ताऊ शनीचरी पहेली राऊण्ड 2 अंक 5

प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरै की घणी राम राम. आज हम ताऊ शनीचरी पहेली के दुसरे राऊंड के अंक पांच की पहेली पूछने वाले हैं.

हमको पता लगा है कि रामप्यारी उल्टी सीधी बकबास करती रहती है. खाली दिमाग शैतान का घर..यही सोच कर रामप्यारी को हमने क्ल्यु देने का और बोनस सवाल पूछने का जिम्मा दे रखा है.

पर रामप्यारी मे बचपना बहुत ज्यादा है. दूसरी कक्षा मे पढने लग गई पर अभी तक अक्ल कोडी की नही है. ताऊ जब दूसरी कक्षा मे पढता था तब अंगरेजी में अंगरेजों को हरा देता था. लगता है रामप्यारी ताऊ का नाम डूबोयेगी.

ताऊ ने सिफ़ारिश करके उसको पुलिस मे भर्ती करवा दिया तो पिस्तौल लेकर जानवरो और पक्षियों को डराती है. उसका आज का सवाल वो खुद की बेवकूफ़ी के बारे मे ही पूछ रही है. अत: सोच समझ कर जवाब दिजियेगा. क्योंकि बेवकूफ़ो के सवाल भी बडे बेवकूफ़ाना होते हैं.


रामप्यारी के ब्लाग तक पहुंचने के लिये आप रामप्यारी की फ़ोटॊ जो कि यहां साईड बार मे लगी है, उस पर चटका लगायें और वहां पहुंच जाये और वहां क्ल्यू की फ़ोटो पर चटका लगा कर आप वापस यहां आ जायें.आपको सब क्ल्यु रामप्यारी के ब्लाग पर ही मिलेंगे.

आईये अब आपको सीधे पहेली की तरफ़ लिये चलते हैं.





यह कौन सी जगह है?



इस पहेली के जवाब देने का समय कल रविवार सूबह दस बजे तक बढा दिया गया है. ताऊ साप्ताहिक पत्रिका का प्रकाशन सोमवार सूबह पुर्ववत होगा.



अब रामप्यारी का विशेष बोनस सवाल : - ३० अंक के लिये.











वैरी गुड वाली मार्निंग अंकलों, आंटियों एंड दीदीयों,

अब मैं आपको क्या बताऊं? रामप्यारी तो लगता है आज आफ़त मे फ़ंस गई है. हुआ युं कि मैने ताऊ को साफ़ मना कर दिया कि मैं अब और नही पढूंगी. मैने दूसरी कक्षा मे फ़ैल होने का सर्टीफ़िकेट प्राप्त कर लिया है. ज्यादा पढकर क्या करना? और ज्यादा दिमाग खराब होगा.

मेरी इस बात पर ताऊ बोला कि - हां रामप्यारी तेरी बात तो सही है. मैं भी इसीलिये पांचवी फ़ैल का लायसेंस मिलते ही पढना बंद कर चुका था और लूट मार शुरु कर दी थी.

अब हुआ युं कि ताऊ ने मुझे पुलिस मे काम पर लगवा दिया और मुझे वहां से एक पिस्तौल भी मिल गया जिससे मैं सब पर रौब भी गांठती हूं. और सब मुझसे डरते भी हैं. अब इसी मे लफ़डा हो गया.

आप तो जानते ही हो कि मुझे सिर्फ़ खेलना और चाकलेट खाना पसंद है. अब जब मैं ड्युटी पर जाती हूं तो हाजिरी लगा कर तफ़्तीश करने के बहाने दिन भर मटरगश्ती करती हूं. काम कभी नही करती. कई साथ वालों ने मेरी शिकायत भी साहब लोगों से कर दी.

एक दिन हमारे बडे साहब ने मुझे एक केस सौंपा तफ़्तीश करने के लिये. हुआ युं कि एक मर्डर होगया और जांच का काम पूरा करने मैं रवाना हुई. रास्ते मे मेरे साथ वाले बच्चे मिल गये और मैं दिन भर खेलती रही. शाम को याद आया कि - अरे रामप्यारी आज तो तेरी नौकरी गई. मैं तो भूल ही गई की मुझे मौका-ए-वारदात पर पहुंचना था.

अब मैं जल्दी २ वहां से भागी घटना स्थल की और. रास्ते मे सामने से ताऊ आता दिखाई दिया और मुझे इस तरह बेतहासा भागते देख कर कारण पूछा. मैने ताऊ को सब सच्ची २ बात बतादी. क्योंकि मैं दुनियां मे सबसे झूंठ बोल सकती हूं पर ताऊ से नही.

मेरी बात सुनकर ताऊ बोला - कि रामप्यारी अब तू एक काम कर. मैं वहीं से आ रहा हूं. तेरे को सारा विवरण बताता हूं. तू यहीं बैठकर रिपोर्ट बना ले और फ़िर जाकर यही रिपोर्ट सबमिट कर देना.

बात मुझे जम गई.अब ताऊ ने मुझे बताया कि - लिख रामप्यारी --

एक कमरा..जिसका एक दरवाजा, जो अंदर से बंद है. उस कमरे की दो खिडकियां..एक अंदर से बंद और दूसरी खुली है. अंदर का सारा नजारा इसी खिडकी से झांक कर देखा जा सकता है.

खिडकी से झांकने पर सामने की दिवार पर एक घोडे की फ़ोटो टंगी है. उस फ़ोटो का कांच टुटा हुआ है.

कमरे के बीचोंबीच एक गोल टेबल है. जिस पर तीन चाय के कप रखें हैं..दो खाली हैं और एक कप आधा अब भी भरा हुआ है. साथ मे दो प्लेट रखी हैं...एक खाली है और दुसरी मे चार बिस्कुट रखे हैं. सिगरेट की ऐश ट्रे से अभी भी धुंआ निकल रहा है. और वहीं पर एक जासूसी उपन्यास " मौत का सौदागर" रखा है जिसके पेज नम्बर इक्कासी - बयांसी खुले हुये हैं.

टेबल के चारों और तीन कुरसियां लगी हैं. दो कुर्सी खाली हैं और एक पर लाश है.. लाश की गर्दन लटक चुकी है और सीने मे एक बडा सा खंजर घुसा हुआ है... कमरे मे घुटनों तक पानी भरा है... और कोई सा FM रेडियो स्टेशन बज रहा है. माहौल मे एक अजीब सा सन्नाटा पसरा है.


यह रिपोर्ट लिख कर मेरी तो खुशी के मारे चीख ही निकल पडी. और मैने कहा - वाह ताऊ वाह..क्याअ खूब रिपोर्ट लिखवाई है आपने. लगता है कि आप भी "पेरी मेशन" से कम नही हो? आज तो अब मेरा प्रोमोशन पक्का ही समझो.

मैं बहुत खुश होती हुई साहब के केबिन मे घुसी और रिपोर्ट साहब के सामने रख दी.

साहब ने पुरी रिपोर्ट पड्गी और मेरे उपर जोर से चिल्लाये - रामप्यारी ..ये क्या तमाशा लगा रखा है? मैं तुमको अभी सस्पेंड करता हूं.

