ताऊ की शनीचरी पहेली-६

आप सबनै शनीचर की राम राम. इस शनीचरी पहेली न.६ मे आपका स्वागत है . नीचै ध्यान तैं देख कै जवाब देणा है बिल्कुल ही आसान पहेली है . यह कौन सी प्रसिद्ध जगह, कहां पर है. तो जरा सा दिमाग पर जोर डालिये. और पहेली जीत कर अपनी मेरिट को उपर कर लिजिये.

 

आपसे गुजारिश है कि जवाब बिल्कुल सुस्पष्ट देवे, यह कौन सी जगह है? इसका नाम लिखें, और फ़टाफ़ट अपना जवाब दे दे. विवरण के लिये दुसरी टीपणि करें, जिससे आपके पहले कोई दुसरा जवाब देकर आपसे अधिक अंक नही ले जाये.


अगर आपको यह पहेली आयोजन पसंद आया है तो यहां दाहिने तरफ़ पसंद पर भी एक चटका लगाने की कृपा करें. इससे हमारा उत्साह वर्धन होता है.


paheli-6r

यह कौन सी प्रसिद्ध जगह है.


आप विषय से संबंधित जितनी सही जानकारी देंगे वो सभी के ज्ञानवर्धन के लिये ज्यादा अच्छा रहेगा . और आपकी टिपणी भी प्रकाशित की जायेगी .


इसका जवाब  परसों सोमवार को मिल जायेगा . यानि ठीक ४८ घन्टे बाद.

 

सर्दी का मौसम होने से इस शनीचरी पहेली के प्रकाशन का समय अब हर शनीवार सूबह ७.०० AM कर दिया गया है. और रिजल्ट  सोमवार को सुबह ७.०० AM पर प्रकाशित कर दिये जायेंगे.

 

तो है ना छुट्टी के दिनो का भरपूर मजा घर बैठे.

 

इस ब्लाग के दाहिंने तरफ़ आप आपकी मेरिट की स्थिति देख सकते हैं. सोमवार को इस अंक के रिजल्ट के साथ ही यह अपग्रेड कर दी जायेगी.

 

पहेली के नियम कायदे पहेली न.१ के रिजल्ट के साथ साथ बता दिये गये थे. जो यहां चटका लगा कर भी देखे जा सकते हैं.

 

आपके सुझावो का हमेशा ही स्वागत है.

 

एक विशेष सूचना हम अवश्य देना चाहेंगे कि आप चाहे जितनी देर से आयें आपको अगर सही जवाब मालूम है तो जवाब अवश्य देवें .

 

यहां पर आपको हर सही जवाब के साथ मार्क्स दिये जाते हैं जो इकठ्ठे होकर कभी भी भविष्य मे आपको बहुत काम आयेंगे. और हर भाग लेने वाले प्रतिभागी को एक अंक दिया जाता है.

 

आपने अगर जवाब दे दिया हो तो आप इन्तजार करें. हो सकता है आप का जवाब जान बुझकर रोका गया हो. हम पहले ही बता देते हैं कि निरणायक गण आपको भ्रम मे डालने के लिये और पहेली की मनोरंजकता बढाने के लिये पहले जो टिपणियां प्रकाशित करते हैं वो गलत भी हो सकती हैं और सही भी. दोनो ही बाते हैं. अत: अपने विवेक से उत्तर देवें.


और आपसे एक निवेदन है कि किसी भी हालत में जवाब मे लिंक नही देवें. अगर आपका जवाब सही है तो हम उसे गलत नही करेंगे, पर आपके Link देने से आपके बाद आने वालों के लिये कोई चार्म नही बचता.


अत: प्लीज..प्लीज..Link कतई नही देवें. वर्ना आपकी टीपणी प्रकाशित नही की जावेगी.


इब खूंटे पै पढो :-

राज भाटिया जी ने अपने पैसों की वसूली का तगादा घणा तेज कर दिया. ताऊ बिल्कुल बेरोजगार था. अब ताऊ के पास एक ही अंतर्राष्ट्रिय ख्याति का सलाह कार था, सैम बहादुर.


सैम ने ताऊ को सलाह दी कि ताऊ आजकल खेती मे बहुत तगडी कमाई है और
तू हर्बल खेती शुरु कर दे, बस तेरे वारे न्यारे जल्दी ही हो जायेंगे.


ताऊ ने दिन रात मेहनत करके खेतों मे अपनी जी जान लगा दी. उसने धोली मूसली,  अश्वगंधा और पता नही कौन कौन सी औषधियों को खेतों मे उगा लिया.


समय पर खाद बीज पानी देने का काम ताऊ का और रखवाली का काम सैम का. अब सैम को तो आपने देख ही लिया है. उसके रहते चोरी चकोरी का क्या काम? 


एक दिन ताऊ खेत मे पानी देण लाग रया था कि एक उडता हुआ बाज पक्षी आकर
गिरा, ताऊ ने उस घायल बाज को ऊठा लिया. उसको किसी शिकारी ने घायल किया था.  


इतनी देर किम्मै घणा ही पढ्या लिख्या शहरी सा आदमी दौडता हुआ खेत म्ह घुस गया.


ताऊ ने उससे पूछा कि भाई तैं क्युं मेरे खेत रौंदण लाग रया सै? बात के सै?


वो बोला : ताऊ सुण, मैने एक उडते हुये बाज का शिकार किया था और वो आकर यहीं कहीं तेरे खेत मे गिरा है. मैं उसे ढुंढ रहा हूं.


ताऊ बोला - सुण बे भले आदमी. पक्षियों का शिकार करना जुर्म है. तेरे को तो मैं पुलिस म्ह पकडवाऊंगा.


ताऊ के इतना कहते ही उस "अ"हटाकर टाईप शिकारी ने अपनी रिवाल्वर निकाल ली और बोला - सुण बे गंवार ताऊ. ये कानून भी हम ही बनाते हैं. तू ज्यादा बकबास करेगा तो मैं तेरा भी शिकार कर डालूंगा.


अब उसके इतना बोलते ही ताऊ की बेटरी जल ऊठी. ताऊ ने देखा कि वो शिकारी बिल्कुल महाबली खली के आकार का था. और ताऊ उसके सामने बिल्कुल छटंकी.
फ़िर उसके हाथ मे रिवाल्वर. ताऊ की तो सिट्टी पिट्टी गुम हो गई.


इतनी देर म्ह सैम बहादुर वहां पहुंच गया, ताऊ की जान मे जान आई. सैम ने सारा
नजारा देखा और तुरंत ताऊ के कान मे जाकर चुपके से बोला - ताऊ. ये बहुत ऊंची पहुंच वाला,  बिगडा हुआ,  पुराने रईस की औलाद है. बाज का शिकार तो छोड, अगर ये तेरा और मेरा शिकार भी करदे तो कोई इस बात की गवाही देने वाला भी नही मिलेगा.


ताऊ : अरे तो बावली बूच. पहले क्युं नही बताया? मैं तो इसको पुलिस की धमकी भी दे चुका हूं.


सैम : ताऊ, अब सिर्फ़ एक ही उपाय है कि  अब तुम अपना फ़ार्मुला वन टू का फ़ोर लगाओ फ़टाफ़ट वर्ना आज मारे गये.


अब ताऊ ने उस फ़ुफ़कारते हुये रईस से कहा - अरे शिकारी साहब. देखो जी, बाज का शिकार आपने किया तो इसमे पुलिस क्या करेगी? भाई जो मेहनत करेगा वो खायेगा.


शिकारी ने ताऊ के इतने मीठे वचनो को सुनकर कहा कि ताऊ , ला फ़िर मेरा शिकार दे दे मुझे.

ताऊ बोला - जी वो तो आप ढूंढ लेना खेत में. पर उसके पहले न्याय की बात ये है कि  शिकार आपने किया और गिरा मेरे खेत मे. तो इस पर हक आपका है या मेरा? इसका  फ़ैसला तो करवाणा पडैगा.


शिकारी बोला - इसका फ़ैसला कैसे होगा?


ताऊ : जी, इसका फ़ैसला हम तो हमारे गांव मे  फ़ाइव किक रुल से करते हैं.


शिकारी बोला - ये फ़ाईव किक रुल क्या होता है 


ताऊ : जी, शिकारी साहब, जब भी कोई ऐसा वाकया होता है तो हम गांव वाले तो जैसे फ़ुटबाल मे कई बार फ़ैसला  पेनाल्टी किक से किया जाता है, उसी तरह से हम पांच किक बारी बारी मारते हैं. उसमे जो जीत जाता है, फ़ैसला उसी के हक मे दे देते हैं. 


अब शिकारी को हंसी आई कि इस ताऊ को मैं एक फ़ूंक मे ऊडा सकता हूं और ये
किक की बात कर रहा है. सो वो बोला - ले ताऊ , पहले तू किक मार ले, तू भी क्या
याद करेगा? फ़िर उसके बाद मैं तेरे को किक मारूंगा.


बस शिकारी तो सैम और ताऊ के जाल मे खुद ही फ़ंस गया, वर्ना वो तो इस चिन्ता
मे थे कि कहीं ये पहले किक मारने की जिद्द नही पकड ले.


अब ताऊ ने उछल कर पहली लात ही उसके नाजुक अंगो पर जमाई. शिकारी गिर गया.दुसरी.. सीधी उसके नाक पर...नाक मे खून...तीसई उसके पेट मे जमाई..और वो जोर जोर से चिल्लाने लगा....


अब ताऊ ने उसका रिवाल्वर कब्जे मे किया. और सैम उसकी छाती पर चढ गया. वो रोता चिल्लाता रहा.


अब ताऊ ने फ़टा फ़ट पुलिस बुलवा कर उसको गिरफ़्तार करवा दिया. ताऊ ने सैम को धन्यवाद दिया. और  सैम को बेचने के लिये कल विज्ञापन दिया था उसके लिये सैम से क्षमा मांगी.


सैम ने भी मुस्कराते हुये ताऊ को क्षमा कर दिया.


ताऊ के सैम बहादुर और बीनू फ़िरंगी की पोस्ट

saim bahadur सैम आराम से बैठ कर आज दूध कार्नफ़्लेक्स का नाश्ता कर रहा है.  बीनू फ़िरंगी आकर चहकता हुआ बोलता है अमां यार  सैम भाई ये क्या बात हुई? क्या इतनी कडकी आगई क्या? जो नाश्ते मे चिकन आलाफ़ूस की जगह घासफ़ूस ले रहे हो?

