मोदीजी को भगत ताऊ का खुला खत

आदरणीय मोदीजी रामराम
वर्तमान स्थितियों में आप अति व्यस्त होंगे फिर भी समय निकाल कर कृपया अविलम्ब गौर करें।

हाल यह है कि इतने दिनों से काम धंधे बन्द कर घर में बैठकर खाते हुए सब जमा पूंजी खत्म हो गयी है अब क्या करें?

आपने 20 लाख करोड़ का राहत पैकेज जब घोषित किया तो मन प्रसन्न हो गया और यक़ीन मानिए उस रात बिना नींद की गोली खाये ही मस्त नींद आयी।
पर अगले दिन जब बहन निर्मला सीतारमण जी ने जलेबी सी उतारना शुरू की और 5 दिन तक उतारती ही  रही तो समझ आगया की इन जलेबियों में चाशनी नहीं है।

पहली बात तो यह कि निर्मला जी पूरे 20 लाख करोड़ की जलेबी भी नहीं उतार पाई। यदि उनकी सारी जलेबियों का हिसाब भी जोड़ा जाए तो ये 13 या 13.5 लाख करोड़ की कीमत की ही बैठती हैं।
अब अगर RBI द्वारा पूर्व प्रदत्त लिक्विडिटी के 8 लाख करोड़ भी इसमें जोडलें तो यह आपके 20 की बजाय 21 या 21.5 लाख करोड़ का राहत पैकेज बन गया।

ताऊ कोई अर्थशास्त्र का ज्ञाता तो है नहीं, ताऊ है एकदम अंगूठा छाप,  पर एक बीघा में कितना किलो बीज लगेगा यह अच्छी तरह जानता समझता है।

आपके राहत पैकेज से जनता अनुमान लगाए बैठी थी कि सबके खाते में 15/16 हजार रुपये अब आये ही समझो। पर आपके इस पैकेज का लॉलीपॉप मुझे कुछ इस तरह समझ आया है कि -

रिजर्व बैंक ने जो 8 लाख करोड़ की लिक्विडिटी लोन के लिए दी थी वह पैसा भी बाजार में आ नही पाया क्योंकि लोन कोई क्यों लेगा? काम धंधा है नहीं, फोकट लोन लेकर कोई कर्ज का बोझ क्यों बढ़ाएगा? ऊंच नींच होगई तो आप विजय माल्या बनने नहीं दोगे।

अब इस राहत पैकेज के 11 या 11.5 लाख करोड़ आपने MSMEs को लोन के लिए रखे हैं तो लोन का हाल आपको ऊपर बता ही चुका हूँ, इस तरह  पैकेज तो यहां पूरा हो गया।

हाँ, आपने जेब से करीब 1.5 लाख करोड़ के आस पास मनरेगा, जनधन व महिलाओं के लिए नगद खर्च किया है उसके लिए आपका आभार। आपने मनरेगा  बजट को 61 हजार करोड़ से  40 हजार करोड़ अतिरिक्त बढाया है उसके लिए भी आभार।

आपने जीडीपी के 10% का राहत पैकेज देने की घोषणा की थी जो कि सिर्फ 0.75% ही आपने दिया है।

पर इस 1.5 लाख करोड़ के सर्कुलेशन से तो अर्थव्यवस्था का पहिया नहीं दौड़ेगा। सर, अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए आपको नगदी माल जनता के हाथ में देना ही होगा। 1930 की अमेरिकी मंदी के समय भी वहां की सरकार ने खुले हाथों जनता को खर्चने के लिए डॉलर दिए थे और अर्थव्यवस्था को उबार लिया गया था।

अब आप कहेंगे कि पैसा क्या पेड़ पर लगता है जो जनता में बांट दूँ? कहाँ से लाऊं इतनी नगदी?
सर, पेड़ पर भी नहीं लगता, और आपकी जेब में भी नहीं है  पर आप उधार ले सकते हैं या बजट घाटा बढ़ा  बढ़ा सकते हैं, इन परिस्थितियों में ऐसा करने से कोई आफत नहीं आएगी, पर नगदी जनता को खर्चने के लिए व्यवस्था करें।

मां बाप अपने बच्चों को महंगी शिक्षा दिलाने के लिए उधार ले सकते हैं तो आप जनता की और अर्थव्यवस्था की भलाई के लिए उधार क्यों नहीं ले सकते? क्यों आप बजट घाटा नहीं बढ़ा सकते?

मेरी बातों पर ध्यान दिया जाए क्योंकि मुझे अब कल की चिंता में नींद आना बंद हो गई है। यदि राहत पैकेज का स्वरूप नहीं बदला गया तो मुझे कल बहुत ही भयानक दिख रहा है।

निवेदक
अंगूठा टेक ताऊ

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पटोला का असल मतलब क्या है?

