ताऊ पहेली राऊंड २ अंक ६ का जवाब

प्रिय बहणों,  भाईयो, भतीजियों और भतीजों आप सबका ताऊ की रविवारीय क्लास मे  घणा स्वागत है. कल की पहेली का सही जवाब था कामाख्या मंदिर गौहाटी (आसाम).   जिसके बारे मे कल सोमवार की ताऊ साप्ताहिक पत्रिका मे विस्तार से बता रही हैं सु अल्पना वर्मा.

 

 

 

maa-kamakhya-temple-way                                              मां कामाख्या मंदिर को जाने वाला रास्ता

 

 

इस विषय पर हमारे कुछ पाठकों ने भी अपने विचार और अनुभव हमे भेजे हैं जो हम इसी अंक मे छाप रहे हैं. हम पाठकों से एक निवेदन और करना चाहेंगे कि वो विषय पर हमें अपने निजी अनुभव और सम्स्मरण भेजे तो यह ज्यादा उपयुक्त होगा. क्योंकि जो सामग्री नेट से अंगरेजी मे कट-पेस्ट करके भेजी जायेगी वो हम प्रकाशित नही कर पायेंगे.

 

और हम चाहते हैं कि आप उस जगह के बारे मे आपके या आपके परिचितों के निजी अनुभवों से हमारे पाठकों को  परिचित कराये. जैसे की पिछले अंक मे श्री महावीर जी ने माऊंट आबू पर लिखे थे.

 

अब हम आज का रिजल्ट जानने  के लिये  आपको बीनू फ़िरंगी के पास लिय चलते हैं.

 

 

ताऊ रामपुरिया की तरफ़ से आपको बहुत  घणी रामराम.

 

 

 

 

 

binu-firangiआदर्णीय देवियों और सज्जनों, ताऊ के भाइयो, बहणों, भतीजियों और भतीजो, समस्त संपादक मंडल के सदस्य गणों,   आप सबको बीनू फ़िरंगी का सादर प्रणाम.

 

और मिस रामप्यारी को विशेष रामराम.

 

ताऊ पहेली राऊंड –२ के पांचवें अंक का रिजल्ट घोषित करते हुये मुझे  अपार हर्ष हो रहा है. और मैं अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं कि मुझे ये मौका आज फ़िर  मिला. और जब तक ताऊ चाहेगा आगे भी मिलता रहेगा.

 

कई लोग हमसे पूछते हैं कि रामप्यारी को विशेष रामराम क्युं? तो रामप्यारी हमारे परिवार मे सबसे छोटी है और घर मे सबकी लाडली है तो उसको तो विशेष रामराम करनी ही पडती है, वर्ना वो कब हमारे बोरिया बिस्तर गोल करवादे इसका पता नही है. वो बहुत तेज खोपडी है.

 

तो आईये अब चलते हैं रिजल्ट की तरफ़ :-  हमारी इस पहेली का सही जवाब है मा कामाख्या मंदिर

गौहाटी आसाम.  और इस विषय पर विस्तृत जानकारी  कल के अंक मे पत्रिका की विशेष संपादक सु.अल्पना वर्मा दे रही हैं.

 

 

 

सर्वाधिक अंक प्रात किये १०१


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घणी बधाई प्रथम स्थान के लिये. .सुश्री Parul

तालियां..... तालियां..... तालियां..... जोरदार  ….  तालियां

विशेष बधाई….

 

 

 

 

आज की उप विजेता  अंक १०० के साथ बधाई


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सुश्री सीमा गुप्ता

 

 


 

आज के तृतिय विजेता अंक ९९ के साथ ...बधाई


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श्री शुभम आर्य

 

 

 

आईये अब अन्य माननिय विजेताओं के बारे में  क्रमश:  जानते हैं. सभी को हार्दिक बधाई.

 

 


वरुण जायसवाल

अंक ९८
 

 HEY PRABHU YEH TERA PATH अंक ९७

 आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) अंक ९६

 Udan Tashtari अंक ९५

 संजय तिवारी ’संजू’ अंक ९४

 मुसाफिर जाट अंक ९३

 दीपक "तिवारी साहब" अंक ९२

 Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" अंक ९१

 प्रकाश गोविन्द अंक ९०

 

नितिन व्यास  अंक ८९

 makrand   अंक ८८


 हिमांशु । Himanshu  अंक ८७

 दर्पण साह 'दर्शन' अंक ८६

सतीश चंद्र सत्यार्थी  अंक ८५

 दिलीप कवठेकर अंक ८४

 

 

 

 

 

 

 

इसके अलावा निम्न महानुभाओं ने भी इस पहेली अंक मे शामिल होकर हमारा उत्साह बढाया. जिसके लिये हम उनके हृदय से आभारी हैं.

 

श्री रतन सिंह शेखावत,  डा.रुपचन्द्र शाश्त्री मयंक,  श्री दिनेश राय द्विवेदी,  श्री अरविंद मिश्रा, 

 

श्री संजय बैंगाणी,  श्री आलोक सिंह,  श्री पंकजरागो,  डा. मनोज मिश्रा,  श्री अंतर सोहिल,  श्री राज भाटिया, 

 

श्री दिगम्बर नासवा,  श्री सैयद अकबर,  श्री महाभारत,  श्री PD,  श्री नरेश सिंह राठोड,  सुश्री लवली कुमारी,

 

डा. भावना,  श्री तरुण ,  श्री योगिंद्र मौदगिल.  मदारी और सुश्री सोनिया.

 

 

आप सबका बहुत बहुत आभार..

 

 

 

 

अब आईये रामप्यारी की क्लास में:-

 

 

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रामप्यारी की क्लास मे :-

आप सबको रामप्यारी की घणी नमस्ते.

 

अब आप पूछेंगे की रामप्यारी आज तेरे को क्या होगया? तू घणी नमस्ते क्युं कर रही है? तो सच्ची बात तो ये है कि मुझे खुद नही मालूम कि घणी का मतलब क्या होता है? वो तो ताऊ घणी रामराम बोलता है तो मैने सोचा कि ये भी कोई अच्छी चीज होती होगी, सो मैने भी घणी नमस्ते बोल दिया.

