ताऊ पहेली - 47 : विजेता श्री शुभम आर्य

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 47 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है लोटस टेंपल दिल्ली.


लोटस टेंपल दिल्ली




आईये अब आज के विजेताओं से आपको मिलवाते हैं.

"आज के विजेता गण"


 

 

  
प्रथम विजेता शुभम आर्य बधाई अंक १०१

 

द्वितीय विजेता वरुण जयसवाल बधाई अंक १००



तृतीय विजेता मुरारी पारीक बधाई अंक ९९

 

हमारे आज के अन्य सम्माननिय विजेता इस प्रकार हैं.

 

 Blogger अविनाश वाचस्पति अंक ९८


Blogger Ratan Singh Shekhawat

अंक ९७

Blogger                 
 दिनेशराय द्विवेदी  अंक
  अंक ९६


Blogger M.A.Sharma "सेहर"

अंक ९५

 Smart Indian - स्मार्ट इंडियन
  अंक ९४

काजल कुमार Kajal Kumar
 
अंक ९३

Blogger सुशील कुमार छौक्कर

अंक ९२

Blogger प्रकाश गोविन्द

  अंक ९१

Blogger

  Dhiraj Shah  अंक ९०


Blogger नीरज गोस्वामी  अंक ८९

Blogger 

 Anil Pusadkar  अंक ८८

Blogger पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

  अंक ८७

Blogger

  पवन *चंदन*  अंक ८६

Blogger संजय बेंगाणी  अंक ८५

 

Blogger अन्तर सोहिल  अंक ८४


  दिगम्बर नासवा  अंक ८३

Blogger   Pandit Kishore Ji

  अंक ८२

Blogger

 वन्दना  अंक ८१

 Blogger सैयद | Syed

  अंक ८०

Blogger अजय कुमार झा   अंक ७९

 

 Blogger प्रेमलता पांडे  अंक ७८


SELECTION & COLLECT
 
  अंक ७७

Blogger

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयं अंक ७६

 

Blogger Ashok Pandey  अंक ७५

Blogger प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVED

   अंक ७४

Blogger अभिषेक ओझा

  अंक ७३

Blogger   दिलीप कवठेकर

    अंक ७२


Udan Tashtari

  अंक ७१

  Blogger Dipak 'Mashal' 

    अंक ७०

 

seema gupta

  अंक ६९

Blogger Vivek Rastogi

   अंक ६८

 

आप सभी को बहुत बधाई

इसके अलावा श्री गौतम राजरिशी और श्री राज भाटिया ने भी हमारा उत्साह वर्धन किया. आपका हार्दिक आभार.



छपते छपते श्री हिमांशु ने भी सही जवाब दिया. आपको दिये जाते हैं ५० अंक. बधाई!



रामप्यारी के सवाल के विजेताओं से यहा मिलिये.

"रामप्यारी के ३० नंबर के सवाल का जवाब"


हाय…गुड मोर्निंग एवरी बडी…आई एम राम..की प्यारी… रामप्यारी.
हां तो अब जिन्होने सही जवाब दिये उन सबको दिये गये हैं ३० नम्बर…अगर भूल चूक हो तो खबर कर दिजियेगा..सही कर दिये जायेंगे.

मेरे कल के सवाल का सही उत्तर था द्रौपदी. जी हां कृष्ण ने उसको अपनी बहन माना था और दोनों के बीच एक परम पवित्र और रुहानी दोस्ती का रिश्ता था. जिस कारण इनको आपस मे सखी या सखा भी संबोधित किया गया है.

द्रौपदी राजा द्रुपद की पुत्री थी और पांडवों कि भार्या थी.

सबसे पहले मुरारी अंकल, फ़िर दिनेशराय द्विवेदी अंकल, और आज फ़टाफ़ट जवाब दिया M.A.Sharma "सेहर"आंटी ने और इसके बाद आये स्मार्ट इंडियन वाले अनुराग अंकल, फ़िर आये प. डी.के.शर्मा "वत्स" अंकल, फ़िर प्रकाश गोविंद अंकल, और फ़िर आई हरकीरत आंटी.

इसके बाद संजय बेंगाणी अंकल...आजकल बेंगाणी अंकल बहुत ज्यादा पढाई मे ध्यान देने लग गये हैं...बहुत अच्छे नम्बर प्राप्त कर रहे हैं आजकल...

