ताऊ पहेली - 44

diwali

दिवाली की घणी रामराम.



प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों आप सबको दिपावली की घणी राम राम.


alp01 माननीय भाईयो और बहनों,
आप सबको दीपावली पर्व की हार्दिक बधाईयां और शुभकामनाएं!

इससे पहले की हम ताऊ पहेली – 44 शुरु करें, मैं आपसे एक बात कहना चाहुंगी. आप सभी के सहयोग से ताऊ पहेली सफ़लता पूर्वक निरंतर गोल्डन जुबिली की तरफ़ बढ रही है. 28 नवंबर 2009 का ताऊ पहेली का अंक गोल्डन जुबिली अंक होगा. इस खुशी के मौके पर हमने विशेष रुप से तैयारियां की हैं जिनके बारे मे आपको आगे विस्तृत जानकारी दे दी जायेगी.

इन पूरे ५० अंको का रिकार्ड हमारे द्वारा रखा गया है . अभी तक सबसे अधिक अंक प्राप्त करने वाले
प्रतिभागी को मेगा गोल्डन पुरुस्कार से नवाजा जायेगा. अत: आपसे निवेदन है कि अब से नियमित भाग लें और आपके लिये रैंक सुधारने का यह सुनहरी मौका है. कृपया नियमित भाग लें.

गोल्डन जुबिली पहेली के बारे मे आगे समय समय पर घोषणा की जाती रहेगी.


अब ताऊ पहेली अंक 44 में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. क्ल्यु हमेशा की तरह रामप्यारी के ब्लाग से मिलेंगे. रामप्यारी के ब्लाग पर पहला क्ल्यु 11:30 बजे और दुसरा 2:30 बजे मिलेगा. रामप्यारी का जवाब अलग टिपणी में देवें. तो आईये अब आज की पहेली की तरफ़ चलते हैं.

यह कौन सी जगह है?


ताऊ पहेली का प्रकाशन हर शनिवार सुबह आठ बजे होगा. ताऊ पहेली के जवाब देने का समय कल रविवार दोपहर १२:०० बजे तक है. इसके बाद आने वाले सही जवाबों को अधिकतम ५० अंक ही दिये जा सकेंगे

अब रामप्यारी का विशेष बोनस सवाल : - ३० अंक के लिये.

rampyari-tdc-1_thumb[2] हाय एवरी बडी..वैरी गुड मार्निंग फ़्रोम रामप्यारी.

विनम्र निवेदन : - कृपया मेरे सवाल का जवाब अलग टीपणी मे देवें. बडी मेहरवानी होगी. एक ही टिपणी मे दोनो जवाब मे से एक सही होने पर प्रकाशित नही की जा सकती और इससे आप कन्फ़्युजिया सकते हैं कि आपकी टिपणी रुकी हुई है. तो सही होगी?

आज का सवाल :-

हेमा और मंदोदरी में आपस में क्या रिश्ता था?


अब आप मेरे ब्लाग पर पहली हिंट की पोस्ट पढ सकते हैं 11:30 बजे और दुसरी 2:30 बजे.

अब रामप्यारी की रामराम.


इस अंक के आयोजक हैं ताऊ रामपुरिया और सु,अल्पना वर्मा



नोट : यह पहेली प्रतियोगिता पुर्णत:मनोरंजन, शिक्षा और ज्ञानवर्धन के लिये है. इसमे किसी भी तरह के नगद या अन्य तरह के पुरुस्कार नही दिये जाते हैं. सिर्फ़ सोहाद्र और उत्साह वर्धन के लिये प्रमाणपत्र एवम उपाधियां दी जाती हैं. किसी भी तरह की विवादास्पद परिस्थितियों मे आयोजकों का फ़ैसला ही अंतिम फ़ैसला होगा. एवम इस पहेली प्रतियोगिता में आयोजकों के अलावा कोई भी भाग ले सकता है.


मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम
मिस.रामप्यारी का ब्लाग

नोट : – ताऊजी डाट काम पर हर शाम 6:00 बजे नई पहेली प्रकाशित होती हैं. यहा से जाये।

"हनन" द मर्डर



                                                                   
                                                             "हनन" द मर्डर
   
   
    ए परिंदे उंची उडान भर    ये समूचा आकाश तेरा है
    पर ध्यान रहे
    और परिंदों का भी हक उतना
    जितना ये नभ तेरा है
    उनका भी ख्याल रख
    मत कर हनन उन सीमाओ का
    जहां दूसरे के अधिकार मारे जाते हों
   जिन्हे तू साधारण परिंदा समझ कर
   हडका रहा हो
   क्या पता ? उनमे से कोई बाज हो ?




    (रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)



ताऊ पहेली - 43 विजेता सुश्री सीमा गुप्ता

श्री समीरलाल "समीर" को "साहित्य गौरव" सम्मान मिलने की हार्दिक बधाईयां और शुभकामनाएं.

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 43 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है 'बराबर गुफाएं' जिन्हें लोमास ऋषि की गुफा भी कहा जाता है. बिहार के जहानाबाद जिले में स्थित हैं.

बाराबर गुफ़ाएं


आईये अब आज के विजेताओं से आपको मिलवाते हैं.

"आज के विजेता गण"

प्रथम विजेता….बधाई

seema-gupta-2

 सुश्री सीमा गुप्ता

अंक १०१

द्वितीय विजेता…बधाई

 

Meet sketch श्री मीत

अंक १००

तृतीय विजेता…बधाई

 

antarsohilश्री अंतर सोहिल

अंक ९९

 


आईये अब हमारे बाकी के सभी विजेताओं से मिलवाते हैं.

 

premalata-pandeyji

        प्रेमलता पांडे  बधाई अंक ९८

 

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sanjay vyas   बधाई अंक ९७

 

My Photo

Udan Tashtari  बधाई  अंक ९६

 

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संजय तिवारी ’संजू’ बधाई अंक ९५

 

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पं.डी.के.शर्मा"वत्स"  बधाई  अंक ९४

 

इसके अलावा निम्न महानुभावों ने भी इस पहेली अंक मे शामिल होकर हमारा उत्साह बढाया. जिसके लिये हम उनके हृदय से आभारी हैं.

श्री रतन सिंह शेखावत,  श्री शुभम आर्य,  श्री दिलीप कवठेकर,  डा. रुपचंद्र शाश्त्री “मयंक”,  श्री दिनेश राय द्विवेदी,  सुश्री मह्क,  सुश्री निर्मला कपिला, श्री अनिल पूसदकर, 

श्री पंकज मिश्रा,  श्री सुशील कुमार छोंक्कर,  श्री काजलकुमार,  श्री संजय बेंगाणी,  सुश्री M.A. Sharma “sehar”,  श्री राज भाटिया,  श्री हे प्रभु ये तेरा पथ,  श्री नीरज जाट जी, 

श्री मुरारी पारीक,  श्री अनानिमस,  श्री दीपक तिवारी साहेब,  श्री दिगंबर नासवा,   श्री आशीष खंडेलवाल,  श्री अविनाश वाचस्पति,  श्री गिरीश बिल्लोरे “मुकुल”,  सुश्री जहान,  श्री अभिषेक ओझा,  भानाराम जाट और श्री सोनू.

आप सबका तहेदिल से शुक्रिया.



रामप्यारी के सवाल के विजेताओं से यहा मिलिये.

