ताऊ पहेली - 32

प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम.


ताऊ पहेली अंक 32 में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. नियमों के लिये आप यह पोस्ट पढ कर नियमों की विस्तृत जानकारी ले सकते हैं. क्ल्यु हमेशा की तरह रामप्यारी के ब्लाग से मिलेंगे. रामप्यारी के ब्लाग पर पहला क्ल्यु 11:30 बजे और दुसरा 2:30 बजे मिलेगा. रामप्यारी का जवाब अलग टिपणी में देवें. तो आईये अब आज की पहेली की तरफ़ चलते हैं

 

 

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इस जगह को पहचानिये!

अब रामप्यारी का विशेष बोनस सवाल : - ३० अंक के लिये.

 

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हाय एवरी बडी..वैरी गुड मार्निंग फ़्रोम रामप्यारी.

 

 

विनम्र निवेदन : - कृपया मेरे सवाल का जवाब अलग टीपणी मे देवें. बडी मेहरवानी होगी. एक ही टिपणी मे दोनो जवाब मे से एक सही होने पर प्रकाशित नही की जा सकती और इससे आप कन्फ़्युजिया सकते हैं कि आपकी टिपणी रुकी हुई है. तो सही होगी?

 

 

 

आज आपको यह बताना है कि नीचे के चित्र मे कितने त्रिभुज हैं?

 

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अब इससे सरल भी क्या सवाल होगा?.क्युं  है ना सीधा सा सवाल? अब कन्फ़्युजियाईयेगा नही और इस सीधे से सवाल के मिलेंगे पूरे तीस नम्बर. और कुछ कन्फ़्युजिया जायें तो रामप्यारी से  मत पूछना क्यों कि पहली फ़ेल रामप्यारी को भी नही मालूम इसका जवाब तो? अब आप मेरे ब्लाग पर पहली हिंट की पोस्ट पढ सकते हैं 11:30 बजे और दुसरी 2:30 बजे

 

 

नोट : – ताऊजी डाट काम पर फ़टाफ़ट मजेदार पहेलियां चालू हैं. यहा से जाये।

 

इस अंक के आयोजक हैं ताऊ रामपुरिया और सु,अल्पना वर्मा

 

नोट : यह पहेली प्रतियोगिता पुर्णत:मनोरंजन, शिक्षा और ज्ञानवर्धन के लिये है. इसमे किसी भी तरह के नगद या अन्य तरह के पुरुस्कार नही दिये जाते हैं. सिर्फ़ सोहाद्र और उत्साह वर्धन के लिये प्रमाणपत्र एवम उपाधियां दी जाती हैं.किसी भी तरह की विवादास्पद परिस्थितियों मे आयोजकों और ताऊ साप्ताहिक पत्रिका के संपादक मंडल का फ़ैसला ही अंतिम फ़ैसला होगा.

 

 

 

मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम
मिस.रामप्यारी का ब्लाग

रामप्यारी मैम की क्लास में "इ" फ़ार इल्लू इल्लू

इस सप्ताह किसी भी बच्चे को नया एडमिशन नही दिया गया है क्योंकि बात डोनेशन पर अटक गई. और बिना डोनेशन के रामप्यारी मैम के स्कूल मे एडमिशन? भूल जाईये.

 

रामप्यारी मैम क्लास मे आती है. बच्चे गुड आफ़्टर नून करते हैं. और अब क्लास शुरु होरही है.

 

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रामप्यारी मैम – हां तो बच्चों, होमवर्क किया?

सबने हाथ उपर ऊठा दिया..यस मैम..यस मैम…

रामप्यारी मैम- यस..यू..अक्षयांशी…. 

अक्षयांशी : यस मैम…आपने पूछा था कि गया गया गया… सो इट्स वैरी सिंपल…gaya went to gayaa.

रामप्यारी मैम :  ओह..हाऊ ब्रिलियंट यू आर? कैसे साल्व किया तुमने?

अक्षयांशी – वो मैम मेरी दादीजी कहती हैं कि मेरा दिमाग बहुत तेज है ना..शायद इसीलिये साल्व होगया होगा…और इसीलिये मैं छिपकली से भी नही डरती…

रामप्यारी मैम : वैरीगुड..माई चाईल्ड….कीप इट अप..अब छिपक्ली को पकड मत लेना कहीं…ओके.

 

रामप्यारी मैम – हां आदि  तुम इस बार भी तो कोई कछुआ वछुआ नही ऊठा लाये?

आदि – नो मैम..मैं तो सिर्फ़ आजकल कार के पीछे ही लगा हूं.

रामप्यारी मैम – व्हाट डू यू मीन आदि?

आदि – मैम मुझे मेरे पापा ने नैनो कार खरीद दी है..तो मैं उसको ही चलाता रहता हूं.  और आज तो स्कूल भी उसी मे बैठ कर आया हूं?

रामप्यारी – ओह वैरी गुड..तो ये बताओ कि जब चढाई चढनी हो और बीच चढाई मे आगे का ट्रेफ़िक बंद हो तब क्या करोगे?

आदि – मैम ये तो पापा ने मुझे बताया ही नही? आप ही बता दिजिये.

रामप्यारी मैम – अरे इसमे  क्या करना? वैरी सिंपल….कार से नीचे उतरो…पास मे पडा पत्थर ऊठाओ..कार के पिछले पहिये के पीछे वो पत्थर लगावो और गाडी आगे बढाओ..

आदि – मैम कुछ समझ मे नही आया…? वहां पत्थर कहां से आयेगा? फ़िर पीछे कार जायेगी?

रामप्यारी मैम – अरे आदि ..यह तो आज तक अच्छे अच्छों के समझ मे नही आया तो तुम्हारे क्या समझ आयेगा?

 

रामप्यारी मैम – हां तो नैना. नाऊ यू टेल मी… लास्ट क्लास मे हमने A to D पढा था. अब तुम E फ़ार बताओ? E   फ़ार क्या होता है?

नैना – मैंम..वो…E फ़ार……E फ़ार…ओह यस याद आगया…E फ़ार..इल्लू इल्लू…

रामप्यारी – वैरी गुड नैना…वैरी स्मार्ट आंशर…सिट डाऊन प्लिज.

 

 

रामप्यारी  मैम – हां लवि..अब तुम एक गणित के सवाल का जवाब दो.

लवि – यस मैम…मैथ्स इज माई फ़ेवरिट..आस्क मैम..

रामप्यारी – लवि ये बताओ कि तुम पांच मिनट में  एक चाकलेट खा लेती हो तो साढे बारह मिनट में कितनी चाकलेट खाओगी?

 

इतनी देर मे चंगू खडा होकर बोला – मैं बताऊं मैम?

रामप्यारी – यस ..यस ..बताओ?

चंगू – मैम इस हिसाब से साढे बारह मिनट मे वो साढे दो चाकलेट खायेगी.

 

लवि तुरंत बोल पडी– मैंम आपका सवाल ही गलत है? और चंगू का जवाब तो उससे भी ज्यादा गलत है.

रामप्यारी मैम – व्हाट आर यू..सेईंग लवि? डू  यू.. नो…

लवि – मैम आप पहले मेरी पूरी बात तो सुनिये..

रामप्यारी :  ओके..टेल मी…व्हाट इज रोंग इन दिस क्वेशचन..एंड आंशर..?

लवि – मैम – बात ये है कि मेरी मम्मी मुझे ढाई तो क्या एक भी चाकलेट नही देगी तो मैं खाऊंगी कैसे?

रामप्यारी --- ओह लवि..यू आर रियल..ब्रिलिएयंट…यू आर करेक्ट….लोगों ने तुम्हारी मम्मी को भडका दिया होगा कि बच्चों को चाकलेट खिलाने से दांत खराब हो जाते हैं.

 

आदि :  मैम..अब जल्दी से होमवर्क दे दिजिये..बरसात बहुत ज्यादा होने वाली है…मेरी नैनो..बरसात मे भीग जायेगी…मैं उसके पहले ही घर पहुंच जाऊं तो अच्छा है.और आज पापा गर्म जलेबी भी तो लाने वाले हैं.

 

रामप्यारी मैम : बच्चों..होमवर्क तुमको आज लठ्ठ वाले ताऊजी की साईट ताऊजी डाट काम की पहेली मे आज शाम को ६ बजे मिलेगा. 

 

आदि – पर मैम वो ताऊजी तो पहेलियां पूछते हैं. वहां होमवर्क कैसे मिलेगा?