फ़िर अंतर सोहिल अंकल, दिगंबर नासवा अंकल, वंदना आंटी, सैय्यद अंकल, प्रेमलता पांडॆ आंटी, सुनीता शानू आंटी दिलिप कवठेकर अंकल और सबसे आखिरी में सही जवाब दिया उडनतश्तरी अंकल ने. और छपते छपते हिमांशु अंकल का भी बिल्कुल सही जवाब आया.


आप सबके खाते में तीस तीस नम्बर मैने जमा करवा दिये हैं.

अब रामप्यारी की तरफ़ से रामराम…अगले शनीवार फ़िर से यही मिलेंगें. वैसे आजकल शाम ६ बजे मैं ताऊजी डाट काम पर रोज ही मिल जाती हूं. ..और हां आपका आज से शुरु होने वाला सप्ताह शुभ हो.



हीरू और पीरू यानि हीरामन और पीटर की मनोरंजक टिपणियां यहां पढिये.

"आपकी सेवा में हीरू और पीरु"


अरे हीरु भिया..अंई देखो ई काजल अंकल कंई के रिया हे?

ला दिखा म्हारे जरा....


काजल कुमार Kajal Kumar said...
रामप्यारी तुम्हें अंग्रेज़ी पढ़ते ज़माना हो गया... लेकिन तुम्हें इतना भी नहीं पता कि महाभारत के समय भी अंग्रेज़ी वाले लोग कृष्ण को ही स्टाइल से कृष्णा कहा करते थे ! देख लो, हम भी आज योग को योगा कहते हैं न?... इसलिए मेरी मान लो कि कृष्ण और कृष्णा, दोनों एक ही थे...

November 7, 2009 10:22 AM



राज भाटिय़ा said...
अरी राम प्यारी केसी है री तुं, बहुत सयानी होती जा रही है, लेकिन यह ताऊ तो बुढापे मे कुछ भुलकड सा होता जा रहा है, अरी राम प्यारी ताऊ सवाल के संग संग जबाब भी तो दे रहा है... चाहाता तो सब से पहले जबाब दे देता, लेकिन मुझे तो पास होने से एलर्गी है ना आज तक कभी पास नही हुया,

अरे हां तु सोच रही होगी कि जबाब कहा दिया ताऊ ने? तो सुन ताऊ की पहेली का चित्र ध्यान से देख, देख देख ओर उस के नीचे यह छपा है 28°33'12.60" N 77°15'32.55" E है ना, तो बस इसे गुगल मेप मे दे कर कलिक कर , ओर राम प्यारी जबाब तेरे समाने है:)अरी जल्दी कर के देख ना

November 7, 2009 3:30 PM



अजय कुमार झा said...
ये हमरे गाम के दलान की फ़ोटू है ..अमरीका वालों ने नासा से कह के खिंचवाई थी ..यहीं पर पहला एतिहासिक ..अखिल ब्लोगीय चपडगंजू सम्मेलन ..आयोजित किया गया था ..
अगले का आयोजन भी किया जाने वाला है जल्दी ही ..

बिल्लन तेरा जवाब मैं ढूंढ के देता हूं ..वैसे नितिश अरे वही जो महाभारत में किशन भगवान का रोल किया था को फ़ोनिया के पूछता हूं ..

हिंट दे फ़टाफ़ट..तभी क्लोर मिंट की बत्ती जलेगी ..

November 7, 2009 11:11 AM



Harkirat Haqeer said...
द्रोपदी विनय
बिन काज आज महाराज लाज गई मेरी, लाज गई मेरी, दुख हरो द्वारकानाथ शरण में तेरी....॥ टेर ॥