"रामप्यारी के ३० नंबर के सवाल का जवाब"


हाय…गुड मोर्निंग एवरी बडी…आई एम राम..की प्यारी… रामप्यारी.
हां तो अब जिन्होने सही जवाब दिये उन सबको दिये गये हैं ३० नम्बर…अगर भूल चूक हो तो खबर कर दिजियेगा..सही कर दिये जायेंगे.

हां तो मेरा सवाल था "कामचाडांली ग्रंथ किस विद्वान द्वारा और किस विषय पर लिखा गया था?" और सही जवाब है रावण. जी हां दशानन रावण जैसे प्रकांड विद्वान द्वारा यह ग्रंथ लिखा गया था. इस ग्रंथ मे मुख्य रुप से तंत्र विद्या के बारे मे लिखा गया था परंतु बाद मे ज्योतिष भी इसमे समाहित हुआ. आज का इस संबंध में परिपुर्ण जवाब आया है प. डी.के.शर्मा "वत्स" का. जानकारी हेतु यहां उनकी टिप्पणी प्रकाशित की जारही है.


पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

रचियता----श्री रावण जी महाराज ( रावण ब्राह्मण था तो इब ब्राहमण होकै दूसरे ब्राहमण की इज्जत ना करांगे तो ओर किस की करांगें,इस करकै नाम गेल्लै श्री लाणा पडया )

अर यो ग्रन्थ मुख्य रूप से तो तंत्र विधा पर आधारित है,लेकिन इसके एक भाग में ज्योतिष को भी सम्मिलित किया था। आगे चलकर ये दोनों भाग अलग करके दो स्वतंत्र ग्रन्थों के रूप में प्रचलन में आए ।
जै राम जी की.......

October 10, 2009 8:58 PM

आज सबसे पहले सीमा आंटी ने क्ल्यु के बाद सही अंदाजा लगाया और उनका अंदाजा सही बैठा. फ़िर प्रेमलता आंटी ने
बिल्कुल नपा तुला उत्तर दिया.

इसके बाद आये प. डी.के.शर्मा "वत्स" जिनकी टिप्पणी उपर पबलिश की गई है. बधाई पंडित जी. आपने रामप्यारी की क्लास की नाक रखली आज तो? वर्ना आज तो सारे ही स्टूडेंटस की होमवर्क की डायरियों मे रिमार्क लग जाता.

वैसे आज सभी की होम वर्क की डायरी मे रिमार्क लगाया जाता है कि ठीक से होम वर्क करके नही आते आजकल. पेरेंट्स को इस बात पर ध्यान देने की जरुरत है.

और इसके बाद समीर अंकल ने भी किसी तरह इस सवाल का संबंध रावण से निकाल ही लिया और लालों के लाल इंदौरीलाल अंकल ने तो सीधा कामचांडाली का जिक्र रावण संहिता से बता दिया और येन केन प्रकारेण वो भी सफ़ल हुये.

आज सिर्फ़ उपरोक्त ५ लोगों को इस सवाल का सही उत्तर देने के एवज मे तीस तीस नंबर दिये जाते हैं और आगे से और ज्यादा ध्यान दिये जाने की जरुरत का रिमार्क लगाया जाता है.

आप सबके खाते में तीस तीस नम्बर मैने जमा करवा दिये हैं.

अब रामप्यारी की तरफ़ से रामराम…अगले शनीवार फ़िर से यही मिलेंगें. वैसे आजकल शाम ६ बजे मैं ताऊजी डाट काम पर रोज ही मिल जाती हूं. ..और हां आपका आज से शुरु होने वाला सप्ताह शुभ हो.



हीरू और पीरू यानि हीरामन और पीटर की मनोरंजक टिपणियां यहां पढिये.

"आपकी सेवा में हीरू और पीरु"


अरे..हीरु भिया..अंई आवो..देखो ऊ सेहर आंटी कंई के री हे...ऊ फ़ेल हो गई..केवे है....
ला म्हारे देखणे दे यार पीरू भिया...
यार आज तो रामप्यारी का सवाल की वजह से सगला कुआं मे ही भांग पडीगी रे...ला म्हारे दे..आज बहुत टिप्पणी बांचणी पडेगी हो...


M.A.Sharma "सेहर" said...
आज तो मैं फेल हूँ ..जीरो नंबर ...पूरे ...:)) आज बस केवल राम राम स्वीकारें...

लगता है ताउजी और रामप्यारी दोनों ने कमर कस के तयारी कर ली है बीरबल से टक्कर .....

वैसे ये एक ही पत्थर से काटकर बना हुआ बहुत अज़ब सा मंदिर नुमा कुछ लग रहा है ....आस पास हुआ तो जाउंगी यहाँ पर....


धन्यवाद

October 10, 2009 1:12 PM



Udan Tashtari said...
आज के दोनों सवाल आउट ऑफ सिलेबस हैं. सबको जनरल प्रमोशन दिया जाये. वरना अनशन करेंगे. मुरारी पारिक भाई, भूख हड़ताल पर बैठो, हम आपके साथ हैं.

October 10, 2009 5:31 PM



संजय बेंगाणी said...
यह अज्ञातेश्वर का मन्दीर है जिन्होने कांमचांडाली ग्रंथ लिखा था.
(हिरामन नाराज सा था, बोला मेरे लिए कभी टिप्पणी करते ही नहीं. तो यह टिप्पणी उसके लिए)

October 10, 2009 11:29 AM



HEY PRABHU YEH TERA PATH said...
कांमचांडाली ग्रंथ लिखने वाले का नाम है श्री श्री समीरानन्दजी महाराज ने ७२० ईसवी पुर्व इस ग्रन्थ की रचना ताऊ के कहने पर की थी. किदवन्ती है की बाबा समीरानन्दजी महाराज का वह सैकेन्ड लास्ट अवतार था. ईस समय बाबा समीरानन्दजी महाराज धरती लोक पर अपने उडन तस्तरी अवतार मे विचरण कर रहे है ( अति)

October 10, 2009 2:10 PM



राज भाटिय़ा said...
हाय राम प्यारी लगता है आज तो तु अकेली है, अरी कहां गया तेरा बागड बिल्ला, लगता है रुठ कर भाग गया. ओर सुना केसी कट रही है, तेरी सास केसी है री, ओर यह फ़ेशन वेशन जो तु करती है तेरी सास तुझे रोती नही क्या, ओर सुना है कल शहर मै तेरे मटक मटक के चलने से बहुत भारी एक्सींडेंट हो गया, अब तु हम से सवाल पुछ रही है तो सुन यह तो बहुत ही अच्छा ओर आसान सवाल है, जितना आसान सवाल है जबाब भी उस से आसान है...

