ताऊ महाराज ने दिये मिस समीरा टेढी के सवालों के जवाब

मिस समीरा टेढी ने आखिर ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र को हिमालयीन कंदराओं में ढूंढ ही निकाला था और सारी बाते विस्तार से जान पाती उसके पहले ही ताऊ महाराज अंतर्धान हो गये थे और समीरा जी की सारी जिज्ञासाएं धरी रह गयी. ताऊ महाराज के आश्रम में उन्हें कोई भी नजर नही आया. हताश होकर वो लौटने ही वाली थी कि उन्हें रामप्यारी धूप सेंकते हुये दिखी, रामप्यारी ने बताया कि महाराज ताऊ आजकल साधना में तल्लीन रहते हैं. और रामप्यारी को महाराज ताऊ के बारे में कोई विशेष जानकारी नही है कि कहां हैं? और आजकल क्या करते हैं?

ताऊ महाराज का साक्षात्कार लेने पहुंची मिस समीरा टेढी


आखिर मिस समीरा ने रामप्यारे से कुछ जानने की सोची तब मालूम पडा कि रामप्यारे तो खुद छुपता फ़िर रहा है. इस खबर पर चौंकते हुये मिस टेढी ने कारण जानना चाहा तो रामप्यारी ने बताया कि ताऊ महाराज द्वारा रामप्यारे को ब्लाग का जिम्मा दिया गया था जिसमें रामप्यारे ने पहेली की जगह स्पेक्ट्रम स्पेक्ट्रम का खेल खेल डाला और आजकल ताऊ महाराज के प्रकट होने के डर से भागता फ़िर रहा है, और सुना है आजकल किसी अखबार में कालम लिख कर दिन काट रहा है.

इतनी ही देर में समीरा जी ने देखा कि महाराज ताऊ हाथ में समूचा चांद उठाये पर्वत शिखर पर प्रकट हो गये. महाराज ताऊ का यह सिद्ध रूप देखकर मिस समीरा टेढी ताऊ महाराज के सामने नतमस्तक होगई और साष्टांग प्रणाम किया, बदले में महाराज ने वरदान मांगने का आदेश दिया. मिस समीरा बोली : ताऊ महाराज, ईश्वर का दिया सब कुछ है मेरे पास, अगर आप ज्यादा ही प्रसन्न हैं तो मुझे आपसे कुछ जरूरी प्रश्न जानने हैं उनका उत्तर दे दिजिये.

ताऊ महाराज बोले - समीरा जी, हम सीधे प्रश्नों का जवाब तो कभी देते नही हैं पर हम आपसे और आपकी हाय हैल्लो से अति प्रसन्न हैं तो पूछिये कौन से प्रश्नों का जवाब जानना चाहती हैं आप?

मिस टेढी - महाराज सबसे पहला सवाल तो यही है कि आप दंडकारण्य का कहकर ब्लागिस्तान से गायब हुये थे और ठीक उसकी उल्टी दिशा में यहां हिमालय में बैठे हैं, यह क्या चक्कर है?

ताऊ महाराज - हम गये तो दंडकारण्य ही थे, पर वहां गर्मी बहुत थी तो श्री ताऊ आकाशगामी यंत्र के बल पर जब चाहे यहां वहां जाते रहते हैं?

मिस टेढी - ओह, अब समझ आया, ताऊ महाराज यह बताईये कि आजकल आपने चोरी डकैती, लूटमार व ठगी वाले धंधे क्यों बंद कर रखे हैं? अगर यह सब बंद है तो आपके खर्चे पानी कैसे चलते हैं?

ताऊ महाराज - जी आपने ठीक फ़रमाया समीरा जी. असल में हमको अब ये छोटी मोटी चोरी चकोरी, ठगी के धंधे करने में शर्म महसूस होने लगी है. आजकल बिना अक्ल लगाये लोग हजारों करोड सिर्फ़ घोटाले कर कर के कमा लेते हैं और हम अपनी पूरी अक्ल इस्तेमाल करके भी कभी दस बीस हजार से ज्यादा नही कमा पाये, इसलिये हमने तय कर लिया है कि दस बीस लाख करोड का दांव ही फ़िट बैठायेंगे.

मिस टेढी - हां महाराज, ये हुई ना आपकी शान के लायक बात, पर एक बात बताईये कि आपने पिछले दिनों क्या क्या किया?

ताऊ महाराज : समीरा जी, आप तो जानती ही हैं कि हमें ज्योतिष से बडा लगाव है, इसके लिये पिछली साधना में हमने श्री ताऊ चौबीसा यंत्र की रचना पाठकों और जनकल्याण के लिये की थी, अबकी बार हमने "आंग्ल ज्योतिष का इतिहास" ही लिख डाला, और आपको परम प्रसन्नता होगी कि हमको इस इतिहास लेखन के लिये सरकारी सम्मान से नवाजा गया है.

मिस टेढी - बधाई हो ताऊ महाराज आपको, अति प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है महाराजश्री, इस किताब के एक दो सूत्र वाक्य भी बता दे जिससे हमारे पाठक भी उससे कुछ लाभ उठा सकेंगे.

ताऊ महाराज :- अवश्य मिस टेढी अवश्य, आपकी बात हम भला कैसे टाल सकते हैं, ज्योतिष का एक मूल सूत्र हम आपके और जनता के कल्याण के लिये बता रहे हैं, अगर इस सूत्र को रट लिया तो साईंस ब्लागर एशोसियेशन वाले चाहे जितना माथा फ़ोड ले, पर ज्योतिष को गलत साबित नही कर पायेंगे.

मिस टेढी - ये तो सही है ताऊश्री, आप तो सूत्र बताईये, जिससे सबका कल्याण हो सके.

महाराज ताऊ : नोट किजिये मिस टेढी, नोट भी क्या, आप तो गांठ बांधिये, इस सूत्र वाक्य के फ़लादेश कभी गलत नही हो सकते,

नीच: क्रूर ग्रर्हयुक्तो अस्तगो रिपु: क्षेत्रग:
वक्री चंद्रो विबलो वर्जितोयम शुभे सम:

अर्थात

नीच क्रूर ग्रह से युक्त, अस्तगत, शत्रु के घर में स्थित तथा वक्री चंद्र निर्बल होकर दु:ख एवम दारिद्रदायक होता है.