रामप्यारी मैम. – अरे आज की पहेली वहां तुम्हारे होमवर्क की ही होगी और उस होमवर्क को करने मे तुम्हारे मम्मी पापा तो क्या तुम्हारे डियर ग्रांड पा और ग्रांड माम भी खुशी खुशी लग जायेंगी. आज बहुत

मजेदार पहेली वहां पर होगी.

 

सभी बच्चे – ठीक है मैम ..हम आज शाम को ६ बजे ताऊजी डाट काम पर..मम्मी पापा के साथ होमवर्क का इंतजार करेंगे.

 

और पिरियड खत्म होने की बेल बज गई.




(रामप्यारी की क्लास में एडमिशन चालू हैं..आवेदन भेजिये )


ताऊ पहेली - 32 का प्रकाशन कल शनिवार सुबह आठ बजे होगा.

मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम
मिस.रामप्यारी का ब्लाग

परिचयनामा : सुश्री पारूल…चाँद पुखराज का

आज के परिचयनामा मे हम आपको मिलवा रहे हैं सुश्री पारुल जी यानि पारूल…चाँद पुखराज का से. वैसे तो उनके व्यक्तित्व के बारे मे उनका ब्लाग ही सब कुछ कह जाता है. उनके ब्लाग पर जाते ही एक शीतलता और संगीत की माधुर्यता का एहसास होता है. उनसे मुलाकात मे भी वैसी ही एक शांत, सौम्य और निश्छलता का एहसास हुआ. पूरे समय की बात चीत में एक निश्छल हंसी उनके चेहरे पर थी जो उनके व्यक्तित्व की शालीनता मे चार चांद लगा रही थी.
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पारुलजी
पारुलजी से बातचीत मे हमे ऐसा लगा जैसे वो समग्र अस्तित्व में ही विश्वास रखती हैं. जीवन को अपने संपुर्ण होने के एहसास के साथ. आईये हम उनसे हुई बातचीत को उनकी जबानी ही आपसे रुबरू करवाते हैं.

ताउ : हां तो पारुलजी, आखिर आपसे मिलने का सौभाग्य हमको मिल ही गया. अब आप सबसे पहले ये बताईये की आप मूलत: कहां की रहने वाली हैं?

पारुल जी : ताऊजी, मुझे कहते हुए अच्छा लगता है की मैं मूलतः निराला जी की जन्मभूमि उन्नाव से हूँ ....छोटी सी जगह है ..मगर मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है

ताऊ : और अभी कहां पर हैं?

पारुल जी : .वर्त्तमान में बोकारो स्टील सिटी- झारखण्ड में रहती हूँ.

ताऊ : और यहां आपके परिवार मे कौन कौन हैं?

पारुल जी : दो बेटे और पति.

ताऊ : बेटों के बारे मे कुछ बताईये?

पारुल जी : अब क्या बताऊं? ( हंसते हुये…) बस ये समझ लिजिये कि इन दिनों 2 शरारती बेटों को सम्हाल रही हूँ या पता नही वे मुझे सम्हालते हैं?


ताऊ : और आपके हमसफ़र के बारे में कुछ बतायेंगी?

पारुल जी : ( हंसते हुये..) ताऊ जी बस एक पंक्ति कहूँगी -- बना के मुस्सविर ने तोडा कलम.

ताऊ : आपके शौक क्या हैं?


पारुल जी : संगीत, कविता, घूमना, बागवानी, बारिश निहारना, ब्लाग्स पढ़ना, और फितूर लिखना. ( हंसते हुये…)
इसके अलावा मुझे रेकी विधा में दिलचस्पी है, आर्ट ऑफ़ लिविंग ---आकर्षित करता है ..फिर भी किसी भी विचार धारा के प्रति खुद को अंध भक्त नही मानती .....


ताऊ : अगर ये पूछा जाये कि आपको सख्त ना पसंद क्या है? तो क्या कहेंगी?


पारुल जी : सख्त नापसंद? कुछ तो मुझ में ही हैं, जो मैं जानते हुए भी बदल नही सकती ..इसलिए दूसरों में बुराई नही ढूंढ सकती...

ताऊ : अगर अब मैं आपसे यह पूछूं कि आपकी सबसे बडी कमजोरी क्या है?

पारुल जी : मेरी कमजोरी? ताऊ जी, मैं .दूसरों पे जल्द विशवास कर लेती हूँ ...इसलिए अकसर वसीम बरेलवी का एक शेर याद आता है -
हमारी सादा मिजाजी की दाद दे की तुझे
बगैर परखे तेरा एतबार करने लगे


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दोनों बेटे गंगटोक में

ताउ : अब आपकी पसंद के बारे में कुछ बताईये?

पारुल जी : सारे मौसम, जाडों की धूप, सावन के बादल, पूरा चाँद, एक सुर में बरसती बूँदें… मेरे दोनों बेटे, पलाश के फूल, समुद्र…......बहुत बहुत कुछ गिनती नही ( हंसते हुये..)


ताऊ : आप घूमने की शौकीन हैं..प्रकृति प्रेमी हैं…ऐसे में मैं यह पूछूं कि आपको कौन सी खास जगह पसंद है?

पारुल जी : अंडमान के जारवा फारेस्ट की सुबह, नार्थ सिक्किम के पहाड़, कुर्ग का कोहरा…और भी बहुत कुछ..मैने कहा ना कि..गिनती ही नही है.

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एक तस्वीर जयपुर से


ताऊ : अच्छा अब एक बात बताईये कि हमने जो सुना है वो सही है या नही?

पारुल जी : कौन सी बात ताऊजी?

ताऊ : वही जब आपकी स्कूलिंग के दौरान किसी ने आपको देख लेने की धमकी दे डाली थी. क्या किस्सा था वो?

पारुल जी : ओह ताउजी..( हंसते हुये…) वो हुआ ऐसे था मैं कि क्लास 11th में स्कूल प्रेसीडेंट थी और नियमानुसार लेट कमर्स को सज़ा देने का हक रखती थी ..

ताऊ : जी..फ़िर क्या हुआ?

पारुल जी : फ़िर .एक दिन एक लड़की पास से यह कहती हुई गुज़री की बहुत सज़ा देती हैं ...मेरा भाई आज हमारी प्रेसीडेंट को स्कूल गेट पर देख लेगा ...बस मेरा दम निकल गया ..स्कूल के बाद जब तक घर नही पहुँच गयी ...होश फाख्ता रहे ...हालाँकि दूसरे दिन बहुत प्यार से उस कन्या को प्रिंसिपल के सामने खडा किया हम सब ने ( हंसते हुये…)

ताऊ : आप ब्लागिंग मे कब से हैं?

पारुल जी : ब्लागिंग में 2 साल पूरे हो जायेंगे अगस्त में.

ताऊ : कैसे अनुभव रहे ब्लागिंग मे आपके?

पारुल जी : खट्ठे-मीठे अनुभव हैं ...ब्लागिंग में आने से खुद मुझ में बहुत बदलाव हुए हैं ...नए मित्रों के साथ -साथ नयी सोच भी पनपी है ...


ताऊ : जी..

पारुल जी : सबसे खूबसूरत बात ..जब सुबह ब्लागवाणी खोलती हूँ ...और संगीत की मन माफिक पोस्ट मिल जाए तो अपने c d नहीं खंगालने पड़ते

ताऊ : हां ये बात तो है, आजकल संगीत की पोस्ट भी काफ़ी सारी अक्सर मिल जाती हैं.

पारुल जी : हां ताऊजी, ब्लागिंग में पाडकास्टिंग का पहलू मुझे बहुत लुभाता है. ऐसे ही कोई बेहतरीन कविता या गद्य का टुकडा पढ़ने को मिल जाए तो फिर दिन भर मनन चलता है .....


ताऊ : राजनिती के बारे मे आपकी कितनी रुचि है?

पारुल जी : काम भर की रूचि रखती हूं .. वैसे .और भी गम हैं ज़माने में ......

ताऊ : ताऊ पहेली के बारे मे आप क्या सोचती हैं?

पारुल जी : ताऊ जी की पहेली विश्व भ्रमण करवा देती है .....मज़ा पहेली का उत्तर पहले न आने पर ज्यादा आता है ..अंदाजे लगाने में ...और फिर टिप्पणियाँ पढ़ने में ..

ताऊ : टिपणियां पढने में? वो कैसे?

पारुलजी : जैसे समीर जी की पिछली टीपणी थी ....दक्षिण की तरफ सर कर के सो जाता हूँ तो सपने में जगह का पता चल जाएगा ....आदि आदि ( हंसते हुये....)

ताऊ : इसकी कोई मजेदार घटना भी हुई क्या?