दुःशासन वंश कठोर महा दुख दाई, महा दुख दाई,

कर पकरत मेरो चीर लाज नहीं आई 2,

अब भयो धर्म को नास पाप रहा छाई, पाप रहा छाई,

लखि अधम सभा की और नार बिलखाई 2,

शकुनि, दुर्योधन, कर्ण खडे सब घेरी, खडे सब घेरी,

दुख हरो द्वारीकानाथ शरण में तेरी ॥ 1 ॥

तुम संतन को सुख देत देवकीनन्दन,

हैं महिमा अगम अपार भक्त उर चन्दन,

तुम किया सिया दुख दूर, शंभु धनु खंडन, शंभु धनु खंडन,

ए तारण मदन गोपाल मुनि मन रंजन,

हे करुणा निधान भगवान करो क्यू देरी, करो क्यू देरी,

दुख हरो द्वारीकानाथ शरण में तेरी ॥ 2 ॥

बैठे यहाँ राज समाज नीति सब खोई, नीति सब खोई,

नहीं कहत धर्म की बात सभा में कोई,

पाँचो पति बैठे मौन, कौन गति होई, कौन गति होई,

ले नन्द नन्दन को नाम द्रोपदी रोई,

कर-कर विलाप, संताप, सभा में टेरी, सभा में टेरी,

दुख हरो द्वारकानाथ शरण में तेरी ॥ 3 ॥

November 7, 2009 12:12 PM



अविनाश वाचस्पति said...
गुड मार्निंग फ्रॉम अविनाश वाचस्‍पति टू रामप्‍यारी

ये सुबह सुबह क्‍या रिश्‍ते ढूंढने चल दी
कृष्‍ण कौन
कृष्‍णा कौन

महाभारत क्‍या
रामचरित मानस क्‍या

नाते रिश्‍ते ढूंढने की आज सुबह सुबह क्‍या है वजह
वैसे पुत्री तो मां की ही होगी
होगी तो पिता की भी
पुत्री है तो सभी की होगी
जो मानेंगे उसे पुत्री
जिनकी होगी, उनकी तो होगी ही
बाकी की होगी मानस पुत्री।

रिश्‍ता तलाशो नंबर पाओ
पहेली बतलाओ नंबर पाओ
टिप्‍पणी जतलाओ नंबर पाओ
पसंद चटकाने पर कब मिलेंगे नंबर
यह भी तो हमका बतलाओ।

November 7, 2009 8:16 AM


अरे पीरू भिया..चलो अब तो घणी देर हुईगी...ने घरे भी जाणों हे...हां हां..चलो भिया....अगले हफ़्ते हूं अर तम फ़िर हाजिर हुई जावांगा और कंई?

तो अब हीरू जी और पीरूजी की रामराम.



अच्छा अब नमस्ते.सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. ताऊ पहेली – 47 का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया. अगली पहेली मे अगले शनिवार सुबह आठ बजे आपसे फ़िर मिलेंगे तब तक के लिये नमस्कार.

ताऊ पहेली - 47

प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम.

ताऊ पहेली अंक 47 में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. क्ल्यु हमेशा की तरह रामप्यारी के ब्लाग से मिलेंगे. रामप्यारी के ब्लाग पर पहला क्ल्यु 11:30 बजे और दुसरा 2:30 बजे मिलेगा. रामप्यारी का जवाब अलग टिपणी में देवें. तो आईये अब आज की पहेली की तरफ़ चलते हैं.

यह किस स्थान की settelite इमेज है?


ताऊ पहेली का प्रकाशन हर शनिवार सुबह आठ बजे होगा. ताऊ पहेली के जवाब देने का समय कल रविवार दोपहर १२:०० बजे तक है. इसके बाद आने वाले सही जवाबों को अधिकतम ५० अंक ही दिये जा सकेंगे

अब रामप्यारी का विशेष बोनस सवाल : - ३० अंक के लिये.

rampyari-tdc-1_thumb[2] हाय एवरी बडी..वैरी गुड मार्निंग फ़्रोम रामप्यारी.

विनम्र निवेदन : - कृपया मेरे सवाल का जवाब अलग टीपणी मे देवें. बडी मेहरवानी होगी. एक ही टिपणी मे दोनो जवाब मे से एक सही होने पर प्रकाशित नही की जा सकती और इससे आप कन्फ़्युजिया सकते हैं कि आपकी टिपणी रुकी हुई है. तो सही होगी?

आज का सवाल :-

महाभारत में कृष्णा कौन थी? कृष्ण का और कृष्णा का आपस में क्या रिश्ता था? और यह किसकी पुत्री थी?


अब आप मेरे ब्लाग पर पहली हिंट की पोस्ट पढ सकते हैं 11:30 बजे और दुसरी 2:30 बजे.

अब रामप्यारी की रामराम.


इस अंक के आयोजक हैं ताऊ रामपुरिया और सु,अल्पना वर्मा



नोट : यह पहेली प्रतियोगिता पुर्णत:मनोरंजन, शिक्षा और ज्ञानवर्धन के लिये है. इसमे किसी भी तरह के नगद या अन्य तरह के पुरुस्कार नही दिये जाते हैं. सिर्फ़ सोहाद्र और उत्साह वर्धन के लिये प्रमाणपत्र एवम उपाधियां दी जाती हैं. किसी भी तरह की विवादास्पद परिस्थितियों मे आयोजकों का फ़ैसला ही अंतिम फ़ैसला होगा. एवम इस पहेली प्रतियोगिता में आयोजकों के अलावा कोई भी भाग ले सकता है.


मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम
मिस.रामप्यारी का ब्लाग

 

नोट : – ताऊजी डाट काम  पर हर शाम 6:00 बजे नई पहेली प्रकाशित होती हैं. यहा से जाये।

गधा सम्मेलन स्थल से प्रथम अनोपचारिक रिपोर्ट


बहुत तेज गति से चलते हुये ताऊ और रामप्यारी उज्जैन गधा सम्मेलन स्थल तक पहुंच गये हैं. चारों तरफ़ गधे और गधियों की बहार ही बहार आई हुई है. देश विदेश से नाना प्रकार के गधे और गधियां इसमे शिरकत करने आये हुये हैं. कुछ ही समय मे सम्मेलन शुरु होजायेगा.

रामप्यारी को फ़िल्मों का बडा शौक है सो जैसे ही उसको मालूम पडा कि करीना, ऐश्वर्या, रानी आदि भी आई हुई हैं ओ वो तो उनके साथ इंटर्व्यु की जोगाड मे निकल ली और ताऊ सम्मेलन स्थल का मुआयना करने लगा. अभी पंडाल और स्टेज का बनने का काम फ़ायनल हो चुका था.


रामप्यारी एक प्रसिद्ध हिरोइन के बच्चे के साथ खेलते हुये


मिडिया मे भी इसके कवरेज के लिये भारी होड मची है. पूरे देश विदेशों का मिडिया यहां इककठा होगया है. जर्मनी से राज भाटिया आगये कवरेज के लिये. जिनका शानदर जेडोंक सबसे अनूठा लग रहा था. और सभी लोग उसको देखना छूना चाह रहे थे.

राज भाटिया जर्मनी से अपने जेडोंक पर सम्मेलन स्थल पहुंचते हुये


तभी योगिंद्र मोदगिल जी का भी फ़ोन आगया कि ताऊ क्या करुं रास्ते मे नदी पड गई है और कैसे पहुंचू? तो ताऊ ने बताया कि गधे सहित पानी मे घुस जावो आंख मींच कर. भगवान भोले नाथ सब भली करेंगे. और उन्होने ऐसा ही किया

योगिंद्र मोदगिल रास्ते मे क्षिप्रा नदी पार करते हुये


और करीब एक घंटा बाद ताऊ और राज भाटिया के विशेष आग्रह पर अपने गधे पर जगाधरी के घडे लादे हुये, और मुस्कराते हुये योगिंद्र मोदगिल भी आ पहुंचे गधा सम्मेलन के कवरेज के लिये.

योगिंद्र मोदगिल जगाधरी के घडे लादे सम्मेलन स्थल पहुंचते हुये


अब हुआ यह कि ताऊ, राज भाटिया जी और योगिंद्र मोदगिल जी यानि तीन तीन हरयाणवी एक जगह मिल गये तो फ़िर क्या कहने जब जगाधरी के घडे भी साथ हों? यूं भी तीनो काफ़ी दिनों बाद मिले थे सो प्रेम भी काफ़ी उमड घुमड रहा था सो तीनों ने एक ही तंबू मे ठहरना उचित समझा. तो तीनों ने एक साथ ही रहने ठाह्रने की व्यवस्था करली और कवरेज भी साथ साथ ही करने लगे.

जो अतिथी पहुंच चुके हैं उनका रहने ठहरने का माकूल प्रबंध किया गया है. अतिथियों के लिये एक बहुत ही बडी भोजन शाला सम्मेलन स्थल के नजदीक ही बनाई गई है. आईये हम आपको सबसे पहेले इस अथिति शाला के अंदर की झलक आपको दिखलाते हैं.

जैसे ही हम भोजन शाला के गेट पर पहुंचते हैं वहां पर हमारा स्वागत अथितिशाला के मेनेजर श्री संतानंद गर्दभराज करते हैं. और हमने उनसे प्रश्न पूछना शुरु किया.

ताऊ : संतानंद जी साहब आप किस तरह का भोजन अथितियों को परोसते हैं?

संतानंद : जी देखिये, हम बहुत ही उच्च गुणवत्ता वाला भोजन परोसते हैं जिसमे साफ़ सफ़ाई का विशेष ध्यान रखा जाता है. हमारे अधिकतर मेहमान विदेश से भी आते हैं इसलिये हम इस मामले मे कोई कंप्रोमाइज नही कर सकते;

राज भाटिया : संतानंद जी आप ये बताईये कि आपका आज का मेनू क्या है? यानि आप आज गधों को..माफ़ किजिये .. यानि मेहमानों को क्या परोस रहे हैं?