मिस टेढी - महाराज ताऊ श्री, कुछ समझ नही आया...ये चंद्र...अस्तगत...और वक्री....युं कि ये कौन सी ज्योतिष है महाराज श्री....?

ताऊ महाराज : बालिके ये ताऊ ज्योतिष है...और सरकारी सम्मान ऐसी ही सूत्र रचनाओं द्वारा मिलता है...हमको तो सम्मान चाहिये था सो मिल गया...अब नाम मिल गया है तो दाम भी कमा ही लेंगे.

मिस टेढी - पर महाराज ताऊ.....आप ऐसा कैसे कर सकते हैं?

ताऊ महाराज - समीरा जी आप परेशान ना हों...आप भी इस सूत्र को इस्तेमाल करिये, फ़िर देखिये मजा...अब हम प्रस्थान करेंगे.

मिस टेढी - पर महाराज मेरे दूसरे सवाल तो बाकी ही रह गये....उनका जवाब कब मिलेगा?

महाराज ताऊ श्री : समीरा जी, अभी तो हमें "लंदन इंटरनेशनल ब्लागर सम्मेलन" की रिपोर्टिंग करने जाना है, वर्ना हम पर ये आरोप लगेगा कि हम सिर्फ़ भारत में होने वाले ब्लागर सम्मेलनों की ही रिपोर्टिंग (छीछालेदर) करते हैं, हमें इंटरनेशनल ब्लागर सम्मेलन की अंदरूनी बातों से पाठकों को रूबरू करवाना है जो किसी को नही मालूम....आप अगले सप्ताह आईये ना समीरा जी.

लगता है इंटरनेशन ब्लागर सम्मेलन का भी होगया कल्याण.... मन ही मन यह सोचती हुई मिस समीरा टेढी बोली - जैसी आज्ञा महाराज.

आखिर मिस. समीरा टेढी ने ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र को खोज ही लिया

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र, ब्लागिस्तान का सारा कार्यभार रामप्यारे के हवाले करके काफ़ी समय पूर्व ही दंडकारण्य के लिये प्रस्थान कर गये थे. अंधे होते हुये भी महाराज ताऊ धॄतराष्ट्र में शायद भविष्य में झांकने की असीम ताकत रही होगी जो समय रहते यहां से गमन कर गये. शायद उनको मालूम था कि अब सब घोटालों का पर्दा फ़ास होने का समय आ चुका है. हस्तिनापुर के सम्राट होने के नाते सारा ठीकरा तो आखिर उनके माथे ही फ़ूटना था.

महाराज को ढूंढने के अनेक लोगों ने प्रयास किये परंतु महाराज तो रामप्यारे के सींगों की तरह गायब हो गये थे. ऐसे में मिस समीरा टेढी को कहां चैन पडता सो अनेकों जगह ढूंढते ढूंढते मिस समीरा ने ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र को हिमालय की वादियों में जाकर ढूंढ ही लिया. मिस समीरा को देखते ही महाराज धॄतराष्ट्र खिल उठे और काफ़ी गर्मजोशी से उनका स्वागत किया.

आखिर मिस. समीरा टेढी ने ताऊ महाराज को खोज ही लिया


ताऊ महा घोटाला धाम के आसपास बिखरी पडी शुभ्र धवल बर्फ़ पर महाराज के साथ चहलकदमी करते हुये समीरा जी ने महाराज से राजकाज के प्रति उनकी बेरूखी का सबब जानना चाहा तो महाराज धॄतराष्ट्र आखिर बोल ही पडे - अब आप ही बताईये समीरा जी, हम क्या कर सकते हैं? हस्तिनापुर में हम सिर्फ़ नाम के महाराज रह गये थे. सब पक्ष विपक्ष के राजकुमार एक दूसरे की टांग खिंचाई में लगे थे, सरकारी अधिकारी, मंत्री, कर्मचारी किसी भी तरह अपना बैंक बैलेंस बढाने में लगे थे. तो हम वहां रह कर क्या करते?

मिस समीरा टेढी : पर महाराज, आपके इस तरह पलायन करने से तो आपके हस्तिनापुर में और घोर अव्यवस्था फ़ैल गई है, आपकी प्रजा दुखी है?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : हम क्या कर सकते हैं समीरा जी? हम तो बस मंत्रि मंडल की कठपुतली भर रह गये हैं. हमारे राजकुमारों के अपने अपने खजाने भरने की महत्वाकांक्षाओं और भ्रष्टाचार के चलते हमारे लिये सांप छछूंदर जैसी हालात हो गई है, हमे ना चाहते हुये भी अपने राजकुमारों और मंत्रियों के गलत काम काज का बचाव और समर्थन करना ही पडता है.

समीरा जी : हां महाराज आपकी ये बात तो सही है, अब देखिये ना बाबा कामदेव और उनके सोते हुये शिष्यों पर आपके सिपहसालारों ने आंसू गैस और लाठियां पडवा दी, ये तो बहुत गलत बात हुई महाराज?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : अब समीरा जी हमारे मंत्री और राजकुमार इतने बुरे भी नही है, आप जानती है ना कि बाबा कामदेव योगासन सिखाने के नाम पर वहां शासन के खिलाफ़ साजिश रच रहे थे? इसमे क्या बुरा किया? इस मसले में हमारे अधिकारियों ने राज धर्म का पालन किया है, हम उनको साजिश बेनकाब करने के लिये धन्यवाद देते हैं, आखिर शासन थोडी सख्ती के बिना नही चल सकता.

समीरा जी - पर महाराज आपके अधिकारी एवम मंत्री तो कन्ना साहेब के रोकपाल बिल के भी खिलाफ़ हैं. वो कहते हैं कि बिना चुनाव लडे कोई सिविल सोसाईटी थोडे ही बन सकती है? या तो राजवंश में पैदा होके दिखाये या चुनाव लडे, तब ठीक है, यूं ही बैठ गये अनशन पर और बन गये रोकपाल बिल के कर्ता धर्ता?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : बिल्कुल सही कहा, आखिर प्रजा को प्रजा ही रहना चाहिये, हमने यहां से ही सख्त आदेश दे दिये हैं कि बगावत की कोशीशे हर स्तर पर नाकाम कर दी जानी चाहिये.

