ताऊ पहेली - 52

प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम.

ताऊ पहेली अंक 52 में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. पिछले अंक से कुछ सामान्य से बदलाव हुये हैं. पहला बदलाव तो यह है कि रामप्यारी यहां की बजाए अपना सवाल सुबह 8:00 बजे ही ताऊजी डाट काम पर पूछेगी. अगर आप उसके सवाल का जवाब देना चाहे तों यहां जाकर जवाब दे सकते हैं और सही जवाब देकर 30 नंबर प्राप्त कर सकते हैं.

दूसरा और महत्वपुर्ण बदलाव यह है कि अब से रामप्यारी का हिंट सिर्फ़ एक बार ही दिया जायेगा जो कि सुबह 10:00 बजे ही उसके ब्लाग पर मिलेगा. बाकी सभी नियम कानून पहले जैसे ही हैं.


यह कौन सी जगह है?


ताऊ पहेली का प्रकाशन हर शनिवार सुबह आठ बजे होगा. ताऊ पहेली के जवाब देने का समय कल रविवार दोपहर १२:०० बजे तक है. इसके बाद आने वाले सही जवाबों को अधिकतम ५० अंक ही दिये जा सकेंगे


अब आप रामप्यारी के ब्लाग पर हिंट की पोस्ट सुबह दस बजे ही पढ सकते हैं! दूसरा हिंट नही दिया जायेगा.


इस अंक के आयोजक हैं ताऊ रामपुरिया और सु,अल्पना वर्मा



नोट : यह पहेली प्रतियोगिता पुर्णत:मनोरंजन, शिक्षा और ज्ञानवर्धन के लिये है. इसमे किसी भी तरह के नगद या अन्य तरह के पुरुस्कार नही दिये जाते हैं. सिर्फ़ सोहाद्र और उत्साह वर्धन के लिये प्रमाणपत्र एवम उपाधियां दी जाती हैं. किसी भी तरह की विवादास्पद परिस्थितियों मे आयोजकों का फ़ैसला ही अंतिम फ़ैसला होगा. एवम इस पहेली प्रतियोगिता में आयोजकों के अलावा कोई भी भाग ले सकता है.


मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम
मिस.रामप्यारी का ब्लाग

 

नोट : – ताऊजी डाट काम  पर हर सुबह 8:00 बजे और शाम 6:00 बजे नई पहेली प्रकाशित होती हैं. यहा से जाये।

अरे सत्यानाशी ताऊ..मैने तेरा क्या बिगाडा था?

इस दुनियां के दस्तूर बडे निराले हैं. असल मे जो खतरनाक दिखाई देता है वो खतरनाक नही होता. और जो शरीफ़ और नेक दिल दिखाई देता है वो उतना ही शातिर बदमाश और जानलेवा सिद्ध होता है. ये अनेकों बार की आजमाई हुई बात है.

चम्पा और रूपा जंगल की तरफ़ जाते हुये


अक्सर चंपा गधेडी को ईंधन वगैरह लेने जंगल जाना पडता था. उसके श्रीमान संतूनारायण जी गधे तो कमाने के लिये परदेश में ही ज्यादा रहा करते थे. चम्पा बहुत समझदार तथा बुद्धिमान शरीफ़ खातून थी. गांव गली के शोहदे भाभीजी ..भाभीजी..कह कर उससे बात जरुर लिया करते थे..पर उनको मालूम था कि चम्पा भाभी ने एक सीमा रेखा बना रखी थी अपने और दूसरों के बीच. उसका उल्लंघन एक बार अकडू गधे ने करने की कोशीश की थी. तब उस अकडू गधे की क्या दुर्गति चम्पा भाभी ने की थी वो किस्सा हम आपको बाद मे कभी सुनायेंगे. आज तो यह कहानी सुनाने का मकसद हमारा कुछ और है.

अब चम्पा भाभी की एक कन्या भी थी रुपकला. जिसे प्यार से सभी रुपा कह कर बुलाया करते थे. कुदरत की नायाब रचना थी रूपा. मां की तरह ही रुपा भी गुणों के अलावा रुप रंग मे भी आला दर्जे की थी. धीरे धीरे बचपन विदा ले रहा था और जवानी का आगमन होने लगा था. और यही कारण था कि चम्पा भाभी उसको कभी भी अपनी नजरों से ओझल नही होने देती थी. रुपा लाख समझदार हो पर इस उम्र मे बचपना नादानी और शोखियां तो स्वाभाविक तौर पर लडकियों मे होती ही है.

मोहल्ले के लौंडे लपाडे यानि किश्शू टाईप के लौंडे गधे तो घर के आसपास चक्कर काटा ही करते थे. कोई मौका ही ढूंढते रहते थे कि चम्पा भाभी उनको कोई काम बतादे और वो उसी बहाने रुपा से दो बातें ही करलें. और इनमे भी किश्शू गधे ने अपने थोबडे पर शेर का नकली चेहरा लगा रखा था.. लोगों को और खासकर जवान गधियों को आकर्षित और इंप्रेस करने के लिये..और गांव वालों मे एक दो लोग उसके जैसा जहीन किसी को नही मानते थे..क्योंकि उन मुर्खों के बीच एक दो शब्द अंग्रेजी के भी झाड लिया करता था. यानि अंधों मे काणा राजा था.. पर था निहायत और खालिश गधेडा ही.. पर चम्पा भाभी ने दुनियां देखी थी. इन लौंडो की क्या बिसात कि रुपकला की तरफ़ नजर भी उठा कर देख ले.