पटोला शब्द कई मायनों में उपयोग होता है।  आइये पहले इसके सार्थक रूप को जानते हैं।

आपमें से कुछ ने शायद पटोला साड़ी पहनी हो और हर महिला की इच्छा अवश्य रहती है कि वह एक बार यह साड़ी जरूर पहने। कुछ ऑन लाइन साइट्स पर भी आपने पटोला साड़ी चार पांच हजार की कीमत में बिकती अक्सर देखी होगी। पर यह ओरिजिनल नहीं है। बस नाम ही पटोला साड़ी है वहां।

 पटोला एक सिल्क की साड़ी को कहते हैं जो मुख्यतया गुजरात के पाटन में तैयार की जाती है। 6/7 लोगों द्वारा एक साड़ी 6 से लेकर 12 महीनों में तैयार हो पाती है।

गुजरात के कुछ हिस्सों में  शादी में दुल्हन द्वारा पहने जाने वाले जोड़े के लिए भी पटोला शब्द का उपयोग होता है।

कुछ देशों में इस साड़ी का एक्सपोर्ट भी होता है पर बनाने वाले कम हैं इसलिए बहुतायत में नहीं। इंदिरा जी, अमिताभ, राजीव गांधी और भी नामचीन लोग   इसके मुरीद रहे हैं।

इसकी खासियत यही है कि इसे दोनों साईड से पहन सकते हैं। कीमत 2 लाख से शुरू होकर 8 लाख तक जाती है।

अब आप इस साड़ी का जलवा इसी से समझ लीजिए कि ताऊ ट्रम्प के साथ जब ताई मेलेनिया अहमदाबाद आई थी तब उनको यह साड़ी भेंट की गई थी और सुनने में आया है कि मोदीजी भी पटोले का साफा एक बार पहन चुके हैं।

पंजाब में  "गुड्डी पटोला" कहा जाता था गुड़िया को जो कपड़ों की चिन्दियों  से बनाकर बच्चियां उसे सिल्क के कपड़े से सजाकर खेला करती थी। अपनी गुड़िया की शादी में उसे पटोला सिल्क का जोड़ा पहनाया करती थी।

आजकल पटोला शब्द खूबसूरत लड़की के लिए प्रयुक्त होता है जो बहुत ही  सजी-संवरी हो। जो बहुत ही आकर्षक परिधान में विशेष सुंदर दिखती है यानी पूरे टोल में एकेली ऐसी खूबसूरत हो।  आपने इसी संदर्भ में यूट्यूब पर कई पंजाबी गाने भी सुने होंगे।

 अब इसके नकारात्मक पहलू को जान लेते हैं। आजकल पटोला शब्द का उपयोग  हरियाणा पंजाब में  किसी भी खूबसूरत लड़की को टारगेट करने के लिए होता है या समझ लें कि लड़की की सुंदरता की तरफ अभद्र इशारा करने के लिए पटोला शब्द का प्रयोग किया जाता है।

पटोला शब्द आज एक स्लैंग के तौर पर  प्रचलित हो गया है। पटोला शब्द पंजाबी फिल्मों तथा गानों में बहुतायत से उपयोग होता है परंतु मूल रूप से  इसका अभिप्राय  "गुड़िया को सजाने के लिए लड़कियों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले सिल्क के कपडे" से ही है जिसे पटोला कहा जाता है।

शोहदे किस्म के लड़के पटोला शब्द का उपयोग लड़कियों को छेड़ने के लिए करते हैं इसी वजह से पटोला जैसा ख़ूबसूरत शब्द नकारात्मक हो चला है। यह शब्द आजकल एक तरह से छेड़खानी का पर्याय बन गया है।

कोई भी पुरुष अपनी घरवाली  या अंतरंग महिला मित्र के लिए प्रेम पूर्वक  निजी क्षणों में इसे उपयोग करे तो गलत नही है पर सावधान  इस शब्द का  प्रयोग आम बोल चाल में लड़की/महिला  की सुंदरता के कसीदे निकालने में किया जाता है तो  यह छेड़खानी की श्रेणी में आ सकता है। वैसे  निर्भर करता है कि सामने वाला इसे किस तरह से समझ पाता है। इसलिए ताऊ तो आपको यही सलाह देता है कि इस शब्द के प्रयोग के बचना चाहिए। 

वैसे भी यह शब्द आजकल सम्भ्रान्त समाज में हेय माना जाने लगा है और भले परिवारों में यह पटोला गाने भी नहीं चलते हैं।  वैसे युवाओं में आजकल यह शब्द और गाने ज्यादा पसंद किए जाते हैं।  अब मर्जी है आपकी, ताऊ को जो समझाना था वह समझा दिया।



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कोरोना लोक डाऊन और साबुन बनाने का शौक

लोक डाऊन के चलते सभी अपने घरों में बंद हो गये हैं और समय काटना मुश्किल हो गया है. सोशल मिडिया पर भी एक लिमिट के अंदर ही टाईम पास हो सकता है. कुछ लोग अपने पुराने काम निपटा रहे हैं कुछ लोग घर में आपस में ही भिट्टी भिडा रहे हैं जिसका जिक्र आपने सुना ही होगा कि घरेलू हिंसा के मामलों में शिकायते बढी हैं. हमारी समझ से यह खाली दिमाग का काम है.

जिन लोगों ने कुछ शौक पाल रखे हैं उनके लिये यह बढिया समय है. हमारे पास अब भी ज्यादा समय नहीं बचता क्योंकि मैं कैपीटल मार्केट से संबंध रखता हूं तो सोमवार से शुक्रवार शेयर बाजार चालू रहता है तो शाम के चार पांच तो आफ़िस में ही बज जाते है. मेरे लिये अच्छी बात यह है कि मेरा आफ़िस मेरे घर में ही ग्राऊंड फ़्लोर पर है और रेसीडेंस ऊपर है, सो कोई खिट खिट नहीं. अब शाम के 5 या 6 घंटे रोजना बचते हैं और हमेशा की तरह शनिवार रविवार तो है ही.