समीरा जी :- और महाराज आजकल आतंकवादी घटनाएं बढ गई है? आपकी इंटेलीजेंसिया नाकाम हो रही हैं? प्रजा रोज मर रही है.

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : अरे समीरा जी आप कहीं पत्रकारिता के पेशे में तो नही आ गई हैं? आप तो बाल की खाल निकाले जा रही हैं? अरे इतने सालों से जब आतंकवादी घटनाएं नही हुई तो उसका श्रेय आप हमारे शासन को नही दे रही हैं और कहीं दो चार बम फ़ूट गये, ट्रेनें पलटा दी गई तो आप आसमान सर पर उठा ले रही हैं? आपको मालूम है कि पडौस के मुल्कों में रोज आतंकवादी वारदातें होती हैं और हमारे यहां कभी कभी होती हैं. आतंकवादी घटनाओं को कोई भी नही रोक सकता, फ़िर आप उल्टे हमें दोष दे रही हैं? आपको तो हमारे मंत्री और अधिकारियों की पीठ थपथपानी चाहिये, उनका एहसानमंद होना चाहिये.

समीरा जी :- बस महाराज श्री एक बात और बता दिजिये कि डीजल, पेट्रोल, दवाई, स्कूल फ़ीस, खाना पीना सब कुछ महंगा हो गया है, अधिकतम जनसंख्या दो वक्त की रोटी और दूसरे संशाधन नही जुटा पा रही है. क्या आप इस के लिये कोई उपाय करेंगे?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : देखिये समीरा जी, महंगाई का बढना बहुत जरूरी है, इससे अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में हमारा रूतबा बढता है, इसलिये महंगाई को तो हम चाहकर भी कम नही करेंगे, अपना रूतबा बढाने के लिये हम चाहेंगे कि महंगाई अभी कम से कम दुगूनी तक बढ जाये तो हम विश्व बिरादरी के नंबरदार बनने की हैसियत वाले हो जायेंगे.

समीरा जी :- पर महाराज, अगर महंगाई दुगूनी तक बढ गई तो प्रजा भूखों मर जायेगी, कैसे जिंदा रहेगी प्रजा? कुछ तो सोचिये? बोलिये महाराज बोलिए?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : समीरा जी हमारे हाथ में कुछ नही है. महंगाई तो नही रूकने वाली, अलबत्ता जो प्रजा जन इस महंगाई के साथ नही चल सकते उनके लिये हम कुछ उपाय अवश्य सोचेंगे.

समीरा जी ने तनिक खुश होते हुये पूछा - बताईये महाराज बताईये, प्रजा के लिये आपका क्या प्रोग्राम है?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : समीरा जी, हम क्या कर सकते हैं? हमारे हाथ में कुछ नही है, हम तो बेबस तिकडमी सरकार के प्रधान हैं, हमारे हस्तिनापुर की प्यारी प्रजा रोज तिल तिल कर भूख प्यास से मरे, इसके बजाये हम सब्सीडी देकर सरकारी खजाने से मुफ़्त के जहर की बोरियां चौपाल में रखवा देंगे, जो तिल तिल कर मरने से डरता हो वो एक बार खाकर मर जाये.

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र की ये बाते सुनकर मिस समीरा टेढी अवाक सी उनको देखती रह गयी.

ताऊ पहेली - 119

प्यारे बहणों और भाईयों, ताऊ पहेली - 119 में मैं रामप्यारे आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते हैं होली के अवसर पर ताऊ महाराज दंडकारण्य में रामप्यारी के साथ विश्राम करने गये हुये हैं. और ताऊ पहेली को सतत जारी रखने का कार्यभार मुझे सौंप गये हैं. मैने इस शर्त पर यह जिम्मेदारी स्वीकार की है कि इस पहेली को जब तक मैं चाहूं तब तक अपनी मर्जी और शर्तों पर चलाऊंगा.

अब आप तो जानते हैं कि मैं ठहरा एक सीधा साधा गधा, ज्यादा फ़ालतू बात करना मेरी तबियत में शुमार नही है. और काबलियत के नाम पर सिर्फ़ अपने बडे बडे दांत ही दिखा सकता हूं. और इस पहेली के नियम बिल्कुल सीधे हैं और आप स्वयं ही इसके जज होंगे.

नीचे एक चित्र दिया हुआ है. इस चित्र को देखकर आपको बताना है कि यह चित्र कहां का है? इस जगह के बारे में आप कुछ और भी जानकारी रखते हैं तो वो भी यहां टिप्पणी में लिख कर दूसरों की जानकारी भी बढा सकते हैं.



अगर आप इस चित्र को 5 मिनट में पहचान जाते हैं तो आप अपने आपको समझिये "सुपर जीनियस"
अगर आप इस चित्र को 10 मिनट में पहचान जाते हैं तो आप अपने आपको समझिये "जीनियस"
अगर आप इस चित्र को 15 मिनट में पहचान जाते हैं तो आप अपने आपको समझिये "बुद्धिमान"

और अगर इससे ज्यादा समय लगाते हैं तो आप क्या हैं? आप स्वयं ही समझ लिजिये. और आपको फ़िर भी जवाब नही मिले तो यहां पर चटका लगाकर देख लिजियेगा. अब यह आपकी इमानदारी पर निर्भर करता है कि आप कितनी देर में उत्तर खोज पाये? यह सही बताते हैं या गलत?

तो अब मैं रामप्यारे आपको होली की शुभकामनाएं देता हुआ आपसे विदा लेता हूं. अगले सप्ताह आपसे फ़िर यहीं मिलूंगा.

ब्लाग भौजी सुंदरी प्रतियोगिता -२०११ में श्री दिलीप कवठेकर

ब्लाग भौजी सुंदरी प्रतियोगिता -2011 में आपका हार्दिक स्वागत है. जैसा कि आपको बताया गया था कि इस प्रतियोगिता का स्विमिंग शूट टेस्ट रामप्यारे ने ताऊ सिटी बीच पर किया था. हमने उससे इस टेस्ट की विडियो रिपोर्टिंग मांगी तो उसने कहा कि वो विडियो सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नही किया जा सकता.