रुपा गधेडी पर डोरे डालने को शेर बना किश्शू गधेडा


रोज की तरह दोनों मां बेटी एक दिन जंगल जारही थी. कुछ ही समय बाद बरसात का मौसम शुरु होने वाला था सो चूल्हे मे जलाने को लकडियां इक्कठी करने नियमित जंगल जाना पडता था. और गांव के दूसरे गधे गधेडियां और उनके बाल बच्चे भी जंगल जाया करते थे. छोटे छोटे समूह मे सब अपनी लकडियां इक्कठी करके शाम तक लौट आते थे.

रुपकला और चम्पा के आसपास भी झुंड मे दूसरे गधेडे होते थे. अक्सर रुपकला को लकडी बीनने मे मदद कर देते थे. अगर कोई कांटा वगैरह रुपा गधेडी को लग जाये तो सब आंख बिछाये तैयार खडे रहते थे. बल्कि किश्शू टाईप के गधेडे तो भगवान से प्रार्थना ही करते रहते थे कि हे भगवान कब रुपा को कांटा चुभे और कब हम उसका कांटा निकालने के बहाने उसके नर्म नर्म और नाजुक पैरो को छू सके और अगर छूने का सौभाग्य ना मिले तो जब वो आय..आय करती हुई कांटा निकलवायेगी तब एकटक उसके पांवो को निहार कर ही धन्य हो सकें.

अब अचानक रुपा के जोर से चिल्लाने की आवाज आई...अरे कोई बचाईयो रे..मर गई..मम्मी..जल्दी आवो...तुरत फ़ुरत सब उधर भागे...देखा रुपा एक गहरे अंधे कुयें मे गिरी हुई है और जोर जोर से चिल्ला रही है.

उपर रुपकला ..हाय मेरी बच्ची..अब क्या करुं..अरे कोई निकालो इसको...का विलाप कर रही थी. कुयें के चारों तरफ़ भीड लग गई...शोहदे सांतवना देने लगे..अरे भाभीजी आप चिंता मत करिये...रुपा को कुछ नही होगा...हम सब हैं ना..मिल कर निकाल लेंगे उसको..इत्यादि..इत्यादि...

अब शोहदों की तो बांछे खिली हुई थी. जाने कितने दिनों की मुराद पूरी होगी? सब के मन मे लड्डू फ़ूट रहे थे..कि हाय कैसा लगेगा जब..रुपकला का हाथ पकडकर कुयें से बाहर खींचेगे? और सब बाहर निकालने की योजना बनाने लगे...सबके मन मे लड्डू फ़ूट रहे थे कि क्या पता किस पर रुपकला रीझ जाये और उसी की जीवन संगिनी बनने का निश्चय करले?

हर लौंडा अपनी भरसक योजना बना रहा था. अब ये राज तो बाद मे जाहिर हुआ कि इस अंधे कुये पर घास फ़ूस तो किश्शू गधे ने ही डलवाया था कि किसी तरह चम्पा भाभी और रुपकला को प्रभावित कर सके. बेचारा अभी तक कुंवारा बैठा था रुपकला की आस मे. हाय रे अंधे इश्क.....जो ना करवाये वो कम....इश्क तो कहते हैं कि अच्छे भले को पपलू बनवा देता है...तो किश्शू गधेडे की क्या औकात?

कुयें पर चारों तरफ़ भीड लगी थी. और सब अपना अपना सर्वश्रेष्ठ मत जाहिर कर रहे थे कि अचानक शेर के दहाडने की आवाज आई. बस सारे गधे और गधेडियां दुल्लत्ती झाडते हुये भाग लिये वहां से.

शेर के डर से भागे हुये गधों ने गांव के पास आकर सांस ली!


किश्शू गधेडा जो कुंये मे झुककर अपना हाथ रुपकला की तरफ़ बढा रहा था और उसको उचक कर अपना हाथ पकडने को कह रहा था ..वो भी भागने की तैयारी करने लगा...शेर धीरे धीरे नजदीक आता जा रहा था. चम्पा भाभी ने किश्शू से रुकने की बहुत गुजारिश की..पर आज किश्शू ने सिद्ध कर दिया कि लैला मजनूं का जमाना और रहा होगा..आज के जमाने मे..जान इश्क से उपर है. और सही भी है..जान बचेगी तो इश्क लडाने वालियां और बहुत मिल जायेंगी...सो किश्शू भी भाग लिया. वाह रे इश्कबाज..!

अब रुपकला कुयें के अंदर कुछ समझ ही नही पा रही थी कि उसको बचाने के लिये जो शोहदों की भीड टुट रही थी वो क्यों और कहां भाग गई? और ऊपर चम्पा भाभी ममता की मारी भाग कर जाये भी तो कैसे? सही है आज इश्क मुश्क तो नकली होगया पर मां की ममता आज भी वही है. धीरे धीरे शेर सामने आकर खडा हो गया. चम्पा हताश निराश और किसी अनहोनी के इंतजार मे..चुपचाप खडी देख रही है.