कांमचांडाली ग्रंथ तो जरुर किसी चंडालनी ने ही लिखा होगा ना, ओर किस विषय पर? अरी पगली यह भी पुछने वाली बात है किस बिषय पर?? यह सब चंडालनियां किस के पिछे पडी होती है? पता है ना... बस जब वो हाथ मै ना आये तो उस के बारे ही उस कि बुराई कर के यह ग्रंथ लिख दिया होगा, लेकिन तु इन बातो से दुर रहना, देख तेरा बिल्ला तो बहुत सयाना है, ओर तेरे सिवा किसी बिल्ली को""बुरी"" नजर से नही देखता, बस सब को अच्छी अच्छी नजर से अपनी समझ कर ही तो देखता है, अगर तेरे पास यह ग्रथ है तो इसे मत पढना.
राम राम मेरी प्यारी प्यारी राम प्यारी

October 10, 2009 1:21 PM



दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...
ये दरवाजा बहुत पुराना लेकिन खूबसूरत है। कहाँ जाएगा यह पता नहीं। कहीं पाताल न जा रहा हो यही सोच डर गए। फिर रामप्यारी के सवाल ने तो घिघ्घी ही बांध दी। इन सवालों के आगे अपने तो दिमाग की रोशनी ही गायब हो गयी। अब देखते हैं रोशनी कब वापस लौटती है।

October 10, 2009 9:19 AM


अरे पीरु भिया ये रामप्यारी का तो ऐसा ही काम है..पता नी कहां से सवाल उठा उठा न ली आवे न लोगा न परेशान करे हो..चलो अपण तो अबे दिवाली की तैयारी करां..

हां बिल्कुल हीरू भिया..चलो...



अच्छा अब नमस्ते.सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. ताऊ पहेली – 43 का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया. अगली पहेली मे अगले शनिवार सुबह आठ बजे आपसे फ़िर मिलेंगे तब तक के लिये नमस्कार.

ताऊ पहेली - 43

प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम.

ताऊ पहेली अंक 43 में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. क्ल्यु हमेशा की तरह रामप्यारी के ब्लाग से मिलेंगे. रामप्यारी के ब्लाग पर पहला क्ल्यु 11:30 बजे और दुसरा 2:30 बजे मिलेगा. रामप्यारी का जवाब अलग टिपणी में देवें. तो आईये अब आज की पहेली की तरफ़ चलते हैं.

यह कौन सी जगह है?


ताऊ पहेली का प्रकाशन हर शनिवार सुबह आठ बजे होगा. ताऊ पहेली के जवाब देने का समय कल रविवार दोपहर १२:०० बजे तक है. इसके बाद आने वाले सही जवाबों को अधिकतम ५० अंक ही दिये जा सकेंगे

अब रामप्यारी का विशेष बोनस सवाल : - ३० अंक के लिये.

rampyari-tdc-1_thumb[2] हाय एवरी बडी..वैरी गुड मार्निंग फ़्रोम रामप्यारी.

विनम्र निवेदन : - कृपया मेरे सवाल का जवाब अलग टीपणी मे देवें. बडी मेहरवानी होगी. एक ही टिपणी मे दोनो जवाब मे से एक सही होने पर प्रकाशित नही की जा सकती और इससे आप कन्फ़्युजिया सकते हैं कि आपकी टिपणी रुकी हुई है. तो सही होगी?

आज का सवाल :-

कामचाडांली ग्रंथ किस विद्वान द्वारा और किस विषय पर लिखा गया था?


अब आप मेरे ब्लाग पर पहली हिंट की पोस्ट पढ सकते हैं 11:30 बजे और दुसरी 2:30 बजे.

अब रामप्यारी की रामराम.



इस अंक के आयोजक हैं ताऊ रामपुरिया और सु,अल्पना वर्मा



नोट : यह पहेली प्रतियोगिता पुर्णत:मनोरंजन, शिक्षा और ज्ञानवर्धन के लिये है. इसमे किसी भी तरह के नगद या अन्य तरह के पुरुस्कार नही दिये जाते हैं. सिर्फ़ सोहाद्र और उत्साह वर्धन के लिये प्रमाणपत्र एवम उपाधियां दी जाती हैं. किसी भी तरह की विवादास्पद परिस्थितियों मे आयोजकों का फ़ैसला ही अंतिम फ़ैसला होगा. एवम इस पहेली प्रतियोगिता में आयोजकों के अलावा कोई भी भाग ले सकता है.


मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम
मिस.रामप्यारी का ब्लाग

 

नोट : – ताऊजी डाट काम  पर हर शाम 6:00 बजे नई पहेली प्रकाशित होती हैं. यहा से जाये।

समीर लाल, राज भाटिया, ताऊ और बादशाह अकबर

अब ताऊ का हाल चाल तो आपको मालूम ही है. चोरी, लूट, ठगी, डकैती और बेईमानी के धंधो मे इतना नाम कमा लिया कि कोई पास मे फ़टकने भी नही देता. अब खाली नाम से क्या होता है? पापी पेट को पालने के लिये रोकडा आजकल घणे जरुरी हैं. फ़िर ताऊ का कुणबा भी घणा ज्यादा बडा है ताई, रामप्यारी, सैम, बीनू फ़िरंगी, चंपाकली, अनारकली, हीरामन (हीरु) और पीटर (पीरु)...और इन सबके दोस्त रिश्तेदार अलग से.

ताऊ की बेरोजगारी की इस स्थिति से सबसे ज्यादा परेशान समीर लाल जी और राज भाटिया जी रहने लगे. ताऊ कुछ करता नही और उसके कुणबे का सारा खर्चा मजबूरन इनको ऊठाना पडता था....एक दिन अचानक राज भाटियाजी का फ़ोन समीर जी के पास आया और दोनों बात करने लगे.

राज भाटिया जी - हैल्लो ..हैल्लो समीरजी...मैं राज भाटिया बोलता हू,,

समीर जी - हां जी..हां..भाटिया जी...बोलो जी..कैसी है अब आपकी तबियत?

राज भाटिया जी
- अजी मेरी तबियत तो अब ठीक है..आफ़िस भी जाने लग गया...आप सुनावो...

समीरजी - अजी भाटिया जी, यहां भी सब रामजी की मौज है..बेटे बहु आजकल कनाडा आये हुये हैं सो बडा आनंद है जी... आप बताईये आज कैसे याद किया ?

राज भाटिया जी - अजी मैने इस लिये फ़ोन किया कि वो ताऊ आजकल कुछ ज्यादा ही परेशान करने लगा है..पहले तो थोडे बहुत रुपये देने से उसका काम चल जाता था आजकल दुनियां भर के खर्चे बढा लिये और मुझे परेशान करता है....उसके लिये एक काम ढूंढा था...

समीरजी
- अरे भाटीया जी आपके मुंह में घी शक्कर...उसने तो मुझे भी परेशान कर रखा है...अब कितनी मदद करें उसकी....पर काम मिल गया है तो दिलवा दो..आपका और मेरा, दोनों का पीछा छूटेगा.

भाटिया जी - अजी पीछा तो तब छूटेगा जब वो नौकरी पा जायेगा..और उसके लिये आपको एक सर्टीफ़िकेट भी देना पडेगा उसको.

समीरजी - अरे आप जो बोलो वो दूंगा...मैं तो सी.ए. आदमी हूं..बोलो वर्थ सर्टीफ़िकेट भी दे दूंगा और अगर दो चाहिये तो अपने शिव मिश्रा जी से दिलवा दूंगा.

भाटिया जी
- अरे नही जी...ये मामला आप समझ रहे हैं वो नही है. असल मे आजकल बादशाह अकबर यहां मेरे पडौस के मकान मे ही रहने आ गये हैं..और उनको एक ऐसा बुद्धिमान आदमी चाहिये जो उसके सवालों का जवाब देकर उसके दिमाग की खुजली मिटाता रहे...

समीरजी
- भाटियाजी..एक मिनट..एक मिनट...आपकी तबियत तो ठीक है?

भाटियाजी - क्युं मेरी तबियत तो ठीक है..अभी तो बताया था.