 

अब कल का सवाल तो बिल्कुल आसान था. तभी तो काजल अंकल ने आते ही फ़टाक से जवाब दे दिया कि “रामप्यारी, तुझे पता नहीं कि डॉक्टर उस लड़के की माँ है ?”

 

अरे अंकल मुझे पता था तभी तो पूछा था मैने. ही..ही..ही..ही..काजल अंक आज बोनस सवाल के प्रथम विजेता रहे हैं बधाई…..

 

 

अब उपविजेता अशोक पांडे अंकल आकर बोले “रामप्‍यारी, लगता है डॉक्‍टर के छोटे बाल देखकर तुम भी अपने पुलिस अंकल की तरह गच्‍चा खा गयी। अच्‍छी बच्‍ची, डॉक्‍टर लड़के की मां हैं। पुत्र पिता का ही थोड़े ही होता है, माता का भी तो होता है।”


अरे अंकल जी मुझे आज ही मालूम पडा..ही..ही..ही…ही……

फ़िर तीसरे विजेता आये आशीष अंकल और आते ही बोले “रामप्यारी.. वो जो डॉक्टर है ना वो आंटी है.. और वो उस लड़के की मां है.. पिता नहीं.. लड़के को तो बेटा ही कहेंगी न वो... वैसे आज ताऊजी और अल्पना जी ने पहेली में बहुत ही मुश्किल सवाल पूछा है.. प्लीज़ क्लू दो ना...“

देखा ना अंकल..मैने आपके मांगते ही हिंट दिया था…अब आप मेरे लिये दो जींस वाली पैंट..एक सलवार सूट और चाकलेट का डिब्बा भिजवा देना..


इसके बाद नितिन व्यास अंकल,  उडनतश्तरी अंकल, संजय तिवारी संजू अंकल, और प्रकाश गोविंद अंकल आये और बिल्कुल सही जवाब दे दिये.

और फ़िर आज सीमा आंटी तो बहुत ही परेशान हुई…फ़िर भी जवाब देकर ही मानी..मजा आया ना आंटी अबकी बार? ही…ही..ही…ही… अरे आंटी अब मेरे दांत ही मत तोड देना…अगली बार बिल्कुल उल्टा सवाल पूछूंगी…

फ़िर मकरंद अंकल और दीपक तिवारी अंकल तो बहुत ही हैरान परेशान हुये पर दे दिया जवाब उन्होने ने भी. बधाई अंकल.

फ़िर गगन शर्मा अंकल और इसके साथ ही शाश्त्री अंकल आये और बोले “

 

मेरे प्रिय ताऊजी,
आज दौडतेभागते लिख रहा हूँ अत: मन भर के लिख न पाऊंगा.
हां रामप्यारी से जरा पूछ लें कि क्या सिर्फ पुरुष योनि में जन्मे हुए लोग ही डाक्टर बन सकते हैं??


अरे अंकल आप तो पहली बार मे ही सही ताड गये…ही..ही..ही…थैंक्यु अंकल.

इसके बाद अनुराग अंकल (स्मार्ट ईंडियन) ने भी बिल्कुल फ़टाक से जवाब दिया. फ़िर दर्पण शाह दर्पण अंकल और सोनिया आंटी ने सही जवाब दिये.

और सबसे आखिर मे सही जवाब लेकर आये दिलिप कवठेकर अंकल और सतीश चंद्र सत्यार्थी अंकल.

आप सबके अकाऊंट मे मैने तीस तीस नम्बर जमा करवा दिये हैं. आप सबका आभार और अब रामप्यारी अगले शनीवार आपसे मिलेगी एक नये बोनस सवाल के साथ. तब तक के लिये अलविदा.


 

 

कुछ पाठको के विचार :-

 

 



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                                                     हे प्रभु यह तेरापन्थ

                                              महावीर बी सेमलानी " भारती'





HEY PRABHU YEH TERA PATH said...

 

 

यौन इच्छा कि हिंदू देवी.Kamakhya का यह मन्दिर है। यह जगह 51 सती पीठ में से एक है, बहिष्कार के दौरान जहां सती की लाश कई भागों मे पृथ्वी पर गिरी उस मे से एक भाग यह भी जहॉ यह मन्दिर है।

 

(This place is one of the 51 satipithas, i.e., places where parts of Sati's corpse fell to Earth during dismemberment by Vishnu (Sati being the wife of Shiva who had committed suicide after she and her husband were insulted by her father). This is the place where her yoni (vulva) fell, and this temple is sacred to Kamakhya, the Hindu goddess of sexual desire. )

 

कामाख्या मन्दिर भारत का सबसे महत्वपुर्ण तान्त्रिक सेन्टर है।

 

इस मंदिर कि संरचना काफी बड़ी है. सबसे पुराना हिस्सा कई छत्रक के साथ एक संरचना-गुंबदों आकार का है. देवताओं के carvings के साथ कई लंबा कॉलम हैं. इस पुराने ढांचे से बढ़ा एक नया एक है, जो चारों ओर पैनलों जिसमें गणेश सहित विभिन्न हिंदू देवताओं और भगवान है।. वहाँ कबूतरों के झुंड, को तीर्थयात्रियों चुगा डालते है ।

 

जहां उसे (योनी) गिर पड़ा, और यह मंदिर yoni की जगह है Kamakhya के लिए पवित्र है, ताऊ पहेली मे जो फोटु दिखा रहे है वह Kamakhya मन्दिर का अन्दर से बहार जाने का रास्ता है।






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                                                         प्रकाश गोविन्द said...