शेर के पीछे पीछे ही उसकी शेरनी और बच्चे भी आ पहुंचे. शेर ने देखा कि आज तो अच्छी मोटी ताजी गधेडी का शिकार मिला है. सारा कुनबा आराम से पेट भरकर खायेगा.

अब शेर रुपकला की गर्दन दबाने के लिये छलांग लगाने ही वाला था कि शेरनी बोली - अरे मुन्ने के पापा, कुछ याद आया?

शेर बोला - भागवान , शिकार के समय क्या याद आयेगा भला?

शेरनी बोली - अरे मुन्ने के बापू, आप भी अब लगता है जवानी खोते जा रहे हो? अरे अभी से दिखाई देना कम होगया क्या? या चश्मा लगवाना पडेगा? अरे ये देखो ये तो वो चम्पा गधेडी है.

शेर बोला - चम्पा गधेडी? वो जिसने अपने मुन्ने को दूध पिलाया था?

शेरनी बोली - अरे अब याद आया आपको सही मे. मैने तो सोचा तुम बुढ्ढे होगये हो? पर तुम तो अभी एकदम ही जवानों की माफ़िक याद दाश्त रखते हो? और शेरनी ने चम्पा गधेडी से हाल चाल पूछे. अचानक चम्पा को याद आया कि जब शेरनी ने बच्चे को जन्म दिया था तब शेरनी भयानक रुप से बीमार पड गई थी. और तब शेर चम्पा को ऊठा लेगया था जंगल में और शेर के बच्चे को तब चम्पा ने ही दूध पिलाया था दो सप्ताह तक. इस वजह से शेर और शेरनी चम्पा के बडे एहसानमंद थे.

रुपा गधेडी को कुयें से बाहर निकालने के बाद सब वहीं आराम करते हुये!


शेर, शेरनी और चम्पा ने मिलकर रुपा को कुयें से बाहर निकाला और थोडी देर वहीं विश्राम करके उनको अपने घर ले गये. वही रुपा की मरहम पट्टी करवाई और तीन चार दिन उन दोनों मां बेटी की अच्छी तरह खातिरदारी की. स्वस्थ होने पर शेर और शेरनी अपने निजी वाहन से उनको गांव छोड गये. ये देखकर गांव मे चम्पा का रुतबा और बढ गया.

अब ये सारा माजरा एक बाज (hawk) की बीबी देख रही थी. उसे विश्वास ही नही हुआ कि एक मांसाहारी शेर एक गधेडी और उसकी बेटी को खाने के बजाये उसकी मदद करते हुये खातिरदारी करेंगे और इलाज करवा कर सकुशल उसे उनके घर पहुंचा कर आयेंगे?

उससे जब नही रहा गया तो उसने तेजी से उडान भरी और आकर ताऊ से पूछने लगी कि आज उसने ऐसा आश्चर्य देखा. ऐसे कैसे हो सकता है?

ताऊ बोला - अरे बाजणी, यही तो सच्ची सेवा है? निस्वार्थ सेवा....इसके बदले में तो सीधे स्वर्ग की सीट रिजर्व होती है. यानि अपने से सक्षम की सेवा तो सब करते हैं..पर स्वर्ग मिलता है अपने से कमजोर और असहाय की सेवा करने से.

बाजणी बोली - ताऊ मौका पडने दे ..मैं इसी तरियां स्वर्ग की सीट बुक करवा लूंगी.

थोडे दिन बाद...जंगल मे पानी बरसा ..बहुत घनघोर...और एक चूहे के जरा जरा से चार बच्चे थे..वो भी बिल मे पानी भरने से बाहर आकर बहने लगे. वहीं पेड पर अपने घोंसले मे बाजणी बैठी इनको देख रही थी पानी मे बह्ते हुये...और वो इनको अपना आहार बनाने ही वाली थी कि अचानक बाजणी को, ताऊ द्वारा बताई, स्वर्ग की सीट बुक करवाने की याद आई... उसने सोचा कि इनसे ज्यादा असहाय और कमजोर अब और कौन मिलेगा? सो यह मौका नही छोडना चाहिये.

बाजणी ने तुरंत उन चूहे के छोटे बच्चों को सावधानी से उठाया और उनको अपने घोसलें में ले आई...और अपने पंखों से उन चूहे के बच्चों को ढका और खिलाया पिलाया. चूहे के बच्चे ..उसके पंखो की गर्मी पाकर सूख गये...और सूखते ही आदतानुसार .. उनके दांत कुलबुलाने लगे....और बाजणी उनको अपने पंखों के नीचे दबाये स्वर्ग के सपने देख रही थी..चूहे के बच्चों ने रात भर मे बाजणी के दोनों पंखों को कुतर खाया...

सुबह हुई..बाजणी ने सोचा ..कि जाकर ताऊ को बतादे..कि स्वर्ग की सीट बुक अब तो हो ही गई होगी? जैसे ही उसने उडान भरने की कोशीश की...उसका कलेजा धक से रह गया....अशक्त..बिल्कुल निसहाय..मुडकर देखा तो...उसके पंख ही गायब....और चूहे के बच्चे...उसके घोंसले से बाहर निकल कर पेड की शाखाओं पर खेल रहे थे....उसको ताऊ पर बहुत गुस्सा आया...पर क्या करें...?