यूं तो हमारे बहुत सारे शौक हैं और उन्हीं में से एक है डिजाईनर साबुन बनाना. अब आप कहेंगे कि ये क्या बला है? घबराईये नहीं ये भी एक आर्ट है जिसकी कोई लिमिट नहीं है. जैसे एक पेंटर या चित्रकार अपनी कल्पना से कितनी ही पेंटिंग विभिन्न तरह की बना लेता है वैसे ही आप इस प्रोसेस से अनगिनत तरह के साबुन बना सकते हैं. इसमे मजे की बात यह है कि आप अपनी जरूरत के हिसाब से बना कर यूज कर सकते हैं, गिफ़्ट कर सकते हैं और बेच भी सकते हैं.

आजकल हैंड मेड साबुनों की डिमांड काफ़ी बढी है उसका कारण यह है कि ये कम नुक्सान देह हैं और ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से आर्डर करता है. और उसी हिसाब से जो भी ग्राहक की डिमांड है, उस मुताबिक चीजे यूज करते हुये तैयार कर सकते हैं. इसमें आपने सही चीजे यूज की और परफ़ेक्शन बनाये रखा तो ग्राहक आपके पास बार बार लौट कर आयेगा ही.

अब ये समझ लिजीये कि साबुन किस प्रकार बनाये जाते हैं? आप जो बाजार से रेडीमेड साबुन खरीद कर लाते हैं अपने लिये,  वह ब्रांड एक निश्चित वस्तुओं से तैयार होता है, आप उसमे रदोबदल नहीं कर सकते. मान लिजीये आप एक ब्रांड का प्रयोग करते हैं तो हो सकता है वह ब्रांड गर्मी में आपको अच्छा काम देता है पर सर्दी आते ही उसी ब्रांड से आपकी त्वचा शुष्क होने लगती है. अब फ़िर कोई नया साबुन ढूंढो या मोईश्चराईजर ढूंढो...इसी वजह से साबुन के इतने सारे ब्रांड आप बदल रहते हैं.

यह बाजार में बिकने वाले साबुन CP यानि कोल्ड प्रोसेस से बने होते हैं यानि कास्टिक सोडा और तेलों के मिश्रण से. इनको तैयार होने के बाद कम से कम 30/40 दिन saponification के लिये खुला रखना होता है, और जितने ज्यादा दिन इनका saponification होगा उतना ही कम नुक्सान देह होंगे. सिंपल भाषा में समझाऊं तो  saponification से तात्पर्य यह है कि साबुन तैयार होने के बाद भी काष्टिक सोडा अपनी क्रिया करता रहता है जिसे पूरा होने में एक डेढ महिना लग जाता है.

अब जो हैंडमेड साबुन होते हैं ये hot process कहलाते हैं. इनमे आपको सोप बेस लेना होता है और उसको मेल्ट करके मन चाहे आकार में वापस शेप देना होता है. soap base कई तरह के आते हैं और आसानी से आपके लोकल मार्केट या आन लाईन साईट्स पर मिल जाते हैं. इनमे saponification की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी होती है इसलिये ये त्वचा के लिये हानिकारक नहीं होते.

आईये अब मैंने कल जो फ़ेसबुक पर साबुन की तस्वीरें डाली थी उनको कैसे तैयार किया? इसकी पूरी जानकारी देता हूं. आपमें से कईयों ने इसके बारे में जिज्ञासा जाहिर की थी इसी वजह से यह पोस्ट लिख रहा हूं. और मेरे पास विडियों एडीटर का जुगाड हो गया तो जल्दी ही विडियो भी डाल दूंगा. फ़ेसबुक पर विस्तृत विवरण से नहीं समझाया जा सकता इसलिये ब्लागर पर यह पोस्ट लिख रहा हूं.




यह एक सोप बार तकरीबन 1500 ग्राम का तैयार किया. आईये देखते हैं इसको कैसे बनाया? 

1. सबसे पहले एक मोल्ड लिया. अब सबसे शुरूआती पर्त नीले रंग वाली (goat milk soap base +shea butter soap base+blue soap colour 2 or 3 drops) मेल्ट करके डाल दी. डालते ही इसमे हल्के झाग आते हैं जो फ़िनिश साबुन पर भी  अच्छे नहीं लगते और इस तरह के कई बार में बनाने वाली पर्ते आपस में जुड जायें इसके लिये rubbing alcohol का स्प्रे तुरंत कर दिया. 

2. अब जो सफ़ेद मोटी पर्त दिखाई दे रही है उसकी तैयारी करते हैं. इसमे आपको एक लाल रंग का हार्ट दिखाई दे रहा होगा. यह हार्ट शेप वाले मोल्ड में "हनी ग्लिसरीन सोप बेस" में रेड सोप कलर की कुछ बूंदे डालकर पहले ही तैयार कर रखा था. नीली पर्त पर इस हार्ट शेप वाले बार को रख दिया.
इसके बाद जो मोटी सफ़ेद पर्त दिख रही है उसके लिये (goat milk soap base+cocoa soap base+black berry essential oil सुगंध के लिये + vitamin E oil capsul के 7 कैपसूल) मेल्ट कर लिया.
यहां ध्यान रहे कि इसको नीली पर्त पर डालने के पहले नीली पर्त पर rubbing alcohol का अच्छे से स्प्रे करना है. यही rubbing alcohol इन पर्तों को जोडने का भी काम करेगा वर्ना कटिंग के समय सारी पर्ते अलग अलग हाथ में आ जायेंगी. सफ़ेद की पर्त मोल्ड में डालकर फ़िर rubbing alcohol का स्प्रे करके झाग खत्म कर दिये.

3. अब तीसरी पर्त के लिये यहां (goat milk soap base+purpal soap color+olive oil+black berry essential oil) को मेल्ट करके ऊपर बताये गये अनुसार rubbing alcohol का यूज करते हुये मोल्ड में डाल दिया.