 

 

कामाख्या मंदिर :


कामाख्या मंदिर असम की राजधानी गुवाहाटी मे है ! यह मंदिर शक्ति की देवी सती का
मंदिर है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना है व इसका तांत्रिक महत्व है।

 

प्राचीन काल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्र सिद्धि का सर्वोच्च स्थल है। पूर्वोत्तर के मुख्य द्वार कहे जाने वाले असम राज्य की राजधानी दिसपुर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नीलांचल अथवा नीलशैल पर्वतमालाओं पर स्थित मां भगवती कामाख्या का सिद्ध शक्तिपीठ सती के इक्यावन शक्तिपीठों में सर्वोच्च स्थान रखता है।

 

यहीं भगवती की महामुद्रा (योनि-कुण्ड) स्थित है। सती स्वरूपिणी आद्यशक्ति महाभैरवी कामाख्या तीर्थ विश्व का सर्वोच्च कौमारी तीर्थ भी माना जाता है। इसीलिए इस शक्तिपीठ में कौमारी-पूजा अनुष्ठान का भी अत्यंत महत्व है। यद्यपि आद्य-शक्ति की प्रतीक सभी कुल व वर्ण की कौमारियाँ होती हैं। किसी जाति का भेद नहीं होता है। इस क्षेत्र में आद्य-शक्ति कामाख्या कौमारी रूप में सदा विराजमान हैं।
इस क्षेत्र में सभी वर्ण व जातियों की कौमारियां वंदनीय हैं, पूजनीय हैं। वर्ण-जाति का भेद करने पर साधक की सिद्धियां नष्ट हो जाती हैं।

 

 

 

 

अच्छा अब नमस्ते. कल सोमवार को ताऊ साप्ताहिक पत्रिका मे आपसे पुन: भेंट होगी.

 

सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. इस दुसरे राऊंड की छठी  पहेली का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया.

 

संपादक मंडल :-

 

मुख्य संपादक : ताऊ रामपुरिया

 

विशेष संपादक : अल्पना वर्मा

 

संपादक (प्रबंधन) : seema gupta

 

संपादक (तकनीकी)  : आशीष खण्डेलवाल

 

सहायक संपादक : बीनू फ़िरंगी एवम मिस. रामप्यारी

 

सहायक संपादक : हीरामन

ताऊ शनीचरी पहेली राऊंड २ अंक ६

प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरै की घणी राम राम.   ताऊ शनीचरी पहेली के दुसरे राऊंड के अंक छ  में मैं  ताऊ रामपुरिया,  सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं.

 

इस पहेली आयोजन को आपका भरपुर प्यार और समर्थन मिल रहा है. आपके अटूट स्नेह और आशिर्वाद की वजह से ही हमको लगातार इसे  सुव्यवस्थित रुप से संचालित करने का हौसंला मिलता है.  और इसके लिये हम आपके अत्यंत आभारी हैं. हमारी कोशीश है कि इस पहेली आयोजन के जरिये हम आप तक हमारे ऐतिहासिक स्मारकों और पर्यटन केंद्रो के बारे मे लगातार जानकारी देते रहें. आपके सुझावों का हमे इंतजार रहता है. आपकी राय हमारे लिये महत्व पुर्ण है. कृपया अपनी राय अवश्य देते रहिये.

 

इस पहेली के भी नियम पुर्ववत ही हैं. क्ल्यु आपको रामप्यारी के ब्लाग से मिलेगा. जो आप यहां चटका लगा कर भी जा सकते हैं. या साईड बार की उसकी फ़ोटो पर चटका लगा कर भी जा सकते हैं. उसके ब्लाग पर साईड बार मे आप क्ल्यु की फ़ोटो पर चटका लगा कर वापस यहां आ सकते हैं. एक जरुरी बात यह है कि क्ल्यु सूबह दस बजे के बाद ही दिया जायेगा.

 

जैसा की आप जानते हैं कि दिलचस्प टिपणी खोज कर विदुषक के तीन खिताब हमारे नये सदस्य हीरामन देते हैं. अत: टिपणि को भी आप मनोरंजक शब्दों से लिखें. पीछले बार यह खिताब श्री योगिंद्र मौदगिल, शाश्त्री जी और राज भाटिया जी ने जीते थे.  देखते हैं इस बार यह खिताब हीरामन जी किसको देते हैं?

 

पहेली के विषय तक पहुंचने के पहले एक जरूरी बात :  कृपया मुख्य पहेली और रामप्यारी का जवाब अलग अलग टिपणी मे देवें. क्योंकि इससे जवाब बनाने मे आसानी रहती है. एक ही टीपणि मे दोनो जवाब रहने से कई बार दुसरे जवाब के नम्बर देना छूट जाते हैं. और कई बार हम आपका जवाब प्रकाशित दिन मे ही करना चाहते हैं पर दुसरा जवाब उसमे रहने से विवशता हो जाती है. अत: निवेदन है कि इस बार इस बात का ध्यान रखें.

 

आईये अब आपको आज की पहेली की तरफ़ ले चलते हैं.

 

 

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                                                                                                                यह कौन सी जगह है?

 

 

अब रामप्यारी का विशेष बोनस सवाल : - ३० अंक के लिये.

 

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   ऊं..ऊं..ऊं… अंकलों, आंटियों और दीदीयो आज रामप्यारी किसी को भी नमस्ते नही करेगी और ना ही अंगरेजी वाली गुड या शक्कर मार्निंग करेगी.

कल ना,  कल ना,…वो मेरी क्लास टीचर ने आकर ताऊ को
शिकायत लगादी कि ताऊ तुम्हारी रामप्यारी को तुमने बिल्कुल भी तमीज नही सिखाई. इसने कल मेरे को बेअक्ल बोला और अपना बैग स्कूल मे ही छॊड कर भाग आई.



अब ताऊ ने मुझसे गुर्राकर पूछा कि – रामप्यारी ये क्या बदतमीजी सीखी हो तुम? कोई
टीचर से ऐसे बात करता है? चलो हाथ उपर करके खडी रहो आज सारा दिन.

मैने ताऊ को लाख समझाया कि मेरी गलती नही है. टीचर ने मुझसे सवाल ही ऐसा
पूछा था कि मैं क्या करती? जब रामप्यारी चूहे गिनने जायेगी तो चूहा वहां दिखेगा क्या? आप खुद मेरी कल की पोस्ट पढलो.