इतनी ही देर मे ताऊ जंगल में आता हुआ दिखा और जैसे ही उस पेड के पास पहुंचा ...उपर से बाजणी ने आवाज लगाई..अरे सत्यानाशी ताऊ....मैने तेरा क्या बिगाडा था? मुझे ऐसी सलाह क्यों दे डाली? तेरा स्वर्ग तुझको मुबारक..मुझे मेरे पंख लौटा दे...मेरे को तो तूने जीते जी नरक मे पहुंचा दिया....तूने ये कौन से जन्म का बदला निकाला..

ताऊ बोला - देख बाजणी...मैं तो बिना बात ही बदनाम सूं...बदमाशों से बदले तो भगवान ही निकाल दिया करै सै..अपने आप... पर इसमे बदले वाली कोई बात नही सै. अरे तेरे को ये तो सोचना था कि मदद किसकी करनी चाहिये और किसकी नही? बिना सोचे समझे स्वर्ग की सीट बुक करवाने वालों की तो यही गति होती है.

ताऊ की चाय मे गिरकर मक्षिका सुंदरी का परलोकगमन

परसों ही सर्द सुबह मे बिस्तर में बैठे बैठे चाय पी रहा था. अचानक एक मक्षिका सुंदरी प्रकट होगई और हमारे कप के किनारे विराजमान होगई. आश्चर्य सर्दी की सुबह इनका क्या काम?

हमने उससे पूछा : हे सुंदरी आपका इस सर्द सुबह मे यहां आने का क्या प्रयोजन है?

मक्षिका सुंदरी बोली : ताऊ, मुझे आत्महत्या करनी है.

हमने घबराते हुये निवेदन किया : हे देवी, तू मुझे माफ़ कर, तेरे हाथ पैर जोडूं..क्युं सर्दी मे पुलिस थाने के चक्कर कटवाने का इंतजाम कर रही है?

वो बोली : ताऊ, सुना है सर्दी की सुबह ताऊ की चाय के कप मे डूबकर आत्महत्या करने से स्वर्ग नसीब होता है. सो आज बहुत दिन बाद तुमको चाय पीते हुये पकडा है, यह सुनहरी मौका मैं हाथ से गंवाना नही चाहती. और हम कुछ बोल पाते उसके पहले ही उस मक्खी सुंदरी ने चाय के गर्म कप मे छलांग मार दी और मर गई.

हमको घोर ग्लानि हुई और हमने वो मक्खी गिरी चाय का प्याला एक तरफ़ खिसका दिया और यह प्रण लेने की ठानी कि अब से हम चाय ही नही पियेंगे. यानि हमारे सबसे प्रिय शौक का त्याग कर देंगे. ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी.


इतनी ही देर मे श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी का आगमन हुआ. हमको उदास निराश और गमगीन बैठे देख कर बोले : बच्चा क्या बात है?

हमने बताया कि हमारी चाय मे गिरकर मक्षिका सुंदरी परलोकगमन कर गई हैं. इसलिये हमने चाय का हमेशा के लिये परित्याग कर दिया है.

इस पर बाबाजी बोले - बालक, चाय छोडने की मुर्खता मत करो. अब तुम चाय के लतियल हो चुके हो?

हमने कहा : महाराज, जिस चाय से किसी की जान जाती हो...किसी का दिल दुखता हो..हम ऐसी चाय, वो भी सिर्फ अपने मौज मजे के लिए, बिल्कुल नही पियेंगे..आज से ही चाय का परित्याग कर रहे हैं हम..

बाबा समीरानंदजी बोले : बालक, मोह ग्रस्त मत हो. जिसको मरना है वो मरेगा ही..तेरी चाय मे गिरकर मरेगा ..नही तो मेरी चाय मे गिरकर मरेगा...या फ़िर किसी और की चाय मे गिरकर मरेगा...पर मरेगा जरुर...मरने वाले को कौन रोक पाया है आज तक? तो ऐसे मे तुम्हारा चाय का परित्याग करना नितांत हास्यापद है. इसमे कसूर तुम्हारे चाय पीने का नही है बल्कि जबरन आकर आत्महत्या करने वाले का है. अत: अब उठ और चाय पीना शुरु कर.

बस हमने चाय का दूसरा गर्मागर्म कप तैयार किया और यह पोस्ट लिखने बैठ गये.

ताऊ पहेली - 51 विजेता श्री दिनेशराय द्विवेदी

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 51 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है मातृमंदिर ओरोविला पाँडिचेरी.

मातृमंदिर ओरोविला


और इसके बारे मे संक्षिप्त सी जानकारी दे रही हैं सु. अल्पना वर्मा

बहनों और भाईयो नमस्कार. इस अंक से कुछ समय के लिये रमप्यारी का और हीरामन का कालम स्थगित किया गया है. आप लोगों ने रामप्यारी की वापसी की मांग की है. आपकी भावनाएं हम समझते हैं. और आपको विश्वास दिलाते हैं कि रामप्यारी बहुत शीघ्र नये रंग रूप और अपनी चुलबुली हरकतों के साथ वापस आपके साथ होगी. बस थोडा सा इंतजार किजिये. आईये अब आज के पहेली के स्थान के बारे में कुछ जानते हैं.


