरीबाती द्विप (लक्षद्वीप समूह, पश्चिमी मध्य प्रशांत महासागर)से होकर गुजरती है. आप अधिक जानकारी लेना चाहें तो विकिपिडिया के इस http://en.wikipedia.org/wiki/Kiribati लिंक पर जाकर प्राप्त कर सकते हैं..


सबसे पहले आये दिनेशराय जी द्विवेदी अंकल, फ़िर वो अपने रेडियो वाले मुरारी पारीक अंकल, फ़िर आई सीमा आंटी, और फ़िर संजय बेंगाणी अंकल आये . इसके बाद प. डी.के.शर्मा वत्स अंकल, फ़िर आई अर्चना तिवारी आंटी, दर्पण शाह "दर्शन" अंकल और फ़िर संजय तिवारी "संजू" अंकल.
आप सभी का हार्दिक धन्यवाद और बधाई.

अब रामप्यारी की तरफ़ से रामराम…अगले शनीवार फ़िर से यही मिलेंगें. वैसे आजकल शाम ६ बजे मैं ताऊजी डाट काम पर रोज ही मिल जाती हूं. ..और हां आपका कल से शुरु होने वाला सप्ताह शुभ हो.
अच्छा अब नमस्ते. कल सोमवार को ताऊ साप्ताहिक पत्रिका मे आपसे पुन: भेंट होगी.
सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद.
ताऊ पहेली – ३८ का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया.

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मुख्य संपादक : ताऊ रामपुरिया
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स्तंभकार : प्रेमलता एम. सेमलानी ( नारीलोक)

ताऊ पहेली - 38

प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम.
ताऊ पहेली अंक 38 में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. क्ल्यु हमेशा की तरह रामप्यारी के ब्लाग से मिलेंगे. रामप्यारी के ब्लाग पर पहला क्ल्यु 11:30 बजे और दुसरा 2:30 बजे मिलेगा. रामप्यारी का जवाब अलग टिपणी में देवें. तो आईये अब आज की पहेली की तरफ़ चलते हैं.

यह कौन सी जगह है?

अब रामप्यारी का विशेष बोनस सवाल : - ३० अंक के लिये.

rampyari-tdc-1_thumb[2] हाय एवरी बडी..वैरी गुड मार्निंग फ़्रोम रामप्यारी.

विनम्र निवेदन : - कृपया मेरे सवाल का जवाब अलग टीपणी मे देवें. बडी मेहरवानी होगी. एक ही टिपणी मे दोनो जवाब मे से एक सही होने पर प्रकाशित नही की जा सकती और इससे आप कन्फ़्युजिया सकते हैं कि आपकी टिपणी रुकी हुई है. तो सही होगी?

आज का सवाल :-

अंतर्राष्ट्रिय तिथी रेखा यानि डेट लाईन क्या होती है? और भारतीय उपमहाद्विप मे यह कौन से स्थान से गुजरती है?

अब आप मेरे ब्लाग पर पहली हिंट की पोस्ट पढ सकते हैं 11:30 बजे और दुसरी 2:30 बजे.

अब रामप्यारी की रामराम.



इस अंक के आयोजक हैं ताऊ रामपुरिया और सु,अल्पना वर्मा


नोट : यह पहेली प्रतियोगिता पुर्णत:मनोरंजन, शिक्षा और ज्ञानवर्धन के लिये है. इसमे किसी भी तरह के नगद या अन्य तरह के पुरुस्कार नही दिये जाते हैं. सिर्फ़ सोहाद्र और उत्साह वर्धन के लिये प्रमाणपत्र एवम उपाधियां दी जाती हैं.किसी भी तरह की विवादास्पद परिस्थितियों मे आयोजकों और ताऊ साप्ताहिक पत्रिका के संपादक मंडल का फ़ैसला ही अंतिम फ़ैसला होगा.

मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम
मिस.रामप्यारी का ब्लाग

 

नोट : – ताऊजी डाट काम  पर हर शाम 6:00 बजे नई पहेली प्रकाशित होती हैं. यहा से जाये।

सांभा ने मौसी के सामने गब्बर की पोल खोली : ताऊ की शोले

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ताऊ की शोले (एपिसोड - 4)
लेखक व निर्देशक : ताऊ रामपुरिया और अनिता कुमार,
सगीत निर्देशक : दिलिप कवठेकर


पिछली बार आपने पढा : कालिया और अपना माल छुडवाने के लिये गब्बर और सांभा वापस ठाकुर की हवेली में लौट आते हैं. जहां ठाकुर उनको ब्लागिंग ब्लागिंग खेलता हुआ मिलता है. गब्बर द्वारा यह कहने पर कि वो और सांभा थोडे दिन ठाकुर की हवेली पर पुलिस से छुपकर रहना चाहते हैं. ठाकुर ने सांभा को घोडे लेकर कहीं और जाने का कहा. क्युंकि पुलिस घोडे की लीद सूघ कर उनको यहां ढुंढने आ सकती थी. और सांभा वहां से अपने घोडे पर सवार होकर गांव में मौसी के घर जा पहुंचता है. मौसी ने उसको बडे प्यार से खाना खिलाया और दोनों बातें करने लगे. अब आगे पढिये...
मौसी : अरे सांभा...वो गब्बर नही आया बहुत दिनों से?

सांभा : मौसी..वो क्या है ना आजकल गब्बर भैया बहुत बिजी हो गये हैं।

मौसी : काहे, आज कल उड़नतश्तरी का धंधा जोरों पर है क्या? कि फ़िर वो मुआ ऑडिट साडिट का चक्कर है? मेरे तो समझ में नहीं आये कि जब इतना बढ़िया खानदानी धंधा चल रहा था तो ये मुए नये धंधे पकड़ने की का जरूरत। खुद तो खानदान की लुटिया डुबो रहा है, साथ में वीरु का भी सत्यानाश करे है।

सांभा : अरे मौसी ...आप तो यूं ही फ़िकर करती हो गब्बर भैया का? ऊ तो का कहवैं कि.. बहुत बडा काम करते हैं...आप चिंता मत किया करो.

मौसी : अरे, चिंता कैसे ना करुं? भाई है मेरा...मैं ही चिंता ना करुंगी तो कौन करेगा? बाप दादा का धंधा संभालता तो आज कित्ता बड़का आदमी होता, सारे मंत्री ऐसे लाइन लगाते जैसे राशन की दुकान पे चीनी की लाइन

सांभा : मौसी तू चिन्ताये मती न, गब्बर भैया तो बस बड़े आदमी बने समझो जरा बस ये लेपटॉप तो पालतू हो जाये

मौसी : का बोला…का बोला…लेपटाप, ये मुआ कोई नया जनावर है का?

सांभा : अरे नहीं मौसी..ये तो बड़के बड़के लोगां के शौक है, राजा महाराजा के…ऊ फ़िल्लम आयी थी, देखो तुमरी जवानी में संजीव कुमार वाली, शंतरज के खिलाड़ी, याद आयी, उसमें वो राजा लोग कैसा खेल खेलते थे, वैसा ही है ये लेपटॉप।

मौसी : हाय हाय तो गब्बर अब धंधा पानी छोड़ के खेल खेलत है, हे भगवान, ये छोरा तो गया हाथ से. बापूऊऊऊउ…क्या मुंह दिखाऊंगी तुम्हें।

सांभा : अरररर मौसी, पिटवाओगी गब्बर भैया से, मैने ये कब कहा कि गब्बर भैया खेलत है, अरे वो भी सुसरी पढ़ाई जैसा है, ठाकुर भैया सिखलाय रहे हैं।

मौसी : हे राम, अब इस उमर में पढ़ाई करत है, काहे, उसके बाप दादा ने कभी पढ़ाई की जो ये कर रहा है, देखत नहीं का? गांव के सब स्कूल पास लौंडे मारे मारे फ़िरत हैं दो दो चार आने की बेगार करे हैं और तू…देख कैसा मौज करे हैं और वो कालिया…। मैं पहले ही बोली थी गब्बर को, ये मरे ठाकुर की सौबत में मत पड़ , मत पड़, बर्बाद हो जायेगा, पर सुने तब न