 

सैम : अबे साले, कडकी आये तुम फ़िरंगियों को. हमको क्यों आये? हम तो ताऊ राजू के पठ्ठे हैं. वो तो आज जरा पेट खराब है, इसलिये चिकन आलाफ़ूस की जगह अपने वो वाले डाक्टर साहब के कहने से  कार्नफ़्लेक्स ले रहे हैं.

 

अब बीनू फ़िरंगी अखबार ऊठाकर पढता है और चोंक कर कहता है - अरे सैम भाई देखो. ये क्या खबर है यार? ताऊ राजू के पास ४०००  एकड जमीन है ? और उसमे से भी २००० एकड तो उसने अभी भी छुपा रखी है? पर इतनी जमीन खरीदने का रुपया कहां से आया?

 

सैम - अबे ओ फ़िरंगी. इतने शरीफ़जादे मत बनो तुम. अरे जब तुम लोग सब प्राईम मे उल्टे सीधे मेन्युपुलेशन कर सकते हो तो ताऊ राजू क्यों नही कर सकता? आखिर मुझे क्यों रखा था उन्होने?

 

बीनू फ़िरंगी - अरे बताओ यार सैम भाई. सब कुछ जरा खुल कर बताओ.

 

सैम - देख बे फ़िरंगी किसी को मेरा नाम मत बताना, अब तुझे सही बात बताता हूं. पर ये मत समझना कि तू फ़िरंगी है इसलिये सफ़ाई दे रहा हूं. वो तो बात ये है कि अब मेरे पेट मे बात पच नही रही है. सो उगलना जरुरी है.

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई, आज तक आपकी बात मैने किसी को बताई है क्या ? जो आज बताऊंगा? आप तो शुरु हो जाओ.

 

अब सैम बोला - देख बे. वहां ताऊ ने बोगस कर्मचारियों की भर्ती दिखा रखी थी. इस तरह २० करोड तो हर महिने इसी के आजाते थे. यानि इस रकम से किश्ते चुक जाती थी खरीदी की.

 

बीनू फ़िरंगी - पर सैम भाई सवाल ये है कि फ़िर डाऊन पेमेंट कहां से आया?

 

सैम - अबे तू चुप नही रह सकता क्या? चुप चाप सुनता जा. आज मैं तेरे को सब कुछ बता कर अपने दिल का बोझ हल्का कर लेना चाहता हूं. मेरी आत्मा की आत्मा अब मुझे धिक्कारने लगी है कि क्यों मैं इन ताऊओं के ही चंगुल मे चढता हूं? कोई शरीफ़ आदमी मुझे मिलता ही नही है?

 

बीनू फ़िरंगी - हां यार सैम भाई. ये आपने अच्छी कही. आप तो अब शुरु हो जाओ और अपनी आत्मा का बोझ मुझ पर ऊंडेल दो.

 

सैम - अबे ज्यादा मत बोल. मेरी आत्मा इतनी भी कमजोर नही है. ये तो मेरे रोज के कर्म कांड हैं. अब एक ताऊ की पोल खुल गई तो क्या सबकी थोडी खुलती है?

 

अब सैम ने चाय का कप ऊठाते हुये बोलना शुरु किया - अरे यार जो बैंक मे पक्की फ़िक्स डिपाजिट की रसीदें थी ना? मेरे कहने पर उन रसीदों को ताऊ ने छुपा लिया और बैंक वालो से जाकर बोला कि रसीदे गुम हो गई हैं. और बैंक वालों ने उनकी डुप्लीकेट

रसीदे जारी कर दी.

 

बीनू फ़िरंगी - फ़िर इससे क्या हुआ?

 

सैम - अबे उल्लू के पठ्ठे.. हुआ क्या? अबे सब कुछ तो हो गया.. करोडों की रसीद डबल हो गई. दो दो जगह प्लेज भी कर दी और जहां असली दिखानी थी वहां असली दिखाता रहा और दुसरी जगह डुप्लिकेट से काम चलता रहा. यानि मनी जेनेरेट करने का नायाब नुस्खा.

 

बीनू फ़िरंगी - वाह यार सैम भाई. आप तो गजब के आईडिये देते हो? अब समझ गया कि आपको तो कोई ताऊ ही झेल सकता है. किसी साधारण आदमी के बस का रोग नही है.

 

सैम - हां यार. और अब देखो ये खबर कि मार्गन और साक्स अब सत्यम को सलाह्कार के रुप मे सेवाएं देंगे. जिन्होने खुद अपना पटिया उलाल कर लिया. अब सत्यम को क्या सलाह देंगे? अरे ये तो सरकार को चाहिये कि मेरे जैसे सलाकार के रहते किसी फ़िरंगी सलाहकार की नियुक्ति ना कि जाये.

 

आगे सैम बोला - पारिख साहब ने कहा है कि वो निवेश बैंकर के लिये बात कर रहे हैं और मैने  भी नियुक्त होने के लिये जोड तोड शुरु कर दी है.

 

[आज युग पुरुष सुभाष चन्द्र बोस का जन्म दिवस है. शायद कहीं कोई चूं चपड नही है. नमन है उनको ]


 

इब खूंटे पै पढो :-

आजकल  सैम की बकबास करने की आदत से ताऊ घणा परेशान हो लिया था. और ताऊ ने यह तय कर लिया कि अब सैम को बेच डालेगा, ओने पोने दामो पर भी.

अब उसको सहन करना बडा मुश्किल हो गया था. ताऊ ने आफ़िस के बाहर एक बोर्ड लगा दिया और अखबार मे विज्ञापन दे दिया.

                                                          
                                                "तुरंत बिकाऊ है:"

                             एक बोलने वाला कुता वाजिब दामों मे बिकाऊ है : 
                                सम्पर्क समय सुबह १०.०० से २.३० बजे तक.
                                                जल्दी सम्पर्क करें.  
                                            
एक खरीद दार बोर्ड देख कर आया. और ताऊ से जाकर पूछताछ करने लगा.

कीमत पूछने पर ताऊ बोला - भाई साहब कीमत का क्या है? ये तो मेरे जिगर का टुकडा है. अनमोल है. बस कोई मजबूरी ही है जो इसे बेच रहा हूं .

खरीद दार ने फ़िर पूछा - अच्छा ताऊ ठीक है, पर मैं कैसे विश्वास कर लूं कि ये बोलता भी है? मैं उससे मिलना चाहुंगा.

अब उस खरीद दार को सैम से मिलवाया गया. सैम से उस खरीददार ने  पूछा कि 
आपने अभी तक  क्या क्या काम किया है?

सैम : - जी सबसे पहले तो मैं स्काटलैण्ड यार्ड पुलिस मे था, उसके बाद FBI में कुछ वर्षो तक सर्विस दी, उसके बाद मैं बुश साहब की सिक्युरिटी का चीफ़ इन चार्ज रहा.

खरीद दार सैम को इन्सानों की जबान बोलते देख कर और उसकी पिछली सेवाओं को
देख सुन कर बडा प्रभावित हो गया. और उसने पूछा कि जब आपकी इतनी हाई प्रोफ़ाईल रही है तो आप इस लोकल ताऊ के पास कैसे आगये?

सैम :- सर जी बात ये है कि मैं भी बुश ताऊ के साथ ईराक यात्रा मे था. वहां ताऊ बुश पर जो जूता फ़ेंका गया उसकी जिम्मेदारी मुझ पर डाल दी गई और मुझे इस लोकल ताऊ के हाथों बेच दिया गया.

खरीददार ताऊ से बोला - आपको तो ऐसे हाई प्रोफ़ाइल कुत्ते को पाकर फ़ख्र करना चाहिये. फ़िर आप इसे बेच क्युं रहे हैं?

ताऊ बोला - क्योंकि एक म्यान मे दो तलवारें नही रह सकती.

खरीददार - क्या मतलब?

ताऊ :- क्योंकि ये मुझसे भी बडा फ़ांकालोजिस्ट है.  

ताऊ पहेली के विषय मे

प्रिय भाईयो, बहणों और बेटियो, सबनै ताऊ की तरफ़ तैं घणी रामराम. आज की ये पोस्ट ताऊ पहेली के बारे मे है.

 

आप लोगो ने इस पहेली प्रतियोगिता को काफ़ी पसंद किया है  और हम आपके प्रेम से अभिभूत हैं. इस आयोजन को हम उत्कृष्ट आयोजन बनाना चाहते हैं हर दृष्टि से.

 

जब ये पहेली का आयोजन प्रथम बार हमने किया था तब सिर्फ़ एक प्रयोग ही था और उस सफ़ल आयोजन ने ही हमको यह हिम्मत दी कि इसको एक व्यवस्थित रुप दिया जाये.

 

प्रथम बार के टेस्ट आयोजन के बाद हम कुल ५ पहेलियां आयोजित कर चुके हैं. उनका सम्पुर्ण विवरण हमारे साथ उपलब्ध है कि किस किसने भाग लिया, कौन से न्म्बर पर आकर जवाब दिया, और कितने मार्क्स प्राप्त किये?

 

आप सबके प्रेम,  आशिर्वाद और सहयोग से हम इस आयोजन को सर्व श्रेष्ठ बना देना चाहते हैं और आशा करते हैं कि जल्दी ही कोई इस पहेली का विजेता बने. हम फ़िर कह रहे हैं कि आप सही जवाब के साथ भाग अवश्य लिजिये. बाद मे ये अंक आपके बहुत काम आने वाले हैं.

 

इस पहेली कि एक और विशेषता हो गई है कि अगर आपने एक भी गलत जवाब दिया या अनुपस्थित रहे तो आपके पीछे वाला आपसे उपर आ जायेगा. आप इसको महसूस करते ही होंगे, बस रेग्युलर जवाब दिजिये.

 

अभी तक की मजेदार स्थिति देखिये :- प्रथम तीन स्थानो पर क्रमश: शुभम आर्य (४९६), सु अल्पना वर्मा (४७८) और श्री विवेक सिंह (४७८) पर चल रहे हैं. इनमे से किसी का भी गलत जवाब या अनुपस्थिति अब नीचे वाले की जिन्दगी है. यानि सिनेमा वाला खेल हो गया. इनको हर हाल मे अपनी स्थिति बनाये रखने के लिये सही जवाब के साथ, और जल्दी से जल्दी नियमित इस पहेली का जवाब देना है.