पर बस जैसे बडे लोग बच्चों की बात नही सुनते वैसे ही ताऊ ने भी नही सुनी. और बडे लोगो की यही बात मुझे बडी गंदी लगती है. फ़िर बोलते हैं कि आजकल के बच्चे बिगडे हुये है.  अरे बडे लोगों तुम क्या सुधरे हुये हो?

बच्चों की तो सही बात भी गलत लगती है बडे लोगों को. और खुद बच्चों के सामने हुक्का तम्बाकु पीते हैं उसका क्या?  फ़िर ताऊ बोलेगा – रामप्यारी ज्यादा जबान मत लडाया कर..जा चुपचाप हुक्का भर कर ले आ.


पर टीचर ने मेरी जबरन शिकायत लगाई है. तो टीचर जी अब तुम भी होंशियार रहना. तुमने रामप्यारी से पंगा लिया है. तुमको साढे ढाई चक्कर खिलाकर स्कूल से नही निकलवाया तो मेरा भी नाम रामप्यारी नही. और  सारे चूहे पकडकर टीचर के घर मे नही छोडे तो मेरा नाम भी बदल लूंगी. हां तो..


खैर आज मेरा मूड तो उखडा हुआ है पर ताऊ कहीं मुझे लठ्ठ नही मारे इसलिये
बोनस का सवाल पूछ ही लेती हूं. जरा ध्यान से पढिये :

परसों की बात है, मैं शाम को पार्क मे घूमने गई थी. एक डाक्टर और एक लडका 
भी वहां घूम रहे थे. तभी वहां एक पुलिस अकंल  आये.

उस पुलिस अंकल ने  पूछा तो डाक्टर ने कहा कि साथ मे घूम रहा लडका उनका पुत्र है. अब पुलिस अंकल को पता नही क्या सूझा कि उन्होने उस लडके को अलग
एक कोने मे ले गये.

मैंने सोचा की पता नही क्या गडबड है? मैं भी दबे पांव उनके पीछे लग गई. पुलिस अंकल ने उस लडके से पूछा तो उस लडके ने डाक्टर को अपना पिता होने से मना
कर दिया.

अब तबसे ही मैं सोच रही हूं कि ये क्या माजरा है?  कुछ समझ आया हो तो मेरी
उलझन को सुलझा दिजिये प्लिज…


हां तो अब रामराम. मेरा जवाब बिल्कुल अलग टीपणी मे दिजियेगा. और हां पता नही
किसने मेरे खिलाफ़ ताऊ के कान भर दिये? ताऊ बोल रहा था – रामप्यारी तू बहुत
बिगड गई है. अब तेरी यहां से छूट्टी कर दुंगा..और चंपाकली को चांद से बुलवा
लूंगा. तो प्लिज मेरी शिकायत मत करना. मुझे यहीं पर मजा आता है


 

इस अंक के  आयोजक हैं ताऊ रामपुरिया और सु,अलपना वर्मा.

रामप्यारी की बकबक

आंटियों,  अंकलों  और दीदीयों  आप सबको रामप्यारी की नमस्ते. अब सोचती हूं कि कौन सी बात आपको बताऊं और कौन सी छोड दूं?  दुनिया भर की बाते हैं. पर मुझे ज्यादा बोलने की आदत तो है नही और ना ही ताऊ की तरह लतियल ब्लागिंग की आदत लगी है कि बेफ़ालतू बक बक करती फ़िरूं?

 

अभी पिछले सप्ताह ही ताऊ की तबियत खराब हो गई. अब आप पूछोगे  कि रामप्यारी ये ताऊ तो रोज दिखाई दे रहा है ब्लागीवूड मे? और तुम कह रही हो कि ताऊ की तबियत खराब है?

 

तो पूछो… पूछो ना…..रामप्यारी कब मना करती है बताने के लिये?  रामप्यारी तो ऐसी ऐसी बाते बतादे कि आप कानों से अंगुली ना हटायें. खैर अब आप पूछ ही रहे हैं तो बता ही देती हूं कि ताऊ तो बिल्कुल गुमशुम और चुपचाप रहने लगा.

 

अब सैम भैया और बीनू भैया को चिंता हुई. उन्होने ताऊ से पूछा तो ताऊ कुछ बताने को तैयार नही. खैर जैसे ही बिलायत से हीरामन भैया आये , तो उन्होने तुरंत ताऊ को डाक्टर के यहां ले जाने का फ़ैसला कर लिया. और डाक्टर के पास जाकर सब जांच करवाई गई. मैने भी कैट-स्केन किया.

 

डाक्टर को जांच रिपोर्टों मे कोई खराबी नही दिखी. तो डाक्टर बोला – ताऊ तुमको ऐसी कोई बीमारी नही है जो जांच से पता चले. पर बीमारी तुमको जरुर है. तुम किसी चिंता मे रहते हो..आजकल इसका नया इलाज आया है. तुम अकेले रहने की बजाय किताबें पढा करो. उससे तुम कंसन्ट्रेशन ठीक कर पाओगे और

६ मिनट के कंसन्ट्रेशन से तुम्हारा तनाव दूर हो जायेगा.

 

ताऊ बोला – अर डागदर..मेरा तो बिना किये ही घणा कंसट्रक्शन हो जाता है. और ज्यादा कंसट्रक्शन ठीक नही होता.. प्रोपर्टी टेक्स घणा भरना पडता है. डाक्टर ने माथा पकड लिया. और नाराज होकर बोला – अरे मेरे ताऊ मैं कंसन्ट्रेशन की बात कर रहा हूं. कंसट्रक्शन की नही. अब तुम घर जाओ. और  किताबे  पढा करो जिससे तुम्हारा कंसन्ट्रेशन बना रहेगा.

 

ताऊ बोल्या – अरे डागदर..तो न्यु हिंदी म्ह बोल ना कि ध्यान एकतरित करो. भाई मैं तो  ब्लागिंग करता हूं और उससे ज्यादा कंसन्ट्रेशन तो कोई चीज म्ह नही हो सकता.

 

डाक्टर – ताऊ इस ब्लागिंग मे ऐसा क्या है जो कंसन्ट्रेशन हो जाता है? मैं नही मानता.