समीरजी - मुझे आपकी तबियत ठीक नही लग रही है...बादशाह अकबर को एक बुद्धिमान आदमी चाहिये और उसके लिये आप ताऊ को भेजना चाहते हैं? अब आप ये बताओ कि ताऊ और बुद्धि का आपस मे कोई रिश्ता दिखा आज तक आपको?

भाटीयाजी - अरे समीरजी...आपकी बात तो सही है..पर मुझे ये मालूम है कि इन कामों मे लफ़्फ़ाजी की जरुरत होती है और ताऊ बचपन से मेरा दोस्त रहा है..इन कामों मे घणी मास्टरी है उसकी....पर इस नौकरी के लिये एक सर्टीफ़िकेट चाहिये ...यह दिखाने के लिये कि ताऊ की बुद्धि बहुत आर पार है...और आप समझ लो कि एक बार ताऊ ये नौकरी पा गया तो बादशाह सलामत का सारा माल ताऊ का होगा..फ़िर तो हम अपनी पिछली उधारी भी ताऊ से वसूल ही लेंगे.

समीरजी - एक मिनट सोचने दिजिये...हां एक काम करता हूं..मैं एक प्रमाणपत्र लिख देता हूं कि ताऊ मेरा चेला है और अब गुरु को गुड का गुड छोडकर खुद शक्कर हो गया है....और भी लिख देता हूं जमा कर..

भाटिया जी
- अरे वाह..क्या आईडिया है आपका? बस आप तो ये काम कर डालो और समझो कि ये काम होगया.

समीरलाल जी ने वो प्रमाणपत्र लिख दिया और इन दोनो ने मिलकर ताऊ को बादशाह अकबर के यहां नौकरी दिलाने की पक्की जुगाड भिडा दी. थोडे समय बाद साक्षात्कार के लिये लेटर आगया और नियत दिन भाटिया जी ने ताऊ को साथ लिया और बादशाह सलामत के दरबार मे पहुंच गये...

ताऊ जैसे ही बादशाह सलामत के सामने पहुंचा तो वहां के ठाठ बाट देखकर सिट्टी पिट्टी भूल गया.

शेष अगले भाग में.....

इब खुंटे पै पढो :-

ताऊ को नींद मे चलने की बीमारी थी.. एक दिन दोपहर मे ताऊ सोते सोते सपना देखने लाग ग्या कि वो स्कूल का इंसपेक्टर है सो वो नींद मे ही चलते हुये इंस्पेक्टर बन कर सीधा स्कूल मे घुस गया और एक क्लास म्ह पहुंच गया.

सब छात्र उधम मचा रहे थे, सो ताऊ ने घणी जोर से डांट मारके पूछ्या ..अर यो मानीटर कुण सै?

एक छोरा आया और बोल्या - जी मैं हूं मानीटर तो....

ताऊ घणी जोर से डाट लगाता हुआ बोल्या - रे कूंगर..तू कैसा मानीटर सै? ये सारे बालक आडै रोला करण लाग रे?

वो मानीटर बना लडका घबरा गया और बोल्या जी - जी नसपेटर साहब, मैं तो बाहर नीम के नीचे आली चाय की दुकान पर कप धोने का काम करता हूं...मानीटर छूट्टी गया तो बोला आज क्लास तू संभाल लिये। मैं तो इस लिये आगया था क्लास में.

यह सुनकर तो ताऊ घणे छोह (गुस्सा) म्ह आगया और चिल्लाकर मास्टर को बुलवाया और बोला - यो के हो रहा सै मास्टर? क्लास म्ह मानीटर भी नकली? और सारे बच्चे उधम कर रहे हैं?

वो मास्टर भी घबराया और बोल्या जी -- मैं तो मास्टर कोनी...मेरी तो स्कूल के बाहर नाई की दूकान सै....मास्टर जी को आज खेत मे पानी देना था सो मुझको कह गये कि आज क्लास तू संभाल लिये...शाम को सौ रपिये दे दूंगा.

अब तो ताऊ घणा ही छोह म्ह आगया और चिल्लाकर हैडमास्टर को बुलवाया और नु बोल्या - अरे हैड मास्टर यो के रासा रोप राख्या सै? मानीटर नकली, मास्टर नकली...ना तू तो यो बता, के यो के चाल्हा पाड राख्या सै तन्नै आडै?

इब ताऊ की डांट फ़टकार से वो भी डर गया और बोल्या - जी मैं आडै पास म्ह ही ढोर डांगरा का (पशुओं) डाक्टर सूं...हैड मास्टर तो अपनी ससुराल गया सै उसकी साली के ब्याह म्ह....और मन्नै न्यूं कह गया था कि चार पांच दिन स्कूल नै संभाल लिये.

इब यो जवाब सुनकै ताऊ बोल्या - हद हो गई भाई यो तो. आडै तो मानिटर नकली, मास्टर नकली और हेडमास्टर भी नकली , इन सारा नै सस्पेंड कर देता अभी की अभी, यदि मैं असली इंस्पेक्टर होता तो.

शुभम आर्य ने हासिल किया द्वितिय महाताऊश्री सम्मान

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम. ताऊ पहेली - ४२ जीतने के साथ ही वो चमत्कार हुआ जिसका ताऊ पहेली के आयोजकों को काफ़ी लंबे समय से ईंतजार था.

द्वितीय महाताऊ सम्मान विजेता : श्री शुभम आर्य


ताऊ पहेली -२१, २२ और २३ को लगातार जीतकर हेट्रीक लगाकर प्रथम महाताऊश्री सम्मान उडनतश्तरी ने हासिल किया था और उसके बाद अब ताऊ पहेली ४०, ४१ और ४२ को लगातार जीतकर हेट्रीक लगा कर द्वितिय महाताऊश्री सम्मान प्राप्त किया है शुभम आर्य ने. हार्दिक बधाई!!!

कल की ताऊ पहेली - ४२ का सही उत्तर है गांधी मेमोरियल म्युजियम मदुराई.


आईये अब आज के विजेताओं से आपको मिलवाते हैं.

"आज के विजेता गण"

 

प्रथम विजेता अंक १०१ बधाई

 

द्वितीय विजेता अंक १०० बधाई

 

तृतिय विजेता अंक ९९ बधाई

आईये अब अन्य विजेताओं से आपको मिलवाते हैं. सभी को हार्दिक बधाई.

 

   jitendra  अंक ९८ बधाई
  मीत  अंक ९७ बधाई
 पं.डी.के.शर्मा"वत्स"  अंक ९६ बधाई

प्रेमलता पांडे
  अंक ९५ बधाई
  Udan Tashtari  अंक ९४ बधाई
  संजय तिवारी ’संजू’  अंक ९३ बधाई
  अभिषेक ओझा  अंक ९२ बधाई
  दिलीप कवठेकर  अंक ५० बधाई

 

इसके अलावा निम्न महानुभावों ने भी इस पहेली अंक मे शामिल होकर हमारा उत्साह बढाया. जिसके लिये हम उनके हृदय से आभारी हैं.

श्री काजलकुमार, श्री अनिल पूसदकर, डा.रुपचंद्र शाश्त्री मयंक, श्री सुशील कुमार छोंक्कर, डा. जीतेंद्र बगरिया,
श्री अविनाश वाचस्पति, श्री हे प्रभु ये तेरा पथ, श्री राज भाटिया, श्री मुरारी पारीक, श्री विवेक रस्तोगी, श्री अनूप शुक्ल, श्री पंकज मिश्रा, सुश्री निर्मला कपिला और श्री निर्मला कपिला.