पारुल जी : एक बार किसी सब्जी की पहेली थी अरविंद जी के ब्लॉग पे ...मैंने अपनी मेड को सारा काम छुड़वाकर उसे पीसी के सामने बैठा दिया की बूझो तो ज़रा ,,....वो आज भी हसती है ...सच पूछिये तो पहली हल करने से आज भी लगता है मन में कहीं बचपना बाकी है ....

ताऊ : अक्सर पूछा जाता है कि ताऊ कौन? आप क्या कहना चाहेंगी?


पारुल जी : ताऊ जी जो भी हैं मेरे लिए आदरणीय हैं ....

ताऊ : ताऊ साप्ताहिक पत्रिका के बारे मे आप क्या कहना चाहेंगी?

पारुलजी : ताऊजी, बहुत मेहनत करती है आपकी पूरी टीम ....सलाह, मेरा पन्ना, सभी स्तम्भ अत्यंत रोचक लगते हैं.


ताऊ : अच्छा आप खुद आपके स्वभाव के भाव मे क्या कहेंगी?

पारुल जी : अपनी ही पंक्तियाँ कहूँगी --खुद पे
चौथ का चांद जो देखेंगे दाग पायेंगे
हम समझ दार भी हैं और थोड़े जिद्दी भी.

ताऊ : आप अपने लेखन को किस दिशा में पाती हैं?

पारुल जी : मेरा लेखन मेरे लिए मेरे मन की ऊडान है.

ताऊ : आज हमारे भारतीय परिवारों में संयुक्त परिवार की अवधारणा, जाने या अनजानें मे टुटती जा रही है? आप इस संबंध में कुछ कहना चाहेंगी?

पारुल जी : मैं संयुक्त परिवार में पली बढी हूँ और अभी न्यूक्लीयर परिवार में हूँ ...दोनों के अपने अपने धूप छाव हैं .....अगर संबंधों में मिठास हो तो संयुक्त परिवार से अच्छा कुछ नहीं

ताऊ : पारुलजी , अब मैं आपसे गुजारिश करुंगा कि आप हमारे पाठकों के लिये आपकी खुद की कोई रचना सुनाये, तो बहुत आनंद आयेगा.

पारुल जी : …जी ताऊजी जैसी आपकी इच्छा...कोशीश करती हूं.



प्राणप्रन से हो निछावर
बंदिनी जब कर लिया,
अंकुशों के श्राप से फिर
प्रीत को बनबास क्यों …

मौन हो जाये समर्पण
शेष सब अधिकार हों,
नेह का बंधन डगर की
बेड़ियाँ बन जाये क्यों…

मोह के संसार की
काँटों भरी पगडंडियाँ,
नग्न पैरों की जलन पर
प्रणय का गुणगान क्यों…

सांझ के मद्धम दिये सी
ये ऊषा की लालिमा,
भोर के पहले चरण मे ही
कहीं खो जाये क्यों

छटपटाती देह में
श्वासों का ये आवा गमन,
वेदना के… ताल-स्वर पर
व्यथित मन का गान क्यों……

प्राणप्रन से हो निछावर
बंदिनी जब कर लिया
प्रेमपूरित नयन फिर
रह-रह सजल हो जाएं क्यों………


"एक सवाल ताऊ से”

सवाल पारुलजी का : प्रश्न तो वडा सिम्पल है ताऊ जी, की आखिर फोटू म्ह ताऊ की जगे जे बन्दर कोण है ?

जवाब ताऊ का :
पारुलजी, आपके सवाल का जवाब देने से पहले मैं आपका धन्यवाद करता हूं कि आप हमारे पाठकों से रुबरु हुई. और ईश्वर का भी धन्यवाद कि उसने मुझे आप जैसी कविमना और सहृदयी इंसान से मुलाकात का सौभाग्य दिया. मुझे आपके प्रश्न के उत्तर मे जितमोहनजी की ये कविता याद आरही है. शायद आपको जवाब मिल जाये.

शक्ल हो बस आदमी की क्या यही पहचान है।
ढूँढ़ता हूँ दर-ब-दर मिलता नहीं इन्सान है।।

घाव छोटा या बडा एहसास दर्द का एक है।
दर्द एक दूजे का बाँटें तो यही एहसान है।।

अपनी मस्ती राग अपना जी लिए तो क्या जीए।
जिंदगी, उनको जगाना हक से भी अनजान है।।

लूटकर खुशियाँ हमारी अब हँसी वे बेचते।
दीख रहा, वो व्यावसायिक झूठी सी मुस्कान है।।

हार के भी अब जितमोहन का हार की चाहत उन्हें।
ताज काँटों का न छूटे बस यही अरमान है।।



तो यह थी आज की हमारी सम्माननिय मेहमान सुश्री पारुल जी. आपको इनसे मिलकर कैसा लगा? अवश्य बताईयेगा.





मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम

मिस.रामप्यारी का ब्लाग

ताऊ गया बाबा समीरानंद के हिमालय आश्रम में

ताऊ ने एक रोज अपने गुरु बाबा समीरानंद जी से कहा - बाबा अब मैं ब्लागिंग छोडने वाला हूं?
बाबा समीरानंद बोले - वत्स शुभ शुभ बोलो ! ऐसी अशुभ वाणी नही बोलनी चाहिये, ऐसा क्या कष्ट है?
ताऊ : क्या बताऊं गुरुजी....बात ही ऐसी है. मुझे एक नम्बर ब्लागर बनना है. मैं जरा सा उपर जाता हूं और चिठ्ठाजगत वाले मुझे घसीट घसाट कर वापस वहीं ला पटकते हैं. क्या करुं अब तो थक हार इसको बंद कर देने मे ही भलाई है.
बाबा समीरानंद - वत्स ऐसी बाते करके खुद भी निराश होते हो और दुसरों को भी निराश करते हो? फ़िर ये हमारी ब्लागरी की राजगद्दी को कौन संभालेगा? हम तो तुमको हमारे ब्लागर मठ का अपना उतराधिकारी मान कर चल रहे थे. ठीक है तुम हमारे साथ हिमालय पर्वत पर चलो. हम तुमको वहीं ब्लागर ज्ञान की संपुर्ण दिक्षा देंगे.

और दोनों ने बाबा समीरानंद आश्रम जाने का फ़ैसला किया. बाबा समीरानंद तो अपने योगबल से उनके हिमालय आश्रम पहुंच गये और ताऊ वाया गौहाटी-सिक्किम होते हुये जाने के लिये राजधानी एक्सप्रेस में बैठ गया. साथ मे अपने गुरु की फ़ोटो भी रख ली. और ट्रेन मे ही अपने लेपटोप को खोलकर ब्लागरी के गहन अध्ययन मे लग गया.



साथ की सीट पर एक कुछ ज्यादा ही पढा लिखा सा आदमी बैठा था. जो वैज्ञानिक होने के साथ साथ घोडे पालने और घुडसवारी का भी शौकीन था. वो बोर होरहा था. बार बार ताऊ को डिस्टर्ब कर रहा था.

ताऊ अपने लेपटोप मे खोया था. आखिरकार सहयात्री ने ताऊ से कहा - श्रीमान आपका नाम क्या है? आप तो कुछ बोलते ही नही हैं? आपको मालूम होना चाहिये कि आपस मे बातें करते रहने से रास्ता आसानी से कट जाता है.

ताऊ का इतनी बाते सुनकर खोपडा खिसक गया. फ़िर भी ताऊ के साथ बाबा समीरानंद जी की फ़ोटो थी..उस फ़ोटो मे साक्षात गुरुजी बोलते हैं. तो उस बोलने वाली फ़ोटो ने इशारों इशारों में ताऊ को दिमाग शांत रखने की सलाह दी.

अब ताऊ बोला - श्रीमान मेरा नाम ताऊ रामपुरिया है. मैं रामपुरा का रहने वाला हूं और आजकल ब्लागरी करता हूं..और अब ब्लागरी मे Phd करने मेरे गुरुजी के पास हिमालय जा रहा हूं.

सहयात्री बोला - वाह श्रीमान वाह, आप तो काफ़ी ज्ञानी पुरुष लगते हैं. आपके साथ सफ़र करने मे काफ़ी आनंद आयेगा. क्यों ना हम नैनो टेक्नोलाजी के बारे मे बातें करे? या फ़िर एंटी मैटर के बारे में?

ताऊ ने सोच लिया कि आज ये बुद्दिजीवी की औलाद दिमाग का दही बना कर छोडेगा, ऐसे मानेगा नही. इसका इलाज तो ताऊ पने से ही करना पडेगा वर्ना इससे माथाफ़ोडी मे मेरे ब्लागरी के सारे पाठ धरे रह जायेंगे.