संतानंद : हां ये आपने अति उत्तम सवाल किया है. देखिये आज हम सबसे पहले तो उज्जैनी दाल बाफ़ला परोस रहे हैं और उसके साथ लड्डू तो है ही.

योगिंद्र मोदगिल : और स्वीट डिश मे क्या परोसेंगे आज?

संतानंद : देखिये युं तो लड्डू अपने आप मे दाल बाफ़लों के साथ स्वीट डिश होता है पर मेहमानों की पसंद का खयाल रखते हुये आज विषेष रुप से केशरिया जलेबी और गुलाब जामुन भी परोसा जा रहा है. आईये आपको दिखाता हूं.

मेहमान दाल बाफ़ले, जलेबी और गुलाब जामुन खाते हुये


तीनों बडे खुश होते हैं और संतानंद जी के प्रबंध की बडी तारीफ़ करते हैं और उनकी इस खान पान की बहुत बढिया रिपोर्टिंग करने का आश्वासन देते हैं. उसके बाद तीनों को भोजन शाला मे दाल बाफ़ले खिलाये जाते हैं. और तीनों बडे मस्त होकर संतानंद जी तारीफ़ करते हैं.

ताऊ : संतानंद जी आपने हमें सिर्फ़ जलेबियां ही खिलाई पर गुलाब जामुन तो खिलाये ही नही?

संतानंद : देखिये..गुलाब जामुन सिर्फ़ गधों के खाने के लिये हैं आप तो गधे नही हैं?

ताउ : अरे संतानंद जी, गोली मारिये. ये तो कहने की बातें हैं कि गुलाबजामुन गधों के खाने के लिये हैं? अरे इतने सुंदर गुलाब जामुन हैं कि मुंह मे पानी आरहा है. आप ओ खिलवाईये हमको भी. लोग तो गुलाब जामुन खाने के लिये गधे को बाप बना लेते हैं फ़िर क्या गुलाब जामुन खाने के लिये हम खुद गधे नही बन सकते क्या?

संतानंद : जी बिल्कुल ताऊ, आप तो लगते भी पैदायशी गधे हैं. और संतानंद आवाज लगाता है और एक गधेडी आती है. संतानंद उसको इनके लिये गुलाब जामुन लाने के लिये कहता है. पर वो बताती है कि अभी खत्म होगये हैं. अब एक घंटे बाद ही तैयार हो पायेंगे.

संतानंद उन तीनों को आश्वस्त करता है कि शाम को गुलाब जामुन आपके तंबू पर पहुंच जायेंगे. ये तीनों भी सोचते हैं कि ये अच्छा रहेगा..अभी तो दाल बाफ़ले से पेट भी फ़ुल है..शाम को तबियत से दबाकर गुलाब जामुन खायेंगे और आकर अपने तंबू मे सो जाते हैं.

आगे का हाल खूंटे पै पढो.


इब खूंटे पै पढो:-

ताऊ, राज भाटिया और योगिंद्र मोदगिल दाल बाफ़ले खाकर सोने के बाद ऊठे तो देखा कि गुलाब जामुन अभी तक नही आये हैं. संतानंद जी को फ़ोन किया तो उन्होने कहा कि गुलाब जामुन भिजवा दिये हैं बस पहुंचते ही होंगे.

थोडी देर बाद एक कंटेनर आधा किलो गुलाब जामुन का एक आदमी देकर गया.

ताऊ बोला - यार भाटिया जी इत्ते से क्या होगा? इससे तो मेरा ही पेट नही भरेगा तो तीनों का तो कोई सवाल ही नही है.

भाटिया जी और मोदगिल जी बोले बात तो एकदम ठीक है, पर एक काम करिये इनको बांट कर खा लेते हैं..बहुत ही जोरदर लग रहे हैं देखने में तो?

ताऊ बोला - अरे भाई ..गधों के गुलाब जामुन देखने मे ही क्या खाने मे भी जोरदार होते हैं. एक काम करो..तीनों को तो इसमे कोई मजा नही आयेगा..और ना ही पेट भरेगा... एक काम करता हूं..मैं तीनों मे बडा हूं तो इनको मैं खा लेता हूं. तुम दोनों को इतना त्याग तो करना ही चाहिये? आखिर भरत और लक्ष्मण ने भी तो किया था?

योगिंद्र मोदगिल जी बोले - भ्राताश्री और तो जो इच्छा हो वो त्याग करवा लो पर गुलाब जामुन वाली बात पर त्याग नही चलेगा और आप दोनों बडे हो तो आप लोगों को यह त्याग मेरे हक मे करना चाहिये. जैसे राम ने भरत के हक मे किया था और तीनों झगडने लगे.