 

ताऊ बोला – डागदर एक बार करके देख..फ़िर ऐसा कंसट्रक्शन तेरा बनेगा कि बीबी बच्चे भी भूल जायेगा.

 

डाक्टर आश्चर्य से बोला – फ़िर ताऊ तू क्युं बिमार हो गया?

 

ताऊ बोला – अर्र डाक्टर..मेरा हथियार (लेपटोप) ही बीमार था..इस वजह से ब्लागिंग नही कर पाया.

 

खैर अब ताऊ का लेपटोप आगया है दिमाग बदल कर.. और ताऊ की तबियत भी झन्नाट हो गई है.

 

अब मेरी ५ दिन की छूट्टी लग गई है स्कूल से.

 

आपको मालूंम है कल मैथ्स की टीचर ने मुझे पूछा – रामप्यारी तू बेअक्ल है. तुझसे सवाल तेरी भाषा मे ही पूछने पडेंगे. तभी तू समझ पायेगी.

 

मैने कहा कि हां मैम..ये तो बढिया रहेगा. तो टीचर ने पूछा – रामप्यारी मानले कि तुझे स्कूळ के गेम्स रूम मे भेजा. वहां चार चूहे टेबल के उपर बैठे हैं और सात चूहे आलमारी के उपर बैठे हैं. तुम्हारे जाते ही दो चूहे भाग गये. अब बताओ कि वहां कितने चूहे बचे?

 

मैने कहा – युं कि मैम..मुझे तो लगता है कि मैं अक्ल की कच्ची हूं..पर अब पक्के से कहती हूं कि आपको सवाल पूछने की अक्ल नही हैं.

 

टीचर मैम तो डंडा ऊठाकर दौडी मेरे पीछे. और बोली – रामप्यारी जबान लडाती है? वहां नौ चूहे बचेंगे.

बेवकूफ़ कहीं की…

 

मैने कहा कि मैम..वहां एक भी चूहा नही बचेगा. क्योंकि जो भागने से बच जायेगा वो मेरे पेट मे चला जायेगा.  मैम तो मेरा मूंह देखने लगी.

 

देखा मैं कितनी होशियार हो गई गणित में? अच्छा तो अब रामराम. कल सबेरे साढे छ बजे पहेली मे मिलूंगी आपको. आप भूलना मत. सब कुछ पहले की ही तरह है. क्ल्यु के लिये मेरे ब्लाग पर.

 

और हां एक बात कि अल्पना आंटी ने कल की पहेली सेट कर दी है. मैं कोशीश करती हूं, अगर मुझे मालूम पड गया तो आपको बता दूंगी चुपचाप. ठीक है ना?

 

अच्छा नमस्ते.

 

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हीरामन उवाच :-

 

बीबी : वह स्त्री, जो शादी के बाद कुछ सालों में टोक-टोक कर आपकी सारी आदतें बदल दे और फिर कहे कि आप कितना बदल गए हैं जी।

 

 

अब ये होगा शायद अपनी आग में खुद जल जायेंगे
तुम से दूर बहुत रह कर भी क्या पाया क्या पायेंगे
- अहमद हमदानी

 

तो अब कल सूबह साढे छ बजे ताऊ शनीचरी पहेली मे आपसे मुलाकात होगी.

ताऊ के हथियार की तबियत खराब

आपने सुना है कि कभी हथियारों के बिना लडाई लडी गई हो? नही ना. अब आपको इतनी देर मे ये समझ आ गया होगा कि आज ताऊ का माथा कुछ आऊट आफ़ करंट है. ये भी आप बिल्कुल सही समझ रहे हैं.

हुआ युं कि पिछले तीन चार सप्ताह से हमारे  हथियार की तबियत बहुत नासाज हो चली थी. अब प्राण निकले कि तब प्राण निकले. भाई अब आप पूछोगे कि ये कौन सा हथियार आगया ? जिसमे प्राण भी होते हैं? बहुत दुरुस्त सवाल है आपका.

एक ब्लागर का और वो भी एक लतियल ब्लागर का हथियार यानि राकेट लांचर से भी बडा हथियार होता है उसका लेपटोप. अगर किसी लतियल ब्लागर का हथियार  आऊट आफ़ दिमाग हो गया तो वो ब्लागर किसी काम का नही. वो एक लंगडे घोडे की माफ़िक होता है, और लंगडे घोडे का क्या किया जाता है? आपसे अच्छी तरह कौन समझ सकता है? समझते रहिये..किसी दिन आपके भी काम आयेगा.

हां तो आगे की कहानी युं है कि लेपटोप के नखरे इतने बढे कि हमने कम्पनी से संपर्क किया. उसने बुलाया..ठीक किया दे दिया...दो दिन बाद वही बीमारी..फ़िर बुलाया.ठीक किया दे दिया. ना लेपटोप जी अपना माथा ठीक करने को तैयार था और ना कम्पनी वाला अपनी हार मानने को तैयार.

कल हमने फ़ायनल कागज पत्र ऊठाकर देखे तो ३ अप्रेल को कम्पनी की वारंटी या गारंटी जो भी है वो खत्म हो रही है.

सो आज हम खुद काम धंधा छोड कर कम्पनी के द्फ़्तर पहूंच गये. वहां वही लफ़्फ़ेबाजी शुरु. हमने जिस वेंडर से खरीदा था उसको भी बुलवा लिया और उस कम्पनी वाले को कहा कि भाई तू ये बदल दे. हमको इतना नखरे वाला हथियार नही चाहिये. इस लेपटोप को बदलने की बात पर उसने हमको इस तरह देखा जैसे हम चिडिया घर के प्राणी  नही होकर कहीं मनुष्यों के बीच से आये हों?

पर थोडी ना नुकुर और हमारे द्वारा ताऊ पना दिखाने की सम्भावना भांपकर वो  मदर बोर्ड बदलने को तैयार होगया. यानि अब झंझट खत्म. फ़िल्हाल तो हमको यही समझाया गया है कि मदर बोर्ड बदल गया तो अब समझो नया ही होगया. वैसे इनकी रामलीला ये ही जाने.