अब ताऊ बोला - श्रीमान मुझे आपके साथ इन विषयों पर चर्चा करके वाकई बडा आनंद आयेगा..आखिर एंटी मैटर की अवधारणा स्थापित करने के पीछे तो मुझे नोबल पुरुष्कार भी मिल चुका है. पर उससे पहले मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहूंगा.

सहयात्री को तो यह सुनकर मानों स्वर्ग मिल गया हो. वो बोला - श्रीमान आप अपना सवाल पूछिये..मुझे भी आपके सवाल का जवाब दे कर बडी प्रशन्नता होगी.

ताऊ बोला - श्रीमान ये बताईये कि मेरी चंपाकली (भैंस) भी घास खाती है और आपका घोडा भी घास खाता है. तो फ़िर मेरी भैंस तो गोबर करती है और आपका घोडा लीद करता है? इस विषय मे आप क्या कहेंगे?

यह सवाल सुनकर उस वैज्ञानिक के पसीने आगये और वह सर खुजाने लगा. उसने अपनी अनभिज्ञता जाहिर की.

अब ताऊ बोला - अरे बावलीबूच, ''जब तेरे को गोबर और लीद के बारे में भी जानकारी नहीं है तो तू ताऊ से एंटीमैटर और नैनो टेक्नोलाजी के बारे में क्या खाक चर्चा करेंगा? इब जाकर पहले गोबर और लीद का फ़र्क समझ के आ..और इब चुपचाप बैठ और मुझे अपना काम करने दे.''

परिचयनामा में 23 जुलाई गुरुवार को मिलिये : पारूल…चाँद पुखराज का से. शाम 3:33 PM पर

मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम

मिस.रामप्यारी का ब्लाग

"और रामकटोरी उदास हो गई"

"और रामकटोरी उदास हो गई"




नौकरानी का कहना
मेमसाहिबा स्कूल खुलने वाले हैं

इस बार मुन्नू को भी स्कूल भेजना है
बेटी की फ़ीस भरनी है.
कुछ एडवांस मिल जाता तो
मेमसाहिबा का फ़रमाना
रामकटोरी तुझे शर्म भी नही आती?
अभी पिछला एडवांस बाकी चल रहा है
और तू नये की बात करती है?
काम करना हो कर
वर्ना मैं कोई दुसरी बाई रख लूंगी.

इसी बीच हल्की फ़ुहारों का शुरु होना
और साहब की फ़रमाईश

मौसम कितना सुहावना हो गया है?
गर्मा गर्म कचोडियां हो जायें
तो कुछ बात बने
मेमसाहिबा का चिल्लाना
रामकटोरी ओ रामकटोरी
अरे कहां मर गई?
देख मौसम कितना सुहाना होगया है?
जरा कचोडियां और भजिये तल ले
रामकटोरी का कचोडियां तलते हुये

इतना सुहावना मौसम क्युं आता है?
जिसमे बच्चों की फ़ीस भरनी पडती है?
क्या ये वाकई सुहावना मौसम है?
और रामकटोरी उदास हो गई.


(इस रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)

परिचयनामा में 23 जुलाई गुरुवार को मिलिये : पारूल…चाँद पुखराज का से. शाम 3:33 PM पर

ताऊ साप्ताहिक पत्रिका अंक - 31

प्रिय बहणों, भाईयो, भतिजियों और भतीजो आप सबका ताऊ साप्ताहिक पत्रिका के 31 वें अंक मे हार्दिक स्वागत है.
पिछले सप्ताह एक अखबार मे पढा था कि टेकनोराती सर्च ईन्जिन के सर्वे अनुसार १३ करोड ३० लाख ब्लाग्स मे से पिछले ४ महिने में केवल ७४ लाख ब्लाग ही अपडेट हुये हैं. यानि करीब ९५ प्रतिशत ब्लाग मृत हो चुके हैं या उस मुहाने पर पहुंच चुके हैं. इन ७४ लाख मे से सिर्फ़ १ लाख के करीब ऐसे हैं जिन्हे ठीक ठाक पाठक और कमेम्ट्स उपलब्ध हैं.

हिंदी मे तो हालत और भी खराब है. कुछेक हजार ब्लाग्स हैं और खुलने की संख्या से कई गुना ज्यादा है बंद होने वाले ब्लाग्स की. और आप अंदाजा इस बात से लगाईये कि हमने अभी पिछले बुधवार यानि ठीक ५ दिन पहले ताऊजी डाट काम शुरु किया था. आश्चर्य तब हुआ जब कल चिठ्ठाजगत मे उसकी सक्रियता क्र. २५७ दिखी. यानि कुल ८ या ९ हजार हिंदी चिठ्ठों मे गतिशील कितने ब्लाग्स हैं? इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है.

इसका कारण क्या है? टिपणियों की कमी, नगण्य कमाई या बिल्कुल ही नही होना, पाठक संख्या नही होना, समय की कमी के साथ साथ धमकियां मिलना. इस सशक्त माध्यम का प्रयोग निजी स्वार्थ और खुन्नस निकालने के लिये किया जाने लगा है. किसी व्यक्ति या समुदाय विशेष के प्रति जहर उगलना भी इसी मे शामिल है. अनेकों मामलों मे धमकियां भी मिली हैं. और कईयों को आपने भी ब्लागिंग छोडते देखा होगा.

दोस्तों सोचिये, आप क्या कर रहे हैं? क्या आप नकारात्मक माहोल बना कर एक तरह से अपनी मातृभाषा को कमजोर नही कर रहे हैं? अगर कोई सक्रियता से लिख रहा है तो किसी को जलन क्यों होनी चाहिये? दूसरे की लकीर छोटी करने की बजाय अपनी लकीर बडी करने के सिद्धांत पर हमको क्यों नही चलना चाहिये? याद रखें कि किसी का भी चरित्र हनन करना बहुत आसान है.

एक तरफ़ बहस चलती है कि ब्लाग साहित्य है या क्या है? और दुसरी तरफ़ ये करम? कैसे साहित्य कोई लिखेगा यहां पर. हां अगर यहां कोई टिका भर रहे, वही उसकी हिम्मत है. एक मजाक भी काफ़ी प्रचलित है कि अधिकांश ब्लाग्स का सिर्फ़ एक पाठक होता है. दोस्तों, अगर आप किसी को प्रोत्साहित नही कर सकते तो निरुत्साहित तो हर्गिज मत किजिये.

दोस्तों, ऐसे मे सवाल उठता है कि क्या ब्लागिंग छोड देनी चाहिये? मित्रों, मैं तो कहुंगा कि नही. क्योंकि मेरे गहन निराशा के क्षणों मे एक पत्र मुझको, श्री समीरलाल जी द्वारा लिखा गया था. जिसके बाद मैने दुगुने उत्साह से लिखना शुरु किया. वर्ना मैं कभी का लिखना बंद कर चुका होता. उनका वह पत्र उनकी अनुमति से मैं फ़िर कभी भविष्य में अवश्य प्रकाशित करना चाहुंगा.

फ़िलहाल तो ये समझिये कि हम जो कुछ लिख रहे है वो एक पूंजी के रुप मे इंटरनेट पर जमा होरहा है जो कभी ना कभी हमारे या आने वाली पीढी के काम आयेगा. दोस्तों ..किसी को परेशान करके या अनावश्यक आलोचना से आप एक स्थापित ब्लागर को बडी आसानी से बाहर कर सकते हैं, पर क्या आप एक नये आदमी को यहां ला कर ब्लागर बना सकते हैं? नही ना? फ़िर आपको क्या हक है कि आप किसी को यहां से बाहर करें? सकारात्मक मौज लेने और नकारात्मक मौज लेने में बहुत फ़र्क है.

आपके सप्ताह की शुरुआत शुभ हो.

-ताऊ रामपुरिया

"सलाह उड़नतश्तरी की" -समीर लाल

अक्सर देखा जाता है कि ब्लॉगर अपने आलेख और शीर्षक में किसी अन्य ब्लॉगर के बारे में बात करते हैं, लिंक देते हैं. यह बैक लिंक देने की परंपरा कई वजहों से एक स्थापित एवं अच्छी परंपरा मानी गई है. मगर ध्यान रखें कि कहीं आप दूसरे ब्लॉगर का माखौल तो नहीं उड़ा रहे हैं. कहीं आप नियोजित या अनियोजित तरीके से जाने या अनजाने में उसे बदनाम करने का प्रयास तो नहीं कर रहे हैं. कहीं कुछ ऐसी बात तो नहीं कर रहे हैं, जिसका वो बुरा मान सकता है. प्रश्न करिये कि अगर वो भी आपके बारे में ऐसा लिखता तो आपको कैसा लगता?