राज भाटिया जी ने सोचा - ये तो छोटे बडे बनकर गुलाब जामुन खा ही जायेंगे. मैं बीच में अच्छा फ़ंसा सो वो बोले - भाई न्याय की बात तो ये है कि इनको रख दो और सो जावो. रात मे जो भी सबसे बढिया सपना देखेगा वो ये गुलाब जामुन सुबह ऊठकर खा लेगा.

इस बात पर तीनों तैयार होगये और सो गये.

अब सुबह तीनो ऊठे और राज भाटिया ने सपना सुनाना शुरु किया. वो बोले भाई रात को अरविंद मिश्रा जी मेरे सपने मे आये और मुझे काशी विश्वनाथ के दर्शन करवा दिये. वाह क्या सुंदर सपना था? इससे सुंदर तो कुछ सपना हो ही नही सकता.

अब योगिंद्र मोदगिल ने सपना सुनाना शुरु किया - अरे भाटिया साहब..आपने तो मुर्ती के दर्शन किये होंगे. मेरे साथ क्या हुआ कि समीरलाल जी अपनी उडनतश्तरी लेके आगये और बोले - चलो कवि महाराज, हम कैलाश पर्वत जा रहे हैं दर्शन करने. आप को भी करवाये देते हैं. ओहो हो..क्या साक्षात भोलेनाथ और मां पार्वती के दर्शन हुये...मैं तो धन्य होगया. और इससे बढिया सपना तो अब ताऊ का भी क्या होगा? अब गुलाब जामुन मैं ही खा लेता हूं. और गुलाब जामुन का कंटेनर हाथ मे ऊठा लिया.

गुलाब जामुन का कंटेनर खाली पडा था..बस थोडी सी चाशनी लगी थी उसमे.

योगिंद्र मोदगिल और राज भाटिया जी ने ताऊ से पूछा तो ताऊ रोते हुये बोला - यारो मेरा सपना सुन लो ...सब कुछ समझ आ जायेगा. अब ताऊ ने बोलना शुरु किया -

भाईयो, रात को सपने मे आपको तो भले आदमी मिल गये और भोले नाथ के दर्शन करवा दिये और मेरे सपने मे सुर्पणखां आगयी. और क्या बताऊं? आते ही लाल आंखे निकाल कर मेरी छाती पर सवार होगई.




भाटिया जी : फ़िर क्या हुआ?

ताऊ - अरे भाटिया साहब होना क्या था? मुझसे कहने लगी की ताऊ जल्दी से ये गुलाब जामुन खा जावो..मुझे इसकी गंध अच्छी नही लगती...वर्ना मैं तुमको खा जाऊंगी और मेरी गर्दन पकड कर ऊपर उठा लिया... और लाल आंखे चुडैल सरीखी दिखाई तो मजबूरी मे डर के मारे मुझे वो गुलाब जामुन खाने पडे.

योगिंद्र मोदगिल बोले - तो उस समय हमको उठाना था ना ..सब बांटकर खा लेते?

ताऊ बोला - अरे भाई..मैने तुम दोनों को बहुत ढूंढा पर तुम तो कैलाश पर्वत गये हुये थे और भाटिया जी वाराणसी गये हुये थे. तो क्या करता? अगर तुम दोनों मुझे अकेला छोडकर नही जाते तो उस सूर्पणखां की इतनी मजाल की मुझे अकेले को गुलाब जामुन खाने को कहने का साहस भी कर पाती?

ताऊ पहेली - 46 : विजेता शुभम आर्य

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम !


आज गुरुनानक देव जी प्रकाशोत्सव है. आप सबको हार्दिक बधाईया और शुभकामनाएं. गुरु नानकदेव जी ने ज्ञान का दीप प्रज्ज्वलित कर समाज में व्याप्त अंधकार और सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया। जन मानस में उन्होंने सद्भाव का माहौल पैदा किया। आईये आज हम भी उनके बताये मार्ग पर चलने की कसम खायें. इतने छोटे से ब्लाग जगत का माहोल भी अगर हम सुंदर और शांत नही रख सकते तो आज हमको सबसे ज्यादा जरुरत है गुरु नानक देव जी के आदर्शों और शिक्षा पर चलने की जिससे सदभाव का वातावरण बने और नया सृजन हो.