सभी भौजियों ने बिकिनी टेस्ट में जरूरत से ज्यादा अडल्टाना प्रदर्शन किया, खासकर समीरा टेढी, सतीशा भौजी और रजिया भौजी ने अडल्टाना प्रदर्शन के सारे रिकार्ड तोड डाले. सभी भौजियों को यह लग गया था कि बिकिनी टेस्ट के सहारे ही यह ब्लाग भौजी सुंदरी प्रतियोगिता जीती जा सकती है सो खरबूजे को देखकर बाकी की खरबूजा भौजियों ने भी रंग बदलते हुये बहुत ही अडल्टाना व्यवहार और प्रदर्शन किया जिसे हम सार्वजनिक नही कर सकते.

अगर किसी को इस बिकिनी टेस्ट के रशेज देखने हों तो वो अपना वयस्क होने का प्रमाण पत्र भेजकर निजी रूप से यह विडियो प्राप्त कर सकता है.

अब ब्लाग भौजी सुंदरी प्रतियोगिता में अगला चरण भौजियों की सुंदरता परखने के बाद उनकी कला को परखने का है, इसमे आज आपको दिलीपा भौजी का गायन सुनवा रहे हैं. हम आपको बतादें की अभी दिलीपा भौजी जरूरी काम से मिश्र (Egypt) में हैं तो उनका अभी बिकिनी टेस्ट होना भी बाकी है परंतु आन लाईन गायन टेस्ट उन्होने इजिप्ट से दे दिया है. तो आईये दिलीपा भौजी, अपना गायन सुनाईये.



प्यारे यानि कि रामप्यारे जी, प्यारे प्यारे देवरों और देवरानियों, आप सबको मेरा यानि दिलीपा भौजी का इजिप्ट से सीधे नमस्कार, एक होली गीत वर्तमान संदर्भ में पेश कर रही हूं, आशा है आप पसंद करेंगे और मेरे लिये ताऊ को ज्यादा से ज्यादा एस एम एस भेजकर मुझे ब्लाग भौजी सुंदरी प्रतियोगिता जीतने का मौका प्रदान करेंगे.




धन बरसे मैली चदरिया रे धन बरसे
धन बरसे मैली चदरिया रे धन बरसे

अरे कितने करे घोटाले
अरे कितने करे घोटाले तोहरे राज में राजा
अरे हंसना रे कलमडिया...

अरे और भी बहुत है भाई...
धन बरसे मैली चदरिया रे धन बरसे
धन बरसे मैली चदरिया रे धन बरसे

एशियन गेम्स का बीडा उठाया
अरे एशियन गेम्स का बीडा उठाया

अरे एशियन खेलों का भैया...

एशियन गेम्स का बीडा उठाया
अरे एशियन गेम्स का बीडा उठाया
चाबे करोडों कल्माडी पी.एम. तरसे धन बरसे..
धन बरसे मैली चदरिया रे धन बरसे

ओ धन बरसे...
एशियन गेम्स का बीडा उठाया
अरे एशियन गेम्स का बीडा उठाया

स्पेक्ट्रम घोटाले का सेज बिछाया
अरे स्पेक्ट्रम घोटाले का
स्पेक्ट्रम घोटाले का सेज बिछाया
सोये मिनिस्टर राजा पी.एम. तरसे, धन बरसे
ओ धन बरसे... पी.एम. तरसे धन बरसे..
धन बरसे मैली चदरिया रे धन बरसे

होली है भैया...अरे होली है भैया.

दिलीप कवठेकर (इजिप्ट से)

ब्लाग भौजी सुंदरी प्रतियोगिता - 2011 शुरू

होली साल में एक बार ही आती है. इसके जाते ही "फ़िर वही रामदयाल और वही गधेडी" बचा रह जाता है. हमारे कहने का मतलब है कि होली पर्व भी जीवन का एक चक्र है. हमारे शास्त्रों में ध्यान की जो प्रक्रियाएं बताई गई है उसमे स्व से मिलन की एक प्रक्रिया स्थूल से सुक्ष्म की तरफ़ लौटना भी है. और अगर किसी ने इसका अभ्यास किया हो तो यह बडे काम की चीज है. शायद इस तथ्य को श्री राकेश कुमार जी ज्यादा अच्छे तरीके से समझा सकेंगे.

इसी प्रक्रिया के तहत अगर हम होली को साल के एक मास की बजाये मास में एक दिन पर ले आयें, फ़िर एक दिन यानि चौबीस घंटे में से एक घंटे पर ले आयें तो चमत्कार घटित हो सकता है. और रोज होली मनाई जा सकती है. जीवन की इतनी भागदौड और आपाधापी में हम तो एक दिन में ये एक घंटा आराम से निकाल लेते हैं और रोज होलियाना मूड में रहते हैं. भले ही इसकी कीमत हमें दो चार लठ्ठ खाकर चुकाना पडती है. और यूं भी श्री प्रवीण पाण्डेय ने घोषित कर ही दिया है कि पिटना भी भाग्य बढ़ाता है सो भाईयो आप भी राज भाटिया से लठ्ठ मंगाकर भौजाईयों को यानि अपनी अपनी लुगाईयों को पकडा दिजिये और रोज होली मना कर, उनसे पिट कर अपना भाग्य बढवाते रहिये. इसमें हर्ज भी क्या है? आपका भाग्य बढेगा, भौजाईयों का अहम संतुष्ट होगा कि सदियों से उन पर होते आये अत्याचार का बदला चुक रहा है और घर में शांति भी बनी रहेगी.

वैसे ये होली (हास्य) के किटाणु सभी के अंदर चौबीसों घंटे ही मौजूद रहते है पर कुछ सज्जन या दुर्जन लोग जबरदस्ती मुंह फ़ुलाकर ऊपर से गंभीरता का मुल्लम्मा चढा लेते हैं जैसे सारे दुनियां जहान को उन्हीं को चलाना है. हमारे बारे में भी लोग यहां वहां कहते फ़िरते हैं कि जब देखो...हा..हा..ठी..ठी..करता रहता है. जानवरों के साथ रहते रहते, ताई के लठ्ठों से पिट पिट कर, भाग्य बढवा कर ताऊ भी जानवर जैसा ही हो गया है. उसे शर्म भी नही आती.