 

शुभम के पास अभी अगली पहेली मे २०वें  नम्बर तक का कुशन है पर सु.अल्पना वर्माजी और विवेकसिंह जी मे बडा कशमकश का मुकाबला हो गया है. अगर पहेली नम्बर ६ मे सु. अल्पना जी सही जवाब मे विवेकसिंह जी से ४ नम्बर बाद आई तो वो तीसरे स्थान पर होंगी और विवेक जी दुसरे पर.

 

यही स्थिति दुसरे ग्रुप बनते जा रहे श्री रंजन (३८४), स्मार्ट इंडियन (३८१) , प्रकाश गोविंद (३५७), pt.डी.के.शर्मा "वत्स" (३५७), और प्रवीण त्रिवेदी जी (३३४) के बीच बन गई है.

 

और तीसरा ग्रुप कुछ युं उभर रहा है,  वरुण जयसवाल (२९१), ऊडनतश्तरी (२८०), P.N.Subramanian (277), दिपक तिवारी साहब ( 273 ), और सु. सीमा गुप्ता (२७०) इनमे कांटे की टक्कर चल रही है.

 

ताऊ पहेली नम्बर ६ का प्रकाशन शनीवार २४ जनवरी को सुबह ७ बजे होगा. कृपया ध्यान रखिये.

 

एक सुझाव आया था कि पहेली के उपर आई टीपणियां रिजल्ट डिक्लेयर करने के साथ ही प्रकाशित की जायें. आपकी इस बारे मे क्या राय है?

 

हमारी नजर मे इससे पहेली की रोचकता समाप्त होगी क्योंकि कई ब्लागर्स यहां टीपणीयों की रोचकता के लिये ही आते हैं और उनकी रोचक टीपणियां सबको आनन्द देती हैं.

 

इस बारे मे आपके विचार जानना बहुत जरुरी है. अगर आपके विचार नही मिले तो एक सदस्यीय निरणायक मण्डल को जो उचित लगेगा वही किया जायेगा.

 

और अब अंत मे आपको बता दे कि निम्न लोगों ने अब तक प्रथम स्थान पर इन पहेलियो मे विजय प्राप्त की है.

 

ताऊ पहेली न.१  के विजेता श्री. स्मार्ट ईंडियन

ताऊ पहेली न.२ के विजेता श्री. शुभम आर्य

ताऊ पहेली न.३ के विजेता श्री विवेक सिंह

ताऊ पहेली न.४ के  विजेता श्री उडनतश्तरी

ताऊ पहेली न. ५ के विजेता श्री शुभम आर्य 

 

और याद रखिये कि सर्वोच्च अंको का इनाम तो एक लाजवाब प्रमाण-पत्र है जो सबसे आखिर मे दिया जायेगा, इसके पहले अगर कोई प्रतियोगी हेट्रिक कर लेता है तो उसे भी एक शानदार ताऊ पहेली विजेता का प्रमाण पत्र दिया जायेगा. अथवा किसी भी क्रम पर ५ बार प्रथम स्थान के विजेता को यह सम्मान प्रदान किया जायेगा. 

 

आपके कीमती सुझावों का हम स्वागत करते हैं.

 

 


इब खूंटे पै पढो :-

राज भाटिया साहब ने ताऊ को कहा - ताऊ तेरे से कोई भी काम ठीक ढंग से नही होता. धन्धा व्यापार करना तेरे बस का नही. नौकरी करने लायक तू पढा लिखा नही है सो एक काम कर तू लोगो को भविष्य बताने का काम शुरु कर दे.

ताऊ : लो बोलो, मुझे मेरा भविष्य नही मालुम? लोगो को क्या बताऊंगा?

राज भाटिया जी  : अरे बावलीबूच ताऊ. तू समझता कोनी? भविष्य तो तोता बतायेगा, बस तू तो कहीं से एक ट्रेंड तोता खरीद के ले आ और रोड किनारे लेकर बैठ जाना, शाम तक अच्छी कमाई हो जायेगी.  

इब ताऊ को किसी ने बताया कि दिल्ली मे अच्छे तोते मिलते हैं, सारे भारत से आकर
वहां संसद मे इकठ्ठे होते हैं, सो ताऊ ने सु.सीमाजी को फ़ोन लगाया कि सीमा जी
मन्नै एक तोता खरीद के भिजवा दो.

सीमाजी ने पूछा कि ताऊ तोते का क्या करोगे? अब ये नया कौन सा धन्धा शुरु करने का विचार है?

ताऊ : जी, सीमा जी, अब मैं भविष्य बताने का धंधा शुरु करुंगा. और भाटिया जी वाली
पूरी बात बताई. इस पर सीमा जी ने सलाह दी की ताऊ ये संसद वाले तोते तो सारा
माल खुद ही जीम जायेंगे, आपको क्या मिलेगा? 

आप तो इस काम के लिये पानीपत से तोता खरीद लो. योगिंद्र  मोदगिलजी आजकल तोते बेचने का साईड बिजनैस भी करते हैं.   

इब ताऊ सीधे योगिंद्र मोदगिलजी के पास पहुंच गया और मोदगिल जी तोते बेचने वाली दुकान पर ही बैठे थे. उन्होने अनेक तरह के तोते दिखाये, कार्ड निकालू तोता, आशिर्वाद देने वाला तोता ..आदि आदि...  पर ताऊ को उनमे सबमें कमी नजर आई.

मोदगिल जी : देख ताऊ तू असली बात बता. ज्योतिषी लोगो के ट्रेंड तोते जितने थे मेरे पास मे, वो सब तेरे को दिखा चुका हूं.

ताऊ : अरे भाई नाराज मत हो कविराज, सही बात ये है कि मुझे ज्योतिष की पूंछडी भी आवै कोनी और यो भाटिया जी मन्नै कहवै कि तोते से ज्योतिष पढवा और मेरे पिस्से
कमा कर वापस कर. सो मन्नै कोई ऐसा तोता बता दे जो खुद ही भविष्य बता दे और
खुद ही उपाय भी बतादे. और नोट गिनने का काम मैं करता रहूं.

योगिन्द्र जी : अरे तो ताऊ पहले बताना था ना. मेरे पास तो इस काम के एक्सपर्ट
तोते हैं. देख ये एक तोता है. सबसे उम्दा किस्म का,   ये लेजा.

ताऊ : पर भाइ इससे मैं भविष्य पढवाऊंगा कैसे?

मोदगिलजी :  देख ताऊ, इस तोते की दोनो टांगों मे ना दिखाई देने धागे बांध रखें हैं. और इसको मैने फ़ुल ट्रेनिंग दे रखी है कि जब तुम इसकी दाहिनी टांग का धागा खींचोगे तो यह सामने बैठे आदमी का भविष्य अपने आप पढ कर सुनायेगा और जब तुम इसकी बांयी टांग का धागा खींचोगे तो ये उसको उपाय बतायेगा और तुमको २१०० रुपये की दक्षिणा दिलवायेगा. अब पिस्से काढ और इसको ले जा फ़टा फ़ट.

इब ताऊ तो ठहरा ठेठ ताऊ सो उसने पूछा : भाई अगर गलती से मैने इसकी दोनो
टांगो के धागे एक साथ खींच दिये तब यह क्या करेगा?

इस पर वो तोता बोला - अबे उल्लू के पठ्ठे, अगर दोनो धागे एक साथ खींच देगा तो मैं गिर नही जाऊंगा?

राज भाटिया को चूना, ताऊ चांद पर

आप लोगां नै आछी तरीयां बेरा सै कि गोटू सुनार ताऊ को चूना लगा कर भाज लिया था, और ताऊ उस बख्त तैं ही गोटू को ढुंढण लागरया था.

 

सब जगह ढुंढते २ आखिर ताऊ ने सोच्या कि इस सारी धरती पर तो गोटू को ढुंढ लिया और मिला नही. सो हो सकता है कि चांद पर भाग गया हो?

 

अब ताऊ ने सोचा कि चलो उस दुष्ट दगेबाज को चांद पर ढूंढते हैं और चांद पर जो ताऊ की कालोनी काटने का काम चल रहा है उसको भी देख लेंगे कि कितनी प्रोग्रेस हुई? और चंपाकली की भी कोई खबर नही आई, सो उसको भी ढूंढ लेंगे.

 

bhatia ka chat ka thela

(राज भाटिया जी का चांद पर चाट का ठेला)

 

सो ताऊ सीधा अपना लठ्ठ ऊठाकै चांद पर जा पहुंचा. वहां राज भाटिया जी अपने ठेले पर पानी पूरी बेच रहे थे. ताऊ के वहां पहुंचते ही भाटिया जी ने खडी हुई खाट को आडी कर दी और दोनो जने उसपै बैठ कर हुक्का पीण लाग गे.

 

भाटिया जी नै धरती के सब हालचाल लिये और ताऊ को चांद पर हो रहे विकास के बारे मे विस्तार से बताया. ताऊ ने बूझ्या कि आपको गोटू सुनार कहीं दिखा था क्या?             

 

भाटिया जी ने पूछा कि - ताऊ क्यों पूछ रहे हो? वो तो अभी ५ दिन पहले ही आया था और यहां दो दिन मेरे पास रुक कर गया है. और जाते समय मुझसे दस लाख रुपये भी लेकर गया है. बोल रहा था कि ताऊ और हमारा जोईंट वेंचर है, सो चांद के बाद अब मंगल ग्रह पर कालोनी काटनी है. वहां बयाने मे कम पड रहे हैं, बस ताऊ पीछे २ आता ही होगा पैसे लेकर. सो ताऊ तू एक काम करिये कि ५ लाख पहले के और दस लाख ये, कुल १५ लाख रोहतक मे मेरे घर भिजवा देना. आजकल वहां थोडी जरुरत है. इसीलिये मैने गोटू को पिस्से दिये थे कि मनीआर्डर खर्च बच जायेगा.

 

इब ताऊ दांत पीसता हुआ बोला - अरे टीकर के बीज गोटू, तू भाटिया जी को भी चूना लगा गया? अरे सत्यानाशी कुछ तो रहम करता. भाटीया जी यहां परदेश मे पिस्से कमाने के लिये पडे हैं और तू इनको भी चूना लगा गया?