4. अब इसमें आपको आखिरी हरी पर्त दिख रही होगी. इसमे ग्लिसरीन सोप बेस में हरा सोप कलर मिलाकर मेल्ट करके डाल दिया. और इस मोल्ड को रात भर छोड दिया. वैसे यह चार पांच घंटे में ही तैयार हो जाता है.

इसके बाद इसको चाकू से बराबर निशान लगाते हुये काट लिया. तो जो तैयार हुआ वो नीचे देखिये.



अब देखिये कितना सुंदर और एक रिच साबुन हमारे हाथ में आ गया. आज हमने कुछ और बनाये हैं जिनकी तस्वीर नीचे दे रहे हैं. 


यह नीम की प्राकृतिक पत्तियों से बना है.


यह ओटमिल से बना है.


यह कुछ अलग अलग डिजाईन में बने हैं.


यह पिस्ता सोप है.


यह बच्चों के लिये फ़न बाल सोप

coffe soap for exfoliation purpose

super rich girl soap with sweet almond oil


तो, आज की कार्यशाला खत्म, कुछ पूछना हो तो कमेंट में पूछ सकते हैं. आपको बताकर ताऊ को प्रसन्नता  होगी. यदि जुगाड जमा तो विडियो भी बनायेंगे. शेष अगली पोस्ट में.

  
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कोरोना काल और 1965 भारत पाक युद्ध का समय

मेरी इस बात को वो लोग ज्यादा अच्छी तरह समझ पाएंगे जो हमारे जैसे सख्त लोक डाऊन एरियाज में रह रहे हैं।

आज आटा समाप्त हो गया, 3 दिन पहले ही आर्डर लिखवाया था पर अभी तक नहीं आया, शायद शाम तक आ जायेगा। हमारे यहां आटा, दाल, चावल की सप्लाई प्रशासन करवा रहा है बस थोड़ी देर सवेर होती है जो स्थितियों को देखते हुए खराब नहीं कही जा सकती।

आज के हालात में अनायास ही 1965 कि याद आगई जब एक तरफ भारत पाकिस्तान युद्ध का बिगुल बजा हुआ था और दूसरी तरफ महा अकाल पड़ा था।

अमेरिका से PL480 के तहत गेंहू आता था जिसे गेंहूँ कहना भी गेंहूँ का अपमान ही माना जाना चाहिए। रंग ऐसा लाल की रोटी का रंग भी गहरा लाल ही होता था। आटे को लगाकर उसकी लोई को खींचो तो च्युंगम भी शरमा जाए। रोटी तोड़कर मुंह में डालकर चबाओ तो मुंह में ही घूमती रहे। और यह गेंहूँ भी गांव से 10 किलोमीटर दूर से सर पर रख कर लाना पड़ता था।

अभी भी याद है कि हमारे दिवंगत प्रधान मन्त्री स्व. लाल बहादुर शास्त्रीजी ने अनाज बचाने के लिए सभी को एक उपवास रखने की अपील की थी। ज्यादातर लोग सोमवार का उपवास रखते थे पर हम ठहरे ताऊ सो हमने मंगलवार को बजरंग बली का उपवास रखना शुरू कर दिया। हालांकि दस ग्यारह साल के बच्चे थे पर सभी में जज्बा था।

आज भी कोरोना काल में खासकर रेड जोन में रहने वालों से निवेदन है, जहां अभी नार्मल सप्लाई नहीं है, उन सभी से निवेदन है कि अपनी आवश्यकताएं कम करें, यहां आपके पैसे की कोई पूछ नही है वह जेब में ही रखा रह जायेगा। घर में जो भी उपलब्ध है उसी से काम चलाएं और घर में ही बने रहें। यह अंधकार भी छंट जाएगा।

हमारे यहां दूध की कोई दिक्कत नहीं है सो आज ब्रेकफास्ट में दही की लस्सी पी ली। और डिनर में आज खीर बनाकर खाई जाएगी। व्रत भी होगया और खीर भी शाम को मिल ही जाएगी।

दोस्तों, दुख और सुख दोनों अस्थाई हैं, यह तकलीफ का समय है ये भी बीत ही जायेगा। वैसे जिनके घर में छोटे बच्चे हैं उनकी तकलीफ समझी जा सकती है। पर याद रखिये यह तकलीफ 1965 से ज्यादा बड़ी नहीं है। जिन्होंने भी PL480 का गेंहूँ खाया है उनको तो यह पीड़ा कुछ भी नहीं लग रही होगी, थोड़ी बहुत तकलीफ बर्गर पिज़्ज़ा वाली पीढ़ी को अवश्य महसूस हो रही होगी।

घर में रहें, शांत रहे, घर में आपस में सर ना भिड़ाये। फेसबुक व ब्लाग पर भी हंसी मजाक को प्रमुखता दें, स्वस्थ चुहलबाजी आधी तकलीफ कम कर देती है।

प्रेम से रहेंगे तो आनन्द पूर्वक समय निकल जायेगा और सर टकराएंगे तो समय निकलना मुश्किल होगा। मर्जी आपकी, ताऊ का काम आपसे निवेदन करने का था सो कर दिया।

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बाबाश्री ताऊ महाराज द्वारा "क रोना" का शर्तिया ग्यारंटेड ईलाज

भक्तजनो, ह्में मालूम है कि कोरोना काल में आपके कष्ट बहुत बढे हुये हैं. और बाबाश्री तो सदैव से आपके कष्टों का शमन करते आये हैं. इन दिनों काफ़ी भक्तों के समाचार आ रहे हैं कि वो कष्ट में हैं. आपमें से कई "क रोना" से पीडित हैं. कुछ भक्त पत्नियों से पीडित हैं मार खा खा कर मोटू पतलू वाले पतलू जैसी हालात में पहुंच गये हैं.