मैं तो घबरा गई. मैं कुछ बोलती उसके पहले ही साहब चिल्ला कर बोले - तुम मौका-ए-वारदात पर गई ही नही थी और यह झूंठी रिपोर्ट बना कर लाई हो. सच बताऒ? वर्ना नौकरी से बाहर समझो अपने आपको. और सात दिन के अंदर मुझे जवाब चाहिये.

अब आप मुझे ये बताइये कि इस रिपोर्ट मे ऐसा क्या लिखा गया जो साहब ने तुरंत पकड लिया कि रामप्यारी ने बिना वहां गये ही रिपोर्ट लिख दी?

अब आपका जवाब आने पर ही साहब के आरोपों का जवाब दूंगी. रामप्यारी की नौकरी का सवाल है. कृपया मेरी मदद किजिये.


रामप्यारी की पोस्ट

आंटियों,  अंकलों  और दीदीयों  आप सबको रामप्यारी की नमस्ते. समय भी कितनी जल्दी बीत जाता है? ये कल की ही बात लगती है जब मैने पोस्ट लिखी थी और अब ये फ़िर से शुक्रवार आगया. बीनू फ़िरंगी ताई के साथ घूंम रहा है और सैम भैया अपने चुनाव की तिकडम मे लगे हैं. ताऊ अपने काम धंधे मे ईयर एंडिंग मे लगा है. और ले देकर बस फ़ालतू रह गई रामप्यारी. 




rampyari-cat_ducks ताऊ की यही आदत खराब है.  बस बोल दिया तो बोल दिया. अब ये नही समझता की मैं मेरी पिछले सप्ताह गुम हुई बतखों को ढूंढूं या पोस्ट लिखूं? ये देखो ना कितनी सुंदर लग रही हैं मेरी तीनों बतखें मेरे साथ?

 

मैं तो अब गिनती करना भी सीख गई हूं. अभी इन तीनों को ही ढूंढ पाई हूं. मालूंम है ये आने को ही तैयार नही थी पर आपको मालूंम है कि रामप्यारी तो पिस्तौल रखती है सो पिस्तौल की नौंक पर ले कर आई इनको. और अब पिस्तौल अडाकर ही इनसे बाकी का पता पूछ रही हूं.

 

 

सूबह होते ही   ताऊ ने मुझको बुला भेजा और बोला – देख रामप्यारी अब आज की पोस्ट तू ही लिखेगी. मुझे तो फ़ुरसत है नही. और  पोस्ट लिखने का नियम तोडना नही है. अब मेरी इज्जत तेरे हाथ है.

 

 

लो बोलो करलो बात. ताऊ की इज्जत रामप्यारी के हाथ. ये तो ताऊ की इज्जत नही हुई धन्नों की बसंती की इज्जत हो गई. जो मानो ना मानो बचानी ही पडेगी. ये ताऊ भी  ना…अब क्या बोलूं आपको?

 

अभी क्या हुआ कि ताऊ बैंगलोर गया था. ताई तो अपने मायके गयी थी. सो ताऊ मुझे साथ ले गया. अब वहां पर मैने ताऊ को कहा की ताऊ मुझे तो फ़िल्म देखनी है वो कौन सी सलीमडोग या सलमाकैट वाली.

 

अब ताऊ और मैं मल्टीप्लेक्स मे घुस गये. वहां ताऊ ने क्या देखा कि लिफ़्ट का बटन दबा कर एक बूढी औरत उसमे घुस गई और थोडी देर बाद एक खूबसूरत सी लडकी उसमे से निकली.

 

ताऊ खडा २ देखता रहा..मैने कहा की ताऊ पिक्चर शुरु होने वाली है जल्दी करो..यहां खडे २ क्या कर रहे हो?

 

अब ताऊ बोला – अरे रामप्यारी ..तूने कुछ देखा की नही?

 

मैने कहा : नही.

 

तो ताऊ बोला कि देख वो कमरा है ना जिसके उपर लाल लाईट जल रही है उसमे उसके दरवाजे से जो भी  औरत घुसती है तो वो जवान हो कर निकलती है, चाहे बूढी ही क्यों ना हो? . तू एक काम कर..जरा जल्दी से तेरी ताई को फ़ोन लगा कर बुलाले उसको भी इस कमरे मे घुसा देते हैं वो भी नई हो जायेगी.

 

मैने कहा : ताऊ बुढापे मे तुम्हारी तो अक्ल मारी गई है.  और ऐसा काम सोचना भी मत कि ताई को बुढी बताने लग जावो वर्ना वो भाटिया अंकल वाला लठ्ठ जो काफ़ी दिनों से जंग खा रहा है ना,  ताई उसकी जंग उतार देगी और आप अस्पताल से नये हो कर लौटोगे.

 

अब मुझे फ़ालतू बात करने की आदत तो है नही, अब आप कहोगे रामप्यारी तूने आज  ताऊ की कुछ पोलपट्टी तो बताई ही नही? तो अब रामप्यारी आपको क्युं बतायेगी कि एक दिन सच्ची मुच्ची के भगवान जी ताऊ के पास आगये. और बोले – ताऊ मैं तेरे से बहुत खुश हूं, मांग ले तेरे को जो वरदान मांगना है.

 

ताऊ ने फ़ट से कहा – हे भगवानजी आप मेरे से खुश हो तो मेरी बीबी की उम्र मेरे से २५ वर्ष कम करदो. और भगवानजी बोले – तथास्तु. और ताऊ अगले ही क्षण मे ७७ साल का होगया.

 

अरे अंकलों और आंटीयों आप भी मुझसे क्यों झूंठ सच बुलवाये जारहे हैं बेमतलब में?

मैने आपको कुछ नही कहा है.  वो तो सब आप मुझे उचका उचका कर झूंठ बुलवा रहे हो. 

 

और सारी दुनियां जानती है कि रामप्यारी झूंठ नही बोलती वो तो कोई जबरन बुलवाले तो बोल भी देती है. अब ये कोई लिखा पढी मे थोडी बात हुई थी कि सच ही बोलना पडेगा. अब ठीक है जरुरत पड गई तो थोडी बहुत झूंठ भी बोल लेती है रामप्यारी.

 

पर अब और नही बोलेगी. आज का कोटा खत्म. और कल सूबह साढे छ: बजे मैं आपको पहेली मे मिलूंगी. पहेली अल्पना आंटी ने तैयार करके रख दी है. पर मुझसे छुपा रखी है.

मुझे जैसे ही पता चलेगा तो मेरे पेट मे ये बात पचेगी थोडी. बस आप तो क्ल्यु मेरे ब्लाग पर आकर देख लेना और मौका मिला तो मैं जवाब ही आपको बता दूंगी. मेरी शर्त तो आपको मालूम ही है.

 

तो अब रामप्यारी की रामराम.

 

 


इब खूंटे पै पढो :-


एक दिन ताई ने ताऊ तैं कही कि तूने आज तक कोई मोड्डे बामण ना जिमाये सैं, तो न्यु करकै अपने घर मे शांति कोनी रहवै और काम धंधा भी कोनी जमता थारा.

तो ताऊ बोला – भागवान तू चिंता ही मतना करै इबकी कनागता म्ह  मैं एक मोड्डा
पक्के से जिमवा दूंगा.