 

इब ताऊ ने भाटिया जी को सारा किस्सा बताया कि किस तरह गोटू सुनार ताऊ को जबर्दस्त चूना लगा कर भागा है?

 

ताऊ बोला - भाटिया साहब आप चिन्ता मत करो. मैं आकाश पाताल मे जहां कहीं भी गोटू छुपा होगा उसको खोद कर निकाल लाऊंगा. गोटू आपके और मेरे पिस्से नही खा सकता.

 

अगर मेरे पिस्से गोटू  खा गया तो ये तो मेरे लिये नाक कटने वाली बात हो गई. वो आखिर जायेगा कहां? आखिर कसाई का माल ललडा (बकरा) थोडी खा सकता है?

 

भाटिया जी और ताऊ अपने गम गलत कर ही रहे थे कि इतने मे सामने से यमराज क्रोधाग्नि मे लाल पीले होते आते हुये दिखाई दिये.

 

वो जैसे ही पैदल चलते हुये आये, ताऊ ने उनको रामराम  करी और पूछ बैठा - यमराज जी मेरी चंपाकली कहां हैं? मुझे मेरी चंपाकली चाहिये. किसी भी कीमत पर.

 

अब यमराज जी क्रोध पुर्वक आंखों को अंगारे की तरह लाल करते हुये बोले- अरे दुष्ट और एहसान फ़रामोश ताऊ. खामोश..अब मेरी क्रोधाग्नि को और प्रजवल्लित ना कर. वर्ना मैं मैं तुझे खोलते हुये तेल के कडाव मे डलवा दूंगा.

 

ताऊ बोला - महाराज वो तो जब मैं आपके राज्य की सीमा मे आऊं तब करना. फ़िल्हाल आप मेरे राज्य की सीमा मे हैं. क्या आपको  याद नही कि आप चांद मुझे दे चुके हैं?

 

अरे एहसान फ़रामोश ताऊ, तू इतना उदंड हो गया ? हमारे सामने जबान चलाता है?

यमराज जी ने पुकारा - अनुचरों..अनुचरो,,अरे कहां मर गये सब के सब?

 

ताऊ बोला - महाराज यहां तो कोई अनुचर नही दिख रहा है. आप किसे पुकार रहे हैं?

 

यमराज - अरे दुष्ट मानव, हमारी मजाक उडाता है? एहसान फ़रामोश...और यमराज गुस्से से कांपते हुये बोले कि पिछली बार तू हमारी कृपा की वजह से बच गया था पर अबकी बार कभी चंगुल मे चढ गया तो हम तुझे नही छोडेंगे.

 

ताऊ बोला - महाराज, हमारी पृथ्वी का तो यही कायदा है कि जिस आदमी को सीढी बनाकर उपर चढो उस सीढी को यानि उस मनुष्य की कब्र खोद दो. हमने तो उसी नियम का पालन किया है. अब आप जल्दी से हमारी चंपाकली का पता बतादो..हमारा उसके बिना मन नही लगता है.

 

अब तो यमराज के क्रोध की सीमा ही पार हो चुकी थी. वो चिल्लाते हुये बोले - अरे दो कोडी की तेरी चंपाकली और दो कोडी का तू. तेरे को मालुम है कि जिस दिन से तेरी चम्पाकली मेरे झोठे (भैंसे) को भगा कर ले गई है उस दिन से मैं पैदल पैदल दोनो को ढूंढ रहा हूं,  और अब सवारी की बजाये मुझे पैदल चलना पड रहा है और दंड देने का काम बाधित हो रहा है.

 

ताऊ - अरे महाराज , इतने परेशान क्यों होते हो? नई कार राल्स रायस या बी.एम.डब्ल्यु. आपको खरिदवा देता हूं आप तो कुछ एडवांस का इन्तजाम करवा दो. ताऊ ने सोचा कि यमराज को कुछ गिनती तो आती नही, कभी लंबा माल इनसे ही बना लूं.

 

यमराज - अरे मुर्ख प्राणी, मजाक मत कर, हम कार मे नही चल सकते, ये प्रोटोकोल के खिलाफ़ है. और अब तू तेरी जबान बंद कर, वर्ना अनर्थ हो जायेगा. अरे मुर्ख तू तो हमारे द्वारा तुझपर पिछले जन्म के किये उपकार भी भूल गया?

 

ताऊ - अरे महाराज हमने पिछले जन्म मे तो आपको देखा हो तो भी हमे याद नही. और हमको तो इस जन्म का भी नही मालुम तो पिछले जन्म की आपने अच्छी कही. क्या हुआ था पिछले जन्म मे?

 

यमराज- अरे दुष्ट भूल गया जब तू पिछले जन्म मे रावण यानि दशानन के फ़ंदे मे चढ गया था तब हमने ही तुझे ये मानव देह दी थी?.......??.......???

 


इब खूंटे पै पढो :-

जैसा कि आपने पिछली बार खूंटे पै पढा था, ताई की अर्थी गधे को देखने के लिये मची भगदड की वजह से गिर गई और ताई जिन्दा होके ऊठ बैठी.

वहां मौजूद सारे लोग तो डर के मारे भाज लिये, और ताऊ को ताई ने गर्दन से पकडा और धक्के देती हुई घर ले आयी.

घर पर आकर ताई ने भाटिया जी वाला मेड-इन-जर्मन लठ्ठ निकाला और ताऊ की
बिल्कुल पुलिसिया पीटाई कर डाली. यानि खून का कोई काम नही, अंदरुनी मार थी.

इब ताऊ कुट पिट कर पडा कराहने लगा तो ताई को फ़िर दया आगई. आखिर ताई
कितनी ही जालिम हो ? है तो एक औरत ही. सो ताई ने ताऊ को ऊठाकर कार की
पिछली सीट पर डाला और खुद गाडी लेकर अस्पताल की और तेज गति से गाडी
दौडा दी..

ताई को तेज गाडी चलाता देख कर ट्रेफ़िक होल्दार ने रुकने का इशारा किया. बडी
मुश्किल से चूं..चूं..की आवाज करती हुई गाडी रुकी.

पुलिसिया होल्दार आगया और ताई को देखकर बोला - तन्नै शर्म कोनी आवै, बीरबानी
होकर इतनी तेज गाडी चलाते हुये? किसी के टक्कर लाग ज्यावै तो?

ताई चुपचाप होल्दार साहब का मुंह देखती रही.
 
इब पुलिसिया समझा कि ये कोई गांव की गंवार औरत दिखती है सो इससे कुछ रुपये
ऐंठते हैं. और ताई से रिश्वत वसूलना यानि अपनी कब्र खोदने के बराबर काम है. 

सिपाही  बोला - अरे ताई ..चल गाडी के कागज दिखा. तेज गति से गाडी चलाने की वजह से तेरा चालान बनेगा.

उसकी भाषा सुनकर ताई को गुस्सा तो आया पर ताई ने सोचा कि आज इसको अच्छा सा सबक सिखाया जाये. इब ताई बोली -- गाडी के  कागज तो मेरे धौरै कोनी.

पुलिसिया -  फ़िर अपणा लेसन्स  (driving license) काढ (निकाल)

ताई - लैसंस के हौवै सै? मन्नै बेरा कोनी.

इब मन ही मन पुलिसिया प्रशन्न होते हुये गुस्से से बोला - तुमको मालुम है ये अपराध है? और ये  गाडी किसके नाम पर है?

ताई - पता नही. मैने इस गाडी के मालिक को मारकर उसके टुकडे करके एक थैले में
भरकर कार की डिक्की मे भर दिये हैं और मेरे पति जो पिछली सीट पर सो रहे हैं उनको दिखाने डाक्टर के पास जा रही हूं.

इब होल्दार के तो होश ऊड गये.  उसने तुरंत अपने अफ़सर को फ़ोन किया और बताया कि - सर मैने एक हत्या करके भागी हुई औरत को रोक रखा है, उसके पास लाईसेन्स, गाडी के कागजात कुछ भी नही है. लाश के टुकडे करके उसने डिक्की मे डाल रखे है.

उधर से तुरंत सायरन बजाती पुलिस की दो तीन गाडियों ने ताई को चारो तरफ़ से घेर लिया. ताई आराम से अपनी सीट पर बैठी रही.

अब दो तीन पुलिस वालों ने रिवाल्वर की नोक पर ताई  को गाडी से बाहर उतार लिया और एक अफ़सर बोला- हमारे जवान ने बताया है कि आप कार की डिक्की मे हत्या करके  लाश ले जारही हैं? चाबियां दीजिये.

ताई ने खामोशी से चाबियां दे दी. अफ़सर को वहां कुछ नही मिला.

अब अफ़सर बोला- सिपाही कह रहा था कि आप गाडी चुराकर भागी हैं?

अब ताई ने चुपचाप गाडी के कागजात अफ़सर को दे दिये.

अब अफ़सर थोडा परेशान होकर  बोला- और आपके पास डाईविंग लायसेंस भी नही है?

ताई ने अपना पर्स खोल कर ड्राईविंग लायसेन्स भी दिखा दिया. और बोली- अब आपका सिपाही ये भी कहेगा कि मैं बहुत तेज गति से गाडी ड्राईव कर रही थी ?

अब अफ़सर ने गुस्से से सिपाही की तरफ़ देखा और सिपाही हकला कर जी सर..नो सर करने लगा.

अब अफ़सर ने ताई से सिपाही की वजह से हुई असुविधा के लिये क्षमा मांगी और सिपाही को वार्निंग देते हुये हुये बोला - अगर तूने ऐसी बेवकूफ़ी आईन्दा की तो तुझे सस्पेण्ड कर दुंगा.

ताई ने अफ़सर को धन्यवाद दिया और सिपाही की तरफ़ मुस्कराते हुये हाथ हिला कर 
रामराम  करते हुये, ताऊ की हड्डी पसली जुडवाने अस्पताल चली गई.

"अहंकार"

 
युगों पुराना मेरा अहंकाahankar
जरासी चोट लगते ही

क्यों गुंजायमान हो गया 
जब जब विराट हुआ
मेरी  विजय का मान होता रहा  

दो कौडी का ये अहंकार
छोटों को लताडने और
बडॊं को दिखाने के काम आता रहा
ना अस्त्र ना शस्त्र से टूटा
टूट तो एक भावुक से क्षण मे
अहम को छोड़  अंतरात्मा मे
झांका तो इस एहसास का भान हुआ
अहंकार कोरा अहंकार ही है

और टूटना इसकी नियति है.
 