महर्षि अरविन्द घोष का जन्म 15 august ,१८७२ कोलकता में हुआ .
वह एक महान योगी एवं दार्शनिक थे.बाल्यावस्था में कुछ समय दार्जिलिंग में शिक्षा ग्रहण करने के बाद वह सात साल की उम्र में अपने भाइयों के साथ शिक्षा के लिए इंग्लैंड चले गये थे. 1892 में भारत वापस लौट आये.

1905 के बंगाल विभाजन के बाद हुए क्रांतिकारी आंदोलन और 1908-09 में अलीपुर बम कांड मुकदमा चला. जेल में कई आध्यात्मिक अनुभव के बाद वे अंतत: सक्रिय राजनीति से अलविदा कह तत्कालीन फ्रांसीसी शासन वाले पांडिचेरी चले गए. पांडिचेरी में उन्होंने आध्यात्मिक साधनाएँ की और मृत्यु पर्यन्त [५ दिसम्बर १९५० को]तक वहीं रहे.पांडिचेरी में रहते हुए अरविन्द ने अपने महाकाव्य सावित्री और सबसे चर्चित पुस्तक ‘डिवाइन लाइफ’ ( हिन्दी में दिव्य जीवन के नाम से अनूदित) की रचना की थी.

पाँडिचेरी-भारत का केन्द्र शाषित प्रदेश पाँडिचेरी पिछले लम्बे काल से फ्रेंच कालोनी के रूप में चर्चित रहा है.इसका इतिहास १६७३ से तब प्रारंभ होता है जब चेन्नइ्रर् के पास सेंट होम के किलेबंद नगर में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी के एजेन्ट मार्टिन को डचों ने हरा दिया था। मार्टिन हार कर फ़्रांस नहीं लौटा। पांडिचेरी में आकर रहने लगा। कहते हैं उस समय यह छोटा सा गांव था। इस गांव को उसने जिंजी के राजा से खरीद लिया और धीरे-धीरे इसे एक समृद्ध नगर का रूप दिया।1954 में भारत व फ्रांस के मध्य एक समझौते के बाद पाँडिचेरी का प्रशासन भारत सरकार के अन्तर्गत है।अंतिम रूप से १ नवम्बर १९५६ को यह भारत संघ का अंग बन गया.

तमिल, तेलुगू, मलयालम व फ्रेंच भाषा सरकारी कामकाज के लिये स्वीकृत है.


'ओरोविला'-:
यहाँ महर्षि अरविन्द के नाम से 'ओरोविला'एक अन्तर्राष्ट्रीय नगर बसाया गया है. महर्षि अरविन्द आश्रम अन्तर्राष्ट्रीय योग शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र के रूप में भी विख्यात है.रूद्रेलाल मैरीन पर अरबिंदो ने फ्रांसीसी महिला मीरा अलफास्सा की सहायता से इस आश्रम की स्थापना की थी.यहाँ का मुख्य सूत्र मानव एकता है.


Auroville Dome


गोल गुंबद के आकार मे बना मातृमंदिर ओरोविला [उषा नगरी] से १० किलों मीटर दूर है.मंदिर के अंदर बने ध्यानकक्ष में रखा बडा क्रिस्टल बाल सूर्य की रोशनी में खूबसूरत आभा बिखेरता है.

यहीं एक बड़ा बरगद का पेड़ भी है जिसकी उम्र बहुत अधिक नहीं केवल १०० बरस बताई जाती है.यह मंदिर फ्रांसीसी महिला द मदर द्वारा स्थापित हुआ था.श्री अरविंद जी ने उन्हें ही आश्रम का संचालन सोन्पा हुआ था.उन्हें श्रीमाता के नाम से भी जानाजाता है.

यह स्थान युनेसको द्वारा संरक्षित है.

अधिक जानकारी के लिये -:

www.auroville.org

or-visit-:
La Boutique d’ Auroville,
38 J.Nehru Street,
Puducherry
Phone: 0413 – 2337264

अभी के लिये इतना ही. अगले शनिवार एक नई पहेली मे आपसे फ़िर मुलाकात होगी. तब तक के लिये नमस्कार।


आज के सम्माननिय विजेता क्रमश: इस प्रकार हैं. सभी को हार्दिक बधाई!

 

   श्री दिनेशराय द्विवेदी  अंक १०१
  श्री स्मार्ट इंडियन  अंक १००
सुश्री हीरल जौहरी अंक ९९
श्री दिलिप कवठेकर अंक ९८
श्री मुरारी पारीक अंक ९७
सुश्री सीमा गुप्ता  अंक ९६
श्री प्रकाश गोविंद अंक ९५
श्री शोभित जैन अंक ९४
श्री मीत अंक ९३
  श्री प. डी.के. शर्मा "वत्स", अंक ९२
श्री उडनतश्तरी अंक ९१
श्री संजय तिवारी ’संजू’ अंक ९०
सुश्री प्रेमलता पांडे अंक ८९

 

निम्न महानुभावों के हम बहुत आभारी हैं जिन्होने इस अंक में भाग लेकर हमारा उत्साह बढाया. हार्दिक आभार.