जल्दी ही कनागते भी आगये. और ताई ने याद दिलाया कि एक दो मोड्डे जिमाने सैं इबकी बार. सो बार बार याद दिलाये जाने पर ताऊ एक मरियल से मोड्डे धौरै पहुंच कै बोला – बाबा कल म्हारै घर आकै जीम लिये.

मोड्डा भी उधार बैठ्या था. अगले दिन सूबह ही ताऊ के घर पहूंच गया और रसोई
बनने का इंतजार करने लगा.

उधर ताई बडी श्रद्धा पुर्वक देशी घी का हलुआ,  पूडी  और खीर बणान लाग री थी.

ताऊ तो मरियल सा मोड्डा ढूंढ कै जिमाने ल्याया था कि कम माल खायेगा और
इसी बहाने अपने भी मजे हो जायेंगे.

रसोई तैयार होते ही ताई ने थाली लगा दी और मोड्डे को जीमने बैठाया. मोड्डे ने
कुछ जंत्र मंत्र जपे और जीमना शुरु किया. देखते देखते वो तो सारा माल जींम गया.
कुछ भी पीछे बाकी नही छोडा.  ताऊ मन ही मन गालियां दे रहा था कि देखने मे तो
मेरा मट्टा जरा सा मरियल लगता है और सारा माल खींच गया.

ताऊ ने सोचा कि अपने को माल मिलना तो दूर आज भूखे ही भजन करना पडेंगें.

अब मोड्डे ने सब कुछ साफ़ देखा तो पानी के दो गिलास पीकर खडा हो गया और हाथ धोने लगा.

इतनी ही देर मे एक कुत्ता कहीं से आ गया.  और उस कुत्ते को हट..हट.. करते हुये वो मोड्डा बोला – अबे ससुरे तू कित रह गया था? जो इब आया है?

ताऊ गुस्से मे जला भुना तो बैठा ही था,  ये बात  सुनकर उस मोड्डे से बोला – अरे
मोड्डे तेरा भोभा (पेट) इतने माल से भी नहीं भरा क्या ? जो इस कुत्ते को भी खाने का विचार कर रहा है?


महाताऊओं द्वारा ताऊ का साक्षात्कार

जैसा की आप सभी जानते हैं कि ताऊ पहेली के प्रथम राऊंड के सभी मेरिट होल्डर्स का साक्षात्कार हम प्रकाशित करने वाले हैं. उनमे सुश्री अल्पना वर्मा और प.श्री डी..के. शर्मा"वत्स"का साक्षात्कार अभी चल रहा है.

इसी क्रम मे हमने श्री नितिन व्यास, श्री प्रवीण त्रिवेदी मास्साब और श्री वरुण जयसवाल को भी मेल भेजी थी लेकिन उनका कोई जवाब नही आया. आपसे निवेदन है कि आप हमसे सम्पर्क स्थापित करें. आपका इमेल नही होने से हमने आपको no reply वाले पते पर मेल भेजा था जो शायद नही मिला होगा. कृपया संपर्क करें.

इसी क्रम में अन्य सम्मान्निय जनों के साक्षात्कार चल रहे हैं. श्री समीर लाल (ऊडनतश्तरी) जो की आजकल पुर्वोत्तर भारत मे अपनी ऊडनतश्तरी सर्विस लांच करने गये हैं उनका साक्षात्कार रामप्यारी ले रही है.


आपको याद होगा कि ताऊ पहेली प्रथम राऊंड का महाताऊ सम्मान संयुक्त रुप से श्री संजय बैंगाणी और श्री गौतम राजरिशी को दिया गया था, जिनके साक्षात्कार भी चल रहे हैं और इसी सिलसिले मे हम इन दोनों महाताऊओं के पास आते जाते रहते हैं.


एक दिन इन लोगों ने खुद हमारा साक्षात्कार लेने का कहा. अब महाताऊओं को ताऊ कैसे मना करता? सो हमने कहा कि ठीक है जी, आज आप करलो आपकी इच्छा पूरी. और इस तरह सवाल जवाब हुये.


बैंगाणी जी : ताऊ ये बताओ कि आप ये चोरी डकैती का धंधा कब से कर रहे हैं?


ताऊ : जी जबसे होश संभाला यानि शुरुआत से ही.


गौतम राजरिशि : तो आप कभी पकडे भी गये?


ताऊ : नही जी. पकडा नही गया कभी. अगर पकडा भी गया तो पुलिस ने खुद ही छोड दिया सम्मान सहित.


बैंगाणी जी : ये क्या बात हुई? पुलिस ऐसे ही कैसे छोड देगी?


ताऊ : अजी बैंगाणी जी, मैं आपको एक बार का किस्सा सुनाऊं. हुआ ये की एक बार मैं चोरी करने सीधा एक मकान मे घुस गया. वहां जो कुछ माल हाथ लगा, वो मैने सब समेट लिया.


गौतम राजरिशी : आगे क्या हुआ ताऊ?


ताऊ : वही तो बता रहा हूं. मुझे मालूम नही था कि पुलिस मुझ पर नजर रख रही है. वहां मेरे पीछे २ एक पुलिस का हवलदार लगा था. जैसे ही चोरी करके मैं बाहर निकला कि उसने मुझे धर लिया.


बैंगाणी जी : अरे रे ये तो आपके साथ बहुत बुरा हुआ ताऊ?


ताऊ : अजी आप पूरी बात तो सुनो. अब वो हवलदार बोला - ताऊ चल थाने. मैने कहा कि ठीक है हवलदार साहब. पर मुझे मेरे घर फ़ोन कर लेने दो. हवलदार बोला - ठीक है जा जल्दी फ़ोन करके आ. मैं उस मकान के अंदर गया और पीछे की खिडकी से कूदकर भाग गया.


गौतम राजरिशी : अरे वाह ताऊ . आप तो महान हो. इसके बाद क्या हुआ?


ताऊ : इसके बाद क्या होना था? एक दिन फ़िर वही हवलदार मेरे पीछे था और मैं एक जेवरात की दुकान मे हाथ साफ़ करके बाहर निकला कि उसने अबकि बार सीधे मेरा गिरेबान पकड लिया और बोला - अब बोल ? अब कैसे बचेगा? आखिर बकरे की मां कब तक खैर मनायेगी?


तो मैने उस हवलदार से कहा : हवलदार साहब अबकी बार घर फ़ोन नही करना है मुझे पक्का मालूम है कि अबकी बार मैं नही बच पाऊंगा. मुझे तो मेरे वकील साहब द्विवेदी जी को फ़ोन करना है.


अब वो हवलदार बोला : अबे ताऊ के बच्चे. तुने मुझे समझा क्या है? अब मैं मुर्ख नही रहा. अबे तू यहीं ठहर और तेरे वकील साहब को मैं फ़ोन करके आता हुं. फ़िर देखता हूं कि तू अबकी बार पिछली खिडकी से कैसे भागता है?


मैने कहा - ठीक है हवलदार साहब. अब आपके सामने तो मैं क्या कर सकता हूं? जैसी आपकी मर्जी. और वो हवलदार गया फ़ोन करने और मैं वहां से सीधा आपके पास चला आया.