जरुरी यह भी है क्या व्यगतिगत स्तर पर आपके उस ब्लॉगर से ऐसे संबंध हैं कि आप उसके बारे में मजाक उड़ाये या लिखें. ऐसे ही अक्सर लोग व्यक्तिगत लिखी गई ईमेल या चैट को उजागर कर देते हैं बिना पूर्वानुमति के. यह एक विश्वासघात है. अगर उजागर ही करना होता तो माध्यम तो उसके पास भी था. पूर्व में इस तरह की बातों ने बहुत गंभीर रुप लिया है और विवाद भी बहुत हुआ.

सबसे अच्छा तो हो कि यदि संभव हो तो जिससे मजाक करने का मन हो रहा है उसे अपना मेटर ईमेल के माध्यम से भेज अनुमति ले लें. आखिर उद्देश्य तो आपका मनोरंजन ही है. तो क्यूँ न स्वस्थ हो.

टीका टिप्पणी और तल्खी के लिए ईमेल, चैट, टिप्पणी हैं, उसे क्या पोस्ट के माध्यम से लिखना. भड़ास व्यक्तिगत और जाहिर सबको हो, यह तो कोई बात न हुई. आपको जो सबसे खराब लगता हो वो शायद मेरा सबसे अच्छा दोस्त हो. फिर इस तरह की बातों से खेमे ही बटेंगे और कुछ भी हासिल न होगा.

कोई वजह नहीं दिखती इन सब बातों की. हाँ बैक लिंक देकर रेफरेन्स यूज करने में किसी को भी क्या आपत्ति हो सकती है, खूब करिये बैक लिंक मगर सोच कर, विचार कर. क्षणिक प्रसिद्धि के लिए यह उचित नहीं.
आगे अगली बार:

ऐ जख्म! यूँ ही भर जाने दूँ या नोचूँ तुझको
जाने क्यूँ सोचता रहता हूँ कि सोचूँ तुझको
जो बहता है तो बह जाने दे आखो से मेरी ,
तू आरजू है कब तक यूँ ही पोछूं तुझको ...

अंतिम दो पंक्तियाँ भाई प्रकाश अर्श, जो मेरे करीबी, मेरे प्रशंसक, मेरे अनुज हैं और उनसे मुझे अभी बहुत सीखना है, उनके द्वारा जोड़ी गई है अनजाने में-शायद उन्हें याद भी न होगा कि कहाँ और कब जोड़ी हैं.

-समीर लाल 'समीर'


"मेरा पन्ना" -अल्पना वर्मा



'छत्तीसगढ़' ---यही वह राज्य है जहाँ से मैं समझती हूँ आज की तारीख में सब से अधिक हिंदी ब्लॉगर हैं. इस राज्य के बारे में जो कुछ भी यहाँ लिख रही हूँ उसमें अगर कहीं कोई त्रुटी दिखाई दे तो कृपया मुझे सूचित करीए.

छत्तीसगढ़ -जैसा की नाम ही इशारा करता है यह क्षेत्र ३६ गढ़ों का समूह रहा होगा इस लिए इस का नाम छत्तीसगढ़ पड़ा.

पौराणिक इतिहास-


कहते हैं कि राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या के नाम पर इस क्षेत्र को कोसल कहा जाने लगा था.
माना यह भी जाता है कि भगवान् राम अपने वनवास के समय 'छत्तीसगढ़ ' से हो कर गुजरे थे और शबरी ने उन्हें बेर यहीं खिलाये थे.

महाभारत से भी जोड़ती कहानियां कुछ इतिहासकार बताते हैं..उनके अनुसार इतिहासकार बिलासपुर के पांडो, कोरवा और कंवर जनजातियों का सम्बन्ध पांडव और कौरवों से हो सकता है.

रायगढ़ के 'कबरा पहाड़' और सिंघनपुर की गुफ़ाओं में मिले भित्तिचित्र इस क्षेत्र में मानव जाती के विकास की कहानी सुनाते हैं.

यहाँ के प्राचीन मन्दिर तथा उनके भग्नावशेष यह बताते कि यहाँ पर वैष्णव, शैव, शाक्त, बौद्ध के साथ ही अनेकों आर्य तथा अनार्य संस्कृतियों का विभिन्न कालों में प्रभाव रहा होगा.
- इसके प्राचीनतम उल्लेख सन 639 ई० में प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्मवेनसांग के यात्रा विवरण में मिलते हैं. यात्रा विवरण में लिखा है कि दक्षिण-कौसल की राजधानी सिरपुर थी.
-कहते हैं-महाकवि कालिदास का जन्म भी छत्तीसगढ़ में हुआ था.

इतिहास से --


-1000 ई. में पहला कलचुरि राजा कलिंगराज कोसल पहुँचा ,उसके बेटे रत्नदेव ने अपने राज्य की राजधानी रत्नपुर में बनाई.कलचुरि शासन दो हिस्सों में बँटा था. एक शिवनाथ के उत्तर में और दूसरा शिवनाथ के दक्षिण में.. दोनों ओर 18 गढ़. जहाँ ये १८-18 प्रशासनिक इकाईयां बनीं.इस तरह कलचुरियों के 36 गढ़ थे जो 36garh के नामकरण का आधार बना.
- मुगलों और मराठों के शासन काल में बस्तर को 36garh शामिल हुआ.
-मराठे और कुछ समय तक अंग्रेज भी छत्तीसगढ़ का शासन नागपुर से सँभालते थे.बाद में अंग्रेजों में रायपुर को राजधानी बना दिया.
-अंग्रेजी हुकूमत के समय 1860 में मध्य प्रांत का गठन हुआ. नागपुर, महाकोसल और छत्तीसगढ़ को मिलाकर वे इसे 'सीपी एंड बरार 'कहते थे. इसमें छोटी-छोटी कुल 14 रियासतें थीं.
-१९४७ में आज़ादी के बाद १९५६ तक छत्तीसगढ़ महाकोसल का हिस्सा था.
-1956 में छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश का हिस्सा बना.
-छत्तीसगढ़ को अपनी पहचान बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी.खूबचंद बघेल [१९५६-६९ ] पवन दीवान, शंकर गुहा नियोगी ने [1977 से 1990 ]आन्दोलन चलाये.
-1994 में मध्यप्रदेश विधानसभा में छत्तीसगढ़ राज्य की मांग की गई और कुछ पार्टियों के लिए यह चुनावी मुद्दा बन गया.
और इस तरह लम्बे इंतज़ार के बाद पहली नवंबर 2000 से देश के नक्शे पर मध्य प्रदेश से कट कर 'छत्तीसगढ़ 'नाम का एक नया राज्य बन गया.
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जानते हैं इस राज्य के बारे में--

छत्तीसगढ़ के उत्तर में सतपुड़ा, मध्य में महानदी और उसकी सहायक नदियों का मैदानी क्षेत्र और दक्षिण में बस्तर का पठार. राज्य की प्रमुख नदियाँ हैं - महानदी, शिवनाथ , खारुन पैरी और इन्द्रावती नदी.
मूल भाषा-छत्तीसगढ़ी ,
राजधानी-रायपुर
जिले-१६

यहाँ का लोक गीत-संगीत तो बहुत प्रसिद्द हैं.
कई जनजातियों वाला यह राज्य धान की भरपूर पैदावार के कारण धान का कटोरा भी कहलाता है.
भारत देश की १२% वनसंपदा यहीं है.राज्य का ४४% हिस्सा वनों से घिरा है.यहाँ २ राष्ट्रिय उद्यान,११ Wildlife Sanctuaries पर्यटकों का मुख्य आकर्षण हैं.
मेरी जानकारी में विद्युत उत्पादन और आपूर्ति में यह राज्य स्वयम में सक्षम है.
यह राज्य सभी राज्यों से सड़क,वायु,और रेल मार्ग से जुडा हुआ है.