आईये अब ताऊ पहेली 46 के परिणाम देखते हैं. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है वैलंकान्नी चर्च, चेन्नई [Vailankanni (Velankanni) church,chennai. Location: Nagapattinam, near Chennai (Tamil Nadu)]




इसके बारे में थोडी पर महत्वपुर्ण जानकारी दे रही हैं सु.अल्पना वर्मा

तमिलनाडु के नागापट्टिनम क्षेत्र में भव्य तीर्थस्थल वैलंकानी गिरिजाघर स्थित है। भक्तजनों का मानना है कि मदर मेरी की प्रतिमा यहाँ जागृत की गई है। चर्च की पवित्र वेदी पर देवी मेरी की आराधना की जाती है।

मान्यता है कि देवी मेरी एक चरवाहे के सामने प्रकट हुईं। चरवाहे ने देवी मेरी के दिए आदेश को पूरा किया। सोलहवीं सदी में देवी मेरी एक विकलांग लड़के के सामने प्रकट हुईं। माँ के आशीर्वाद से विकलांग लड़का ठीक हो गया था। इन घटनाओं के बाद गिरिजाघर की स्थापना की गई।

[यही कहानी..clue-3 के चित्र मे है.]

गिरिजाघर के पास एक संग्रहालय है जहाँ पर देवी मेरी को अर्पित की गई भेंटें रखी गई हैं। आवर लेडी ऑफ हेल्थ देवी मेरी का जन्म 28 अगस्त से लेकर 10 सितम्बर तक मनाया जाता है।

आवर लेडी ऑफ हेल्थ देवी मेरी का जन्म 28 अगस्त से लेकर 10 सितम्बर तक मनाया जाता है।
समारोह के दौरान होली मास की प्रार्थना आयोजित की जाती है जो कि 6 भाषाओं में बोली जाती है और दिन में 14 बार दोहराई जाती है।

कहा जाता है कि जब श्रद्धालुओं की मुराद पूरी हो जाती है, तब देवी मेरी को भेंट चढ़ाते हैं। गिरिजाघर के पास एक संग्रहालय है जहाँ पर देवी मेरी को अर्पित की गई भेंटें रखी गई हैं।
नजदीकी एयरपोर्ट है चेन्नई।रेलः- नजदीकी रेलवे स्टेशन है त्रिची, चेन्नई एवं तंजावुर।सड़क मार्ग : नागापट्टिनम से बस सेवाएँ उपलब्ध हैं।

(साभार : हिंदी वेब दुनिया डाट काम)

आईये अब आज के विजेताओं से आपको मिलवाते हैं.

"आज के विजेता गण"

 

 

Bloggerप्रथम विजेता  शुभम आर्य बधाई अंक १०१



द्वितीय विजेता मिश्रा पंकज बधाई
अंक १००



तृतीय विजेता वरुण जयसवाल बधाई अंक ९९

 

आईये अब हमारे आज के अन्य सम्माननिय  विजेताओं से आपको मिलवाते हैं.

बधाई सभी विजेताओं को

 

Blogger

 Blogger 

 प्रकाश गोविन्द अंक ९८


 

Blogger seema gupta  अंक ९७

 दिनेशराय द्विवेदी अंक ९६

रंजन अंक ९५

 

 
  mahashakti अंक ९४

 

Blogger संजय बेंगाणी अंक ९३

 

 अन्तर सोहिल  अंक ९२


मीत
अंक ९१
  पं.डी.के.शर्मा"वत्स" अंक ९०

HEY PRABHU YEH TERA PATH
  अंक ८९
 

 अभिषेक ओझा अंक ८८


Udan Tashtari
  अंक ८७
  संजय तिवारी ’संजू’ अंक ८६

काजल कुमार Kajal Kumar अंक ८५
 

Globe Treader™ अंक ८४


Murari Pareek
  अंक ८३

 

इसके अलावा निम्न महानुभावों ने भी इस पहेली अंक मे शामिल होकर हमारा उत्साह बढाया. जिसके लिये हम उनके हृदय से आभारी हैं.

सु. M A Sharma "सेहर",   श्री अविनाश वाचस्पति,  श्री सुशील छोंक्कर,  सु. प्रेमलता पांडे,  डा. जीतेंद्र बगरिया,  सु. हरकीरत हकीर,  डा. रुपचंद्र शाश्त्री,  श्री रतन सिंह शेखावत,  श्री दिगंबर नासवा, श्री पी.एन. सुब्रमनियन,  श्री अनिल शर्मा,  श्री योगिंद्र मौदगिल,  सु. बबली और चच्चा टिप्पू सिंह. 

बहुत बहुत आभार आप सभी का.



रामप्यारी के सवाल के विजेताओं से यहा मिलिये.