(इस रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)

"ताऊ" साप्ताहिक पत्रिका (अंक-५)

माननिय भाईयों, बहणों और बेटियो सबनै ताऊ की तरफ़ तैं सोमवार सबेरे की रामराम.  आज आपका कार्यकारी दिवस है सो फ़टाफ़ट ये रिजल्ट देख कै काम धंधे पै लग ल्यो.

 

अबकी बार इस साप्ताहिक पत्रिका मे देखिये पहेली -५ के जवाब

 

ताऊ पहेली-५ का सही जवाब है "बाघ केव्ज" तह्सील कुक्षी जिला- धार (म.प्र.), इस अंक मे कुल ५६ ब्लागर्स के ७३ कमेंट्स आये. जिसमे से १९ लोग विजेता रहे.

 

विवरण के लिये हम  सुश्री सीमा गुप्ता, सुश्री अल्पना वर्मा और  श्री प्रकाश गोविन्द की टिपणीयां भी प्रकाशित कर रहे हैं. यह जगह बाघ गुफ़ाओं के नाम से  प्रसिद्ध है और यह बाघ नामक एक छोटा सा गांव है.

 

इन गुफ़ाओं मे जो चित्रकारी है वो अजन्ता की गुफ़ाओ से मिलती जुलती है. गुफ़ाओ मे जो चित्रकारी मिलती है उनमे अजन्ता के बाद इन्ही गुफ़ाओं का नम्बर आता है.

 

आजकल बाघ प्रिंट के नाम से यहां पर बहुत ही खूबसूरत साडियां, वाल हैंगिंग्स और बॆडकवर का निर्माण होता है. इन की विदेशों मे काफ़ी बहुतायत से मांग है. और इसकी वजह है कि यहा जो कपडे प्रिंट किये जाते हैं उनमे फ़्रुट कलर इस्तेमाल होते हैं, जिसकी वजह से ये बिल्कुल भी नुक्सान देह नही होते.

 

फ़्रुट कलर्स की एक और विशेषता है कि जैसे जैसे आप इनको वाश करते जायेंगे इनकी कलर और साईनिंग और निखरती जायेगी.

 

तो आईये, अब रिजल्ट की तरफ़ बढते हैं.

 

आज के प्रथम विजेता शुभम आर्य said...

ताऊ मेरा जवाब बदल दिया जाए मुझे मिल गया सही जवाब ये तो बाघ गुफा यानि bagh caves है | जो धार, मध्य प्रदेश में है |

 

घणी बधाई प्रथम स्थान के लिये. सर्वाधिक अंक प्रात किये १०१.

तालियां.....

-----------------------------------------------------------------------------------------

 

( नोट : शुभम आर्य के  कमेंट मुझसे गलती से रिजेक्ट पर क्लिक होने से पब्लिश नही हो पाये हैं, इनकी मेल मौजूद है. वो तीनो मेल शनीवार को ही मैने पब्लिश कर दी थी. सबसे पहले १०:५९ AM पर इनका ही सही जवाब सबसे पहले आया था. जिस किसी को संदेह लगता हो वो अपना मेल एड्रेस मुझे भेज देवे, वो मेल उनको फ़ारवर्ड कर दी जायेंगी.)

--------------------------------------------------------------------------------------------

२. पर हैं वरुण जायसवाल said...बाघ गुफा , धार जिला , म . प्र .|

अंक १००

----------------------------------------------------------------------------------------------------

३. पर हैं seema gupta said...

ये बाघ गुफा है जो धार से ९७ किलोमीटर दूर मध्ये प्रदेश मे है . इन गुफाओं की खोज १८१८ मे हुई थी, इनका नाम बाघ गुफा क्यूँ पडा इसका कोई ठोस कारन ज्ञात नही है मगर कहा जाता है की इनकी खोज से पहले यहाँ बाघों ने आपना निवास बनाया हुआ था. इसके बाद ये स्थान Buddhist मोंक्स द्वारा रहने और योग साधना आदि के लिए भी किया गया .ये गुफा कुदरती नही हैं इनका निर्माण पुरातन कलाकरों ने पथरों को नक्काशीदार काट कर किया था हैं ये गुफाएं अपनी अद्भुत चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है .पॉँच गुफाओं का ये समूह इंदौर और वडोदरा के मध्य सडक पर पडता है "इन्हे Bagh Buddhist Caves,भी कहा जाता है ये बाघिनी नदी के तट पर बाघ गावं से ७ कम की दुरी पर स्तिथ है."
Regards 

अंक ९९

----------------------------------------------------------------------------------------------------

पर हैं. अल्पना वर्मा said...पहले का जवाब खारिज कर दिया जाए...
नया जवाब है--Bagh caves
-details अभी देती हूँ.

अंक ९८

----------------------------------------------------------------------------------------------------

५. पर हैं विवेक सिंह said...

ताऊ मेरा अंतिम जबाब माना जाय मध्यप्रदेश में धार के निकट बाघ गुफाएं !

अंक ९७

----------------------------------------------------------------------------------------------------

६. पर हैं रंजन said...

ताऊ वैसे तो मुझे इस बा्रे में बिल्कुल पता नहीं था.. पर आपने हिंट दे दिया अब जबाब नहीं दु तो .. तो फिर हम भतीजे किसके..
ये है बाघ गुफा.. मध्यप्रदेश में धार से ९७ किमी दूर.. और हां ये प्राकृतिक नहीं ्है.. मानव निर्मित है..
बाकि जबाब तो सोमवार को देखेगें..
नंबर दे देना ताऊ..
राम राम

अंक ९६

----------------------------------------------------------------------------------------------------

पर हैं. प्रकाश गोविन्द said...

My Correct Answer :
Bagh Caves of Madhya Pradesh

अंक ९५

----------------------------------------------------------------------------------------------------

पर हैं. Udan Tashtari said...

ये हैं बाध गुफाऐं धार जिले में..असल जबाब!!
इसे ही मान्यता दी जाये.

अंक ९४

----------------------------------------------------------------------------------------------------

९. पर हैं. Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

ये मध्यप्रदेश के धार जिले में 'बाग की गुफाएं'हैं.किंवदंतियो के अनुसार यहीं पर पांड्वो ने अपने अज्ञातवास का समय व्यतीत किया था.

अंक ९३

----------------------------------------------------------------------------------------------------

१०. पर हैं. PD said...

ab sab bagh gufa bol rahe hain to ham bhi kah hi dete hain bagh gufa.. yahi antim javaab..
chori karke aaj pass ho hi jate hain.. :)

अंक ९२

----------------------------------------------------------------------------------------------------

११. पर हैं. Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

ताऊ, जैसी के हमारी और आपकी डील हुई थी, बिल्कुल वैसे ही मैंने जानते हुए भी सही उत्तर बाघ गुफा, (धार जिला) म . प्र लिखने के बजाय लोगों को कन्फुजिआने के लिए एलोरा बोला है. इब थम म्हारे पीसे लौटा दोगे ना?

अंक ९१

----------------------------------------------------------------------------------------------------

१२. पर हैं Tarun said...

ताऊ काम में ऐसा फंसा की पहेली रह गयी, बॉस को कहता कहता थक गया कि जाणे दा भाया काम तो होता रहेगा, पहेली ज्यादा जरूरी है नही तो फिर से मेरिट में पीछे आ जाऊँगा माणा ही नही। देर से ही सही हमारा उत्तर भी लॉक कर दिया जाय - बाघ गुफायें (Bagh Caves) जो मध्य प्रदेश में हैं, धार से कोई ९०-१०० किमी दूर।

अंक ९०

----------------------------------------------------------------------------------------------------

१३. पर हैं ताऊजी said...

ताऊ चालहे काट दिये, मेरे ब्लाग पै कब्जा करकै टिपणियां के मजे लेण लाग रया सै. यो तओ बाघ की गुफ़ा ही सै, पर मेरे ब्लाग पै कब्जा कब छौडैगा? या बता दे. लागै सै कि चिठ्ठा चर्चा म्ह फ़ु्रसतिया जी की अदालत म्ह तेरे उपर केस ठोकणा पडैगा और वकिळ भी द्विवेदी जी को करुंगा फ़ेर देखते हैं कैसे कब्जा ना छोडैगा तू.
इब नम्बर तो दे ही दे, बाकी तो मैं बाद म्ह निपट ल्युंगा.
रामराम.

अंक ८९

----------------------------------------------------------------------------------------------------

१४. पर हैं. दीपक "तिवारी साहब" said...

अरे यार ताऊ, आज ही मैं गांव गया था कुक्षी, और आज ही हमारे गांव की पहेली पूछ ली आपने.
ये हमारे गांव से दस किलोमीटर पर बाघ की गुफ़ाएं हैं यहां पर खूब गुल्ली डन्डा खेला है बचपन मे हमने.

अंक ८८

----------------------------------------------------------------------------------------------------

१५.  पर हैं. makrand said...

बाघ की गुफ़ाएं हैं ताऊ. और यहां की साडियां भी बडी फ़ेमस हैं. बाघ प्रिन्ट के नाम से यहां की साडीयां और बेड कवर बहुत फ़ेमस हैं.

अंक ८७

----------------------------------------------------------------------------------------------------

१६. पर हैं. अनूप शुक्ल said...

ताऊ जी जब इत्ते लोग बता रहे हैं तो हमारा जबाब भी बाघ गुफ़ा होना चाहिये लेकिन हमारा जबाब लाक किया जाये कि ये ताजमहल बनने के पहले की जगह है।

अंक ८६

----------------------------------------------------------------------------------------------------

१७. पर हैं प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

मध्यप्रदेश में धार के निकट बाघ गुफाएं !!!!!

अंक ८५

----------------------------------------------------------------------------------------------------

१८ पर है Dixit said...

Ram Ram Tau .......pehli bar aaya thyare blog pe ........ib sab Bagh ghufa keh rahe to mera bhi yahi jawab man leyo .........waise tau .....teth hariyanvi mein puri post likhi jave to maza hi aa javega ......!!!
Lucky

 

अंक ८४

----------------------------------------------------------------------------------------------------१९. पर है. Anumeha said...