 

सुश्री M A Sharma “सेहर”, श्री विवेक रस्तोगी,  सुश्री निर्मला कपिला,  श्री रतनसिंह शेखावत,  श्री ललित शर्मा,  श्री संजय बेंगाणी,  श्री काजलकुमार,  श्री अविनाश वाचस्पति,  श्री अंतर सोहिल,  सुश्री वंदना,  डा. महेश सिन्हा,  डा. रुपचंद्र शाश्त्री,  श्री मुंबई टाईगर,  श्री दिगंबर नासवा,  श्री राज भाटिया,  हे प्रभु ये तेरा पथ,  श्री महावीर सेमलानी,  श्री दीपक तिवारी “साहब”,  श्री रामबाबू सिंह,  श्री योगिंद्र मोदगिल, श्री टेगस्की और सुश्री वाणीगीत.

 

आप सभी बहुत अभार.



अच्छा अब नमस्ते.सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. ताऊ पहेली – 51 का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया. अगली पहेली मे अगले शनिवार सुबह आठ बजे आपसे फ़िर मिलेंगे तब तक के लिये नमस्कार.

ताऊ पहेली - 51

प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम.

ताऊ पहेली अंक 51 में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. इस अंक से कुछ सामान्य से बदलाव हैं. पहला बदलाव तो यह है कि रामप्यारी यहां से कुछ दिन की छुट्टी ले रही है. तो उसके सवाल को स्थगित किया गया है.

दूसरा और महत्वपुर्ण बदलाव यह है कि अब से रामप्यारी का हिंट सिर्फ़ एक बार ही उसके ब्लाग पर दिया जायेगा जो कि सुबह 10:00 बजे ही उसके ब्लाग पर मिलेगा. बाकी सभी नियम कानून पहले जैसे ही हैं.


यह कौन सी जगह है?


ताऊ पहेली का प्रकाशन हर शनिवार सुबह आठ बजे होगा. ताऊ पहेली के जवाब देने का समय कल रविवार दोपहर १२:०० बजे तक है. इसके बाद आने वाले सही जवाबों को अधिकतम ५० अंक ही दिये जा सकेंगे


अब आप रामप्यारी के ब्लाग पर हिंट की पोस्ट सुबह दस बजे ही पढ सकते हैं! दूसरा हिंट नही दिया जायेगा.


इस अंक के आयोजक हैं ताऊ रामपुरिया और सु,अल्पना वर्मा



नोट : यह पहेली प्रतियोगिता पुर्णत:मनोरंजन, शिक्षा और ज्ञानवर्धन के लिये है. इसमे किसी भी तरह के नगद या अन्य तरह के पुरुस्कार नही दिये जाते हैं. सिर्फ़ सोहाद्र और उत्साह वर्धन के लिये प्रमाणपत्र एवम उपाधियां दी जाती हैं. किसी भी तरह की विवादास्पद परिस्थितियों मे आयोजकों का फ़ैसला ही अंतिम फ़ैसला होगा. एवम इस पहेली प्रतियोगिता में आयोजकों के अलावा कोई भी भाग ले सकता है.


मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम
मिस.रामप्यारी का ब्लाग

 

नोट : – ताऊजी डाट काम  पर हर सुबह 8:00 बजे और शाम 6:00 बजे नई पहेली प्रकाशित होती हैं. यहा से जाये।

ताऊ, करवा ले न्याय तेरे ब्लाग पंचों से ही.... !

हमने एक कहानी शुरु की थी सांड तो लड अलग भये : बछडे भये उदास शीर्षक से. जो क्रमश: पर जो छूटी तो आज तक छूटी हुई है. असल में ये रिपोर्टिंग का रोग ही कुछ ऐसा है कि आदमी को कहीं का नही छोडता यानि रामदयाल का गधा बनवा देता है. हमारी इस रिपोर्टिंग का नतीजा ये निकला कि कुछ अपने आपको अंग्रेज टाईप समझने वाले लोग तो ब्लडी..और हेल..तक उतर आये और कुछ ने हमारे पीछे खुल्ले सांड दौडा दिये...सुर्पणखां दौडा दी... हम ठहरे मुर्ख ..सो भैया..हाथ जौडे इस रिपोर्टिंग के धंधे से...कम कमायेंगे कम खा लेंगे..पर ऐसी सर्दी को इसमे उलझ कर क्यों खराब करे?


अभी पिछले दिनो संजय बेंगाणी जी का फ़ोन आया था कि ताऊ बीकानेर चलना है ...वहां शादी भी अटेंड करनी है और एक ब्लागर सम्मेलन का एजेंडा है उसकी रिपोर्टिंग भी करनी है..हमने उनसे माफ़ी मांग ली कि.. दिल्ली ब्लागर सम्मेलन के बाद ताऊ ने रिपोर्टिंग से तौबा करली.. हम पहले ही घोषणा कर चुके हैं..

इसलिये हम बीकानेर नही गये. बेंगाणी जी ने कहा भी कि ताऊ शादी मे तो चलो..आप रिपोर्टिंग भले मत करना तो हमने कहा की आपकी बात सही है पर हम अपने आपको आपसे ज्यादा अच्छी तरह से जानते हैं...