आप सभी का तहेदिल से आभार!





रामप्यारी के सवाल के विजेताओं से यहा मिलिये.

"रामप्यारी के ३० नंबर के सवाल का जवाब"


हाय…गुड मोर्निंग एवरी बडी…आई एम राम..की प्यारी… रामप्यारी.
हां तो अब जिन्होने सही जवाब दिये उन सबको दिये गये हैं ३० नम्बर…अगर भूल चूक हो तो खबर कर दिजियेगा..सही कर दिये जायेंगे.

मेरे द्वारा पूछे गये कल के सवाल का सही जवाब था ...सीता, मांडवी, उर्मिला और श्रुतकीर्ति

सबसे पहला सही जवाब आया दर्पण साह अंकल का, फ़िर वरुण जायसवाल अंकल, और उसके बाद सही जवाब दिया महक आंटी ने. फ़िर लुधियाना वाले पंडितजी यानि प.डी.के.शर्मा वत्स अंकल आये.

फ़िर मीत अंकल, फ़िर संजय बेंगानी अंकल, उसके बाद सही जवाब दिया प्रेमलता आंटी ने, और उसके बाद अंतर सोहिल अंकल आये. संजय तिवारी "संजू अंकल और उसके साथ ही सही जवाब के साथ प्रथम महाताऊ उडनतश्तरी अंकल आये.

उसके बाद आज के द्वितिय महाताऊ शुभम भैया भी सही जवाब के साथ आये.और उसके बाद आये अभिषेक ओझा अंकल
फ़िर मोहन वशिष्ठ अंकल और सबसे आखिर मे आये दिलिप कवठेकर अंकल.

आप सबके खाते में तीस तीस नम्बर मैने जमा करवा दिये हैं.

अब रामप्यारी की तरफ़ से रामराम…अगले शनीवार फ़िर से यही मिलेंगें. वैसे आजकल शाम ६ बजे मैं ताऊजी डाट काम पर रोज ही मिल जाती हूं. ..और हां आपका आज से शुरु होने वाला सप्ताह शुभ हो.



हीरू और पीरू यानि हीरामन और पीटर की मनोरंजक टिपणियां यहां पढिये.

"आपकी सेवा में हीरू और पीरु"


अरे हीरु भिया..कईं हो, कईं करि रिया हो?

अरे पीरू भिया कईं नी करा हो…बस ई टिप्पणी देखी रिया था तम भी देखि लो.

लावो दिखाओ म्हारै भी..

  Blogger राज भाटिय़ा said...

अरे ताऊ इतनी आसान पहेली पुछ रहे हो? अरे इसे तो देख कर अंधा भी बता दे,इस मे कोन सी बडी बात है, कभी जो दिल्ली ना भी गया हो वो भी इसे पहचान जाये, भाई इस के आस्पास जामुन के पेड बहुत लगे है ओर इसी भवन के नाम से एक सदक भी तो है, अब भी नही समझे तो जाओ मै भी नही बताता, भाई मै कभी स्कुल मै पास नही हुया तो ताऊ की कलास मै पास हो कर अपना रिकार्ड क्यो खराब करूं.राम राम जबाब सही तो मुझे दिख रहा है.

October 3, 2009 1:11 PM

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  Blogger काजल कुमार Kajal Kumar said...

देखो भई रामप्यारी, मुझे एक का नाम तो पता है 'सीता' और मेरे ख़्याल से यह अकेला नाम ही सवा लाख के बराबर है फिर तुम बाकी 3 नाम भी क्यों जानना चाहती हो? इनके पतियों के नाम पूछतीं तो भी मुझ नालायक के लिए कोई बात होती.

ख़ैर मर्ज़ी तुम्हारी मैं तो तुम्हें समझा ही सकता हूं...वैसे ज़िद ही करती हो तो ज़रा रूको अभी कुछ ही देर में कुछ भक्त लोग आते ही होंगे, बाक़ी नाम में बताने. और बाकी बचे, गूगल से ढूंढ तुम्हारे लिए लाते ही होंगे.
मुझे 30 नहीं तो दो-चार नंबर तो दे ही देना, ग्रेस मार्क्स...
जय राम जी की.

October 3, 2009 10:26 AM

  Blogger seema gupta said...

रामप्यारी ये कैसा है सवाल.....
आज क्या है तुम्हरे मन में
कौन सा मचा रही हो बवाल.....
हा हा हा हा हा
regards

October 3, 2009 9:34 AM

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चलो पीरु भिया थारै जत्रा मे घुमा लाऊं हो…हियां बैठ न कईं करोगा…

हां चलो हीरू भिया…हूं भी कुछ महाराष्ट्रियण खाणों खाणे को इच्छूक हुई रियो हूं..चलो…




अच्छा अब नमस्ते.सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. ताऊ पहेली – 42 का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया. अगली पहेली मे अगले शनिवार सुबह आठ बजे आपसे फ़िर मिलेंगे तब तक के लिये नमस्कार.

ताऊ पहेली - 42

रामप्यारी का सवाल आज शनिवार सुबह 8:26 पर प्रकाशित किया गया है.


प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम.

ताऊ पहेली अंक 42 में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. क्ल्यु हमेशा की तरह रामप्यारी के ब्लाग से मिलेंगे. रामप्यारी के ब्लाग पर पहला क्ल्यु 11:30 बजे और दुसरा 2:30 बजे मिलेगा. रामप्यारी का जवाब अलग टिपणी में देवें. तो आईये अब आज की पहेली की तरफ़ चलते हैं.

यह कौन सी जगह है?


ताऊ पहेली का प्रकाशन हर शनिवार सुबह आठ बजे होगा. ताऊ पहेली के जवाब देने का समय कल रविवार दोपहर १२:०० बजे तक है. इसके बाद आने वाले सही जवाबों को अधिकतम ५० अंक ही दिये जा सकेंगे

अब रामप्यारी का विशेष बोनस सवाल : - ३० अंक के लिये.

rampyari-tdc-1_thumb[2] हाय एवरी बडी..वैरी गुड मार्निंग फ़्रोम रामप्यारी.

विनम्र निवेदन : - कृपया मेरे सवाल का जवाब अलग टीपणी मे देवें. बडी मेहरवानी होगी. एक ही टिपणी मे दोनो जवाब मे से एक सही होने पर प्रकाशित नही की जा सकती और इससे आप कन्फ़्युजिया सकते हैं कि आपकी टिपणी रुकी हुई है. तो सही होगी?

आज का सवाल :-

रामप्यारी का सवाल
महाराज दशरथ की चारों पुत्रवधुओं के नाम बताईये।


अब आप मेरे ब्लाग पर पहली हिंट की पोस्ट पढ सकते हैं 11:30 बजे और दुसरी 2:30 बजे.

अब रामप्यारी की रामराम.


इस अंक के आयोजक हैं ताऊ रामपुरिया और सु,अल्पना वर्मा



नोट : यह पहेली प्रतियोगिता पुर्णत:मनोरंजन, शिक्षा और ज्ञानवर्धन के लिये है. इसमे किसी भी तरह के नगद या अन्य तरह के पुरुस्कार नही दिये जाते हैं. सिर्फ़ सोहाद्र और उत्साह वर्धन के लिये प्रमाणपत्र एवम उपाधियां दी जाती हैं. किसी भी तरह की विवादास्पद परिस्थितियों मे आयोजकों का फ़ैसला ही अंतिम फ़ैसला होगा. एवम इस पहेली प्रतियोगिता में आयोजकों के अलावा कोई भी भाग ले सकता है.


मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम
मिस.रामप्यारी का ब्लाग

 

नोट : – ताऊजी डाट काम  पर हर शाम 6:00 बजे नई पहेली प्रकाशित होती हैं. यहा से जाये।

परिचयनामा : सुश्री प्रेमलता पांडे

आज हम परिचयनामा में मिलवा रहे हैं सुश्री प्रेमलता पांडे से जो कि उच्च शिक्षित एवम अध्यापन कार्य से लंबे समय से जुडी हुई हैं. जो सादा जीवन उच्च विचार में यकीन रखती हैं. तीर्थ-यात्रा, फ़ोटोग्राफ़ी एवम आध्यात्मिक सोच उनके रुचि के विषय हैं. उनके ब्लाग पसंद और ’मन की बात’ पर आप उन्हे पढते ही रहे हैं. आईये हम उनसे हुई ताऊ की बातचीत से आपको भी रुबरु करवाते हैं.

सुश्री प्रेमलता पांडे


ताऊ - प्रेमलताजी, ताऊ डाट इन के परिचयनामा में आपका स्वागत है. सबसे पहले तो आप ये बताईये कि आप कहां से है और क्या करती हैं?
प्रेमलता जी - मैं पिछले छ्ब्बीस सालों से दिल्ली में हूं और एक सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल मे अध्यापन कार्य करती हूं.

ताऊ - अब आप ये बताईये कि आपके शौक क्या हैं?
प्रेमलता जी - विशेष शौक में मुझे पढ़ना-लिखना बहुत पसंद है और तीर्थाटन मे भी उतनी ही रुचि है.
ताऊ - आपको सख्त ना पसंद क्या है?
प्रेमलता जी - बनावटीपन और फ़रेब।
ताऊ - आपकी विशेष पसंद क्या है?
प्रेमलता जी - यों तो पसंद का कोई पैमाना नही होता पर आप अगर विशेष पसंद ही पूछ रहे हैं तो "सादगी और सच्चाई" मेरी विशेष पसंद हैं.

ताऊ - आप हमारे पाठको से क्या कहना चाहेंगी?
प्रेमलता जी - मेरा मानना है कि आज का पाठक बहुत सुधी है फिर उनसे क्या कहूं?
ताऊ - हमने सुना है कि आपने एक बार स्कूल की छुट्टी वाली घंटी बजाकर स्कूल की छुट्टी करवा दी थी? क्या यह सच है?
प्रेमलता जी - हां जब आपको पता चल ही चुका है तो ना कैसे करूं? घटना तो सही है.
ताऊ - पूरी बात बताईये कि हुआ क्या था?
प्रेमलता जी - यह घटना है जब हम ११वीं कक्षा में पढ़ते समय राजनीति-विज्ञान से पहला सामना हुआ था, बड़ा जोश
था। तभी हमारे शहर में डॉ० फ़खरुद्दीन-अहमद आये थे जो उस समय कृषि-मंत्री थे।
ताऊ - जी, आगे बताईये.
प्रेमलता जी - विद्यालय के ज्यादातर अध्यापक उनकी मिटिंग सुनने चले गए। हम
बच्चे यूँ ही घूम रहे थे तभी सबने मिलकर योजना बनायी कि हम भी उन्हें सुनने चलते हैं। बस आव देखा न ताव घंटी बजा दी स्कूल की। छुट्टी करके सब भाग गए सभा में।
ताऊ : फ़िर प्रिंसिपल महोदया ने अगले दिन तो खूब पूजा पाठ की होगी?
प्रेमलता जी - हां, अगले दिन प्रिंसिपल महोदया ने अपने कमरे में बुलाया और पूछी असलियत।
माता-पिता की सच बोलने की सीख काम आयी। सब सच बता दिया। प्रिंसीपल ने डांटा नहीं बस इतना कहा- इतन मन था तो किसी टीचर से क्यों नहीं कहा? बहुत अच्छी बात है किसी के विचार जानना। पर इस तरह नहीं जाना चाहिए था। हम सभी बच्चों ने माफ़ी मांगी और वो मुस्करा गयीं। महान थीं डॉ० पुष्पा शर्मा- हमारी प्रिंसीपल।
ताऊ - आप मूलत कहां से हैं?
प्रेमलता जी - जन्म तो दिल्ली में हुआ लेकिन बचपन पैतृक-स्थान अनूपशहर में बीता। अनूपशहर क़स्बा गंगाजी के किनारे बसा जि० बुलंदशहर उ०प्र० में है।
ताऊ - संयुक्त परिवार के बारे में आप क्या कहना चाहेंगी?
प्रेमलता जी - देखिये परिवार शब्द ही संयुक्तता का परिचायक है। पर सामंज्स्य न हो तो फिर
संयुक्त का दिखावा न हो। अलग रहकर भी संयुक्त्ता बनायी रखी जा सकती है। परिवार प्रेम और त्याग का धाम है स्वार्थ का नहीं एक छत हो या न हो।
ताऊ - आप ब्लागिंग का भविष्य कैसा देखते हैं?
प्रेमलता जी - मुझे यह स्वर्णिम और लाभप्रद दिखाई दे रहा है !
ताऊ - आप कब से ब्लागिंग मे हैं?
प्रेमलता जी - अप्रैल २००६ से ।
ताऊ - आपका ब्लागिंग मे आना कैसे हुआ? और कैसा रहा ये अनुभव?
प्रेमलता जी - अन्तर्जाल पर हिंदी खोजते-खोजते हिंदी रचनाएँ पढना शुरु किया। फिर ’काव्यालय’ पत्रिका में अपनी कविताएँ भेजी जहाँ कविताएँ प्रकाशित तो नहीं हुयीं पर वहाँ से ’अनुभूति’ अन्तर्जाल-पत्रिका का पता चला जिसमें तीन संक्षेपक प्रकाशित हुए।
ताऊ - जी, आगे क्या हुआ?
प्रेमलता जी - फिर रवि भाई/ श्री रविंद्र श्रीवास्तव जी के ’रचनाकार’में ’परिवर्तन’ शीर्षक से मेरी एक कविता छपी और रविभाई से ब्लॉग लिखने की प्रेरणा मिली। तकनीकी ज्ञान बहुत कम होने के कारण श्री जितेंद्र चौधरी
जी की सहायता से ब्लॉग ’मन की बात’ बनाया और लेखन किया। बाद में वर्डप्रैस पर ’पसंद’ बना लिया । अब इसपर ज़्यादा सक्रियता रहती है।
ताऊ - आपके लेखन की दिशा किस और हैं?
प्रेमलता जी - जो अनुभव करती हूँ वही लिख देती हूँ। मातृ-भाषा से गहरा लगाव है।
ताऊ - आपकी राजनैतिक रुचि और विचार बतायें?
प्रेमलता जी - सरकारी कर्मचारी रिटायरर्मेंट के बाद रुचि बनाता है। (हंसते हुये...) जिसकी सरकार उसी के मुलाजिम। अपना वोट भी कभी डाल पाते हैं और कभी नहीं भी क्योंकि हमेशा एलेक्शन-ड्यूटी पर होते हैं।
ताऊ - कुछ अपने स्वभाव के बारे मे बताईये.
प्रेमलता जी - सादा। झूठ और बेईमानी सहन नहीं।( अध्यापिका-स्वभाव)
ताऊ - कैसा जीवन पसंद है?
प्रेमलता जी - सरल जीवन पसंद है।
ताऊ - कौन सी पुस्तक आपको विशेष पसंद है?
प्रेमलता जी - श्रीमदभागवत-गीता को जीवन की कला सिखाने वाला सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ मानती हूँ, मात्र धार्मिक पुस्तक नहीं।
ताऊ - जीवन का कोई मूलमंत्र आपके हिसाब से?
प्रेमलता जी - सेवा को पूजा मानती हूँ और बच्चों, माता-पिता या वृद्धजन को भगवान। दंभ,झूठ और ग़लत बात घर, बाहर और नौकरी कहीं पर भी पसंद नहीं करती। कई बार परेशानी होती
है पर अन्त में सब सही को ही सही कहते हैं। चाहे मन में कहें। (एक सौम्य हंसी के साथ...)
ताऊ - ताऊ पहेली के बारे क्या कहना चाहेंगी?
प्रेमलता जी - शिक्षिका की भाषा में- ’चहुँमुखी ज्ञान के विकास की नींव’( इमारत बननी बाकी है) ।
ताऊ - ताऊ कौन? क्या कहेंगी?
प्रेमलता जी - आदरणीय, विद्वान और मातृ-भाषा-प्रेमी।
ताऊ - अगर आपको शिक्षा मंत्री बना दिया जाये तो आप क्या करना चाहेंगी?
प्रेमलता जी - सभी के लिए समान शिक्षा-व्यवस्था। सरकारी और प्रायवेट सब एक और शिक्षा का उद्देश्य सनद नहीं बल्कि मानवीयता की जड़े मजबूत करना।
ताऊ - आप शिक्षण से ताल्लुक रखती हैं...आप आज के समय में विशेषकर पालकों से क्या कहना चाहेंगी.
प्रेमलता जी - पालकों! बच्चों को अपना खिलौना न समझें वे भी जानदार और दिमागदार है।
बालकों! - माता-पिता और बड़ों का आदर और सेवा करें यही आराधन है और पूजा है। अनुभव से सीखा ज्ञान शुद्ध होता है।