बाघ गुफा , धार जिला , म . प्र .|

January 18, 2009 11:17 PM

 

अंक ८३

----------------------------------------------------------------------------------------------------

निम्न भाइ बहणों ने भी इस पहेली अंक-५  मे किसी न किसी रुप मे टिपणी करके सहभागिता करके हमारा उत्साह वर्धन किया.  आप सबका सादर हार्दिक आभार !

ARVIND MISHRA , दिनेशराय द्विवेदी DINESHRAI DWIVED , DINANATH ,
PARUL , VIDHU , राम खेलावन , संजय बेंगाणी , कुश , सुशील कुमार छौक्कर ,
NIRMLA KAPILA , JAYAKA , रंजना [रंजू भाटिया] , ANIL PUSADKAR ,AMIT ,
नितिन व्यास , दिगम्बर नासवा , राज भाटिय़ा , मुसाफिर जाट , विनय , डॉ .अनुराग , मोहन वशिष्‍ठ , NEELIMA SUKHIJA ARORA , MAMTA ,
शाश्‍वत शेखर , HARKIRAT HAQEER , अभिषेक ओझा , गौतम राजरिशी

 

अब कुछ विषय पर रोशनी डालती हुई टिपणियां क्रमश :-

 seema gupta said...

ये बाघ गुफा है जो धार से ९७ किलोमीटर दूर मध्ये प्रदेश मे है . इन गुफाओं की खोज १८१८ मे हुई थी, इनका नाम बाघ गुफा क्यूँ पडा इसका कोई ठोस कारन ज्ञात नही है मगर कहा जाता है की इनकी खोज से पहले यहाँ बाघों ने आपना निवास बनाया हुआ था. इसके बाद ये स्थान Buddhist मोंक्स द्वारा रहने और योग साधना आदि के लिए भी किया गया .ये गुफा कुदरती नही हैं इनका निर्माण पुरातन कलाकरों ने पथरों को नक्काशीदार काट कर किया था हैं ये गुफाएं अपनी अद्भुत चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है .पॉँच गुफाओं का ये समूह इंदौर और वडोदरा के मध्य सडक पर पडता है "इन्हे Bagh Buddhist Caves,भी कहा जाता है ये बाघिनी नदी के तट पर बाघ गावं से ७ कम की दुरी पर स्तिथ है."
Regards

 

 अल्पना वर्मा said...

यह चित्र बाघ गुफाओं का है.कुछ इतिहासकार इन्हें चौथी और पांचवी सदी में निर्मित मानते हैं .
अधिकतर ७ वीं सदी में.
ये बाघ गुफाएं ,मध्य प्रदेश में धार जिले से ९७ कम दूर विन्ध्य पर्वत के दक्षिणी ढलान पर hain.
बौद्ध धरम को दर्शाती हुई इन ९ गुफायों में से केवल ५ ही अभी बची हुई हैं.ये इंदौर और वडोदरा के बीच में हैं.बाघिनी नदी के किनारे हैं.
इन गुफाओं का संबंध बौद्ध मत से है। यहां अनेक बौद्ध मठ और मंदिर देखे जा सकते हैं।
इन गुफाओं में चैतन्य हॉल में स्तूप हैं और रहने की कोठरी भी बनी हैं जहाँ बोद्ध भिक्षु रहा करते थे.
अजंता और एलोरा गुफाओं की तर्ज पर ही बाघ गुफाएं बनी हुई हैं। इन गुफाओं में बनी प्राचीन चित्रकारी मनुष्य को हैरत में डाल देती है। इन गुफाओं की खोज 1818 में की गई थी। माना जाता है कि दसवीं शताब्दी में बौद्ध धर्म के पतन के बाद इन गुफाओं को मनुष्य ने भुला दिया था और यहां बाघ निवास करने लगे। इसीलिए इन्हें बाघ गुफाओं के नाम से जाना जाता है। बाघ गुफा के कारण ही यहां बसे गांव को बाघ गांव और यहां से बहने वाली नदी को बाघ नदी के नाम से जाना जाता है।
यहाँ बनी पदाम्पनी का चित्र[पेंटिंग]अजंता में बनी पदाम्पनी से मिलती जुलती है.
यह किताब इन गुफाओं के बारे में आप को बहुत सी जानकारी देगी.
यह शायद सिर्फ़ पुस्तकालयों में मिलेगी.बडे अफ़सोस की बात है ,की हमारे भारतीय इतिहासकार इन प्राचीन स्मारकों पर किताबें नहीं लिखते[?]=ज्यादातर किताबें और दस्तावेज अंग्रजों के द्वारा एकत्र किए हुए हैं.
यह किताब भी एक अंग्रेज ने ही लिखी है.
The Bagh Caves in Gwalior state
AUTHOR - Sir John Marshall
PUBLICATION - India society, London [year 1927]
[-आज तो सच में मुश्किल लगी पहेली.
-अच्छा हुआ, बहुत से monuments को जान लिया इस बहाने.]

 

 प्रकाश गोविन्द said...

ताऊ आपने "क्लू" देकर काम आसान कर दिया वरना मंजिल तक पहुंचना बहुत मुश्किल था !
सही जवाब तो मैं दे ही चुका हूँ अब थोड़ा विस्तृत जवाब भी दे दूँ !
बाघ गुफाएं-
ये गुफाएं मध्य प्रदेश के धार जिले से ९७ किलोमीटर दूर हैं ! माँडू किले से इनकी दूरी ५० किलोमीटर (पश्चिम) लगभग है !
इन गुफाओं का संबंध बौद्ध मत से है। यहां अनेक बौद्ध मठ और मंदिर देखे जा सकते हैं। अजंता और एलोरा गुफाओं की तर्ज पर ही बाघ गुफाएं बनी हुई हैं। इन गुफाओं में बनी प्राचीन चित्रकारी मनुष्य को हैरत में डाल देती है। इन गुफाओं की खोज 1818 में की गई थी। माना जाता है कि दसवीं शताब्दी में बौद्ध धर्म के पतन के बाद इन गुफाओं को मनुष्य ने भुला दिया था और यहां बाघ निवास करने लगे। इसीलिए इन्हें बाघ गुफाओं के नाम से जाना जाता है। बाघ गुफा के कारण ही यहां बसे गांव को बाघ गांव और यहां से बहने वाली नदी को बाघ नदी के नाम से जाना जाता है।

 

 अल्पना वर्मा said...

दुबई में जब भी ग्लोबल विल्लेज लगता है -भारत के पवेलियन में मध्य प्रदेश का एक छोटा सा स्टाल ही देखा है.जहाँ कपड़े मिलते हैं.मैं ने वहां से एक बार सिर्फ़ cotton बेड शीट्स खरीदीं हैं.राजस्थान और कश्मीर के स्टाल्स के आगे बहुत फीका और dull स्टाल होता है.इसलिए लोग उस तरफ जाते ही कम हैं.मैं भी हैण्ड प्रिंट्स के चक्कर में वहां पहुँची थी.लेकिन तब भी बाघ प्रिंट्स के बारे में नहीं सुना था.आज पहली बार जाना है कि बाघ प्रिंटिंग क्या होती है.इस के बारे में नेट पर पढ़ा और प्रिंट्स देखे.
आप की हर पहेली कुछ न कुछ सिखा रही है.
धन्यवाद.

 

 

कुछ मौज मस्ती की टिपणियां :-

 

 Arvind Mishra said...

ताऊ रे यह हर शनिवार को टपक रही है -अब तीर तुक्का हर बार थोड़े ही लहता है ! जो कुछ इज्जत पानी बची रह गयी है काहें को बंटाधार करने को तुल गया है ताऊ ?

 

मिश्राजी जी, अब इज्जत कोई नाव थोडे ही है जो बंटाधार हो जायेगा. आप बेफ़िक्र रहिये, इज्जत को बचा कर रखेंगे. :)

 

 दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

आज तो हमारी बुद्धि और स्मृति चकरा गई। निगेटिव नंबर नहीं है इसलिए जवाब दे रहे हैं कि ये एलीफेन्टा की गुफाएँ हैं। तीर न सही तुक्का ही सही।


हाँ, गधे की नीलामी मं दुनिया आए हम नहीं आ रहे हैं। ताऊजी तो गधे की नीलामी इस लिए कर रहे हैं कि यह उन्हें दुलत्ती न मार दे।

 

हमारा गधा हमको ही लात मार सकता है, ये तो हमने सोचा ही नही था. आगे से संभलकर रहेंगे.   आप सही कह रहे हैं, घोर कलियुग है जी. :)

 

 

dinanath said...

पहेली का तो जबाब पता नहीं ताऊ
लेकिन गधे की नीलामी कब है? चटका लगा दिया है, ये गधा मुझे ही मिलना चाहिये

 

भाई ताऊ को आपसे घणी सहानुभुती है, अभी तो नीलामी का प्रोग्राम केन्सिल हो गया भविष्य मे जब भी नीलामी होगी, आपको सूचित करेंगे.  आपका इ-मेल ???

 

 Vidhu said...

शनिवार की गुड मोर्निंग,..ये पुरानी गुफाओं को बाहर से नवीन कराया गया तो दिखाई दे रहा है ..अजन्ता एलोरा भी कई साल पहले गए थे इस लिए कन्फर्म नही है ,,लेकिन चित्र ऐसा है की याद वहीँ की दिला रहा है ..अब आप चाहे जो जाने....

 

लो जी, आपको इतनी दूर जाने की क्या जरुरत थी? नीचे के बाक्स मे अल्पना जी

का जवाब देख  लेती, आपके तो अत्यधिक नजदीक हैं ये गुफ़ाएं.

 

 

 अल्पना वर्मा said...

आज की पहेली के जवाब के लिए मैं भी एक clue दे दूँ -'बगल में बच्चा और नगर में ढिंढोरा....' मैं ने भी सारी दुनिया घूम डाली ,इस के जवाब को पाने में...बड़ी मशक्कत से जवाब मिला..

 

शायद विधू जी को आपने बताया नही? सबसे नजदीक होकर भी वे नही ढूंढ पाई. :)

 

 संजय बेंगाणी said...

एलोरा दिखे है. ज्यादा नहीं पता. लगता नहीं यह पप्पू कभी पास होगा भी :(
खूँटा जोरदार था.