बेंगाणी जी बोले - बात कुछ समझ नही आई?

हमने कहा कि - इसमे समझने जैसी कोई बात ही नही है. जैसे गीदड जब दूसरे गीदडों को हूआं..हूआं..हूआं..हूआं.. करते सुनता है तो उसकी भी इच्छा हो ही जाती है हुआं..हुआं... करने की, तो यह संभव ही नही है कि ब्लागर सम्मेलन हो और ताऊ उसमे जाये और रिपोर्टिंग नही करे? ऐसा हो सकता है क्या?

और जब हम रिपोर्टिंग करेंगे...फ़िर कोई ब्लडी.. हेल...कहेगा...फ़िर कोई खुल्ला या बंधा सांड..और सुर्पणखां ताऊ के पीछे दौडायेगा...

तो भैया हमने तो रिपोर्टिंग से तौबा करली है. और अविनाश वाचस्पति जी..ताऊ तो आपके मुंबई ब्लागर मिटिंग को कवर करने भी मुंबई नही आयेगा..आप अपना इंतजाम खुद ही कर लेना....

हां तो हमने अपनी कहानी छोडी थी कि ताऊ से चिलम पीने के बहाने शेर ने ताऊ को अपनी मीठी मीठी बातों मे उलझा लिया. और ताऊ ठहरा बावली बूच...आगया शेर की बातों में..और खोल दिया शेर के पिंजरे का मूंह...और जैसे ही पिंजरे का मूंह खुला .. वो बेईमान शेर कूद कर बाहर आगया और बाहर आते ही ताऊ की गर्दन पर झपट पडा.

पिंजरे से छुटते ही बेईमान शेर ताऊ पर झपट पडा!


ताऊ हक्का बक्का रह गया..और बोला - यार शेर ये क्या बदतमीजी है? मैने तुझको बाहर निकाला और तू मेरी गर्दन पकड कर मुझे ही खाना चाहता है?

शेर बोला - अरे ताऊ तू बावली बूच है मुर्ख...अरे मुर्ख..मैं दस दिन से भूखा प्यासा इस पिंजरे मे पडा हूं..और मेरे अंदर अब तो इतनी ताकत भी नही बची है कि जाकर कहीं शिकार कर सकूं? इसलिये अब मैं तुझे ही खाऊंगा...

ताऊ बोला - तूने मुझे इनाम के लालच मे फ़ंसा लिया और अब इनाम देने की बजाये मुझे खाना चाहता है? यह अन्याय है यह नीति विरुद्ध है. ऐसा करके तुम अच्छा नही कर रहे हो? आगे से कोई किसी की मदद नही करेगा.

शेर बोला - अरे ओ बावलीबूच ताऊ...नीती यही है जो मैं कर रहा हूं..अब तू निपट गंवार आदमी जंगल के राजा को नीती पाठ पढायेगा क्या? अरे अगर मैं गलत कर रहा हूं तो करवाले न्याय तेरे ब्लाग पंचों से ही....

ताऊ ने जैसे ही ब्लाग पंचों से न्याय करवाने की बात शेर के मूंह से सुनी तो...कुछ आशा बंधी की..अब जान बच सकती है. ब्लाग जगत के मठाधीष पंच न्याय की बात करके ताऊ की जान बचा ही लेंगे....(क्रमश:)

ताऊ गोल्डन जुबिली पहेली : विजेता श्री विवेक रस्तोगी

प्रिय बहनों और भाईयों, आज ताऊ गोल्डन पहेली के रिजल्ट के इस अंक मे मैं आपका हार्दिक स्वागत करता हुं. यह आपके लिये और हमारे लिये बहुत ही खुशी का मौका है. और इस खुशी के मौके तक पहुंचने मे आप सभी का अथक सहयोग और आशिर्वाद हमें मिला है. ताऊ गोल्डन जुबिली पहेली में हमने जो सवाल पूछा था उसका सही उत्तर जहाजमहल मांडव (जिला - धार) म.प्र. है.
खेल में अगर स्वस्थ प्रधिस्पर्धा हो तो जीत हार के कोई मायने नही है. इस तरह से आज इस गोल्डन अंक में सभी विजेता हैं. यहां तक का निर्बाध सफ़र ना केवल हमारी मेहनत का फ़ल है बल्कि उससे कहीं ज्यादा ये आप सभी के सहयोग नतीजा है. जिसके लिये हम आपके तहेदिल से आभारी हैं. और मैं विशेष आभारी हुं सुश्री अल्पना वर्मा का जिनके सहयोग के बिना इसकी कल्पना भी मुश्किल थी. उन्होने इस पहेली की विषय वस्तु से लेकर निरंतरता बनाये रखने में अपना बहुमुल्य समय, सुझाव और सहयोग दिया है. आप सभी ने इस ताऊ गोल्डन पहेली की ट्राफ़ी को बहुत सराहा है. तो अब रिजल्ट घोषित करने से पहले मैं बता दूं कि ये ट्राफ़ी टीम वर्क का नतीजा है. इसका कलर कंबीनेशन और थीम अल्पना जी ने तय किया , जिसमे बहुत सारा समय कई सप्ताह से आज के विशेष दिन के लिये उन्होनें लगाया. फ़िर इसकी सेटिंग और स्क्रिप्टिंग पर मैने काम किया और यह कच्चा घडा सौंपा गया आशीष खंडेलवाल जी को. और उनके हाथों से निकलकर यह आपके सामने है. आशीष खंडेलवाल जी का तहेदिल से आभार.
तो आज इस गोल्डन पहेली के प्रथम विजेता हैं श्री विवेक रस्तोगी……..और आज के सभी विजेताओं को यह ट्राफ़ी जल्द भेजी जारही है. बधाई सभी को. आज के हमारे सम्माननिय विजेताओं से आपको मिलवाते हैं...