तो ये थी हमारी आज की मेहमान सुश्री प्रेमलता जी पांडे. आपको इनसे मिलकर कैसा लगा? अवश्य बताईयेगा.

तीन बुलाये तेरह आये दे दाल में पानी

असल में बच्चों के संस्कार और अच्छी बुरी आदतों को तय करने मे सबसे ज्यादा घर का माहोल ही जिम्मेदार है. बच्चे सबसे ज्यादा अपने माता-पिता का ही अनुसरण करते हैं. पिछले सप्ताह एक बहुत ही मजेदार घटना हुई जो कि बिल्कुल सच्ची है. घटना जितनी मजेदार लगती है उससे कहीं ज्यादा हमको सोचने पर विवश करती है.

हमारे एक मित्र हैं..नाम? रहने दिजिये, नाम में क्या रखा है? कभी मौका मिला तो आपको रुबरु ही मिलवा देंगे. हम दशहरा मिलन के लिये उनके घर गये थे. बात चीत शुरु हुई तो उन्होने अपनी पीडा हमको कह सुनाई. अब उनकी पीडा यह थी कि पहले वो कभी कभार दो घूंट सोमपान कर लिया करते थे पर आजकल चार घूंट (पैग) के बाद भी सुरुर नही आता.

हमने कहा - तुम्हारा माथा खराब है ऐसा नही हो सकता और इस उम्र मे इतना अधिक सुरापान अच्छा भी नही है. वो जब बोले कि नही मैं सच कह रहा हूं ताऊ. तब हमने दिमाग दौडाया. यह तो पक्का था कि कुछ गड्बड जरुर है पर हमारे यहां और सब चीजों मे मिलावट हो सकती है पर इस तरह की मिलावट असंभव है कि नशा ही नही आये. बल्कि यहां तो तेज नशे के नाम पर सुरा को जहरीला बनाने मे भी नही हिचकते.

इतनी देर मे उनका नौकर रामसिंह चाय लेकर आगया.... रामसिंह हमारे मित्र का काफ़ी पुराना और विश्वासपात्र नौकर है. उसने नमस्ते की..हमने उसके हालचाल पूछे..... और उससे यूं ही पूछ बैठे कि रामसिंह ये क्या चक्कर है?

रामसिंह शायद सेठजी की नशा नही होने वाली बात सुन चुका था..सो उसकी भाव भंगिमा देखने लायक थी. हमने उसको परेशान देख कर पूछा कि रामसिंह सही सही बताओ...

रामसिंह बोला - ताऊजी, आप भी कैसी बाते करते हो? पीते सेठजी हैं और आप पूछ मुझसे रहे हैं.


तब हमने कहा कि - रामसिंह तुम्हारे सेठजी को तो तुम जानते ही हो? वो पुलिस भी बुला सकते हैं..अत: सही सही बताओ कि सेठजी को नशा क्युं नही आता?

पुलिस का नाम सुनकर रामसिंह सकपकाया और बोल पडा - "३ बुलाये १३ आये दे दाल मे पानी".

हमने पूछा - रामसिंह पहेलियां मत बुझाओ..वो हमारा काम है. सीधी तरह से सच सच बताओ.

वो बोला - ताऊजी, अब मैं बताऊंगा तो भी मैं ही फ़सूंगा और नही बताऊंगा तो भी. यानि चाहे खरबूजा छुरी पर गिरे या छुरी खरबूजे पर गिरे..पर मेरी कोई गलती नही है.


हमने कहा - रामसिंह बिल्कुल सही सही बताओ..तुमको कोई कुछ नही कहेगा.

रामसिंह बोला - ताऊजी अब मैं क्या बताऊ कि सेठजी बोतल घर लाकर रखते हैं और पीछे से बबलू भैया ( सेठजी के १५ वर्षिय सपूत) और उनके दोस्त उसमे से खींच जाते हैं और लेवल मिलाने के लिये उतना ही पानी मिला देते हैं.अब सेठजी को खाली पानी से नशा कैसे होगा?

रामसिंह की बाते सुनकर हंसी भी आई. और हम यह सोचने पर मजबूर भी हुये कि इसमे बबलू की कितनी गलती है और सेठजी की कितनी? जिस किसी के साथ भी ऐसा कुछ हो रहा हो तो ध्यान देने वाली बात है, क्योंकि अब बबलू बडा हो रहा है.

बस भाई इब आज की रामराम.

इब खूंटे पै पढो:-


एक दिन आशीष खंडेलवाल जी ने समीरलाल जी को फ़ोन लगाया और पूछा कि आप ये इतनी सारी पहेलियां कैसे जीत लेते हो? समीरजी ने जवाब दिया कि मैं रामप्यारी का खयाल रखता हूं और रामप्यारी मेरा खयाल रखती है.

बात आशीष जी की समझ मे आगई और उन्होने रामप्यारी के लिये मुंबई से एक खिलौना रेलगाड़ी खरीद कर भिजवाई. खिलौना पाकर रामप्यारी बडी खुश हुई और वो उस रेलगाडी को लेकर अपने कमरे मे चली गई.