छत्तीसगढ़ में बहुत कुछ है देखने के लिए.पुरानी गुफाएं,मंदिर,जल प्रपात आदि..हर जिले में कुछ न कुछ !
मुख्य पहेली के चित्र में आप ने दंतेश्वरी मंदिर देखा.
क्लू के चित्र में इसी मंदिर का गलियारा और दूसरे क्लू में आप ने भारत का 'निआग्रा फाल'कहा जाने वाला बस्तर का 'चित्रकोट जल-प्रपात ' देखा.जिसे हाल ही के एक सर्वे में भारत के सात अजूबों में शामिल किया गया है.
हम आप को पहेली के ज़रिये 'दंतवाडा ' ले कर गए थे.
'दंतवाडा में विश्व में सबसे अधीक iron -ore के desposits पाए गए हैं.
यहाँ की मिटटी में खनिज प्रचुर मात्रामें है .
यहाँ का मुख्य आकर्षण है दंतेश्वरी देवी का मंदिर-:
आज जानते हैं 'बस्तर 'की कुल देवी के दंतेश्वरी देवी के मंदिर के बारे में-:

सम्बंधित पौराणिक कथा-

कहा जाता है कि सती पार्वती ने अपने पिता द्वारा अपने पति, भगवान शिव का अपमान किए जाने पर हवन कुंड में कूदकर अपनी जान दे दी थी. भगवान शिव को आने में थोड़ी देर हो गई, तब तक उनकी अर्धांगिनी का शरीर जल चुका था. उन्होंने सती का शरीर आग से निकाला और तांडव नृत्य आरंभ कर दिया. अन्य देवतागण उनका नृत्य रोकना चाहते थे, अत: उन्होंने भगवान विष्णु से शिव को मनाने का आग्रह किया. भगवान विष्णु ने सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए और भगवान शिव ने नृत्य रोक दिया.
कहा जाता है कि डंकिनी-शंखनी नदी के तट पर परम दयालु माता सती का दांत वहां गिरा था और यह जगह एक शक्तिपीठ के रूप में प्रतिष्ठित हो गया और दंतेश्वरी माता के रूप में देवी को यहाँ पूजा जाने लगा.

इसी मंदिर से सम्बंधित बस्तर के राजा की एक कहानी और सुनिए--


बस्‍तर के राजा अन्‍नमदेव वारांगल, आंध्रप्रदेश से अपनी विजय के बाद बस्‍तर की ओर बढ रहे थे साथ में मॉं दंतेश्‍वरी का आशिर्वाद था . गढों पर कब्‍जा करते हुए बढते अन्‍नमदेव को माता दंतेश्‍वरी नें वरदान दिया था जब तक तुम पीछे मुड कर नहीं देखोगे, मैं तुम्‍हारे साथ रहूंगी . राजा अन्‍नमदेव बढते रहे, माता के पैरों की नूपूर की ध्‍वनि पीछे से आती रही, राजा का उत्‍साह बढता रहा .

शंखिनी-डंकिनी नदी के तट पर विजय मार्ग पर बढते राजा अन्‍नमदेव के कानों में नूपूर की ध्‍वनि आनी अचानक बंद हो गई . वारांगल से पूरे बस्‍तर में अपना राज्‍य स्‍थापित करने के समय तक महाप्रतापी राजा के कानों में गूंजती नूपूर ध्‍वनि के अचानक बंद हो जाने से राजा को वरदान की बात याद नही रही, राजा अन्‍नमदेव कौतूहलवश पीछे मुड कर देखा.
माता का पांव शंखिनी-डंकिनी के रेतों में किंचित फंस गया था! अन्‍नमदेव को माता नें साक्षात दर्शन दिये पर वह स्‍वप्‍न सा ही था . माता ने उनसे कहा 'अन्‍नमदेव तुमने पीछे मुड कर देखा है, अब मैं जाती हूं . बस वहीँ 'डंकिनी-शंखनी' के तट पर माता सती के दंतपाल के गिरने वाले उक्‍त स्‍थान पर ही जागृत शक्तिपीठ, बस्‍तर के राजा अन्‍नमदेव ने अपनी अधिष्‍ठात्री मॉं दंतेश्‍वरी का मंदिर बनवाया दिया .
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----ऐसा भी कहा जाता है कि यह नाम देवी का नया नाम है इनका पुराना नाम मानिकेश्वरी देवी था.
-यह मंदिर चार भागों में है-
गर्भ गृह,महा मंडप,मुख्य मंडप, और सभा मंडप..
-पहले दो भाग पत्थर में बने हैं.
यह मंदिर भी कई बार बनवाया गया है और वर्तमान स्वरुप ८०० साल पुराना है.एक गरुड़ स्तम्भ भी मंदिर के प्रवेश द्वार के सामने बाद में ही बनवाया गया था.
यहाँ का ५०० साल से चलता आ रहा बस्तर दशेहरा मेला बहुत ही प्रसिद्द है.एक लकडी के रथ पर माता की कैनोपी को रख कर यहाँ की tribes के लोग खींचते हैं.
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कैसे पहुंचे-
यह जगह जगदलपुर से डेढ़ घंटे कि दूरी पर है.
सबसे नज़दीक हवाई अड्डा -रायपुर का है.
विशाखापत्तनम से बैलाडाला जाती हुई रेल थोडी देर को इस स्टेशन पर रूकती है.
जगदलपुर सब से करीबी शहर है.
आंध्र प्रदेश से दंतवाडा के लिए नियमित बस सेवा है.
मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ के बड़े शहरों को जाती बसें भी यहाँ रुक कर जाती हैं.
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कब जाएँ-
-वर्ष पर्यंत जब भी माता का बुलावा हो.
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आज के लिए इतना ही....अगली बार एक नयी जगह ले कर आप को चलेंगे,तब तक के लिए नमस्कार.



“ दुनिया मेरी नजर से” -आशीष खण्डेलवाल


यह डॉग तो पढ़ता है..

पैट डॉग्स को मौखिक निर्देशों का पालन करना तो सभी सिखाते हैं, लेकिन न्यूयॉर्क की एनिमल ट्रेनर लीजा रोजेनबर्ग ने वह कर दिखाया है, जो नामुमकिन सा लगता है। उन्होंने अपने पैट डॉग को पढ़ना सिखा दिया है और अब वह लिखित निर्देशों का पालन करने लगा है। जब उसे बोर्ड पर bang लिखा दिखाया जाता है तो वह आराम से लेट जाता है, wave दिखाते ही अपने अगले पंजे को उठाकर हिलाने लगता है और जब उसे sit up शब्द दिखाया जाता है तो अपने पिछले पैरों के बल सीधा खड़ा हो जाता है, मानों इंसानों की तरह बैठ गया हो।

रोजेनबर्ग अब अपने विलो नामक इस पालतू दोस्त को विभिन्न विज्ञापनों औऱ टीवी शो के लिए तैयार कर रही हैं। वे दावा करती हैं कि विलो करीब 250 ऐसे निर्देशों का पालन कर सकता है, जो किसी सामान्य डॉग के लिए मुश्किल है।

रोजेनबर्ग जी, आप हमारी रामप्यारी को नहीं जानतीं। वह ढाई सौ तो क्या ढाई लाख ऐसी चीजें कर सकती है, जो आप भी नहीं कर सकतीं :)


"मेरी कलम से" -Seema Gupta

एक औरत अपने घर के बाहर आई और लंबी सफेद दाढ़ी में उसने सामने बैठे 3 बूढ़े आदमियों को देखा. वह उन्हें जानती नहीं थी. वह बोली "मुझे लगता है आपको भूख लगी होगी. कृपया अंदर आयें मै आपको खाने के लिए कुछ देती हूँ.
उन्होंने पुछा क्या घर का मुखिया घर पर है????

"नहीं", उस महिला ने उत्तर दिया. "वह बाहर है."
"तब हम घर में नहीं आ सकते, उन बजुर्गो ने कहा..

शाम को जब उसका पति घर आया था, तब उसने दिन में घटे घटनाक्रम के बारे में, सब कुछ बताया .
तब उसके पति ने कहा " कल मैं घर में रहुंगा तो जब आयें तो उन्हें अन्दर आने को आमंत्रित करना.
अगले दिन वो फ़िर आये. वह बाहर जाकर उन पुरुषों को अंदर आने का निवेदन किया.
"हम एक घर में एक साथ नहीं जाते हैं," उन्होंने कहा.
ऐसा "क्यों है?" उस महिला ने पूछा
तब उनमे से एक बूढ़े आदमी ने विस्तार में बताना शुरू किया...: "उसका नाम धन," वह एक अपने दोस्तों की ओर इशारा करते हुए कहा, और एक दूसरे की ओर इशारा करते हुए कहा, "वह सफलता है, और मैं प्यार हूँ." तब उसने कहा, "अब जाओ और अपने पति से पुछ कर आओ की सबसे पहले वो अपने घर में किसका प्रवेश चाहते हैं"

औरत घर में गयी और अपने पति से सब कुछ कहा. उसका पति बहुत खुश हुआ और बोला ये बात है , तो हम धन को आमंत्रित करते हैं , ताकि हमारा घर धन के साथ भर जाये.