                                                    मोबाईल पर "क रोना" झाडा देते बाबाश्री

कुछ पति भी पत्नियों पर अत्याचार कर रहे हैं जिसकी वजह से पुलिस भी परेशान है. अब पुलिस लोक डाऊन को मैनेज करे या इन खूसट पतियों की खबर ले? चारों तरफ़ हालत बहुत ही नाजुक और दयनीय हैं.

आपको इन कष्टों से छुटकारा दिलाने के लिये बाबाश्री ताऊ महाराज ने अचूक उपाय खोज निकाले हैं. और कोरोना के लोक डाऊन को देखते हुये आपको बाबाश्री के पास आने की आवश्यकता भी नहीं है बल्कि मोबाईल पर ही आपका ग्यारंटेड इलाज उपलब्ध करवा दिया जायेगा.


इस ईलाज की न्यौछावर फ़ीस बहुत ही मामूली रखी है. आप यह न्यौछावर फ़ीस आन-लाईन "बाबाश्री ताऊ महाराज 420 अपर्माथिक ट्रस्ट"  के अकाऊंट में ट्रांसफ़र करवाये और मिस समीरा टेडी  (Finance Controller) से फ़ोन पर अपाईंटमैंट लेकर फ़ोन करें. आपको ईलाज उपलब्ध करवा दिया जायेगा.

            मर्ज का नाम                                               न्यौछावर फ़ीस
1.   "करो ना" झाडा                                                     रूपये 21,001/  मात्र           

2.  "करो ना" ऊपरी फ़ेंट बचाव                                      रूपये 17,501/   मात्र       

3. "करो ना" आपसी गृह क्लेश                                     रूपये 25,001/= मात्र

4. "करो ना" पतिकूट यंत्र                                              रूपये 27,501/  मात्र                  

5. "क रोना" पत्नी पीडा बचाव यंत्र                              रूपये 31,001/  मात्र

6. "क रोना" घर में मन लगाऊ झाडा                              रूपये 16,501/  मात्र  

7. " क रोना" समस्त असाध्य बाधा पीडा यंत्र                 रूपये 38,501/  मात्र

हमारे सभी ईलाज जांचे हुये और शर्तिया ग्यारंटेड हैं. ईलाज करवाने वाले की जानकारी गुप्त रखी जाती है. ईलाज किसी कारणवश फ़ेल होने की स्थिति में आपका जमा रूपया वापस नहीं करने की हमारी पक्की ग्यारंटी रहेगी.


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अरै सत्यानाशी कोरोना तू ताऊ के घर क्यूंकर आया?

जैसे ही कोरोना के चलते मोदीजी ने लोक डाऊन की घोषणा की, ताऊ की बांछे खिल गई। अब 3 सप्ताह का पूरा आराम, ना जल्दी उठना, ना आफिस जाना और ना ही घर का कोई सामान लेने बाजार जाना... वाह, यह आराम तो पृथ्वी पर शायद वर्तमान काल के मनुष्यों के अलावा किसी ने ही भोगा होगा अब तक। 

ताऊ का दिल बाग बाग हो रहा था तभी ताई की आवाज आई - सुणै सै के?
ताई बोली - ईब कल तैं झाड़ू पौंछे वाली, रोटी बनाने वाली कोई नही आएगी। 
ताऊ बोला - चिंता क्यों करती हो, हम मिल जुलकर घर का सब काम कर लेंगे।



ताई बोली - मुझे मालूम है तुम कितने भले हो। हम अपने अपने काम का बंटवारा कर लेते है। 
ताऊ बोला यह भी ठीक है। बताओ मुझे क्या क्या करना है?

ताई बोली - सुबह उठते ही चाय बनाने का काम तुम्हारा और पीने का काम मेरा। फिर  मंजन ब्रश करके योगा करने का काम मेरा तब तक झाड़ू बुहारी और पौंछा करने का काम तुम्हारा।

ताई काम का यह सब बंटवारा लठ्ठ पास में रखकर ही कर रही थी सो ताऊ चुपचाप हाँ में गर्दन हिलाते हुए बोला - ठीक है और कुछ?

ताई बोली - अभी तो सारे दिन के काम बाकी पड़े हैं...इसके बाद बाथरूम में नहाने का काम मेरा, फिर बाथरूम साफ करने और लत्ते (कपड़े) धोने का काम तुम्हारा।

नहा धोकर भगवान की दिया बत्ती करने का काम मेरा  तब तक रोटी सब्जी बनाने का काम तुम्हारा. 
इसके बाद खाना टेबल पर लगाने का काम तुम्हारा और खाने का काम मेरा.
खाना खाने के बाद आराम करने का काम मेरा तब तक झूंठे बर्तन भांडे साफ़ करने का काम तुम्हारा.

अब तक ताऊ समझ गया था कि मन गया उसका तो लोक डाऊन......

ताई गंगाराम (लठ्ठ) पर हाथ फ़िराते हुये बोली - दोपहर में टीवी देखने और आराम का काम मेरा और तब तक घर के गार्डन की सफ़ाई का काम तुम्हारा. फ़िर शाम को चाय नाश्ता बनाने का काम तुम्हारा और नाश्ता करने और चाय पीने का काम मेरा. इसी तरह रात को खाना बनाने का काम तुम्हारा और खाने का काम मेरा.