साक्षात्कार का शेष भाग अगली बार..अभी वही हवलदार यहां आता दिखाई दे रहा है. मैं चलता हूं फ़िर कभी मिलेंगे.


और अब अंत मे एक शुद्ध रुप से चोरी का माल. जो इसी सप्ताह किसी अखबार से ऊडाया है. मुझे पसंद आया तो ऊडा लिया आपको पसंद आये तो आप खरीद लेना वर्ना अपने कौन से पैसे लगे हैं. अभी रात को पोस्ट लिखते समय अखबार मिल नही रहा है. मिल जायेगा तो नाम भी बता देंगे. वैसे सत्य कथन है कि माल शुद्ध रुप से चोरी का है. हम सत्य कभी बोलते ही नही हैं.



बेटे बेटियां -



बोये जाते हैं बेटे
उग जाती हैं बेटियां


खाद पानी बेटॊं मे
पर लहलहाती हैं बेटियां


एवरेस्ट तक ठेले जाते हैं बेटे
पर चढ जाती हैं बेटियां


कई तरह से गिराते हैं बेटे
पर संभाल लेती हैं बेटियां


पढाई करते हैं बेटे
पर सफ़लता पाती हैं बेटियां


कुछ भी कह लें
अच्छी हैं बेटियां



(यह कविता साभार : भास्कर समूह की पत्रिका मधुरिमा २५ मार्च २००९ से )





ताऊ बना हनुमान

ताऊ के गाम म्ह रामलीला होण लागरी थी, और उस रामलीला की मण्डली का हनुमान का रोल करने वाला हनुमानजी पडग्या घणा-- बेमार.

और उसी दिन हनुमान जी का ऊडने वाला रोल था, यानि हनुमान जी अशोक वाटिका म्ह उडते हुये पहुंचने वाले थे और सीता जी को रामजी की दी हुई निशानी दिखाने वाले थे. रामलीला का मास्टर चिमनलाल चिंता म्ह पड गया. क्योंकि उसकी रामलीला मे यह जो हनुमानजी का ऊडान भरने वाला सीन जनता मे बहुत लोकप्रिय था. और जब ये सीन ही नही हो तो काहे की रामलीला?

इसी सीन की वजह से आज भीड भी जबर्दस्त होने वाली थी. कहीं बैठने की जगह भी नही थी. और आप जानते होंगे की गांवों मे रामलीला मे ऐसी बातों पर चढावा भी अच्छा आया करता है. और वो एक मुख्य कमाई का जरिया होता है.

अपने राज भाटिया जी, ताऊ और योगिंद्र मोदगिल जी भी स्कूल से तडी मारकै दिन भर वहीं रामलीला मंडली के मालिक मास्टर चिमनलाल के पास बैठे रहते थे. कभी वहां किसी को डायलोग याद करवाते और कभी पेटी (हारमोनियम) पर हाथ आजमा लिया करते थे. और रात भर रामलीला देखते.

अब चिमन मास्टर बडी चिंता म्ह पड गया कि आज तो सारी किरकिरी हो जायेगी, शाम तक लालिया ढोल (हनुमानजी का रोल करने वाला) ठीक नही हुआ था. सो चिमनलाल मास्टर ने भाटिया जी को अपनी समस्या बताई.

भाटिया जी बोले- अजी, मास्टर जी आप क्युं चिंता करते हो? अपना ताऊ है ना, उसको हनुमान बना दो. आज तो डायलोग भी कम हैं. थोडे बहुत हैं जो मैं याद करवा देता हुं.

चिमन मास्टर बोले - भाटिया साहब तकलीफ़ डायलोग की नही है. असली तकलीफ़ है रस्से पै ऊडान भरने की. लालिया इस काम म्ह घणा एक्सपर्ट है. ताऊ इस रस्से से ऊडाण कैसे भरेगा?

भाटिया जी बोले - अरे आप ताऊ को जानते नही हो वो रस्से पै तो क्या, बिना रस्से के भी ऊडान भर सकता है. भाटिया जी को आज ताऊ से हिसाब बराबर करण का मौका मिल गया था.

अब भाटिया जी और मोदगिल जी दोनो ने ताऊ की प्रसंशा कर कर के ताऊ को चने के झाड पै चढा दिया. और ताऊ को थोडे बहुत डायलोग रटवा दिये. और ताऊ के मना करने के बावजूद भी उसको हनुमानजी बनाने पर तुल गये. और ताऊ की किस्मत खोटी कि इन दोनो की बातों मे आगया.

शाम को पास मे सेठ की हवेली से नीचे स्टेज पर रस्सा बांध दिया गया और ताउ को हनुमान बना के उस सेठ की हवेली पै चढा दिया गया.

नीचे स्टेज पर सीताजी बना हुआ रामजीडा अशोक वाटिका मे बैठ कर विलाप कर रहा हैं. हा राम.. तुमने मेरी अभी तक भी सुध ना ली सै... मैं क्युं कर जिंदा रह सकूं सुं?

त्रिजटा माता उसे दिलासा दे रही हैं : माते चिंता मत करिये. प्रभु श्रीराम का संदेश आता ही होगा.

सीता : नही त्रिजटे इब मैं क्युं कर जिंदा रहुंगी? इब मेरा प्राण त्याग देना ही सर्वथा उचित है.

उपर से हनुमान बना ताऊ चिल्लाया जोर से..नही रामजीडे..अरे ..मेरा ..... मतलब.... माता सीता ..थमनै तो जीणा ही पडैगा. रामजी की खातर और म्हारी खातर. इब थम चिंता मतना करो. मैं राम का दूत हनुमान आ ही गया हूं माता.

सीता जी- हे राम के दूत ..आप मन्नै दिखाई कोनी दे रहे हो? आप कित छुप रे हो? जरा मेरे सामने तो आओ.

हनुमान - मैं आ रहा हूं सीता माते. थम थोडा धीरज राखो.

सीता : हे राम के दूत, इब तुम जल्दी से मेरे सामने आवो वर्ना मेरे प्राण निकले ही समझना. और रामजीडे (सीता जी) ने जोर से छाती पर हाथ मार कर रुक्का मारया.

और उधर ताऊ ने रस्से को पेट पै बंधी घिर्री मे फ़ंसाया और नीचे की तरफ़ मुंह करके रस्से पै लटक कर चिल्लाया : माते लो मैं श्रीराम का दूत पवनपुत्र आपके सामने हाजिर हो रया सूं.

और पबलिक ने जोर से बजरंग बली की जय बोलणी शुरु करदी.

और ताऊ भी घणा जोश म्ह आगया. इब ताऊ रस्से तैं नीचे कुदता उसके पहले ही उपर से किसी ने रस्सा काट दिया और ताऊ धडाम से नीचे आ गिरा.

ताऊ को उपर से गिरने के कारण चोट लग गई जोर से.

उधर जैसे ही ताऊ गिरा जोर से पबलिक ने बजरंग बली का जयकारा लगाया.

और सीता जी जोर से बोली - आओ राम के दूत आओ.. तुम्हारे आने से मेरे कलेजे मे ठंडक पड गई है.