अब हमको डीळीवरी कल तक मिलेगी. हम पिछले तीन चार सप्ताह से जैसे तैसे काम चला रहे हैं. हमारे सम्मन्निय ब्लागर्स के आधे अधूरे साक्षात्कार भी इसी वजह से रुके पडे हैं. इस दुख की महान घडी मे हमको सबसे ज्यादा सहारा भतीजे आशीष खंडेलवाल ने दिया है. जिसने हमारी पोस्टों को उनका कीमती समय जाया करते हुये प्रकाशन करवाते रहे. 

कई बार हमारी इच्चा हुई कि अब और नही लिख  सकते बिना हथियार के.लेकिन आशीष ने कहा कि - ताऊ कुछ भी हो जाये आप तो मुझे ईमेल पर पोस्ट लिख कर भेजो. मैं पबलिश करता रहूंगा. बहुत धन्यवाद भतीजे.

अब उम्मीद करते हैं कि एक दो दिन मे हमारी AK-47 हथियार सही होके आजाये और हमारी तबियत भी ठीक हो जाये. हमारी तबियत का हाल चाल खूंटे पर पढ लिजिये.

इब कल तक की रामराम.






इब खूंटे पै पढो :-


बात स्कूल के दिनों की है. उन दिनों मे नौवी क्लास मे ही  ऐच्छिक विषय लिये जाते थे.  ताऊ ने जैसे तैसे करके आंठवीं पास करली और नौवीं मे पहुंच गया. 

ताऊ को गणित विषय से ओबामा और ओसामा वाली दुशमनी थी यानि खानदानी दुश्मनी. सो उससे बचने के लिये ताऊ ने बायोलोजी विषय ले लिया.

ताऊ रट्टेबाज तो घणा पुराना था सो कोई दिक्कत नही आई. गणित मे रट्टे की सुविधा नही होती वर्ना उससे भी दोस्ती हो सकती थी. अब यहां भी समस्या खडी हो गई.

वार्षिक परिक्षा के समय प्रेक्टिकल शुरु हुये. ताऊ ने रात भर सब रट्टे मारे. मेंढक भी कतरना जैसे तैसे सीख गया. बायो के प्रेक्टिकल शुरु हुये. सब लडके लैब मे हाजिर थे. सबको अलग अलग डिसेक्शन के लिये विषय और सा्मग्री तैयार करके दे ई गई. संयोग देखिये ताऊ को और उसके बाजू वाले लडके रामजीडे दोनो को  मेंढक का डिसेक्शन करके आंते निकालनी थी.

बस ताऊ को मेंढक खोलना तो आता था. ट्रे मे मेंढक को उल्टा करके पिन लगा कर क्लोरोफ़ार्म सूंघा कर उसको खोल लिया. इससे आगे का उसके बस का रोग नही था. अब ताऊ ने देखा कि रामजीडा काफ़ी कुछ काम कर चुका है. ताऊ लगातार रामजीडे को देख रहा था. रामजीडा आंते निकाल कर अपना प्रेक्टिकल पुर्ण करने वाला ही था कि उसको पानी की प्यास लगी और वो पा्नी पीने के लिये जरा सी देर बाहर गया.

इसी बीच मे ताऊ ने उसकी ट्रे अपने कब्जे मे करी  और खुद की ट्रे उसकी टेबल पर रख दी. रामजीडा आता उसके पहले ही उसने मास्साब को अपनी निकाली हूई आंते दिखाई और वहां से नौ दो ग्यारह हो लिया. रामजीडा रोता रह गया. उसकी कौन सुनता?

अगले दिन जंतू वि्ज्ञान का प्रेक्टीकल था. ताऊ ने फ़िर रट्टे मारे. पर हुआ उल्टा ही. प्रयोगशाला मे मास्साब ने दस बारह चिडियों की टांगे लटका रखी थी. और सवाल था कि ये टांगे पहचानों कौन से पक्षी की टांगे  हैं?

अब ताऊ के बस का ये काम था नही. बेईमानी की भी गुंजाईश नही की ट्रे ही बदल दे? 

ताऊ झुंझलाया और मास्साब से  बोला - ''ये क्या बेवकूफी भरी परीक्षा है। टांगों से चिड़ियों को कैसे पहचाना जा सकता है। मैं जा रहा हूं। '' उसने अपनी कॉपी मास्साब  की मेज पर पटकी और चल दिया। चूंकी प्रायोगिक परिक्षा लेने वाले मास्साब बाहर से आते हैं सो वो लडकों पहचानते भी नही हैं.उनको भी ताऊ की इस हरकत पर काफी आश्चर्य हुआ।

ताऊ दरवाजे तक पहुंचा ही था कि उन मास्साब ने आवाज दी - ''ए छोरे, तुम्हारा नाम क्या है ?''
गुस्से से भरा हुआ ताऊ, एक पल के लिये रुका, फिर अपनी पैंट नीचे उतारी और टांगें दिखाते हुये बोला - ''आप पहचानिये मेरी टांगे देख कर और पहचानिये कि मेरा नाम क्या है. 





जान बची तो करोडो पाये :ताऊ

बहणों, भाईयों, भतिजियों और प्यारे भतीजो, सबको आज बुधवार की घणी रामराम.  

इब आप कहोगे कि आज ये बिना मतलब सूबह सूबह ताऊ  रामराम क्युं करण लाग रया सै? तो बात ऐसी होगई कि कल ताऊ जंगल मे लकडी काटने के लिये गया था. वहां जंगल मे घुसते ही देखा कि एक शेर एक पिंजरे मे बंद था. शेर को पिंजरे मे बंद देख कर ताऊ उसके आगे से निकल कर जाने लगा तो उस शेर ने बहुत ही विनम्र शब्दों मे ताऊ को पुकारा.

 

lion-&-taau

 

शेर : अरे ताऊ जी रामराम. 

ताऊ : रामराम भाई रामराम.

शेर : ताऊ जी कहां जा रहे हो?

ताऊ : भाई शेर. ताऊ कहां जायेगा? यानि वो ही रामदयाल और  वो ही गधेडी.

शेर : ताऊ, मैं कुछ समझा नही. 