ताऊ का सारा उत्साह काफ़ूर हो चुका था. मन ही मन बोला - अरे मोदी जी....ये लोक डाऊन से तो अच्छा था कि ताऊ की घेट्टी (गला) ही दबा देता. इतने काम करके तो वैसे ही कोरोना हो जायेगा.

ताऊ सर पकड कर ताई के पास बैठने लगा तो ताई ने लठ्ठ फ़टकारते हुये कहा - "परै नै मर ले"   (दूर होकर बैठ)....पता नहीं है क्या? मोदीजी ने कहा है कि कम से कम दो मीटर दूर होकर बैठना है...

ताऊ बोला - हो गया सब काम का बंटवारा या कुछ बाकी रह गया? 
ताई लठ्ठ उठाते हुये बोली - ज्यादा बकबास मत कर, यह तो शुकर मना कि तुम्हारे हिस्से मैंने सब सीधे सरल काम ही रखे हैं. अब एक रात का काम बाकी बचा है,  रात को लेटकर टीवी देखने का काम मेरा और मेरे सोने तक पांव दबाने का काम तुम्हारा.

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ताऊ टीवी द्वारा रंगारंग होली उत्सव 2020 की अग्रिम सूचना

प्रिय दर्शकों, आपको यह सूचित करते हुये हर्ष हो रहा है कि होली पर अबकि बार काफ़ी अरसे बाद ताऊ टीवी के लोकप्रिय कार्यक्रम होली उत्सव-2020 का आयोजन किया जा रहा है.

इस कार्यक्रम के उदघाटन समारोह में शिरकत करने के लिये प्रख्यात ब्लाग वीणा वादक  पं. श्री अरविंद जी मिश्र महाराज ने सहर्ष अनुमति दे दी है.


पण्डित मिश्र जी महाराज राग झिंझोडी और राग कपार फोड़ी के विश्व के सिद्ध हस्त एकमेव कलाकार हैं। इसके अलावा पण्डितजी ने राग लठ्ठेश्वरी स्वयं ईजाद करके संगीत जगत में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है।  पण्डितजी ने हमें वादा किया है कि वो इस उत्सव में राग लठ्ठेश्वरी तीन ताल में सुनाएंगे। इस बंदिश के बोल होंगे "ताऊ काहे इतरावे...ताई आवत जात" 

और भी स्वनाम धन्य कवि, वादक, गायक और नृत्यांगनाएं इस समारोह में शिरकत करेंगे. उनका सहमति पत्र प्राप्त होते ही हम आपको सूचित करते रहेंगे.

आप सभी का इस होली उत्सव-2020 में हार्दिक स्वागत है.

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कोरोना वायरस और दुनिया की अर्थ व्यवस्था

कोरोना वायरस का भय अब सारी दुनियां में व्याप्त होता जा रहा है. अभी तक तो चीन से अपने अपने लोगों को रेस्क्यू करने तक ही बात सीमित थी पर पिछले दो तीन दिन से दुनियां के शेयर बाजारों पर इसका असर दिखने लगा था. आज पिछले कई सालों की हद तोडते हुये शेयर बाजारों ने निवेशकों को कंगाल बनाने में कोई कसर नहीं छोडी.

अमेरिका के शेयर बाजारों की देखा देखी एशियन मार्केट भी नीचे की तरफ़ मुंह करके खुले थे. बाद में यूरोपियन मार्केट्स ने इस मंदी को ओर हवा दे दी.

हमारे शेयर बाजारों में भी इसका पूरा पूरा असर दिखा. NSE का NIFTY 3,71% की गिरावट के साथ यानि 431.55 point गिरकर 11201.80 पर बंद हुआ वहीं BSE  का SENSEX 1448.37 point यानि 3.645% गिरकर 38297.29 पर बंद हुआ.

आज कोई भी सेक्टर ऐसा नहीं था जहां तबाही का मंजर नहीं रहा हो.

कोरोना वायरस ऐसी तबाही ला सकता है यह ज्यादातर लोगों को नहीं लग रहा था. ज्यादातर लोग समझ रहे थे कि यह चीन का मामला है पर इसके व्यापक असर अभी देखने को मिलेंगे.

सरकार को इंपोर्ट ड्यूटी में दस से बारह प्रतिशत तक गिरावट आने का अंदेशा जताया जा रहा है वहीं GST क्लेक्शन में भी कमी का डर अब सताने लगा है. और यह होना भी है क्योंकि ज्यादातर कच्चे पक्के माल का इंपोर्ट चीन से होता है तो जब माल आयेगा ही नही तो इंपोर्ट ड्यूटी कहां से मिलेगी और माल बिकेगा नहीं तो GST कहां से मिलेगा?

दवा उद्द्योग का अधिकतर कच्चा माल चीन से आयात होता है तो ऐसे में दवाओं की उपलब्धता में कमी भी हो सकती है और दवाओं के दाम बढना तो तय ही है.

एसी फ़्रीज टीवी मोबाईल जैसे उद्द्योग के लिये भी कच्चे पक्के माल का अधिकतर आयात चीन से ही होता है तो इनकि कीमतों में इजाफ़ा होना तय दिखाई दे रहा है. कुल मिलाकर कोरोना वायरस उम्मीद से ज्यादा क्षति पहुंचाता लग रहा है.