इब हनुमान बना ताऊ किम्मै घणा छोह म्ह आके चिल्ला कर बोला -  अरे रामजीडे तेरी ठंडक गई ससुरे तेल लेने, और दूत गया सुसरा अपनी ऐसी तैसी कराने... 

पहलम मन्नै या बता अक यो रस्सा किस सुसरे ने काट्या सै?




इब खूंटे पै पढो :-



एक बार ताऊ एक जंगल से होकर गुजर रहा था कि सामने एक मोटा ताजा शेर आकर खडा हो गया. ताऊ ने इधर उधर देखा. कहीं कोई भागने की गुंजाईश नही थी. अब जिंदगी पूरी तरह शेर की दया पर आकर टिक गई थी.


ताऊ को जब कुछ नही सूझा तो जो आखिरी समय सबको सूझता है वही ताऊ को सूझा. यानि ताऊ ने आंखे बंद करके भगवान की प्रार्थना शुरु कर दी.


जब तीन चार मिनट भी शेर ने ताऊ को नही खाया तो ताऊ को कुछ आश्चर्य हुआ और ताऊ ने डरते डरते आंखे खोली. और आंखे खोल कर जो कुछ सामने देखा उस पर ताऊ को विश्वास नही हुआ.


ताऊ ने देखा कि शेर आंखे बंद कर के दोनों हाथ जोड कर प्रार्थना की मुद्रा मे खडा है. अब शेर ने जैसे ही आंखे खोली, ताऊ प्रशन्नतापुर्वक बोला - हे वनराज मुझे नही मालूम था कि आप भी मेरी तरह प्रभु के इतने बडे भक्त हैं? मैं नाहक डर गया था. अगर आपकी जगह कोई दूसरा शेर होता तो आज मेरी जान गई थी.


और ताऊ ने फ़िर से हाथ जोड कर प्रभु को धन्यवाद दिया और शेर से पूछा कि  हे  परम भक्त वनराज,  आप दिन में कितनी बार पूजा करते है?

शेर बोला - ताऊ मैं पूजा वगैरह कुछ नही करता. मैं तो प्रभु को धन्यवाद दे रहा था कि हे प्रभु तेरा लाख लाख धन्यवाद कि आज तूने घर बैठे बिठाये बिना मेहनत के मुझे ताऊ जैसा मोटा ताजा शिकार भेज दिया. प्रभु भी कितना दयालू है?

अब ताऊ का क्या हुआ होगा? बताने की जरुरत है क्या?



जिंदगी एक गीली सी रेत

जिंदगी एक गीली सी रेत















समंदर की रेत पर

देखा है अक्सर
लुप्त हो जाते हैं
कदमों के पडे निशां
फ़िर भी ना जाने क्युं
अनजाने में अक्सर
हम नही छोडते
गीली रेत पर घरौंदे बनाना

और नहीं भूलते
अपने कदमों के निशां
रेत पर अंकित करना
शायद यही जिंदगी का चक्र है
और हम बार बार
यही करते चले जाते हैं अक्सर....






(इस रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)

ताऊ साप्ताहिक पत्रिका : अंक 14

प्रिय बहणों, भाईयो, भतिजियों और भतीजो आप सबका ताऊ साप्ताहिक पत्रिका के १४ वें अंक मे स्वागत है.

आजकल गर्मियों का मौसम शुरु हो चुका है और इस मौसम मे बच्चे बडे़ बूढे़ सबकी मनपसंद चीज होती है आईसक्रीम. यह आईसक्रीम ईंगलैंड से अमेरिका पहुंची और वहां से इसने बहुत तरक्की की. लेकिन हम आपको आज आईसक्रीम के इतिहास मे एक मात्र शहीद हुये व्यक्ति के बारे मे बताना चाहेंगे.

आईसक्रीम बनाना उन दिनो मे बडा कठीन काम था और फ़्रांस का सम्राट आईस्क्रीम बहुत पसंद करता था. आम जनता तक आईस्क्रीम की पहुंच भी नही थी. उन्ही दिनों मे फ़्रांस की राजकुमारी का विवाह इंगलैंड के चार्ल्स प्रथम के साथ हुआ था.

और राजकुमारी अपने साथ आईस्क्रीम बनाने वाले गोलातियरी को भी ईंगलैंड ले आई थी. चार्ल्स प्रथम ने जब उसकी बनाई आईस्क्रीम चखी तो वो उसका मुरीद हो गया. और उसने गोलातियरी पर यह पाबंदी लगा दी कि वो यह फ़ार्मुला किसी को नही बतायेगा.

फ़िर बाद मे गोलातियरी से जलने वाले कुछ दरबारियों ने सम्राट के कान भर दिये कि वो कुछ धन के एवज मे यह फ़ार्मुला दुसरे लोगों को बेच रहा है तो सम्राट चा्र्ल्स प्रथम ने उसे मृत्यु दंड दे दिया. और इस तरह वो अईस्क्रीम के इतिहास मे शहीद होने वाला एक मात्र शहीद था.

जो पहेली पिछले शनीवार आपसे पूछी गई थी वो जगह थी जंतर मंतर दिल्ली. और इस विषय पर विस्तृत जानकारी दे रही हैं ताऊ पत्रिका की विशेष संपादक सु. अल्पना वर्मा.

आइये अब चलते हैं सु अल्पनाजी के “मेरा पन्ना” की और:-

-ताऊ रामपुरिया





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"मेरा पन्ना"

-अल्पना वर्मा



आईये इस अंक मे आपको हमारी पहेली के स्थान के बारे में विस्तृत जानकारी देते हैं.

महाराजा सवाई जयसिंह [द्वितीय] का एक खगोलशास्त्री के रूप में परिचय-

आप सब पिछली पहेलियों में जानचुके हैं कि सवाई जयसिंह कौन थे और उनके पूर्वज कौन थे.
थोडा सा परिचय उनके इस पहलू के बारे में देती चलूँ.

जैसा कि आप जानते हैं कि राजा जयसिंह [II] बहुत ही छोटी सी उम्र से गणित में बहुत ही अधिक रूचि रखते थे.
उनकी ओपचारिक पढ़ाई ११ वर्ष की आयु में छूट गयी क्योंकि उनकी पिताजी की मृत्यु के बाद उन्हें ही राजगद्दी संभालनी पड़ी थी.

जनवरी २५,सन् १७०० में गद्दी संभालने के बाद भी उन्होंने अपना अध्ययन नहीं छोडा.उन्होंने बहुत खगोल विज्ञानं और ज्योतिष का भी गहरा अध्ययन किया.उन्होंने अपने कार्यकाल में बहुत से खगोल विज्ञान से सम्बंधित यंत्र एवम पुस्तकें भी एकत्र कीं. उन्होंने प्रमुख खगोलशास्त्रियों को विचार हेतु एक जगह एकत्र भी किया.हिन्दू ,इस्लामिक और यूरोपीय खगोलशास्त्री सभी ने उनके इस महान कार्य में अपना बराबर योगदान दिया.अपने शासन काल में सन् १७२७ में,उन्होंने एक दल खगोलशास्त्र से सम्बंधित और जानकारियां और तथ्य तलाशने के लिए भारत से यूरोप भेजा था.वह दल कुछ किताबें,दस्तावेज,और यंत्र ही ले कर लौटा.न्यूटन,गालीलेओ,कोपरनिकस,और केप्लेर के कार्यों के बारे में और उनकी किताबें लाने में यह दल असमर्थ रहा.