उसकी पत्नी अपने पति की बात से असहमत दिखी और बोली क्यों न हम सफलता को पहले आमंत्रित करें???

उनकी बेटी जो घर के दूसरे कोने से सुन रही थी, बीच में आकर बोली , इस वक़्त प्यार को आमंत्रित करने के लिए बेहतर होगा? हमारा घर तो प्यार से भर जाएगा!"

ये सुन कर पति ने पत्नी से कहा....क्यूँ न हम अपनी बेटी की सलाह पर ध्यान दे. बाहर जाओ और प्यार को हमारे मेहमान के रूप में आमंत्रित करो"

वह औरत बाहर गई और 3 बूढ़ों, से बोली की आप सब में से प्यार को मेरे साथ अंदर आने के लिए आमंत्रण है. जैसे ही प्यार उठा और चलने लगा धन और सफलता भी उसके पीछे पीछे चलने लगे, इस पर उस महिला ने हैरान होकर कहा मैंने तो सिर्फ प्यार को निमंत्रण दिया है फिर आप लोग?????
बूढ़े आदमियों ने एक साथ उत्तर दिया: "यदि आप दौलत या सफलता, को बुलाती तो बाकि दो बाहर ही रह जाते ,

मगर आपने प्यार को बुलाया तो हम भी साथ ही आयेंगे क्यंकि , जहाँ प्यार होता है, वहाँ संपत्ति और सफलता दोनों ही होतें हैं




"हमारा अनोखा भारत" -सुश्री विनीता यशश्वी



बैजनाथ

बैजनाथ अल्मोड़ा से 41 मील दूर स्थित है। इसको प्राचीन समय में वैद्यनाथ के नाम से भी जाना जाता है। वैजनाथ को कत्यूरी राजवंश के लोगों ने बसाया था। बैजनाथ के पास में ही सरयू नदी बहती है।
बैजनाथ के मुख्य मंदिर के पास ही केदारनाथ का मंदिर स्थित है। इस मंदिर में शिव की मूर्ति के साथ

-साथ गणेश, ब्रह्मा, महिषमर्दिनी की मूर्तियां रखी हुई हैं। इस मुख्य मंदिर के चारों ओर 15 छोटे-छोटे मंदिरों का समूह है। यह मंदिर उत्तरीय शिखर शैली से बनाये गये हैं।


बैजनाथ के मुख्य मंदिर से कुछ दूरी पर सत्यनारायण , रकस देव तथा लक्ष्मी के मंदिर स्थित हैं। सत्यनारायण मंदिर की चर्तुभुजी विष्णु प्रतिमा खासी दर्शनीय है। इस मूर्ति को काले पॉलिशदार पत्थर से बनाया गया है। यह मूर्ति बहुत विशाल है।
बैजनाथ की कई मूर्तियों को अब केन्द्रीय पुरातन विभाग ने अपने पास संरक्षित कर लिया है। इन संरक्षित मूर्तियों में शिव

-पार्वती की मूर्ति तथा ललितासन में बैठे कुबेर की मूर्ति हैं। इनके अतिरिक्त सप्तमातृका, सूर्य, विष्णु, माहेश्वरी, हरिहर, महिषमर्दिनी आदि की मूर्तियां हैं।



"नारीलोक" -प्रेमलता एम. सेमलानी


राजस्थानी दाल ढोकली

भारत देश मे विभिन्न संस्कृतिया बसती है। चारो ऋतुओ का भी यहा दबदबा है। उसी के अनुरुप हमारे विभिन्न प्रान्तो मे मोसम अनुसार भी स्वादिष्ट एवम पोष्टिक खाना बनता है। वर्षा अमुमन भारत के हर हिस्से मे अपनी दस्तक दे चुकी है। मै आज बरसात के दिनो मे बनाई जाने वाली एक राजस्थानी व्यंजन विधि आपका परिचय कराने जा रही हू जो खाने मे तो मजेदार तो है ही पर स्वास्थ के लिए भी लाभकारी है। सभी इसे पसन्द करेगे।

3-4 व्यक्तियो के लिए दाल ढोकली

सामग्री

*मूग दाल (छिल्केवाली) 1 कटोरी

*गेहू का आटा 1-1/2 कटोरी

*तेल/घी 4 छोटा चम्मच

*लालमिर्च पाउडर 1-1/2 छोटा चम्मच

*हल्दी थोडी

*अजवाईन थोडासा

*राई थोडीसी

*जीरा थोडासा

*हिन्ग थोडीसी

*कडीपत्ता कूछ पत्ते

*नमक स्वाद अनुसार

बनाने का तरिका

सबसे पहले आप गेहू का आटा ले। उसमे तेल या घी का मोयन, नमक, लाल मिर्ची पाउडर, थोडी सी हल्दी, थोडी सा अजवाईन डाले। अब आटे को सख्त गून्ध ले। ऑटा गून्ध लेने के बाद उसकी छोटी छॉटी गोल लोईयॉ {छोटे टूकडे/balls) बना ले। प्रत्येक लोई {छोटे टूकडे/balls) को हथेली के बीच मे रखकर अगुली से दबाऐ और खाली बर्तन मे रखते जाए।

गैस पर एक पतीली रखे उसमे पानी डाले । जब पानी मे उबाल आ जाए तब धूली हूई छिल्के वाली दाल (हरी दाल ) उबलते पानी मे डाल दे। दो मिनिट बाद बनी हुई लोईयॉ {छोटे टूकडे/balls) उसमे डाल दे। अब ढक कर पन्द्रह बीस मिनट पकने का इन्जार करे। बीच बीच मे चम्मच से हिलाते रहे।

एक अलग कडाई मे घी गर्म करे। उसमे राई, जीरा,हिन्ग, कडीपत्ता, और मिर्ची पाउडर का तडका डाले।

दाल के साथ उबली ढोकली को भी कडाई मे डाल दे ।

अब तैयार है लजीज दाल ढोकली । उसे एक प्लेट मे डाले, उपर (इच्छा हो तो) थोडा सा घी और हरा धनिया-पती से सजाकर परोसे ।

नोट-: छोटी छोटी गोल लोईयॉ {छोटे टूकडे/balls) कैसे बनानी है फोटु को बडा कर देख ले।

............

जाते जाते एक बात- कल मैने रसोई घर मे निम्बु और अमरुद (जाम) को बाते करते हुये सुना - निम्बु अमरुद से कहता है-" कि मेरे गर्भ मे अगर प्रकृति ने बीज नही बनाया होता तो मुझ मे वह सामर्थ्य होता कि मै किसी को मरने नही देता।

पलट कर अमरुद बोला -" अगर मेरे गर्भ मे बीज नही होता तो जो भी मुझे खाता मै उसे जीने नही देता। उक्त दोनो ही तथ्य औषधि शास्त्रियो के मताअनुसार शत-प्रतिशत सत्य है।

निम्बु कहता है-

@ शिशु अगर माता का दुध उलटी करता हो तो मेरे ‍रस के पॉच बुन्द और तीन चम्मच पानी मिलाकर शिशु को पिलाया जाए तो शिशु दुध नही उलटेगा।

@आगे निम्बु बोलता है- मेरे टुकडे करके फ्रिज मे रखेगे तो फ्रिज मे दुर्गन्ध नही आएगी।

@और तो और जो कोई भी गुनगुने पानी के साथ नमक डालकर एक गिलास भूखे पेट सुबह-सुबह नित्य मुझे पीयेगा, उसका मोटापा कम कर दुगा।

अब मुझे आज्ञा दीजिए अगले सप्ताह मै फिर आऊगी एक नये रेसिपी के साथ।

नमस्कार।

प्रेमलता एम सेमलानी




सहायक संपादक हीरामन मनोरंजक टिपणियां के साथ.
"मैं हूं हीरामन"

अरे हीरू ..देख देख ये अभिव्यक्ति अंकल क्या कह रहे हैं?

अरे क्या? देख देख ये तो बोल रहे है कि समीर अंकल और रावण दोनो क्लास फ़ेलो थे.

अरे वाह…ला दिखा..

अरे दिखा क्या? ले खुद ही बांच ले सारी टिपणियां.

abhivyakti said...

रावण के पिता का नाम विश्रवा और माता का नाम कैकेशी था रावण कुबेर का सौतेला भाई था रावण समीर जी से डरता था.रावण सामीर जी की कक्षा में पढता था.