पर भाईयों और भौजाईयो...कसम खुदा कि..हम इतने जंगली नही हैं. ये अलग बात है कि सुबह शाम लठ्ठ से पिट पिट कर हमारी बुद्धि कुछ कुंद और निर्मल जरूर हो गई है. होली की भांग कुछ ज्यादा चढ गई थी. ताई के लठ्ठों से भी नही उतरी. आराम से घर में पडे थे. पर रिश्तेदारी की एक उम्रदराज अम्मा जी काफ़ी लंबी बीमारी के बाद देवलोक गमन कर गई और उनकी शवयात्रा में जाना जरूरी था. सो चले गये. आप जानते ही हैं कि श्मसान में श्मसान वैराज्ञ तो हर किसी को व्यापत होता है फ़िर ताऊ क्या चीज है.

दाह संस्कार से वापसी में लौटते हुये :-

मेरे आगे आगे एक टिरिक का बच्चा (आटो) जा रिया था
पीछे पीछे मैं वैराज्ञ में डूबा श्मसान से वापस आ रिया था

ट्रक के बच्चे के पीछे लिखा था :-

कीचड से खेलोगे तो धोना भी पडेगा
करोगे अगर शादी तो रोना भी पडेगा

धतूरे के पेड़ से धतूरा ही मिलेगा
आम खाने को आम बोना भी पड़ेगा.

जो ढूंढते विकास परमाणुओं के खेल में
उन्हें जिन्दगी के नाम को खोना भी पडेगा

जो तानते रहें हैं जंगल कांक्रिट के उनको
भूकंप और सुनामी के साये में सोना भी पड़ेगा

समझायें चलो आज इन सिरफिरे आकाओं को
करनी का असर हर हाल में ढोना भी पड़ेगा

घर पहुंचते २ मन उदास होगया, मन में आया कि पता नही कब हमारा देश भी जापान हो जाये, क्योंकि हमने भी पूरा इंतजाम विनाश का कर रखा है सो क्यों ना इस क्षण भंगुर संसार में जब तक अपना जीवन है उसमे होली मनाते रहे?

भैस के केडे को कंघा चोटी करके स्कूल भेजने के लिये तैयार करती ताई

इधर होली बीती थी कि ताई थोडी होलियाना मूड से बाहर निकली, घर बार की सुध आई, भैंसों को चारा पानी भी ठीक से नही दिया गया था सो उसने भैंसो को चारा पानी दिया. इधर हमारी भैंस (जिसने भागकर यमराज के झौठे से शादी करली थी) का केडा (भैंस का बच्चा) भी पूरी तरह होली के मूड मे था. अभी तक स्कूल की छुट्टियां थी और आज स्कूल भी खुल गये थे पर वो स्कूल जाने को तैयार नही हो रहा था. ताई ने उसको जैसे तैसे नहला धुलाकर स्कूल के लिये तैयार किया तो पसर गया कि स्कूल नही जाऊंगा. पर ताई के आगे उसकी एक नही चली, आखिर उसकी कंघा चोटी करके उसको स्कूल बस में बैठा ही दिया.

"ब्लाग भौजी सुंदरी प्रतियोगिता" के लिये "ताऊ सीटी" पहूंच चुकी ब्लाग भौजियों का एक ग्रुप फ़ोटो

हमने नहा धोकर खा पीकर कुछ विश्राम किया और हल्की सी नींद लगी ही थी कि रामप्यारे आकर धमक गया और बोला - ताऊ, वो ब्लाग भौजी सुंदरी प्रतियोगिता के लिये बहुत सी उम्मीदवार ताऊ सीटी बीच पर पहुंच चुकी हैं और बिकनी व स्विंमिग शूट टेस्ट मैने ले कर नंबर दे दिये है. आगे अब रैंप पर परेड आप देख लो और नंबर दे दो फ़िर इस साल की ब्लाग भौजी सुंदरी - 2011 के नाम की घोषणा कर देते हैं. आप चलकर तैयारी भी देख लिजिये. सो हम रामप्यारे के साथ ताऊ सीटी में पहूंचे और सभी ब्लाग भौजियों से परिचय प्राप्त किया, उनमें राजीवा भौजी तो इतनी लंबी थी कि कैमरे के फ़्रेम में भी नही आरही थी. किसी तरह एडजस्ट करके रामप्यारे ने एक यादगार फ़ोटो लिया.

दराल भौजी, सतीशा भौजी और रजिया भौजी किसी षडयंत्र की जुगाड में

वहां ब्लाग भौजियों से परिचय प्राप्त करने के बाद हम लौटने लगे तो हमने एक कोने में दराल भौजी, सतीशा भौजी और रजिया भौजी को कुछ गुफ़्तगू करते पाया, हमें लगता है कि ये तीनों मिलकर ब्लाग भौजी सुंदरी एवार्ड - 2011 जीतने के लिये कुछ षडयंत्र कर रही हैं. अब आगे क्या हुआ? और कौन कौन सी ब्लाग भौजियां आई? रैंप पर किसका पल्लू खिसका? और मुद्दे की बात यह कि किसने जीता ब्लाग भौजी सुंदरी एवार्ड - 2011... ये सब अगले अंक में पढिये.

ताऊ गरही कवि सम्मेलन में : चच्चा मनचले "पिट लिए" श्री सतीश सक्सेना

प्यारे श्रोताओं, मैं रामप्यारे ताऊ तरही कम गरही सम्मेलन में आप सबका स्वागत करता हुं. ताऊ गरही मुशायरे में अभी तक आप महाकवि ताऊ जी महाराज, महान कवियित्री मिस समीरा टेढी, आल राऊंडर ललित शर्मा, कवि सम्राट विजय सप्पात्ति और चच्चा रामपुरी चाकू वाले अनुराग शर्मा (स्मार्ट इंडियन) को सुन चुके हैं. और आज इस गरही सम्मेलन में अपनी व्यथा कथा सुनाने आ रहे हैं चच्चा मनचले "पिट लिए" यानि कि महान कविकार श्री सतीश सक्सेना.

तो भाइयो और भौजाइयो .....दिल थाम के बैठो ..... अब आ रहे हैं...... चच्चा मनचले "पिट लिए" ...पर चच्चा कैसे किससे "पिट लिये" ? इसकी एक बानगी उनको सुनने के पहले देख लिजिये.