या कहीये..eupropean समुदाय ने उन्हें पूरा सहयोग नहीं दिया.इस लिए उन्होंने जो जानकरियां मिलीं उसी के आधार
पर अपने प्रोजेक्ट को पूरा किया.

निम्न लिखित masonary यंत्र खुद राजा जयसिंह द्वारा ही बनाये गए थे-

1-सम्राट यन्त्र
2-सस्थाम्सा
3-दक्सिनोत्तारा भित्ति यंत्र
4-जय प्रकासा और कपाला
5-नदिवालय
6-दिगाम्सा यंत्र
7-राम यंत्र
8-रसिवालाया

राजा जय सिंह तथा उनके राजज्योतिषी पं. जगन्नाथ द्वारा इसी विषय पर लिखे गए कुछ ग्रन्थ हैं- 'यंत्र प्रकार' तथा 'सम्राट सिद्धांत'.

५४ वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु के बाद देश में यह वेधशालाएं बाद में बनने वाले तारामंडलों के लिए प्रेरणा और जानकारी का स्त्रोत रही हैं.हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर में स्थापित रामयंत्र के जरिए प्रमुख खगोलविद द्वारा शनिवार को विज्ञान दिवस पर आसमान के सबसे चमकीले ग्रह शुक्र की स्थिति नापी गयी थी.इस अध्ययन में नेहरू तारामंडल के खगोलविदों के अलावा एमेच्योर एस्ट्रोनामर्स एसोसिएशन और गैर सरकारी संगठन स्पेस के सदस्य भी शामिल थे.

यंत्र मंदिर -जंतर मंतर



कनोटप्लेस में स्थित स्थापत्य कला का अद्वितीय नमूना 'जंतर मंतर 'दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है .
यह एक वेधशाला है.इस वेधशाला में १३ खगोलीय यंत्र लगे हुए हैं.यह राजा जयसिंह द्वारा डिजाईन की गयी थी.
एक फ्रेंच लेखक 'दे बोइस' के अनुसार राजा जयसिंह खुद अपने हाथों से इस यंत्रों के मोम के मोडल तैयार करते थे.

जैसा आप सभी जानते हैं कि जयपुर की बसावट के साथ ही तत्कालीन महाराजा सवाई जयसिंह [द्वितीय] ने जंतर-मंतर का निर्माण कार्य शुरू करवाया, महाराजा ज्योतिष शास्त्र में दिलचस्पी रखते थे और इसके ज्ञाता थे. जंतर-मंतर को बनने में करीब 6 साल लगे और 1734 में यह बनकर तैयार हुआ। इसमें ग्रहों की चाल का अध्ययन करने के लिए तमाम यंत्र बने हैं.यह इमारत प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उन्नति की मिसाल है।दिल्ली का जंतर-मंतर समरकंद [उज्बेकिस्तान] की वेधशाला से प्रेरित है। मोहम्मद शाह के शासन काल में हिन्दु और मुस्लिम खगोलशास्त्रियों में ग्रहों की स्थित को लेकिर बहस छिड़ गई थी। इसे खत्म करने के लिए सवाई जय सिंह ने जंतर-मंतर का निर्माण करवाया। राजा जयसिंह ने भारतीय खगोलविज्ञान को यूरोपीय खगोलशास्त्रियों के विचारों से से भी जोड़ा .उनके अपने छोटे से शासन काल में उन्होंने खगोल विज्ञानमें अपना जो अमूल्य योगदान दिया है उस के लिए इतिहास सदा उनका ऋणी रहेगा.

ग्रहों की गति नापने के लिए यहां विभिन्न प्रकार के उपकरण लगाए गए हैं।

सम्राट यंत्र सूर्य की सहायता से वक्त और ग्रहों की स्थिति की जानकारी देता है।

मिस्र यंत्र वर्ष के सबसे छोटे ओर सबसे बड़े दिन को नाप सकता है।

राम यंत्र और जय प्रकाश यंत्र खगोलीय पिंडों की गति के बारे में बताता है।

राम यंत्र गोलाकार बने हुए हैं.



-इन सभी यंत्रों की कार्यविधि को विस्तार से जानना चाहते हैं तो यहाँ से pdf.फॉर्मेट में पूरी सामग्री को डाउनलोड भी कर सकते हैं.

बड़ी बड़ी इमारतों से घिर जाने के कारण आज इन के अध्ययन सटीक नतीजे नहीं दे पाते हैं.

दिल्ली सहित देशभर में कुल पांच वेधशालाएं हैं- (बनारस, जयपुर , मथुरा और उज्जैन) में मौजूद हैं, जिनमें जयपुर जंतर-मंतर के यंत्र ही पूरी तरह से सही स्थिति में हैं.

मथुरा की वेधशाला १८५० के आसपास ही नष्ट हो चुकी थी.
[दुर्भाग्य से यह दिल्ली में जन आंदोलनों /प्रदर्शनों/धरनों की एक जानी मानी जगह भी है ]

वेधशाला के बारे में Dr.RathnaSree,Director, Nehru Planetarium बता रही हैं -आप भी देखीये-



अगली पहेली तक के लिए नमस्कार.

-अल्पना वर्मा
( विशेष संपादक )






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“ दुनिया मेरी नजर से”

-आशीष खण्डेलवाल


आम आदमी की कार नैनो आज धूमधाम से लॉन्च हो रही है। भले ही यह दुनिया की सबसे सस्ती कार कही जा रही हो, लेकिन यह सबसे छोटी कार नहीं है। अगर आप सबसे छोटी कार को देखेंगे तो दांतों तले उंगली दबा लेंगे। नहीं मैं आपको खिलौना नहीं दिखा रहा हूं। मैं आपको ऐसी कार दिखाने जा रहा हूं, जिसका नाम गिनीज बुक में सबसे छोटी कार के रूप में दर्ज है। यह कार है- पील पी50



इस छोटी सी कार को देखकर यह मत सोचिए कि किसी ने एक सामान्य आकार की कार को दो हिस्सों में बांट दिया है। यह वास्तविक कार है और इसे दुनिया की ऐसी सबसे छोटी कार का रुतबा हासिल है, जिसका बड़े स्तर पर उत्पादन हुआ है। इस कार में केवल चालक और उसका शॉपिंग बैग ही आ सकता है। थोड़ा सटकर बैठें तो एक साथी भी बैठ सकता है। ब्रिटिश कंपनी पील ने यह कार 1962-65 के बीच 119 पाउंड (करीब दस हजार रुपए) में बाजार में उतारी थी। तीन पहियों वाली इस कार में केवल 49 सीसी का छोटा सा इंजन लगाया गया और इसकी लंबाई महज 52 इंच है व चौड़ाई 39 इंच। इसका वजन सिर्फ 59 किलोग्राम है और इसे हाथ से खींचकर कहीं भी ले जाया सकता है। इसमें रिवर्स गियर नहीं है और कम वजन की होने के कारण उसकी जरूरत भी नहीं है।



आप चाहें तो इस छोटे से वीडियो में पील पी50 और ट्राइडेंट माइक्रोकार को और करीब से देख सकते हैं-



अब सुनिए राज़ की बात। जब से रामप्यारी ने यह कार देखी है, मेरे पीछे ही पड़ गई है कि उसे यही कार चाहिए। इधर ताऊजी उसे नैनो दिलवाने की जुगत भिड़ा रहे हैं और रामप्यारी आजकल ड्राइविंग सीख रही है।

सादर.
-आशीष खण्डेलवाल
( तकनीकी संपादक )






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"मेरी कलम से"
-Seema Gupta


एक बार एक कौवा एक पेड़ पर बैठा था और दिन भर वो मौज लेता दिखाई देता था.
यानि उसने सारा दिन कुछ काम नही किया बस खाली बैठा रहा.