समीर जी टीचर की टेबल पे च्विंगम चिपकाते थे..नाम रावण का आता था .रावण को डांट पड़ती थी.रावण बहुत अच्छा लड़का था .

July 18, 2009 8:49 AM

Murari Pareek said...

अर ताऊ इतणा तो कदै भाड़े का घर भी ढूंढना न पड्या !

July 18, 2009 9:52 AM

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

अटकलों की मान गये - रेलवे का मालगोदाम और साबरमती आश्रम!
बापू सिर पीट लेंगे!

July 18, 2009 6:56 PM

Shiv Kumar Mishra said...

मैं तो पहली बार आया. ऐसे में पहेली का जवाब दे पाना संभव नहीं है. जब नीरज भइया इतनी बार आने के बाद भी नहीं बता पाए तो हम कौन से खेत के बैंगन हैं?
रामप्यारी बहुत सुन्दर दिख रही है. साज-वाज बहुत बढ़िया है.

July 18, 2009 11:14 AM

अविनाश वाचस्पति said...

भेजा फ्राई
बल्कि
हो गया
भेजा ड्राई।

July 18, 2009 3:25 PM

अरे आज तो मजा आगया इन टिपणियों में.

हां यार ..चल अब जरा घूम फ़िर कर आते हैं बरसात में.

हाम..हां..चल भाई.



ट्रेलर : - पढिये : सुश्री पारुल जी से आत्मिय बातचीत
"ट्रेलर"

इस सप्ताह के गुरुवार शाम ३:३३ पर परिचयनामा में मिलिये पारूल…चाँद पुखराज का से


ताऊ : अगर अब मैं आपसे यह पूछूं कि आपकी सबसे बडी कमजोरी क्या है?

पारुल जी : मेरी कमजोरी? ताऊ जी, मैं .दूसरों पे जल्द विशवास कर लेती हूँ ...इसलिए अकसर वसीम बरेलवी का एक शेर याद आता है -

हमारी सादा मिजाजी की दाद दे की तुझे
बगैर परखे तेरा एतबार करने लगे

ताऊ के साथ एक बहुत ही सौम्य मुलाकात हमारी सम्माननिय मेहमान सुश्री पारुलजी से




अब ताऊ साप्ताहिक पत्रिका का यह अंक यहीं समाप्त करने की इजाजत चाहते हैं. अगले सप्ताह फ़िर आपसे मुलाकात होगी. संपादक मंडल के सभी सदस्यों की और से आपके सहयोग के लिये आभार.

संपादक मंडल :-
मुख्य संपादक : ताऊ रामपुरिया
वरिष्ठ संपादक : समीर लाल "समीर"
विशेष संपादक : अल्पना वर्मा
संपादक (तकनीकी) : आशीष खण्डेलवाल
संपादक (प्रबंधन) : Seema Gupta
संस्कृति संपादक : विनीता यशश्वी
सहायक संपादक : मिस. रामप्यारी, बीनू फ़िरंगी एवम हीरामन
स्तम्भकार :-
"नारीलोक" - प्रेमलता एम. सेमलानी

ताऊ पहेली – ३१ विजेता श्री अनिल पूसदकर

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम.

 

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कल की ताऊ पहेली – 31   का सही जवाब है  . दंतेश्वरी मंदिर.  जिसके बारे में कल सोमवार की ताऊ साप्ताहिक पत्रिका मे विस्तार से बता रही हैं सु अल्पना वर्मा.

 

अब बात करें ताऊ पहेली – 31  के परिणामों की. आज के प्रथम विजेता रहे हैं श्री अनिल पूसदकर  दुसरे विजेता हैं प.  श्री डी. के शर्मा “वत्स”.  और तीसरे विजेता हैं सु. सीमा गुप्ता.    सभी को हार्दिक बधाई.

 

हमारी परंपरा अनुसार अबकी बार का  ताऊ के साथ कलेवा करने का आमंत्रण. दिया जारहा है आज  के प्रथम  विजेता श्री अनिल पूसदकर   को.  उनको  जल्द ही निमंत्रण भेजा जा रहा है.  हार्दिक बधाई.

 

 

 

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आज के प्रथम विजेता श्री अनिल पूसदकर .. हार्दिक बधाई .पूरे १०१ अंक


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द्वितिय विजेता प. श्री डी. के शर्मा “वत्स” हार्दिक बधाई पूरे ९९ अंक

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तृतिय  विजेता सु. सीमा गुप्ता हार्दिक बधाई पुए ९९ अंक.

 

 

आईये अब क्रमश: आज के अन्य माननिय विजेताओं से  आपको मिलवाते हैं.

 

 

  HEY PRABHU YEH TERA PATH  अंक ९८


woyaadein
अंक ९७

premlatapandey अंक ९६
राजेश स्वार्थी अंक ९५

  Vivek Rastogi अंक ९४


रंजन अंक ९३

  रविकांत पाण्डेय अंक ९२

  दिलीप कवठेकर अंक ९१

  Harkirat Haqeer अंक ५०

  अविनाश वाचस्पति अंक ५०

 

 

इसके अलावा निम्न महानुभावों ने भी इस पहेली अंक मे शामिल होकर हमारा उत्साह बढाया. जिसके लिये हम उनके हृदय से आभारी हैं

 

डा. मनोज मिश्र,  श्री drsharma,  श्री नीरज गोस्वामी,  डा. रुपचंद्र शाश्त्री मयंक,  श्री शिवकुमार मिश्रा,  श्री सोनु,  श्री भैरव,  श्री लालों के लाल इंदौरीलाल,  श्री दीपक तिवारी साहब,  श्री उडनतश्तरी,  श्री सुशील कुमार छोंक्कर,  श्री भानाराम जाट,  श्री सही और श्री हरि…आप सबका हार्दिक आभार.

 

 

 

 

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हाय…गुड मोर्निंग एवरी बडी…आई एम राम..की प्यारी रामप्यारी.

 

मेरे सवाल का सही जवाब तो आपको मालुंम चल ही गया होगा? रावण के पिताजी थे विशेश्र्वा और माताजी थी दैत्य राजकुमारी कैकशी.  और कुबेर उनका सौतेला भाई था जो उनसे पहले लंका का राजा था. तो आईये अब मैं आपको उन साहबान के नाम बताती हूं जिन्होने मेरे सवाल का सही सही जवाब दिया और जिसके बदले में मैने उनके खाते मे ३० नम्बर जमा करवा दिये.

 

सबसे पहले MA Sharma सेहर आंटी,  राजेश शर्मा अंकल, अभिव्यक्ति अंकल,  और फ़िर आई महक आंटी.

उसके बाद मुरारी पारीक अंकल, सैयद अंकल, रंजन अंकल, सीमा आंटी, और फ़िर आये गौतम राजरिशी अंकल,

 

फ़िर अंतर सोहिल अंकल, संजय बैंगाणी अंकल,  प.डी.के. शर्मा वत्स अंकल, और फ़िर आये काजलकुमार अंकल,  फ़िर मीत अंकल, मुम्बई टाईगर अंकल,  हे प्रभु ये तेरा पथ अंकल, फ़िर भारतिय नागरिक अंकल.

 

फ़िर वो यादें भैया,  गगन शर्मा अंकल,  रविकांत पाण्डे अंकल,  दिलिप कवठेकर अंकल और अविनाश वाचस्पति अंकल.

 

आप सबको पूरे तीस तीस नम्बर दिये गये हैं.  यानि आप सबके खाते मे रामप्यारी ने तीस तीस नम्बर जमा करवा दिये हैं. अब रामप्यारी की तरफ़ से रामराम…अगले शनीवार फ़िर मिलेंगें. तब तक के लिये नमस्ते ..और हां आपका कल से शुरु होने वाला सप्ताह शुभ हो.

 

 

 

अच्छा अब नमस्ते. कल सोमवार को ताऊ साप्ताहिक पत्रिका मे आपसे पुन: भेंट होगी.

 

सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद.

ताऊ पहेली – ३१  का  आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया.

 

संपादक मंडल :-

 

मुख्य संपादक : ताऊ रामपुरिया
वरिष्ठ संपादक : समीर लाल "समीर"
विशेष संपादक : अल्पना वर्मा
संपादक (तकनीकी) : आशीष खण्डेलवाल
संपादक (प्रबंधन) : Seema Gupta
संस्कृति संपादक : विनीता यशश्वी
सहायक संपादक : मिस. रामप्यारी, बीनू फ़िरंगी एवम हीरामन

स्तंभकार : प्रेमलता एम. सेमलानी ( नारीलोक)