मेडिकल क्षेत्र के अनुसार दुनिया की अधिकतर आबादी इसकी चपेट में आ सकती है और अभी इसके प्रतिरोधक टीके की कोई संभावना ही नहीं दिखाई देती और उपलब्ध दवाओं की प्रचुरता नही है. ऐसे में ईश्वर सबकी मदद करे और जल्द से जल्द इस कोरोना वायरस को समाप्त करने का कोई रास्ता मिले.

आ अब लौट चलें ब्लाग की ओर

प्यारे भतीजो और भतिजीयों, ताऊ की होली टाईप रामराम. आज सबसे पहले तो मैं सुश्री रेखा श्रीवास्तव जी द्वारा संपादित "ब्लागरों के अधूरे सपनों की कसक" पुस्तक के विमोचन पर उनको और इस कार्य में सभी सहयोगी जनों को हार्दिक धन्यवाद देना चाहता हूं. आशा करता हूं यह पुस्तक हिंदी ब्लागिंग के लिये मील का पत्थर साबित होगी. सुश्री रेखा जी ने बहुत ही स्नेह से मुझे इस कार्यक्रम में शिरकत करने के लिये निमंत्रण दिया और मैंने आने के लिये टिकट्स भी बुक करवा लिये थे. पर ताऊ के साथ हमेशा ही कुछ ना कुछ गडबड हो ही जाती है जो इस बार भी होगई.  आपमें से अधिकतर साथियों को मालूम ही होगा कि ताऊ  शेयर ब्रोकिंग के व्यापार के जरिये ही ताई के लठ्ठ की मार सहन करता है.


और आज शेयर मार्केट में कोहराम मच गया है, BSE SENSEX 1510 प्वाईंट्स से ज्यादा लुढक चुका है और यह अभी कितना और लुढकेगा यह मालूम नहीं है. मेरी हार्दिक इच्छा थी कि मैं वहां पहुंचकर आप सभी के दर्शन करूं, किंतु परिस्थितियों के कारण यह संभव नहीं है.  पर ईश्वर ने चाहा तो भविष्य में ऐसा  सुयोग अवश्य मिलेगा. मेरी तरफ़ से इस कार्यक्रम और हिंदी ब्लागिंग के सुनहरे भविष्य की शुभकामनाएं.

इसी तारतम्य में अपने मन की बात कहता चलूं कि मुझे हिंदी भविष्य की एक सशक्त भाषा दिखाई पड रही है. और अतिशयोक्ति नहीं होगी यदि अंग्रेजी को भी पछाड दे. युनिकोड आने के बाद हिंदी लेखन की सारी दिक्कतें दूर हो चुकी हैं और आज लाखों करोडों लोग कंप्यूटर व मोबाईल पर धडल्ले से हिंदी का उपयोग कर रहे हैं.

एक आम जन जो कि ब्लागर नही है वो भी आज नेट सर्फ़िंग कर रहा है. कारण की पहले नेट के खर्च बहुत ज्यादा थे आज रिलाय़ंस जियो ने इसको बहुत ही सस्ता करवा दिया है. इसी का परिणाम है कि आज हिंदी पढने वालों की संख्या अचानक बढ गयी है जो एक शुभ संकेत है.

यूट्यूब पर आज लाखों करोडों हिंदी के विडियो अपलोड भी हो रहे हैं और असंख्य मात्रा में उनको दर्शक भी मिल रहे हैं. शायद आपको यकिन नहीं होगा कि आपके द्वारा स्वयं के उपेक्षित ब्लाग भी लोगों द्वारा देखे पढे जा रहे हैं. आपमें से अधिकतर तो अपने ब्लाग्स का पासवर्ड भी भूल चुके होंगे. मेरा निवेदन है कि एक बार जाकर अपनी STATS को चेक करें कि आपके बिना लिखे भी आपके ब्लाग पर पाठकों की संख्या पहले से अधिक हो चुकी है.

जरा ताऊ डाट इन  taau.taau.in  के आंकडों पर गौर करियेगा. ताऊ डाट इन पर पहले जहां नित्य एक पोस्ट लिखी जाती थी. किंतु छोटे भाई के असामयिक निधन से उपजे नैराष्य ने अन्य क्षेत्रों  के साथ साथ ब्लागिंग से भी वितृष्णा पैदा कर दी, फ़लस्वरूप ब्लाग लेखन करीब करीब बंद सा ही हो गया.

2014  में 9 पोस्ट,  2015 में  1 पोस्ट,  2016 में 0 यानि कोई पोस्ट नहीं,  2017 में 36 पोस्ट,  2018 में 1 पोस्ट,  2019 में  0 यानि कुछ नहीं और 2020 में अब तक सिर्फ़ 5 और आज की मिलाकर कुल 6 पोस्ट लिखी गई हैं.

अब आईये STATS  पर नजर डालते हैं तो मुझे जहां तक याद है 2014 में कुल पाठक संख्यां 1 लाख से भी कम थी और आज की पाठक संख्या  करीब 7 लाख पहुंच चुकी है. और पिछले 6 माह से तो औसतन  प्रति माह 17 या 18 हजार पाठक प्रतिमाह तक नियमित है.

तो कहां से आ रहे हैं ये पाठक? इसका सीधा सा जवाब है कि हिंदी पढने वालों की संख्या में आश्चर्यजनक इजाफ़ा हो रहा है. नये पाठक तैयार हो गये हैं जो हिंदी में पढना चाहते हैं. अभी तो यह संख्या कुछ भी नहीं है, आने वाले समय में इसमें अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज होगी.