 

लो जी, अच्छी भली मूंछे दीख रही हैं आपकी, पप्पु कहां से होगये जी आप? और खूंटे पर तो P.N.Subramaniyan saahab  बंधने को तैयार रहते थे, आज दिखे नही. कहीं आपके पास तो नही आ गये. :) 

 कुश said...

मुझे तो ये स्टॅच्यू ऑफ लिबर्टी लग रही है...
हा ये वही है.. लॉक कर दीजिए.. और गढ़े की ज़रूरत अभी हमको है नही..


घणा सही जवाब सै भाई, इस जवाब के नम्बर होने चाहिये ५०१ पर अफ़्सोस १०१ से ज्यादा नम्बर ही नही हैं. sorry... वैसे भाई अब हमारा गधा आप मांगो तो भी बिकाऊ नही है. उसकी काफ़ी डिमाण्ड आगई है, उसके कारनामों को सुनकर.

 PD said...

ab sab bagh gufa bol rahe hain to ham bhi kah hi dete hain bagh gufa.. yahi antim javaab..
chori karke aaj pass ho hi jate hain.. :)

 

बिल्कुल सही, ताऊ के पदचिन्हों के अनुगामी हो गये हो? :) बधाई.

 

 

 सुशील कुमार छौक्कर said...

पहले तो जी हम इतना घूमें फिरे है नही। आप जैसा पहले कोई मिला नही। कभी दिल्ली के एक आध स्मारक बगैरा के बारे में पूछेंगे तो कुछ बता पाए। वैसे जब अनुराग जी कह रहे है एलोरा की गुफा तो हमारा जवाब भी वही मानिए। सही हुआ तो भी ठीक नही हुआ तो भी ठीक। और हाँ आज का खूंटे पर तो बस हा हा हा ही कर ते रहे। अब भी गधा याद आ रहा है।

 

अजी सब गधे को ही याद कर रहे हैं और ताऊ को कोई नही पूछ रहा. लगता है

ये गधा ताऊ के काम डलवा कर छोडेगा. :)

 

 

 Nirmla Kapila said...

ताऊजि लगता है हमेम घर बैठे 2 ही भारत दर्शन करवा देंगे धन्यवाद्

 

लो जी कर लो बात. ताऊ को और क्या काम? आप तो भारत दर्शन का खर्चा पानी जमा करवादो जी. नकद नही जी, बस आपका आशिर्वाद चाहिये. 

 

 

 jayaka said...

ताऊजी।... पहेलियां और सहेलियां मेरे को तो परेशानी में डाल देती है।... हां।..गधे वाली कहानी अच्छी लगी।... लेकिन मुझे लगता है कि कोई न कोई गडबड है।... गधे की दुलत्ती से तो गधे की टांग बेशक टूट सकती है, ताई नहीं मर सकती।... पता लगा कर बता देना जी... इंतजार कर रहे है।

 

लगता है कि ताई से आपका परिचय हो चुका है. तभी आपको अंदर की बात पता है, ताई तो रास्ते मे ही जिंदा होकर लौट आई. पर इस खबर से हमारे गधे की कीमत बढ गई है. :)

 

 Anil Pusadkar said...

ताऊ जी ये शनिवार बचपन से तंग कर रहा है।शनिवार को स्कूल मे होम वर्क मिलता था इस्लिये बहाना कर के स्कूल नही जाता था अब आप आ गये हो कठिन-कठिन सवाल करते हो।फ़िर शनिवार को गोल मारना पड़ेगा।वैसे एलोरा गये सालो हो गये मगर ऐसा लगता है की वो अजंता या एलोरा की गुफ़ाये ही है।

 

भाई बचपन मे स्कूल चले जाते तो आज सही जवाब याद आ जाता ना. :)

 

 नितिन व्यास said...

अजंता की गुफायें ही है, जिसका जवाब सही उसे एक बार गुफा दर्शन का टिकट भेज दो, और जिसका जवाब सही ना हो उसे गुफा में बंद करवा दो ताऊ!

 

भाई नितिन जी, फ़टाफ़ट आज्यावो, आपका ही नम्बर है गुफ़ा मे बंद होने का. कब आरहे हैं जी. :)

 

 दिगम्बर नासवा said...

ताऊ
हमारी समझ मा को नि आए इस का जवाब
बस थारा खूंटा चोखो से...............इब म्हारी बोली भी रिज़र्व रखियो

 

भाई लागै सै कि खूंटा ही ताऊ तैं बडा सै. घणा धन्यवाद.

 

 डॉ .अनुराग said...

ham to vakeel sahab ke peeche hai ji....vahi sabse intellijent najar aa aahe hai hame.

 

अजी डागदर साब, देखो वकील साहब ने आपके साथ चोट करदी ना. हमेशा सही जवाब देते हैं, आज पता लग गया होगा कि आप भी कमेंट करने आवोगे, सो जानबूझकर गलत जवाब दे गये. वर्ना हमेशा सही जवाब देते हैं. :)

 

 

 

 अल्पना वर्मा said...

सब से पहले कहना चाहती हूँ--मेरे पहले [खारिज कर दिए ]जवाब -'नालंदा 'को कोई कॉपी न करे -please..मैं ने अंदाजे से लिखा था.
खूंटे पर ताई के बारे में पढ़ा...बहुत बुरा लगा..लेकिन ताऊ यह ख़बर आई है..की ताई इतनी भीड़ और शोर सुनकर उठ बैठी है..और अब आप की तो खैर नहीं!बिना पूरी जाँच किए , बेहोश ताई को शमशान पहुँचा दिया!बड़ी बुरी बात है...:(---और अब के ताई को जिन्दा देख ...सारे जमा गाम वाले भज जायेंगे..कोसेंगे अलग..की उनका टेम खोटी कर दिया! गधा अब किस के दुल्लती मारे न मारे--अब नहीं नीलाम होता..

 

आपकी खबर बिल्कुल सही है, कहीं से एक दुसरे गधे ने आकर टक्कर मार दी और अर्थी गिर गई, बस ताई तो ऊठ बैठी और ताऊ के क्या हाल करे? ये फ़िर कभी फ़ुरसत मे लिखूंगा. अभी तो टूटी हड्डियों पर  प्लास्टर करवा रखा है. :)

 

 

 neelima sukhija arora said...

ना ताऊ म्हाने तो आइडया सा न लग रया अब थमी बता दयो कुणसी जगह है या

 

अजी, इब तो बेरा पाटग्या ना, कि या जगह बाघ की गुफ़ा सै...बाघ प्रिंट का नाम त आपनै सुण ही राख्या होगा जी. :)

 

 

 mamta said...

ओफ फो इतना ज्यादा कनफूजन । :)
हम ४८ घंटे बाद आकर देख लेंगे ।
क्यूँ ठीक है न ताऊ ।

 

इब ठीक क्या है ममता जी, आप ४८ की जगह २४ घंटे बाद भी आकर देख लेती तो आपको जवाब और नम्बर दोनो मिल जाते. अगले शनीवार ध्यान रखना जी.

 

 प्रकाश गोविन्द said...

अरे ताऊ
मैं अचरज में हूँ कि ये अल्पना वर्मा जी
हर एक प्रश्न का जवाब इतने विस्तार से
कैसे दे लेती हैं !
हर बार ऐसा लगता है जैसे अल्पना जी
महीने भर पहले से जवाब की तैयारी कर
रही थीं !
इस मामले पर जांच कमीशन बैठना चाहिए
या सी०बी०आई० इन्क्वारी होनी चाहिए !
मैं इस गंभीर मामले को संसद में उठाऊंगा !

 

जरुर करवाओ जी, हमको भी लगता है कि कहीं ताऊ के नाम से अल्पना जी ही तो ये  ब्लाग नही लिख रही हैं, क्योंकी किसी महिला के ताऊ होने की संभावना भी हरकीरत हकीर जी पहले ही व्यक्त कर चुकी हैं, पता लगे तो हमे भी बता देना जी. :)

 

 

 Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

ताऊ, जैसी के हमारी और आपकी डील हुई थी, बिल्कुल वैसे ही मैंने जानते हुए भी सही उत्तर बाघ गुफा, (धार जिला) म . प्र लिखने के बजाय लोगों को कन्फुजिआने के लिए एलोरा बोला है. इब थम म्हारे पीसे लौटा दोगे ना?

 

आपके पीस्से तो ताऊ छान फ़ूंक गया, आपको पैसों की एवज मे जितवा दिया है, किसी को बताना मत जी. :)

 

 

 Harkirat Haqeer said...

ताऊ, मै पहले ही आई ही जवाब देने पर किसी ने वाज मार ली ...अब मोहन वशिष्‍ठ ने मेरा जवाब कापी कर लिया....ये हमारे गांव का स्‍कूल ही है अरे इसी बरामदे में खडे होकर तो हम प्र।र्थना किया करते थे
...."सारे जहाँ से अच्‍छा हिन्‍दुस्‍तां हमारा....

 

"पर ताऊ एक राज की बात सुण लै ...गधे की निलामी ना करियो
दूसरी ताई के काम आयेगा....हा हा... फेर मौजां ही मौजां....."तालियाँ...!"

अपनी ऐसी किस्मत कहां जी? शायद आपको मालूम नही है, पुरानी ताई ही वापस खडी हो गई, बहुत दुर्गति हुई हमारी,  बहुत कूटाई हुई, बडी भयानक दास्तां है.

हड्डी पसली जुड जाने दिजिये, फ़िर खूंटे पै ही सब समाचार लिखेंगे. :)

 

 

 अभिषेक ओझा said...

अपन तो गदहे की बोली लगाने में इंटेरेस्टेड हो गए, और जगह भूल गए.

 

भाई हमारा गधा तो बडा करामाती है पर हमारी किस्मत ही हर बार धोखा दे जाती है. आपकी बोली ठीक ठाक आई तो विचार करेंगे.

 

वैसे राजू ने भी अन्डरग्राऊंड सुत्रों के द्वारा हमसे सम्पर्क किया है. वो शायद सरकार को दुल्लती खिलाने की जोगाड मे है. हमको तगडा आफ़र मिल चुका है. ऐसा गधा अभी दुनियां मे दुसरा नही है. :)

कृष्णचन्दर जी जाते समय ये गर्दभराज हमको दे गये थे. :)

 

 

 ताऊजी said...