सांभा : अरे नहीं नहीं मौसी, ठाकुर भैया तो उन्हें ब्लागिंग करना सिखाय, अब देखो, गब्बर भैया कित्ते बड़े आदमी बन गये , पहले तो सौ कोस दूर तक गब्बर भैया का नाम था अब तो दुनिया के चप्पे चप्पे में लोग उन्हें जानत हैं, प्यार करत हैं। हम तो ठाकुर भैया को बोले हमें भी तनिक सिखलाय दो इ मुई ब्लागिंग, हमें भी कोई इक बार क्यूट कह दे झूठा ही सही।

मौसी :ह्म्म, तो ये मुई बिलागिंग ने सत्यानास किया है मेरे गब्बर का, पहले वो छमिया आयी थी बर्बाद करने। कौन गांव से है ये मुई ब्लागिंग, चल अभी उसका झोंटा काट उसके हाथ न दिया तो मेरा नाम भी जगत मौसी नहीं, हां
sssss नहीं तो।

सांभा : अरे मौसी , तुम भी न , बस न आव देखती हो न ताव बस झट से डंडा निकाल लेती हो, अब बिना समझे ही चढ गई ना हुक्का पानी लेके? अरे ई ब्लागिंग कोई माहतारी नहीं ये तो एक विधा है, तुम भी सिखल्यो ना ई बिलागिंग अब छोड़ो ये आचार बनाने, ब्लागिंग सीखो ब्लागिंग, फ़िर देखो, तुम भी बड़की हो लोगी

मौसी : अरे हट परे मुए, अब क्या मेरी उमर है बड़का होने की? तेरी ये ब्लागिंग कोई दाम भी दिलाये की बस टाइम खोटी? गब्बर कुछ कमाता धमाता भी है की ना

सांभा, मौसी के सामने गब्बर की पोल खोलते हुये


सांभा : अरे मौसी..तुम भी का बात करती हो? अरे लेपटोपवा है तो ई समझ ल्यो कि पैसा ही पैसा है
मौसी आंखे बडी करके कहती है : वो कैसे ?
सांभा : अरे मौसी, अब देखो, डाका डालना हो तो पहले खबरी का खर्चा, फ़िर कम से कम दस घोड़े का खर्चा, एक एक घोड़ा, साठ सत्तर हजार का आता है, फ़िर घास भी कित्ती मंहगी हो रेली है आजकल, आदमियों का खर्चा सो अलग, और फ़िर पुलिस का खटका हुआ तो उल्टे पैर भाग लेते है, कित्ता लुकसान हो जाता है, समझ रही हैं न ?

मौसी : का मतलब है तुहार सांभा..?

सांभा : अरे मौसी..ऊ देखो ना..अब कालिया पकडे गये हैं...उसे छुड़वाने का खर्चा , भले गब्बर भैया ने ठाकुर को कह दिया,,वो छुडवा भी देंगे..पर खर्चा तो देना ही पड़े न, इसमें तो फ़ौरन काम चालू..

मौसी : सांभा..ई का ताऊ जैसन पहेलियां बुझा रहा है? कालिया..पकडा गया..ठाकुर छुडवा देगा? काम चालू..साफ़ साफ़ बता...

सांभा : अब मौसी..हम का बतायें..कि कालिया के साथ साथ ठाकुर ...गब्बर भैया का माल भी छुडवा देंगे....

मौसी : माल भी छुडवा देंगे...का कह रहे हो सांभा? कौन सा माल..

सांभा : अरे मौसी..जब गब्बर के आदमी पकडे जाते हैं तो माल भी तो साथ मे पकडा जाता है ना?
अब मौसी ने लठ्ठ हाथ मे ऊठाया और सांभा पर तानते हुये बोली - देख बचूआ..तू हमका सही सही बता वर्ना आज तेरी हड्डी पसली हम तोड ताड के रख देंगे..