ताऊ : इसमे ना समझने वाली कौन सी बात है?  जैसे रामदयाल और उसकी गधेडी को उम्र भर वही मिट्टी लाकर मटके बना कर बेचना है. वैसे ही ताऊ को भी रोज जंगल से लकडी काट कर और उनको बेचकर बीबी बच्चों का पेट पालना है. ताऊ ने थोडा तल्खी से कहा.

 

( शेर ने ताऊ की नाराजगी बढी देखी और लग गया कि उसका काम नही बनेगा ताऊ के पास तो  शेर ने पिंजरे मे ही चिलम सुलगा कर, वो चिलम ताऊ की तरफ़ बढाकर बोला) -

लो ताऊ जी जरा दो कश लगाते जाओ. आप थक गये होंगे. बहुत बढिया और ताजा तंबाकू है.

 

और ताऊ ने पिंजरे से ही चिलम पकडी और दो चार कश लगा कर बोला - अच्छा भाई इब रामराम. मैं जाता हूं अब लकडी काटने.

 

अब शेर अपने मतलब की बात पर आया और बोला - ताऊ जी जरा इस पिंजरे का दरवाजा तो खोल दो . बाहर से कुंडी लगी है इसकी.

 

अब ताऊ ने देखा तो सारा माजरा समझ मे आगया कि क्यों आज शेर ताऊ को चिलम पिला रहा था?

 

सो ताऊ बोला - भाई शेर, बात ये है कि अगर मैने ये कुंडी खोल कर तुमको पिंजरे के बाहर किया तो तुम सबसे पहले मेरे को ही खा जाओगे.  इसलिये मैं नही खोल सकता. और ताऊ चलने लगा.

 

अब शेर गिडगिडाकर बोला - अरे ताऊ, आप भतीजे पर इतना भी यकीन नही करते क्या? आपको खाने का तो सवाल ही नही उठता. एक तो आप मेरे ताऊ और मैं आपका भतीजा. अब ऐसा कभी हुआ है कि भतीजे ने ताऊ को खाया हो?

 

ताऊ बोला : यार शेर भाई, लोग कहते हैं कि शेरों के कैसे ताऊ? मुझे तो यकीन नही होता और डर भी लगता है. सो मैं तो नही खोल सकता. इब रामराम.

 

शेर ने अपना पैंतरा खाली जाते देख कहा - अरे ताऊ जी आपका पाला किसी ऐरे गैरे भतीजे से पड गया होगा, मैं उस किस्म का नही हूं. और फ़िर आप तो मेरी जान बचाने वाले हैं और मैं इतना भी कृतघ्न नही हूं कि आपको खाऊं? 

 

आप तो बेखटके पिंजरे की कुंडी खोल कर मुझे बाहर करो. वर्ना सर्कश के  शिकारी आकर अब मुझे ले जायेंगे और मैं इस जंगल मे राज करने वाला वनराज सर्कश मे लोगों को सलाम करता नजर आऊंगा. 

 

और बेवकूफ़ ताऊ को दया आगई. उसने शेर को पिंजरे से आजाद कर दिया.

 

जैसे ही शेर बहर आया. उसने बाहर निकलते ही ताऊ की गर्दन पकड ली, और ताऊ डर के मारे थर थर कांपने लगा. यानि ताऊ की तो घिग्घी बंध गई. एक क्षण तो ताऊ को लगा कि अपना तो रामनाम सत्य होगया.

 

पर जो इतनी आसानी से रामनाम सत्य करवा ले वो कैसा ताऊ?  सो ताऊ ने हिम्मत से काम लेना उचित समझा और बोला - यार शेर भाईजी, आप तो भतीजे होने का दम भर रहे थे और अब जान लेने पर उतर आये हो?

 

शेर बोला - देख बे ताऊ, तू ताऊ है तो ताऊ ही रहेगा. और मैं अगर भतीजा हूं तो भतीजा ही रहूंगा. पर जरा ये सोच कि मैं इस पिंजरे मे कितने दिनों से भूखा प्यासा बंद पडा था, और भूख के मारे मुझसे चला भी नही जारहा है. अब तुझको मैं खा लूंगा तो इस जंगल को उसका राजा वापस मिल जयेगा. और एक ताऊ कम हो गया तो कौन सी ताऊओं की कमी हो जायेगी? एक ढूंढों हजार ताऊ मिलेंगे. चल अब तैयार हो जा मेरे पेट मे जाने के लिये.

 

ताऊ ने अब भी जीने की आशा नही छोडी और बोला - यार शेर साहब, ये तो कृतघ्नता है आपकी. मैने आपके साथ भलाई की और आप भलाई का ये सिला दे रहे हो?

 

अब शेर जरा व्यंग से बोला - अरे ओ ताऊ, ये गीता ज्ञान किसी और को देना, मुझे मालूम है आजक्ल जिंदा रहने के लिये यही एक फ़ार्मुला है. हम तो जानवार हैं जो भूखे रहने पर ही ऐसे काम करते हैं. तुम इंसान कहलाने वाले तो रोज स्वाद के लिये कितने ही जानवरों को मार डालते हो? बस अब मुझसे भूख बर्दाश्त नही हो रही है. फ़िर भी तुम्हारी तसल्ली के लिये इस रास्ते (सडक) को पूछ लो कि मैं कुछ गलत काम तो नही कर रहा हूं?.

 

अब ताऊ के समने और कोई चारा ही  नही था. ताऊ भी समझ गया कि हम मनुष्यों की आदत इन जंगल के जानवरों को भी लग गई है. सो अपनी समस्या ताऊ ने सडक  को बताई कि मैने शेर के साथ भलाई की और अब ये मुझे खाना चाहता है. आप उचित न्याय किजिये.

 

रास्ता बोला - भाई इसमे क्या न्याय करना?  आजकल के न्याय के हिसाब से शेर आपको खायेगा ही. अब मुझे ही देखो ना, मैं लोगो को कितना अच्छा रास्ता चलने के लिये देता हूं ? फ़िर भी लोग मुझ पर ही गंदगी फ़ैलाते हैं. अत: शेर द्वारा तुमको खाया जाना निहायत ही न्यायसंगत है.