ताऊ चालहे काट दिये, मेरे ब्लाग पै कब्जा करकै टिपणियां के मजे लेण लाग रया सै. यो तओ बाघ की गुफ़ा ही सै, पर मेरे ब्लाग पै कब्जा कब छौडैगा? या बता दे. लागै सै कि चिठ्ठा चर्चा म्ह फ़ु्रसतिया जी की अदालत म्ह तेरे उपर केस ठोकणा पडैगा और वकिळ भी द्विवेदी जी को करुंगा फ़ेर देखते हैं कैसे कब्जा ना छोडैगा तू.
इब नम्बर तो दे ही दे, बाकी तो मैं बाद म्ह निपट ल्युंगा.
रामराम.

 

तैं कित सैं टपक पड्या ताऊ? इब्बी मेरी ही दुकान ना जमी सै, जरा थ्यावस राख.:)

 

 गौतम राजरिशी said...

लो तुम भी क्या याद रखोगे ताऊ....इस पहेली का सही हल सिर्फ मुझेपता है-ये ताजमहल के कब्र के अंदर का गलियारा है
हो हो हो

 

वाह... वाह...फ़ौजी भाई, इब आज जाकै बेरा लाग्या मन्नै. तभी तो मैं इतनै दिनों से सोच्या करै था कि ये गुफ़ायें इस तरियां की क्युं दिखै सैं. :)

 

 योगेन्द्र मौदगिल said...

ताऊ, पहली बात तो ये कोई प्रसिद्ध जगह है पर इतनी भी नहीं जितना थारा खूंटा वहां कम से कम गधा तो रहवै
दूसरी बात शनीचर को पानीपत में हमारे मोहल्ले में लाइट नहीं होती अंधेरे में कंप्यूटर महाराज नहीं चलते इसलिये हम तो ठाट से संडे को डंडा लेकै बैठते हैं
jai RAM g kee

 

भाई म्हारा गधा तो वाकई घणा करामाती हो रया सै. आपको भी उसी की फ़िक्र

हो री सै? जरा ताऊ के हाल चाल तो लेलिया करो जी. :)

 

 

 

अच्छा जी इब अगले शनिवार को फ़िर आपसे रुबरु होंगे इस पहेली की अगली कडी मे.

 

हम अपन्रे निजी कार्य से दो तीन जरा व्यस्त रहेंगे. बाहर जा रहे हैं, अगर वहां कोई नेट का साधन मिला तो थोडा बहुत टिपियायेंगे भी और अगर नही होतो आप भाई बहनो से निवेदन है कि नाराज ना हो कि हमारी पोस्ट पर ताऊ टिपियाया नही. हमारी ब्लाग जगत मे गतिविधी ३/४ दिन कम ही रहेगी.

 

पोस्ट हमने एडवांस मे फ़ीड कर रखी हैं सो नियमित पोस्ट होती रहेंगी. टिपणी पबलिश

करने का इन्तजाम हमने कर दिया है.

 

आज की पोस्ट पर आपके विचार अति आव्श्यक हैं. आपको पोस्ट का यह स्वरूप पसंद आया या नही? हम इसके स्वरुप मे कुछ चेंज करने का सोच रहे हैं. आपसे निवेदन है कि

अपने विचार अवश्य प्रकट करे. और आप क्या और अच्छा सुझा सकते हैं? अवश्य बतायें.

 

हम हो सकता है ३/४ दिन आपके ब्लाग पर नही आ पाये, पर आपके सुझाव हम अवश्य पढ पायेंगे, तो इब रामराम.

 

छपते छपते :

 


रविवार रात ९.०० बजे यह अंक पब्लिश होते होते निम्न टिपणि आई है. हालांकी इसे शामिल करने मे बडी दिक्कत आ रही है. पर महत्वपुर्ण खबर हो सकती है. आप चाहे तो इसे ब्रेकिंग न्युज भी कह सकते हैं. इसलिये इसे आज ही पब्लिश कर रहे हैं.

 

 Harkirat Haqeer said...

ताऊ, प्रकाश गोविद जी ने सही कहा मुझे भी अल्‍पना और सीमा गुप्‍ता दोनों पर शक है...जांच कमीशन बैठाई जाये...!


 

 

 

 

 

ताऊ की शनीचरी पहेली-५

आप सबनै शनीचर की राम राम. इस शनीचरी पहेली न.५ मे आपका स्वागत है . नीचै ध्यान तैं देख कै जवाब देणा है बिल्कुल ही आसान पहेली है . यह कौन सी प्रसिद्ध जगह, कहां पर है. तो जरा सा दिमाग पर जोर डालिये. और पहेली जीत कर अपनी मेरिट को उपर कर लिजिये.

 

आपसे गुजारिश है कि जवाब बिल्कुल सुस्पष्ट देवे, यह कौन सी जगह है? इसकानाम लिखें, और फ़टाफ़ट अपना जवाब दे दे. विवरण के लिये दुसरी टीपणि करें, जिससे आपके पहले कोई दुसरा जवाब देकर आपसे अधिक अंक नही ले जाये.

 

अगर आपको यह पहेली आयोजन पसंद आया है तो पसंद पर भी एक चटका लगाने की कृपा करें. इससे हमारा उत्साह वर्धन होता है.

paheli-5

यह कौन सी प्रसिद्ध जगह है.

आप विषय से संबंधित जितनी सही जानकारी देंगे वो सभी के ज्ञानवर्धन के लिये ज्यादा अच्छा रहेगा . और आपकी टिपणी भी प्रकाशित की जायेगी .


इसका जवाब आपके जागने से पहले परसों सोमवार को मिल जायेगा . यानि ठीक ४८ घन्टे बाद.

 

सर्दी का मौसम होने से इस शनीचरी पहेली के प्रकाशन का समय अब हर शनीवार सूबह ७.०० AM कर दिया गया है. और रिजल्ट पुर्ववत सोमवार को सुबह ४.४४ AM पर प्रकाशित कर दिये जायेंगे. 

 

तो है ना छुट्टी के दिनो का भरपूर मजा घर बैठे.

 

इस ब्लाग के दाहिंने तरफ़ आप आपकी मेरिट की स्थिति देख सकते हैं. सोमवार को इस अंक के रिजल्ट के साथ ही यह अपग्रेड कर दी जायेगी.

 

पहेली के नियम कायदे पहेली न.१ के रिजल्ट के साथ साथ बता दिये गये थे. जो यहां चटका लगा कर भी देखे जा सकते हैं.

 

पहेली नम्बर ४ तक जिन्होने भी इस पहेली मे हिस्सा लिया है वो अपने अंक की स्थिति यहां चटका लगा कर देख सकते हैं. शुरु से अंत तक की मेरिट लिस्ट यहां पर प्रकाशित कर दी गई है.


आपके सुझावो का हमेशा ही स्वागत है.

एक विशेष सूचना हम अवश्य देना चाहेंगे कि आप चाहे जितनी देर से आयें आपको अगर सही जवाब मालूम है तो जवाब अवश्य देवें .

 

यहां पर आपको हर सही जवाब के साथ मार्क्स दिये जाते हैं जो इकठ्ठे होकर कभी भी भविष्य मे आपको बहुत काम आयेंगे. और हर भाग लेने वाले प्रतिभागी को एक अंक दिया जाता है.

 

आपने अगर जवाब दे दिया हो तो आप इन्तजार करें. हो सकता है आप का जवाब जान बुझकर रोका गया हो. हम पहले ही बता देते हैं कि निरणायक गण आपको भ्रम मे डालने के लिये और पहेली की मनोरंजकता बढाने के लिये पहले जो टिपणियां प्रकाशित करते हैं वो गलत भी हो सकती हैं और सही भी. दोनो ही बाते हैं. अत: अपने विवेक से उत्तर देवें.


और आपसे एक निवेदन है कि किसी भी हालत में जवाब मे लिंक नही देवें. अगर आपका जवाब सही है तो हम उसे गलत नही करेंगे, पर आपके Link देने से आपके बाद आने वालों के लिये कोई चार्म नही बचता.

अत: प्लीज..प्लीज..Link कतई नही देवें. वर्ना आपकी टीपणी प्रकाशित नही की जावेगी.

 

इब खूंटे पै पढो :-

ताऊ की बीबी यानि ताई स्वर्गवासी हो गई, शवयात्रा मे अथाह भीड. लोगो का हुजुम टुटे पड रहा था.

भाटिया जी को खबर लगी तो वो भी आगये और शवयात्रा मे शामिल हो गये. पर
उन्होने देखा कि इतनी भीड हो रही है तो उन्होने पूछा लोगो से कि भई बात क्या है?
इतनी भीड क्यों है? ताऊ की तो इतनी ओकात नही है कि इतनी भीड इक्कठी कर ले.

तो क्या ताई कोई मिनिस्टर वगैरह बन गई थी या कोई महिला मोर्चा की नेता थी?
लोग जवाब देने की बजाये, भाटिया जी की तरफ़ देख कर मुस्करा कर रह जाते.

अब भाटिया जी को और भी उत्सुकता हुई तो उन्होने सीधे जाके ताऊ से ही पूछ
लिया कि भई ये क्या कारण है इतनी भीड का?

ताऊ बोला - भाटिया जी, इसका असली कारण है मेरा गधा

भाटिया जी - अरे यार ताऊ, तेरी बीबी की शवयात्रा है और इसमे भी तू मजाक कर रहा है? कुछ तो शरम कर. और सही बात बता.

ताऊ - मैं सही ही बोल रहा हूं. मेरे गधे को दुल्लत्ती मारने की खराब आदत थी और उसकी दुल्लत्ती लगने से ताई की ये गति हो गई. अब सारे गांव वाले उस गधे को खरीदना चाहते हैं.

भाटिया जी - अच्छा है तो फ़िर बेच दे. पर ये क्या कोई नई स्कीम है?

ताऊ -  भई भाटिया जी अपनी स्कीम तो चोबिसों घंटे चालू रहती है. काम धंधा तो मैं कभी बंद कर ही नही सकता.

इसीलिये मैने सबको कह दिया कि उस गधे को जो भी खरीदना चाहे वो 
शमशान मे आ जाये वहीं पर उस गधे की नीलामी होगी. जो ज्यादा बोली लगायेगा
वो गधा मैं उसी को बेचूंगा. और देखो सब आसपास के गांवों के लोग भी इक्कठ्ठा
हो रहे हैं.