इन कौवे महाराज को एक छोटा सा खरगोश दिन भर मौज लेते देख रहा था.

आखिरकार उस खरगोश से रहा नही गया और उसने कोवे से पूछ ही लिया कि

" क्या मै भी आपकी तरह सारा दिन बिना कुछ किए मौज से बैठा रह सकता हूं?

इस पर वो कौवा बोला - " हाँ हाँ क्यूँ नही". बस दिन भर आराम से बैठो और मौज लो.
कौन मना करता है?

ये सुन कर वो खरगोश उसी पेड़ की नीचे आराम से बैठ गया. और मौज लेते हुये आराम करने लगा..




अचानक कहीं से एक लोमडी आई और उसने बिना मौका दिये उस मौज लेते हुये खरगोश को मुंह मे दबाया और खरगोश की जीवनलीला समाप्त कर दी.

प्रबन्धन सीख:

असल मे खाली बैठ कर मौज लेने के लिये यानि कुछ न करने के लिए भी आपको बहुत
ऊँचे मुकाम तक पहुंचना जरूरी है जहा सिर्फ़ आपके बैठने मात्र से काम हो जाये ...
और वहां तक पहुंचने की लिए कितनी मेहनत और लगन की आवश्कता है ये बताना जरूरी नही....


अगले सप्ताह फ़िर मिलते हैं तब तक के लिये अलविदा.

-Seema Gupta
संपादक (प्रबंधन)


अब ताऊ साप्ताहिक पत्रिका का यह अंक यहीं समाप्त करने की इजाजत चाहते हैं. अगले सप्ताह फ़िर आपसे मुलाकात होगी. संपादक मंडल के सभी सदस्यों की और से आपके सहयोग के लिये आभार.

संपादक मंडल :-

मुख्य संपादक : ताऊ रामपुरिया

विशेष संपादक : अल्पना वर्मा

संपादक (प्रबंधन) : Seema Gupta

संपादक (तकनीकी) : आशीष खण्डेलवाल

सहायक संपादक : बीनू फ़िरंगी एवम मिस. रामप्यारी

पाठशाला आफ़ सन्डे में ताऊ पहेली - 2 (4) का जवाब

प्रिय बहणों,  भाईयो, भतीजियों और भतीजों आप सबका ताऊ की रविवारीय क्लास मे  घणा स्वागत है. कल की पहेली का सही जवाब था जंतर मंतर दिल्ली. जिसके बारे मे कल सोमवार की ताऊ साप्ताहिक पत्रिका मे विस्तार से बता रही हैं सु अल्पना वर्मा.

 

इस पहेली के जवाब मे शायद अभी तक के अधिकतम सही जवाब आये हैं वहीं दूसरी और हमारे सम्मान्निय प्रतिभागियों ने क्ल्यु पर भी ध्यान नही दिया और सु अल्पना जी की टीपणी पर भी ध्यान नही दिया. एवम दिल्ली की जगह जयपुर जवाब दे बैठे. और आज तक की सबसे आसान पहेली के अंक भी गंवा बैठे.जबकि तस्वीर  में बडी बिल्डिंग्स साफ़ दिख रही हैं जो जयपुर मे नही हैं.

 

अब आपका और समय नही खाते हुये हम आज का रिजल्ट घोषित करने के लिये  आपको बीनू फ़िरंगी के पास लिय चलते हैं.

 

ताऊ रामपुरिया की तरफ़ से आपको बहुत  घणी रामराम

 

 

 

 

binu-firangiआदर्णीय देवियों और सज्जनों, ताऊ के भाइयो, बहणों, भतीजियों और भतीजो, समस्त संपादक मंडल के सदस्य गणों,   आप सबको बीनू फ़िरंगी का सादर प्रणाम.

 

और मिस रामप्यारी को विशेष रामराम.

 

 

 

 

ताऊ पहेली राऊंड –२ के चतुर्थ अंक का रिजल्ट घोषित करते हुये मुझे  अपार हर्ष हो रहा है. और मैं अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं कि मुझे ये मौका आज फ़िर  मिला. और जब तक ताऊ चाहेगा आगे भी मिलता रहेगा.

 

 

मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि मैं बिना किसी ईमान और  इमानदारी के यानि बेइमानी पुर्वक रिजल्ट घोषित करता आ रहा हूं पर आपने आज तक कभी ध्यान ही नही दिया और शायद आगे भी नही देंगे तब तक करता रहूंगा.

 

यह बात मैं जबसे रिजल्ट घोषित कर रहा हूं तब से लिख रहा हूं अब देखता हूं कि इस बात पर आप लोगों का ध्यान कब तक जाता है?  वैसे मुझे  आशा है आप मेरे द्वारा तैयार रिजल्ट से संतुष्ट हो ही रहे होंगे?  नही तो अब तक ताऊ से शिकायत कर चुके होते.

 

 

तो आईये अब चलते हैं रिजल्ट की तरफ़ :-  हमारी इस पहेली का सही जवाब है जंतर-मंतर दिल्ली. इस विषय पर विस्तृत जानकारी  कल के अंक मे पत्रिका की विशेष संपादक सु.अल्पना वर्मा दे रही हैं.

 

 

 

 

सर्वाधिक अंक प्रात किये १०१


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घणी बधाई प्रथम स्थान के लिये. .ऊडनतश्तरी श्री समीरलाल …

 

तालियां..... तालियां..... तालियां..... जोरदार  ….  तालियां

विशेष बधाई….

 

 

 


 

आज के उप विजेता  अंक १०० के साथ बधाई



makrand श्री मकरंद

 


आज की तृतिय विजेता अंक ९९ के साथ ...बधाई...       



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सुश्री सीमा गुप्ता

 

 

आईये अब अन्य माननिय विजेताओं के बारे में  क्रमश:  जानते हैं. सभी को हार्दिक बधाई.