मेरा आप सभी साथियों से निवेदन है कि नियमित लेखन करें, आप जिस विधा में भी लिखते हों. अब टिप्पणियों की उम्मीद में लेखन मत करिये. अब वो जमाना जा चुका है. कोई टिप्पणी आती है तो ठीक वर्ना एडसेंस भी हिंदी के लिये नगद धन रूपी टिप्पणियां देने को उधार बैठा है.

आप हिंदी की सेवा करना चाहें तो स्वागत और सेवा नहीं भी करना चाहें तो भगवान के लिये अपनी जेब की सेवा के लिये ही नियमित लेखन करें. काफ़ी लोग नियमित लिख भी रहे हैं आप भी लिखें.

फ़ेसबुक का मैं कोई महारथी नहीं हूं, और उसका आलोचक नहीं तो प्रशंसक भी नहीं हूं. फ़ेसबुक भी अपनी बात पहुंचाने का सशक्त माध्यम है इससे इन्कार भी नहीं किया जा सकता. पर जिस स्तर की अभद्रता और औछापन वहां व्यापत है वह मन को खिन्न करता है. फ़ेसबुक पर आपके अकाऊंट पर ही आपका कोई कंट्रोल नहीं है. वहां कोई भी ऐरा गैरा नत्थू खैरा आपकी वाल पर कुछ भी गंदगी करने की छूट रखता है, आप कुछ नहीं कर सकते. सीधी सी बात है वहां कई लोग पंचायती झौठे सरीखे विचरण करते रहते हैं जिन पर लठ्ठों का भी असर नहीं होता.

आशा करता हूं आपको मेरी बात समझ में आई होगी और नहीं आई हो तो खेलते रहिये फ़ेसबुक...फ़ेसबुक.
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

होली पर सियाचिन में ब्लागर सम्मेलन, योग एवम प्राकृतिक चिकित्सा शिविर

ब्लागिंग के माननिय नये, जूने-पुराने, घुटे घुटाये, डायनासोर एवम नान ब्लागर्स यानि फ़ेसबुकियों से ताऊ की होली टाईप रामराम. जैसा कि आप जानते हैं हमने 10 साल पहले सियाचिन में एक बहुत ही सफ़ल आयोजन किया था और सभी ब्लागर्स उससे लाभान्वित भी हुये थे. आप लोगों के बार बार अनुरोध पर इस साल यह आयोजन दुबारा आयोजित किया गया है.

                                                                   मिस समीरा टेढी                   

इस आयोजन के बारे में संपूर्ण विवरण जल्द ही आपकी सेवा में एक ब्लाग पोस्ट द्वारा दिया जायेगा. इस आयोजन में सीटे बहुत ही कम हैं अत: हम पर कोई पक्षपात का आरोप नही लगे कि ताऊ ने अपने अपनों को रेवडी बांट दी....इस आरोप से बचने के लिये इस शिविर के लिये पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है. आप सबसे निवेदन है कि मिस समीरा टेढी से अपने अपने पंजीकरण फ़ार्म प्राप्त करलें. मिस समीरा टेढी के बारे में आपको बताने की जरूरत नही है. शिविर में मिस समीरा टेढी आपको सटा खेलने की विधा के बारे में सारी गुप्त टेक्निक सिखायेंगी.

इस फ़ार्म की फ़ीस आपकी सुविधा और जेब का ध्यान रखते हुये रूपये 251/= मात्र रखी है जो कि नान रिटर्नेबल होगी. इन प्राप्त फ़ार्म्स में से लाटरी ड्रा निकाला जायेगा. लाटरी में जिन सदस्यों को नाम निकलेगा, उन्हीं को शिविर में आने दिया जायेगा.

फ़ार्म्स की डिमांड बहुत ज्यादा है. अभी तक एक लाट तो खत्म भी हो चुका है. आज ही दूसरा लाट प्रिंट होकर आया है अत: शीघ्रता करें. एक सदस्य एक से अधिक चाहे जितने फ़ार्म्स भी भर सकता है. उस पर कोई रोक टोक नहीं होगी. आप जितने अधिक फ़ार्म भरेंगे, आपका नाम निकलने की संभावना उतनी ही अधिक होगी.

                                                     डा. रामप्यारी कैट-स्केन स्पेशलिस्ट

जैसा कि आप जानते ही हैं कि सियाचिन में आक्सीजन की कमी रहती है अत: स्वास्थ्य चेक अप जरूरी है. स्वास्थ्य चेक अप सर्टीफ़िकेट दूसरी जगह का मान्य नहीं होगा. सिर्फ़ डा. रामप्यारी द्वारा दिया गया हैल्थ सर्टीफ़िकेट ही मान्य होगा. इसमें भी अनिवार्य तौर पर कैट-स्केन करवाना अनिवार्य होगा. आपके लिये हमने डा. रामप्यारी से स्पेशल कन्शेसनल पैकेज सिर्फ़ रूपया 7500/= मात्र तय किया है. बिना कैट-स्केन के स्वास्थ्य सर्टीफ़िकेट मान्य नहीं होगा. भीड से बचने के लिये आप एडवांस में कैट-स्केन करवा कर रख लेवें.

शिविर में ब्लागिंग के गुरू घंटालों के टिप्स, बाबाश्री ताऊ महाराज की दुर्लभ दवाएं और दुर्लभ साहित्य उचित मूल्य पर उपलब्ध करवाया जायेगा. इस शिविर में भाग लेना एक अलौकिक अनुभव रहेगा.

बाकी की जानकारी के लिये अगली ब्लाग पोस्ट का इंतजार करें.

#हिन्दी_ब्लॉगिंग