 

ताऊ ने सोचा कि अब कोई नही बचा सकता अपने को मरने से. इतनी ही देर मे शेर बोला - सुन  लिया ताऊ? अब भी तुमको लगता हो कि मैं अन्याय की बात कर रहा हूं तो इस सडक किनारे खडॆ आम के पेड से पूछ लो.

 

और शेर ने आम के पेड को पूछा कि - हे वृक्ष श्रेष्ठ, आप ही न्याय किजिये. और न्याय मे मनुष्यों के न्याय जितना विलम्ब ना करें. क्योंकी मैं कई दिनों का भूखा हूं.

 

इस पर आम का पेड बोला - हे वनराज आप तो बिल्कुल श्रेष्ठ और छाछ की छाछ और पानी का पानी करने वाले प्रजा पालक हो.  आपका निर्णय बिल्कुल न्यायोचित  है. 

 

और ताऊ सुनो आप अगर भलाई की ही बात करते हो तो  मुझे ही देखो ना. मैं लोगों को गर्मी मे शीतल छाया देता हूं. और इतने रसीले आम के फ़ल खिलाता हूं. फ़िर भी लोग मुझे पत्थर मारते हैं  आम  तोडने के लिये और कुल्हाडी से मुझको काट  डालते हैं. अत: शेर द्वारा आपको खाया जाना तर्कसंगत और सर्वथा न्यायोचित है.

 

अब ताऊ ने अपने प्राण बचने की उम्मीद छोड दी और प्रभु स्मरण करने लगा कि तभी  बसंती लोमडी उधर से निकल रही थी. लोमडी वैसे होती भी चतुर है और फ़टे मे पैर फ़ंसाने मे माहिर होती है. उसने मजमा लगा देखा तो आगई और सारा माजरा समझा.

 

अब बसंती लोमडी ने सोचा कि जबसे ये शेर पिंजरे मे था तबसे जंगल मे बडा आनन्द था. किसी जानवर का बच्चा भी गायब नही हुआ. अब इस ताऊ के बच्चे ने इसको बाहर कर दिया है तो खुद तो मरेगा ही और जंगल के जानवरों को मरवाने का इंतजाम भी कर दिया.

वहां आते ही बसंती बोली - युं कि ये माजरा क्या है? हमको कुछ समझ नही आया? कोई समझायेगा क्या हमको?

 

बसंती की बात सुनकर शेर ने उसकी तरफ़ तीखी नजरों से देखा और तुरंत ही बसंती बोली - सलाम वनराज. आज तो बडा अच्छा मोटा ताजा ताऊ हाथ लगा है आपके. बधाई हो.

इतनी देर मे ताऊ बीच मे बोल पडा - अरे बसंती बहन, देखो ना कैसा जमाना आ गया?  ये शेर पिंजरे मे बंद था और मैने इसको बाहर निकाल दिया और अब कहता है कि ताऊ  तुझको ही खाऊंगा. बताओ अब ये कहां का न्याय है? भलाई का जमाना ही नही रहा.

 

ताऊ के बोलते बोलते ही बसंती लोमडी बीच मे ही ताऊ को डपटकर बोली - अरे ओ ताऊ, जरा जबान संभाल कर बात कर. ये हमारे जंगल के महाराजाधिराज हैं. इनकी शान मे कुछ उल्टा सीधा बोला तो मुझसे बुरा कोई नही होगा.  किसकी ताकत है जो इनको पिंजरे में बंद करदे? तूने समझ क्या रखा है? लगता है तुझे दंड देना ही पडॆगा.

 

बसंती लोमडी की ऐसी चापलुसी भरी बाते सुनकर शेर तो गदगदायमान हो गया. और बोला - अरे वाह प्यारी बसंती लोमडी. तुझको मेरी इज्जत की कितनी चिंता है? पर सही बात है कि मैं सर्कश वालों के इस पास पडे  पिंजरे मे गलती से  फ़ंस गया था. और इस मुर्ख ताऊ ने ही मुझे बाहर निकाला था.

 

अपनी योजना अनुसार अब बसंती बडे नाज से बोली - अरे महाराज, आप भी क्या मजाक करते हैं. इस पिंजरे मे तो हम नही आ सकते तो हमारे इतने मोटे ताजे और बलशाली महाराज कैसे आये होंगे? जाईये हम आपसे नही बोलते. आप हम से ही मजाक करते हैं.

 

अब शेर तो बिल्कुल फ़ूल कर कुप्पा होगया और बोला - अरे नही बसंती. सच मे ही मैं इसमे बंद था. विश्वास नही होता ना? लो मैं  वापस घुसकर दिखाता हूं. पर तुम नाराज मत हो मेरे से.

 

और शेर वापस पिंजरे मे घुसा. शेर की पीठ पिंजरे के दरवाजे की तरफ़ थी. अब बसंती ने ताउ को आंखों ही आंखों मे इशारा किया और ताऊ ने बिजली की फ़ुर्ती से पिंजरे का दरवाजा बंद करके ताला लगा दिया.

 

शेर को जब असली बात समझ आई तो वो बसंती को गालियां देने लगा. बसंती बोली - अबे तेरे जैसे एहसान फ़रामोशों ने ही इस खूबसूरत दुनियां को बदसूरत बना रखा है. पर याद रख बसंती  तेरे जैसों इस जंगल के सत्ताईस चक्कर लगवा कर पिंजरे मे बंद करवाती रहेगी.

 

ताऊ ने बसंती को धन्यवाद दिया और चलने लगा तो बसंती बोली - क्या ताऊ? सिर्फ़ खाली पीली फ़ोकट धन्यवाद ही देगा क्या? अरे तेरे ब्लाग की टीम में  मुझको  भी शामिल करले ना. सुना है बहुत सारे जानवर तेरे कुनबे मे  हैं ?

 

ताऊ ने समय आने पर उसको भी शामिल करने का वादा किया और जान बची तो लाखों क्या करोडों पाये वाले भाव से वापस लौट आया.

 

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