 

 

        शुभम आर्य    अंक ९८ बधाई

Tarun

अंक  ९७     बधाई

वरुण जायसवाल


अंक ९६ बधाई

 नितिन व्यास


अंक ९५   बधाई

        

 दिलीप कवठेकर  अंक ९४ बधाई


 सुशील कुमार छौक्कर

अंक ९३ बधाई

 

 आशीष खण्डेलवाल


अंक ९२ बधाई

          poemsnpuja


        अंक ९१ बधाई

 प्रकाश गोविन्द

अंक ९० बधाई

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स"

अंक ८९ बधाई

अन्तर सोहिल


अंक ८८ बधाई

          Syed Akbar


         अंक ८७ बधाई


रंजना [रंजू भाटिया]


अंक ८६ बधाई

 

 योगेश समदर्शी


अंक ८५ बधाई

 Ratan Singh Shekhawat

अंक ८४ बधाई

मुसाफिर जाट

अंक ८३ बधाई

 

 दीपक "तिवारी साहब"

अंक ८२ बधाई

 हिमांशु । Himanshu

अंक ८१ बधाई

HEY PRABHU YEH TERA PATH


अंक ८० बधाई

premlatapandey


अंक ७९ बधाई

 ranjan


अंक ७८ बधाई

 लवली कुमारी / Lovely kumari

अंक ७७ बधाई

गौतम राजरिशी


अंक ७६ बधाई

 सतीश चंद्र सत्यार्थी


अंक ७५ बधाई

Rajeev (राजीव)


अंक ७४ बधाई

 

 

 

 

इसके अलावा निम्न महानुभाओं ने भी इस पहेली अंक मे शामिल होकर हमारा उत्साह बढाया. जिसके लिये हम उनके हृदय से आभारी हैं.

 

 

श्री काजलकुमार,  श्री अरविंद मिश्रा,  श्री मा पलायनम,  श्री अनुराग जी (स्मार्ट ईन्डियन), 

 

श्री ज्ञानदत पांडेय,  सु. विनीता,  श्री जीतेंद्र,  श्री पी.एन. सुब्रमनियन,  सु. हरकीरत हकीर, 

 

श्री डा. रूपचन्द्र शाश्त्री मयंक,  श्री भारतिय नागरिक,  श्री महाभारत, श्री नरेश सिंह राथौड,

 

श्री अभिषेक ओझा,  श्री अमिताभ बच्चन और श्री अविनाश वाचस्पति

 

 

 

आप सबका बहुत बहुत आभार..

 

 

 


अब आईये रामप्यारी की क्लास में:-

 

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रामप्यारी की क्लास मे :-

 

 

आप सबको रामप्यारी की नमस्ते.

 

 

देखा ना आप सब भी चकरा गये ना मेरी टीचर के सवाल से?  अब आप ही

बताईये कि ऐसे उल्टे सीधे सवाल टीचर पूछती है तो मुझे जवाब कैसे मिलेंगे?

 

अब आपने मुझे जवाब दे ही दिया है तो कल मैं स्कूल जा रही हूं. सच्ची मे जा रही हूं..झूंठ नही बोल रही हूं…कल रास्ते मे नही रुकुंगी.. वो तो जब मैं होम वर्क

नही करती ना,  तब स्कूल की तडी लगाती हूं.

 

आज मैने सबको तीस तीस नम्बर दे दिये हैं और आपके खाते मे जमा करवा दिये हैं.

 

कल मैं भाटिया अंकल के यहां गई थी क्योंकि किसी ने बताया कि मेरी बतखें

भाटिया अंकल के घर दिखी थी. सो बतखें तो नही मिली पर भाटिया अंकल ने

मुझे बताया कि रामप्यारी तू भी रिजल्ट बीनू फ़िरंगी की तरह निकाला कर.

 

तू क्या बीनू फ़िरंगी से कम है? सो मैं बीनू की तरह रिजल्ट निकालने की तैयारी

कर रही हूं. तब तक भाटिया अंकल की स्टाईल मे ही बता देती हूं.

 

सबसे पहले आई सीमा आंटी, फ़िर समीर अंकल आये..फ़िर काअर्टून वाले काजल अंकल ने सही बताया..अरे काजल अंकल आप सही जवाब जंतर मंतर दिल्ली

बता कर फ़िर गलत जयपुर क्यों कर गये? मैने आपको कितने हिंट दिये..पर शायद आपने वापस आकर नही देखा.

 

फ़िर शुभ आर्य, वरुण जयसवाल, अनुराग अंकल (स्मार्ट ईंडियन).  आशीष अंकल,

अंतर सोहिल,  रंजना [रंजु भाटिया] आंटी,  आलोक सिंह अंकल, सैयद अंकल, 

और फ़िर हमारे स्कूल के मास्टर जी यानि प्रविण त्रिवेदी सर,  दिलिप कवठेकर

अंकल,  दिलिप गौड, मकरंद सर आये सही जवाब लेके.

 

और फ़िर अगली खेप मे आये हे प्रभु ये तेरा पथ वाले अंकल, और रंजन अंकल,

और नरेश राथौड अंकल आये.

 

फ़िर सतीश सत्यार्थी अंकल,  राजीव अंकल, हिमांशू अंकल और नितिन व्यास अंकल आये.

 

आप सबके खाते मे रामप्यारी ने नम्बर पूरे के पूरे तीस जमा करवा दिये हैं और अब रामप्यारी अगले शनीवार इसी जगह मिलेगी और कभी मुझे खेलने से फ़ुरसत मिल गई तो इस सप्ताह भी मैं मेरे ब्लाग पर पोस्ट लिख सकती हूं.

 

तब तक के लिये आप तो रामप्यारी की रामराम समझ लिजिये.


 

छपते छ्पते :- भाई दिगम्बर नासवा जी का कमेंट आया है:-



Blogger दिगम्बर नासवा said...

ताऊ
एक शिकायत प्यार से..... भाई हमारे दुबई में शुक्र और शनि की छुट्टी होती है और कंप्यूटर फिर सीधे इतवार को खुलता है तो जवाब तो लेट होना ही है .......

पर जवाब आता है इसका तभी लिख रहा हूँ

जंतर मंतर, दिल्ली या जयपुर का वैसे मैं दिल्ली के साथ जाऊँगा


March 22, 2009 1:15 PM
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ताऊ उवाच :- भाई नासवा जी, आपके प्यार की वजह से ही यह आयोजन इस रुप मे
चल पारहा है.  आपका जवाब आप ही देखिये कितनी बजे आया है. सो इसे शामिल करने मे रिजल्ट रुक जायेगा.

अगर आप कहे तो हम इसका समय रविवार को आठ की बजाये ज्यादा से ज्यादा
दो घंटे बढा सकते हैं.  आप कृपया सूचित करियेगा.

आपके द्वारा बढाये गये उत्साह के लिये हम आपके तहेदिल से आभारी हैं और आशा
करते हैं कि आपका अमुल्य सहयोग हमें यथावत मिलता रहेगा.

 

 

 

 

अच्छा अब नमस्ते. कल सोमवार को ताऊ साप्ताहिक पत्रिका मे सिर्फ़ रिजल्ट वाला हिस्सा

छोडकर बाकी सब स्तम्भ यथावत प्रकाशित होंगे.

 

 

सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. इस दुसरे राऊंड की चौथी पहेली का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया.

 

 

संपादक मंडल :-

मुख्य संपादक : ताऊ रामपुरिया

विशेष संपादक : अल्पना वर्मा

संपादक (प्रबंधन) : seema gupta

संपादक (तकनीकी)  : आशीष खण्डेलवाल

सहायक संपादक : बीनू फ़िरंगी एवम मिस. रामप्यारी