चच्चा "पिट लिये" को पीटने का इंतजार करती समीरा भौजी, अनुरागी भौजी, विजया भौजी और ललिता भौजी


ये चार चार भौजियां लठ्ठ लिये चच्चा पिट लिये को पीटने के लिये इंतजार कर रही हैं कि कब चच्चा आये और कब उनको पीटा जाये. पर चच्चा भी आखिर चच्चा ठहरे....खुद तो आये इंतजाम से ...और संगी साथियों को पिटवा कर एक तरफ़ खडा कर दिया...जरा हालत तो देखिए चच्चा के दोस्तों की... चच्चा बडी चालू चीज हैं... चच्चा को देखिये तो सही.. ..कैसे मुस्करा कर पिट रहे हैं....


चच्चा "पिट लिये" को पिटवाती रजिया भौजी, पीटे हुये खडे देवरों को पहचानिये और पीटने वाली भौजी कौन है?


और ये रजिया भौजी तो चच्चा "पिट लिये" को जमकर पिटवाने पर अडी हैं....मारे जावो.....मारे जावो...लठ्ठ पे लठ्ठ...आखिर भौजी का ही देवर है... कोई पराया देश का थोडे ही है.

पर सवाल ये है कि चच्चा "पिट लिये" को ये कौन सी भौजी पीटे जा रही है?
कोई बता सकता है?
यही राज है कि ये लठ्ठ कौन सी भौजी चला रही है?


चच्चा "पिट लिये" से कविता पाठ करवाती रजिया भौजी और डांस करता रामप्यारे


और अब चच्चा "पिट लिये" को रजिया भौजी ने इस शर्त पर पिटवाना बंद किया कि वो एक कविता सुनायेंगे. तो अब मैं पिटे पिटाये चच्चा "पिट लिये" को आमंत्रित करता हूं कि वो आये और अपनी नई नवेली रचना सुनाये...तो अब आ रहे हैं पिटे पिटाये चच्चा "पिट लिये" उर्फ़ सतीश सक्सेना. जरा जोरदार हुटिंग हो जाये....


(इस पूरी पोस्ट का पोडकास्ट यहां सुनिये.)



प्यारे भाईयों और मुझे पीटने वाली भौजाईयों...आप सबको होली की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं...अब मैं आपको बिल्कुल ताजा और पिटने के तुरंत बाद उपजी नई नवेली रचना सुना रहा हूं....सुनिये और दाद ...मेरा मतलब टिप्पणी दिजियेगा.... दाद खाज खुजली लेकर तो क्या करूंगा...लठ्ठों से पिट पिट कर वो तो यूं ही गायब हो गई है....हां तो अब सुनिये.

ऐसा क्या बुरा किया मैंने मुझको तुम क्यों पिटवाते हो
वर्षों से पूजन करने को
मंदिर के चक्कर लगवाए
रूपसियों का कर नेत्रपान
तेरे चरणों में सर नाए
तेरे दर्शन के साथ साथ सुंदरियों से धक्का मुक्की
में, जूता घूँसा लातों से मुझको तुम क्यों पिटवाते हो

सुन्दरता की रचना क्यों की
इसमें मेरी गलती क्या है
क्यों रूपसियों को मंदिर में
सजधज कर तुम बुलवाते हो
पूजा करने में ध्यान बँटे नज़रें चपलाओं पर जाती
करके अपना पाषाण ह्रदय तुम मुझको क्यों पिटवाते हो

शायद तुम भूले निज करनी
मैं याद तुम्हें दिलवाता हूँ
खुद तो मैरिड महिलाओं से
भी चक्कर खूब चलाते थे
राधा के घर को उजाड़ कर मुझको क्या सबक सिखाते हो
मैं तो तेरा फालोवर हूँ , तुम मुझको क्यों पिटवाते हो ??

-सतीश सक्सेना

नोट :- अब इस गरही कवि सम्मेलन का समापन करेंगे श्री ताऊ जी महाराज.
(अगले अंक में)


ताऊ पहेली - 118

प्यारे बहणों और भाईयों, ताऊ पहेली - 118 में मैं रामप्यारे आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते हैं होली के अवसर पर ताऊ महाराज दंडकारण्य में विश्राम करने के लिये प्रस्थान कर जाते हैं. सो इस साल भी वो रामप्यारी के साथ यहां से कूच कर गये हैं और ताऊ पहेली को सतत जारी रखने का कार्यभार मुझे सौंप गये हैं. मैने इस शर्त पर यह जिम्मेदारी स्वीकार की है कि इस पहेली को जब तक मैं चाहूं तब तक अपनी मर्जी और शर्तों पर चलाऊंगा.

अब आप तो जानते हैं कि मैं ठहरा एक सीधा साधा गधा, ज्यादा फ़ालतू बात करना मेरी तबियत में शुमार नही है. और काबलियत के नाम पर सिर्फ़ अपने बडे बडे दांत ही दिखा सकता हूं. और इस पहेली के नियम बिल्कुल सीधे हैं और आप स्वयं ही इसके जज होंगे.

नीचे एक चित्र दिया हुआ है. इस चित्र को देखकर आपको बताना है कि यह चित्र कहां का है? इस जगह के बारे में आप कुछ और भी जानकारी रखते हैं तो वो भी यहां टिप्पणी में लिख कर दूसरों की जानकारी भी बढा सकते हैं.



अगर आप इस चित्र को 5 मिनट में पहचान जाते हैं तो आप अपने आपको समझिये "जीनियस"
अगर आप इस चित्र को 10 मिनट में पहचान जाते हैं तो आप अपने आपको समझिये "बुद्धिमान"
अगर आप इस चित्र को 15 मिनट में पहचान जाते हैं तो आप अपने आपको समझिये "औसत"

और अगर इससे ज्यादा समय लगाते हैं तो आप क्या हैं? आप स्वयं ही समझ लिजिये. और आपको फ़िर भी जवाब नही मिले तो यहां पर चटका लगाकर देख लिजियेगा. अब यह आपकी इमानदारी पर निर्भर करता है कि आप कितनी देर में उत्तर खोज पाये? यह सही बताते हैं या गलत?

आज की पहेली पर दसवें नंबर का सही जवाब देने वाला सौभाग्यशाली विजेता प्रमाणपत्र का हकदार होगा.