ताई कुछ देर बाद जब रामप्यारी के कमरे में गयी तो देखा कि रामप्यारी उस खिलौना रेलगाड़ी से खेल रही है ..और जोर जोर से आवाज लगा रही है - ... जिस उल्लू के पट्ठे को उतरना है वो उतर जाए, और जिस उल्लू के पट्ठे को चढ़ना है वो चढ़ जाए. जल्दी फ़टाफ़ट...इब यो रेलगाड़ी दो मिनट से ज्यादा इत नहीं रुकेगी ......

रामप्यारी जैसी छोटी बच्ची के मुंह से यह भाषा सुनकर ताई को गुस्सा आगया और उसने रामप्यारी के कान तले यानि कनपटी पर दो इनिशियल एडवांटेज (तमाचे) लगाए और फिर कभी इस तरह से न बोलने की चेतावनी दी.. और ताऊ को बुलाकर रामप्यारी की शिकायत कर दी.

ताऊ ने रामप्यारी को डांट लगाई और बोला - मैं दो घंटे के लिए बाजार जा रहा हूं। तब तक तुम सिर्फ पढ़ोगी, समझी ना. एंड नो बदमाशी....और रामप्यारी बेचारी चुपचाप पढने बैठ गई.

ताऊ जब बाजार से लौटकर आया तो देखा कि रामप्यारी तो किसी शरीफ़ बच्ची की तरह पढने मे लगी हुई है तो ताऊ का दिल पसीज गया और उसने रामप्यारी को खिलौना रेलगाडी से खेलने की इजाजत देदी.

अबकी बार रामप्यारी कुछ यूं आवाजे लगा कर खेल रही थी - जिस उल्लू के पट्ठे को उतरना है वो उतर जाए, जिस उल्लू के पट्ठे को चढ़ना है वो चढ़ जाए । रेलगाड़ी पहले ही एक उल्लू के पट्ठे की वजह से दो घंटे लेट हो चुकी है .....

"कल परिचयनामा मे मिलिये"

कल गुरुवार १ अक्टूबर को शाम ३:३३ बजे परिचयनामा मे मिलिये सुश्री प्रेमलता पांडे से.

ताऊ - आप शिक्षण से ताल्लुक रखती हैं...आप आज के समय में विशेषकर पालकों से क्या कहना चाहेंगी?

प्रेमलता जी - पालकों! बच्चों को अपना खिलौना न समझें वे भी जानदार और दिमागदार है। बालकों! - माता-पिता और बड़ों का आदर और सेवा करें यही आराधन है और पूजा है। अनुभव से सीखा ज्ञान शुद्ध होता है।

आज तू तेल बेच, मैं शक्कर बेचूंगा !

ताऊ को रामप्यारी फ़िल्म्स की ताऊ की शोले में सांभा का रोल मिला था. उसके बदले मे मेहनताना भी अच्छा मिल रहा था. पता नही क्या पंगे हुये कि रामप्यारी मैम ने अचानक फ़िल्म बंद करदी और सब बेकार होगये . गब्बर कनाडा निकल लिया, पर सांभा सबसे ज्यादा तकलीफ़ मे आगया..बेरोजगारी से बडी तकलीफ़ और क्या हो सकती है?

ताऊ फ़िर पहुंच लिया पहले की तरह राज भाटिया जी के पास. राज भाटिया जी बोले - ताऊ तेरे को नगद रुपये पिस्से तो मैं एक कौडी भी नही दूंगा पर तू और मैं एक ही गाम के हैं सो क्या करूं..मुझे तेरी मदद तो करनी ही पडेगी.

भाटिया जी ने तरस खाकर ताऊ को एक किराने की दूकान "ताऊ लूट खसोट स्टोर" खुलवा दिया. वहीं पर पहले से रतन सिंह शेखावत ने एक किराने की दूकान खोल रखी थी. सो उनको जैसे ही मालूम पडा उन्होने कंपिटशन में शक्कर के भाव ३० रुपये किलो से घटाकर २५ रुपये किलो कर दिये. जिससे ताऊ अपनी दूकान बंद करके भाग जाय.



ताऊ ने शेखावत जी को समझाया कि देखो आजकल जमाना कंपीटीशन का नही है बल्कि मिल्जुलकर डकैती मेरा मतलब दूकानदारी करने का है. मै ताऊ मेनेजमैंट युनिवर्सिटी का पास आऊट हूं. मेरी सलाह से दूकानदारी करोगे तो बहुत जल्दी दूकान की जगह शो रूम खडा कर लोगे.

शेखावत जी बोले - ताऊ इसमे मिलजुलकर भी क्या होगा?

ताऊ बोला - वो मेरे उपर छोडिये...एक दिन आप शक्कर बेचिये और मैं तेल बेचूं...?? और अपनी स्कीम समझा दी.

अब शेखावत जी ने अपनी दूकान पर बोर्ड लगा दिया कि हमारे यहां शक्कर २० रुपये किलो मिलती है. और ताऊ ने
अपने यहां बोर्ड पर लिख दिया की सोयाबीन का तेल ३० रु, किलो मिलता है.

अब शक्कर का २० रुपये किलो का भाव देखते ही सब गाहक शेखावत जी की दूकान पर टूट पडे...शेखावत जी ने ग्राहकों को कह दिया कि मेरे पास तो शक्कर का स्टाक खत्म हो गया. अब कल आयेगी. ज्यादा जरुरी हो तो
सामने ताऊ की दूकान से ले लो.

अब जिनको जरुरी मे शक्कर चाहिये थी वो ताऊ की दूकान पर आये ..और पूछने लगे - ताऊ शक्कर क्या भाव?
ताऊ बोला - भाई घणी सस्ती करदी आज तो शक्कर..सिर्फ़ ४० रुपिये की एक किलो.



ग्राहक नाराज होकर बोले - ताऊ ये तो लूट है...शेखावत जी के यहां देखिये ..शक्कर २० रुपिये किलो का भाव बोर्ड पर लिखा है.

ताऊ बोला - अरे बावलीबूचों..जब मेरी शक्कर खत्म हो जायेगी तब मैं भी २० रुपिये किलो का ही भाव बोर्ड पर लिखूंगा..पर अभी लेनी हो तो ४० रुपिये किलो लो वर्ना अपना रास्ता नापो.

अब ग्राहक मजबूरी मे क्या करते..बेचारों ने ४० रु. किलो में शक्कर खरीद ली. और ताऊ के बोर्ड पर सोयाबीन तेल का भाव ३० रु. किलो देखकर तेल भी मांगने लगे.

ताऊ बोला - भाईयो, तेल तो बस अभी अभी खत्म हुआ है . अब कल आजायेगा कल लेजाना. और ज्यादा ही जरुरी हो तो सामने शेखावत जी की दूकान से लेले.

अब ग्राहक तेल के लिये शेखावत जी की दूकान पर पहुंच गये. और तेल का भाव पूछा.

शेखावत जी बोले- भाई तेल ६५ रु.किलो का भाव है.

ग्राहक बोला - सामने ताऊ ने तो देखो ३० रुपये किलो मे बेचने का बोर्ड लगा रखा है.

शेखावत जी बोले - भाई आज ताऊ का तेल खत्म है और मेरी शक्कर खत्म है सो अब तेल तो ६५ रु. किलो ही लेना पडेगा.

बस दोनों की मिली भगत से दोनों का तेल और शक्कर दोनों कि दूकान पर एक साथ कभी नही पाया गया. और दोनों की पांचों ऊंगलियां घी मे और सर कडाही में.