सांभा : अब देखो मौसी..आप खाम्खाह मे हमारे उपर तो नाराज हो मति..हमरा आपके सिवा और हैईये कौन? और आप हमारा हड्डी पसली तोड कर भी अपना ही नुक्सान करवा लेंगी...काहे से कि हमारी दवा दारू भी आपको ही करवानी पडेगी ना बुढौती मे...

मौसी ने एक लठ्ठ दिया सांभा को घुमाकर...और बोली ---बातें बाद मे बनाना मुए..चल अब सही सही बता सब कुछ मेरे को. नही तो अब और पिटेगा.

सांभा - अरे मौसी इत्ती जोर से क्युं मारती हो? आव देखती हो ना ताव..बस जब मन हुआ घुमाय दिया लठ्ठ सांभा की खुपडिया पर...हम बताये देत हैं...ऊ का है ना कि गब्बर भैया को ठाकुर की हवेली मे जाये बिना चैन नही है और ऊंहा..ठाकुर साब उनको नशा पानी पिलवाय देत हैं...बस नशा करके ..

मौसी बीच मे ही टोक कर...तो अब क्या गब्बर नशा भी करने लगे हैं?

सांभा - अरे मौसी... ई हम कब कहत हैं? ऊ तो ई होत है कि ..नशे के बाद गब्बर बडा रोमांटिक हो जाता है और फ़िर ऊ जो कौन बंजारन है...का नाम है.. अरे मौसी ऊ ही जो सिप्पी साहब की फ़िल्लम मे बडे ठुमके लगाके नाची रही...ऊ ...हां शायद हेलनवा या ऐसन ही कोनू नाम रहा.. अबहिं नाम याद आने पर पक्का बताते हैं...बस ऊसको बुलवाकर ठुमके उमके की महफ़िल लगा लेत है...

मौसी फ़िर से बीच मे बोली ---हे राम..मेरे तकदीर फ़ूटे..इस लडके ने तो सारा कुल का नाम मिट्टी मे मिलाय दिया..अब क्या कसर रह गई? हे भगवान..यही कमी थी..अब नशा और उसके बाद नाच..गाना..छि: छि:....सांभा....

सांभा - अरे मौसी ई तो कोनू बडी बात नही है...अब का है कि इन बंजारण कि महफ़िल मे खर्चा भी बहुत बडा आता है..सब नवाबी शौक हैं..तो जब पैसा की जरुरत लग पडे तो गब्बर कहां से लाये....ई तो पूछो जरा हमसे?

मौसी बीच मे ही.. अबे मुए बतायेगा भी कहां से लाता है इतने पैसे गब्बर? या दूं घुमा के? मौसी लठ्ठ तानती हुई बोली.

सांभा खींसे निपोरते हुये बोला - अरे मौसी ...वही तो समझा रहे थे न, पैसे पाने के लिए डाके डालने पड़ते हैं, लेकिन अब तो वो सबहे काम लेपटॉप पर झूला झूलते झुलते हो जाता है, काहे गधे घोड़े की खिटपिट मोल लेनी?

मौसी: सांभा, तू पगला गया है या मुझे पगला देगा, अब क्या ये तेरे लेपटॉप से पैसा निकलता है?

सांभा: नहीं मौसी, ठाकुर ने ऐसे ऐसन गुर सिखा दिये है गब्बर भैया को कि किसी का घर में घुसने की जरूरत ही नाहीं, बस लेपटॉप खोलो, किसी के भी बैंकवा में घुसो और वारे न्यारे, क्या समझीं…॥ ही ही ही... अरे मौसी, इसी लिये तो कहूं हूं कि तू भी सीख ले ये खेल फ़िर तू भी पैसा कमाना, छोड़ ये आचार वाचार के चक्कर्। कब तक बनाती रहेगी?

मौसी: अच्छा ssssss. चल फ़िर मैं भी जरा चलूं ठाकुर के घर,
ब्लाग बिना चैन कहां रे,
ब्लाग बिना चैन कहां रे
सोना नहीं चांदी नहीं ब्लाग तो मिला
अरे ब्लागिंग कर ले