तो अब मैं रामप्यारे आपको होली की शुभकामनाएं देता हुआ आपसे विदा लेता हूं. अगले सप्ताह आपसे फ़िर यहीं मिलूंगा.

नोट : ताऊ होली गरही कवि सम्मेलन में कल की रेवडी दी गई है श्री सतीश सक्सेना को....इंतजार किजिये.

ताऊ गरही कवि सम्मेलन में चच्चा रामपुरी चाकू वाले : श्री अनुराग शर्मा (स्मार्ट इंडियन)

प्यारे श्रोताओं, मैं रामप्यारे ताऊ तरही कम गरही सम्मेलन में आप सबका स्वागत करता हुं. ताऊ गरही मुशायरे में अभी तक आप महाकवि ताऊ जी महाराज, महान कवियित्री मिस समीरा टेढी, आल राऊंडर ललित शर्मा और कवि सम्राट विजय सप्पात्ति को सुन चुके हैं. और आज इस सम्मेलन में महान चाकूबाज कवि, चच्चा रामपुरी चाकू वाले श्री अनुराग शर्मा (स्मार्ट इंडियन) अपनी रचना प्रस्तुत कर रहे हैं अपने चाकू और माईक को कांधे पर रख कर.

महाकवि चच्चा रामपुरी चाकू वाले कविता पाठ के लिये जाते हुये


चच्चा रामपुरी के चाकू को देखकर हमेशा की तरह आन लाईन कैट स्केनिंग का कार्यभार संभालने वाली मिस रामप्यारी कहीं दुबक गई है. अत: चच्चा की रचना बिना कैट स्केन के ही सीधे आन एयर करना पड रही है. तो अब मैं आमंत्रित करता हूं आज की रेवडी प्राप्त चाकू कवि चच्चा रामपुरी को...आईये चच्चा .. अपनी बिल्कुल ताजी और नई नवेली चाकू रचना से इस गरही सम्मेलन की गरिमा बढाकर हम सब को कृतार्थ किजिये..

कविता पाठ करते श्री अनुराग शर्मा एवम डांस करता रामप्यारे






कुछ गाने को दिल करता है, सुना लूँ?
तालियाँ बजाओगे या रामपुरी निकालूँ?

दिल के बहाने कहीं ले न उडें चुप के
ज़रा सा रुक जाओ, बटुआ छिपा लूँ

जिनकी होनी थी उन सबकी हो ली
मस्ती में मैं भी तो रंग में नहा लूँ

लाज की लाली से लाल हो रहे हैं जो
उन गालों से थोडा सा रंग चुरा लूँ?

कुछ गाने को दिल करता है, सुना लूँ?
तालियाँ बजाओगे या रामपुरी निकालूँ?

आप सब को अनुराग शर्मा की ओर से होली की अनंत शुभकामनाए.

ताऊ तरही कम गरही कवि सम्मेलन में : कवि शिरोमणी श्री विजय कुमार सप्पात्ति

प्यारे श्रोताओं, मैं रामप्यारे ताऊ तरही कम गरही सम्मेलन में आप सबका स्वागत करता हुं. ताऊ गरही मुशायरे में अभी तक आप महाकवि ताऊ जी महाराज, महान कवियित्री मिस समीरा टेढी, और आलराऊंडर श्री ललित शर्मा को सुन चुके हैं. और आज इस सम्मेलन में महान कविकार, अनेक विधाओं के ज्ञाता श्री विजयकुमार सप्पात्ति अपनी हास्य व्यंग की रचना प्रस्तुत कर रहे हैं.

और हमेशा की तरह आन लाईन कैट स्केनिंग का कार्यभार संभाल रही हैं मिस रामप्यारी. और अब मैं आमंत्रित करता हूं आज की रेवडी प्राप्त श्री विजयकुमार सप्पाति को...जोरदार स्वागत किजिये हमारे आज के महाकवि महाराज का... आईये विजय जी.... अपनी बिल्कुल ताजी और हास्य व्यंग की रचना से इस गरही सम्मेलन की गरिमा को साढे नौ चांद लगाकर हम सब को कृतार्थ किजिये..

कविराज श्री विजय सप्पाति के कविता पाठ पर डांस करता रामप्यारे, कैट स्केन करती हुई मिस. रामप्यारी


प्यारे श्रोताओं, आप सबको विजय सप्पाति की और से होली की भांग भरी नमस्कार, आज मैं आपको अपनी कविता "मेरी कविता की किताब" की दास्तान सुना रहा हूं, ध्यान से सुनिये और मटका भर कर होली युक्त टिप्पणी दिजिये.



नीरज जी से मेरी मुलाकात हुई ;

मन की पूरी बहुत बड़ी आस हुई !

उन्हें अपना समझकर उन्हें चाय पिलाई ;

दिल उनका जीतकर मैंने एक बात बतलाई !

नीरज जी , मुझे कविता की किताब छपवाना है

साहित्य की दुनिया में बड़ा नाम कमाना है

बहुत बड़ा कवि बनकर दिखलाना है

नीरज जी हंसकर बोले ,

और बोल कर गज़ब ढा दिया

मेरा छोटा सा दिल तोड़ दिया

कविता लिख लिख कर बोरा भर , बौरा गया है

तेरी किताब को कोई नहीं पढ़ेगा

उस पर घास रखकर गधे चरेंगे

और दाल रख कर लोग रोटी खाएँगे

सुनकर दिल मेरा भयभीत सा हुआ

मेरे भीतर का कवि व्यथित हुआ !!

फिर भी निडर हो मैंने किताब छपवाने की ठान ली

नीरज जी को अनसुना कर दिया ;

जाते जाते नीरज जी फिर बोल गए

कानों में नीम सा कुछ घोल गए

विजय, क्यों पगला गया है

और दिल की बात मान ली

बेटा ,दोबारा सोच ले

मेरी बात पर कान दे !