"रामप्यारी के ३० नंबर के सवाल का जवाब"


हाय…गुड मोर्निंग एवरी बडी…आई एम राम..की प्यारी… रामप्यारी.
हां तो अब जिन्होने सही जवाब दिये उन सबको दिये गये हैं ३० नम्बर…अगर भूल चूक हो तो खबर कर दिजियेगा..सही कर दिये जायेंगे.

हां तो मेरे सवाल का जवाब तो मालूम पड ही गया होगा कि यह विवाद धनुष को लेकर भगवान राम और भगवान परशुराम के बीच हुआ था और दोनो ही विष्णु के अवतार र्हे.

पिछले दिनों डायरी मे रिमार्क लगाये जाने की वजह से होमवर्क पर ध्यान दिया गया है और क्लास का रिजल्ट संतोष जनक आया है. जिन्होने भी जवाब देने मे लापरवाही दिखाई है उनकी डायरी मे रिमार्क लगाये जाते हैं.

तो आज सबसे पहले सही जवाब दिया शुभम आर्य भैया ने, फ़िर वरुण कुमार जयसवाल अंकल, अपने वकील साहब अंकल ..अरे वही वही कोटा वाले दिनेश्राय द्विवेदी अंकल...एक ही तो वकील साहब हैं यहा, फ़िर भी पहचानते नही हैं क्या? हां तो सबके सही जवाब यानि पूरे नम्बर.

फ़िर आये स्मार्ट इंडियन अंकल, प्रकाश गोविंद अंकल, महाशक्ति अंकल, फ़िर वो संजय बेंगाणी अंकल, जीतेंद्र अंकल, अंतर सोहिल अंकल, मीत अंकल, और सैय्यद अंकल ने भी बिल्कुल सही सही जवाब दिये.

इसके बाद आये अभिषेक ओझा अंकल, वंदना आंटी, नीरज जाट्जी अंकल, मुरारी पारिक अंकल, उडनतश्तरी अंकल..अरे वही समीर अंकल जिनको अजय झा अंकल एलियन कह कर बुलाते हैं. इन सबके भी बिल्कुल सही जवाब आये.

फ़िर आये संजय तिवारी "संजू" अंकल, गोलोब ट्रेडर्स अंकल और हमेशा की तरह अपने दिलिप कवठेकर अंकल.

आप सबके खाते में तीस तीस नम्बर मैने जमा करवा दिये हैं.

अब रामप्यारी की तरफ़ से रामराम…अगले शनीवार फ़िर से यही मिलेंगें. वैसे आजकल शाम ६ बजे मैं ताऊजी डाट काम पर रोज ही मिल जाती हूं. ..और हां आपका आज से शुरु होने वाला सप्ताह शुभ हो.



हीरू और पीरू यानि हीरामन और पीटर की मनोरंजक टिपणियां यहां पढिये.

"आपकी सेवा में हीरू और पीरु"

अरे हीरू भिया...ई देखो कवि महाराज कईं के रिया हे? म्हारे नी समझाये हो..जाणै कुण सी भाषा बोली रिया हे?
तम देखो...

अरे पीरू भिया ई तो ताऊ आली हरयाणवी बोलि रिया हे...लो सुणो ---


योगेन्द्र मौदगिल said...

नम्बर ३

खूंटे की बात सुण....

एक कतई ताजा पैदा होये छोरे नै दाई तै पूच्छया अक् यू चारों तरफ अंधेरा क्यूं हो रह्या सै...?

दाई बोल्ली लाइट जा री सै.....

छोरे नै मात्थे पै हाथ मारया अर बोल्या
'ऒह माई गाड ईबकै फेर इंडिया म्हं पैदा होग्या.........

October 31, 2009 7:45 PM


और ई देखो..मीत अंकल कईं केवे हे?



मीत said...

रामप्यारी एक तो लिख ले परशुराम ही हैं, क्योंकि वो ही मेरे जैसे सवभाव के थे... यानी की तुनक मिजाज अब दूसरा कौन है ये भी में ही बताऊँ क्या... लगता है की तू आजकल स्कूल नहीं जाती...
मीत

October 31, 2009 11:45 AM


अरे पीरु भिया आज तो छुट्टी को दन हे...चलो...सनीमा देखने चलते हैं...

चल भिया जी....


अच्छा अब नमस्ते.सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. ताऊ पहेली – 46 का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया. अगली पहेली मे अगले शनिवार सुबह आठ बजे आपसे फ़िर मिलेंगे तब तक के लिये नमस्कार.