सभी को हार्दिक बधाईयां!

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  गोल्डन जुबिली विजेता विवेक रस्तोगी अंक…१०१

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गोल्डन जुबिली विजेता श्री दिनेशराय द्विवेदी अंक १००

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  गोल्डन जुबिली विजेता  श्री प्रकाश गोविंद अंक ९९

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  गोल्डन जुबिली विजेता सुश्री सीमा गुप्ता अंक ९८

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  गोल्डन जुबिली विजेता  श्री मीत अंक ९७

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  गोल्डन जुबिली विजेता श्री पी.एन.सुब्रमनियन अंक ९६

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  गोल्डन जुबिली विजेता श्री नीरज गोस्वामी अंक ९५

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  गोल्डन जुबिली विजेता श्री शोभित जैन अंक ९४

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  गोल्डन जुबिली विजेता श्री प. डी.के. शर्मा "वत्स", अंक ९३

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  गोल्डन जुबिली विजेता श्री उडनतश्तरी अंक ९२

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गोल्डन जुबिली विजेता संजय तिवारी ’संजू’ अंक ९१

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  गोल्डन जुबिली विजेता सुश्री प्रेमलता पांडे अंक ९०

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  गोल्डन जुबिली विजेता श्री अविनाश वाचस्पतिअंक ८९

 

आज के इस गोल्डन जुबिली अंक में जिन्होने  भाग लेकर हमारा उत्साह वर्धन किया उन प्रतिभागियों के हम हृदय से आभारी हैं और यादगार स्वरूप निम्न  स्मृति चिन्ह  आपको भिजवाया जा रहा है. जिनके प्रोफ़ाईल में फ़ोटो नही है और जो स्मृति चिन्ह पर अपना फ़ोटो लगवाना चाहते हैं वो यथा शीघ्र अपना फ़ोटो हमे भिजवा दें.

आप महानुभावों के हम आभारी हैं.

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री रतनसिंह शेखावत

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री अजयकुमार जी झा

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री M VERMA

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री प्रवीण त्रिवेदी

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री रंजन

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री ललित शर्मा,

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी सुश्री निर्मला कपिला

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री काजलकुमार

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री हे प्रभु ये तेरा पथ

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री अंतर सोहिल

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी सुश्री वंदना

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री सुशील कुमार छौक्कंर

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी सुश्री हरकीरत ’हीर’

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री डा.रुपचंद्र शाश्त्री "मयंक,

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री दिगम्बर नासवा

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री मुरारी पारीक

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री राज भाटिया

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी सुश्री बबली

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री अशोक पांडे

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गोल्डन जुबिली प्रतिभागी श्री महेंद्र मिश्र

 

आप सभी का हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक आभार. और अब रामप्यारी के सवाल के जवाब के लिये आपको लिये चलते हैं रामप्यारी के पास.

हाय…गुड मोर्निंग एवरी बडी…आई एम राम..की प्यारी… रामप्यारी. हां तो अब जिन्होने सही जवाब दिये उन सबको दिये गये हैं ३० नम्बर…अगर भूल चूक हो तो खबर कर दिजियेगा..सही कर दिये जायेंगे. मेरे कल के सवाल का सही जवाब है अंगिरा ,अत्रि .क्रतु , मारीचि, पुलस्र्य , पुलह और वसिष्ठ नामक सप्तऋषि "चित्र शिखंडी" कहलाते है विवेक रस्तोगी अंकल, सीमा आंटी, उडनतश्तरी अंकल, प्रकाश गोविंद अंकल, हरकीरत ’हीर’ आंटी, मीत अंकल, संजय तिवारी "संजू" अंकल और प्रेमलता आंटी ने बिल्कुल सही सही जवाब दिये. आप सबके खाते में तीस तीस नम्बर मैने जमा करवा दिये हैं. अब रामप्यारी की तरफ़ से रामराम…अगले शनीवार फ़िर से यही मिलेंगें. वैसे आजकल शाम ६ बजे मैं ताऊजी डाट काम पर रोज ही मिल जाती हूं. ..और हां आपका आज से शुरु होने वाला सप्ताह शुभ हो. और हीरु भैया और पीरू भैया आजकल कार्पोरेशन के चुनावों मे व्यस्त हैं सो वो आज नही आये हैं..उनकी तरफ़ से मैं आपसे क्षमा मांगती हूं. चुनाव खत्म होते ही वो आपकी सेवा मे वापस उपस्थित होंगे.
अच्छा अब नमस्ते.सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. ताऊ पहेली – 50 का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया. अगले शनिवार सुबह आठ बजे आपसे फ़िर मिलेंगे तब तक के लिये नमस्कार.