पर मैंने न कान, न नाक और न आंख दी

उनकी सलाह को आंख दिखा दी

एक कान से सुनी दूसरे से निकाल दी

मैं कहा , नीरज जी , बस अब देखिये क्या होता है

साहित्य की दुनिया में मेरा कैसा नाम होता है

घर आकर सारे रूपये लगाकर

मैंने मोटी सी किताब छपवाई

और अपने खर्चे पर दोस्तों को भिजवाई

और लोकार्पण की एक बड़ी पार्टी रखवाई

ये बात अलग है कि इस सारी प्रक्रिया में

बीबी ने मुझे डांट ही खिलाई

खाना तो छोड़िये चाय भी नहीं पिलाई

बहुत दिन बीत गए

कर्जा जिनसे लिया था

वो आने शुरू हो गए

मेरे नाम से गालियों के दौर शुरू हो गए

कविता की वाहवाही की कोई निशान नहीं था

साहित्य जगत में मेरे कोई नाम नहीं था

मैंने एक दिन फैसला किया

और दोस्तों के घर जाने का हौसला किया !!

एक दिन भरी बरसात में एक

दोस्त के घर गया और जो देखा

उसके बच्‍चे मेरी किताब के पेजों की

एक दूसरे पर हवाई जहाज़ बना कर उड़ा रहे है

देख कर ये सीन दिल मेरा टूट गया

उसे जी भर भर कोसा

नाव बना रहे हैं और

मैं उस दोस्त से रूठ गया !

और मेरी किताब को चबा रहा था !!

दूसरे दोस्त के घर गया

उसका छोटा बच्चा खडा था

तीसरे दोस्त के घर गया

वहां हाल और भी खराब थे

वे किताब को वो बेच कर छोले खा चुके थे !!!

घूमते घूमते रात हो गई

पेट में चूहे तांडव मचाने लगे

एक दोस्त के घर पहुंचा

वो बेचारा गरीब था

बरतनों से भी मरहूम था

मुझे बड़े प्यार से खिलाई

उसने मेरी ही किताब पर रख कर दाल रोटी ,

ऐसा कर के उसने मुझे बड़ी ठेस

पर पेट की आंतडि़यों को राहत पहुंचाई

वापिस आते हुए ठोकर लगी और मैं गिर पड़ा

मेरे पैर को मेरी किताब ने ही ठोका था

मुझे गिराने का मौका उसने नहीं चूका था

आँख खुली तो हॉस्पिटल नजर आया

मेरे उपर पड़ रही थी नीरज जी की छाया

गिरा और बेहोश हो गया मैं

नीरज जी हंसकर कहा

फिक्र मत करो , सब ठीक है

हॉस्पिटल का बिल कुछ ज्यादा आया था

तेरी मोटी किताबों को बेचकर चुकाया है

मैं फिर खुश हो गया

पर दोबारा से रो गया

जब मुझे बताया कि बिकी नहीं

मोटी थी, तुली हैं, तोलाराम कबाड़ी वाले ने खरीदी हैं

तभी बिल चुकाया है

हाय रे मेरी कविता की किताब

जिसने अस्‍पताल में भर्ती करवाया मुझे जनाब !!!

अब कभी भी अपनी कोई किताब नहीं छपवाऊंगा ,

ये बात अब समझ आ गयी है

अब आप भी इसे समझ ले , यही दुहाई है ......!!!!!


हमारे अगले रेवडी प्राप्त कवि हैं चच्चा रामपुरी चक्कू वाले यानि श्री अनुराग शर्मा (स्मार्ट इंडियन)
(अगले अंक में)

ताऊ तरही कम गरही कवि सम्मेलन -2011

प्यारे श्रोताओं, मैं रामप्यारे ताऊ तरही कम गरही सम्मेलन में आप सबका स्वागत करता हुं. ताऊ गरही मुशायरे में अभी तक आप महाकवि ताऊ जी महाराज और महान कवियित्री मिस समीरा टेढी को सुन चुके हैं. और आज इस सम्मेलन में महान विभुति, सब विधाओं के पारंगत श्री ललित शर्मा अपनी रचना प्रस्तुत कर रहे हैं.

और हमेशा की तरह आन लाईन कैट स्केनिंग का कार्यभार संभाल रही हैं मिस रामप्यारी. और अब मैं आमंत्रित करता हूं आज की रेवडी प्राप्त श्री ललित शर्मा को...जोरदार स्वागत किजिये इस आल राऊडर का... आईये आलराऊंडर ललित जी.... अपनी बिल्कुल ताजी और नई नवेली होली की रचना से इस गरही सम्मेलन की गरिमा बढाकर हम सब को कृतार्थ किजिये..


"रामप्यारे उवाच"


प्रिय श्रोताओं, एक छोटी सी होली रचना इस ताऊ गरही कवि सम्मेलन में पेश कर रहा हूं, रचना अभी अभी फ़ूटी है और बिल्कुल नई नवेली है, उनके श्री मुख से सुनकर जरा जमकर टिप्पणी दिजियेगा.

ताऊ गरही मुशायरे में महाकवि श्री ललित शर्मा एवम आन लाईन कैट-स्केन करती मिस रामप्यारी



आलराऊंडर श्री ललित शर्मा का "गरही कविता पाठ"


जब टेसू जब पलास के रंगों की सजे रंगोली
जब चौपाल में बजे नगाड़े और हँसे हमजोली
जब कोयलिया ने भी अपनी तान सुरीली खोली
तभी समझना यार आ गयी है मस्तानी होली

आँख आँख जब सजे इशारे और बुलावा आये
आँगन आंगन बिखर चांदनी अपना रंग दिखाए
झर झर झर झर मधु रस टपके और अमृत घोली
तभी समझना यार आ गयी है मस्तानी होली

जब खिड़की से वह लटकाए ऊपर चढ़ने डोरी
तुलसीदास की रत्ना जैसी लगती है तब गोरी
देख खुला दरवाजा चोरों की भी नियत डोली
तभी समझना यार आ गयी है मस्तानी होली

जब ऋतुराज ने रंगों वाली बड़ी पिटारी खोली
भांग चढ़ा कर जब वो बोले मीठी मीठी बोली
सारा दिन मदमस्त रहे जब सूझे नई ठिठोली
तभी समझना यार आ गयी है मस्तानी होली


ललित शर्मा
अभनपुर जिला रायपुर छत्तीसगढ
9425515470

ताऊ गरही मुशायरे की अगली रेवडी दी गई है श्री विजयकुमार सप्पात्ति को...
(अगले अंक में)