जिधर देखो उधर बाढ ही बाढ....



संटू भिया के कबाडखाने में मित्र मंडली जमी हुई थी पोहे जलेबी के नाश्ते वाले साप्ताहिक कार्यक्रम में, पर संटू भिया परेशान नजर आरहे थे. उनसे पूछने पर पता चला कि वो बरसात नही आने से परेशान हो रहे हैं. सारे जमाने में बाढ आई हुई है और हमारे यहां बाढ तो छोडिये वर्षा के नाम पर सरकारी नलों से टपकते पानी की तरह इंद्र देवता बरस रहे हैं…यानि इंद्र देव भी अबकि बार सरकारी तरीके से जल प्रदाय कर रहे हैं. अभी तक शहर के तालाब भी पूरे नही भर पाये हैं. यह तो शहर वासियों का इंद्र देव की तरफ़ से घोर अपमान है….वाह रे इंद्र भगवान, सबको लड्डू और हमको फ़ीकी बूंदी भी नही? पर अब इंद्र देव का क्या, उन्होंने कोई शोले फ़िल्म के जय वीरू की तरह, ठाकुर से गब्बर को मारने की सुपारी तो  ली नही है कि बरसना ही पडेगा और बाढ भी लानी ही पडेगी.

माहोल को चिंताजनक देखकर रमलू भिया चाय वाले ने कहा – यार संटू भिया क्यों परेशान हो रहे हो? ना बरसे पानी तो मत बरसने दो, अपने यहां तो नर्मदा माई की किरपा है जो बारहों महिने पानी तो पिला ही देगी. इस बात पर भिया भडक उठे – रमलू तू अपनी काली जबान को लगाम देकर रखा कर, अरे बरसात नही होगी और बाढ नही आयेगी तो अपना जलवा कहां से दिखेगा?
अब ये जलवे वाली बात सुनकर हमारे चौंकने की बारी थी सो हमने प्रश्नसूचक चक्षुओं से संटू भिया की तरफ़ देखा तो वो बोले – अमा यार तुम तो कुछ समझते ही नही हो…अरे जब बाढ आती है हर साल तो हम निचली बस्तियों में अपने पठ्ठों की टीम को लेकर जाते हैं और वहां से गरीब लोगों को निकालकर सरकारी स्कूल और धर्मशालाओं में पहुंचाते हैं…..फ़िर उनके खाने पीने के भंडारे का इंतजाम करवाते हैं…और सबसे ज्यादा मजा तो तब आता हैगा जब अगले दिन हमारा फ़ोटों और खबर सब अखबारों में छ्पती हैगी..….कसम से हमारा सीना गर्व से तन जाता है और पुण्य मिलता है वो अलग से. पर इस बार लगता है इंद्र भगवान हमको पुण्य नही कमाने देगा और ना ही अखबार में फ़ोटो छपने देगा.

हमने कहा – इतना क्यों परेशान हो रहे हो? अखबार छोडो…हम तो तुम्हें टीवी में छा जाने की स्कीम बता सकते हैं? अब संटू भिया की प्रश्नसूचक निगाहे हमारे थोबडे की तरफ़ थी सो हमने जरा रूककर थोडा भाव खाते हुये कहा – देखो भिया यदि बाढ का इतना ही शौक है तो कुछ मुकेश भिया की तरह करो. देखो उन्होने मोबाईल की बाढ ला दी की नही? पहले इंटरनेट की बाढ लाये थे तब सब अखबार और टीवी में उनकी ही बाढ थी, उनकी इस बाढ में सारी टेलीकाम कंपनिया बह गई की नही? और आज फ़ोकट के फ़ोन की बाढ ला दी, जिसमे बडी बडी मोबाईल बनाने वाली कंपनियां बहती क्या तैरती नजर आयेंगी आपको. तुम भी कुछ बडा करने की सोचो….

संटू भिया ने जलेबी का एक टुकडा मुंह में रखते हुये कहा – अमा यार तुमतो ऐसे बात कर रिये हो जैसे हम सर सेठ हुकुम चंद जी वारिश हैंगे. भिया हमारे पास तो ये एक कबाड खाना है और इसे भी लुटा देंगे तो भी किसी टीवी या अखबार वाले के कानों पर जूं नही रेंगेंगी और सबसे बडी बात तो ये कि फ़िर हम बच्चों को पालेंगे कैसे?
 
हमने कहा संटू भिया आप बस अपने बच्चे ही पालिये….ये बाढ वाढ के सपने छोडिये. अरे बाढ तो आजकल चीन और पाकिस्तान के खिलाफ़ बयान देने वाले वीर बहादुरों की आई हुई है. ये वीर बहादुर अपने बयानो की बाढ से अब की अब दोनों से सर फ़ुट्टोवल करा सकते हैं. जिधर टीवी पर देखो बस यही बाढ लाते रहते हैं.  आजकल चीन के साथ डोकलाम मुद्दे पर बाढ आई हुई है, कुछ दिन पहले जीएसटी की बाढ आई हुई थी. कल किसी और की बाढ ले आयेंगे. तुमको टीवी और अखबार में छ्पने का शौक है तो हमारे शहर में बाढ लाकर पुण्य कमाने की बजाये जाकर किसी राजनैतिक पाटी के प्रवक्ता बन जावो और रोज जमकर बाढ लावो…हमारे शहर को तो बख्शो भिया.

#हिन्दी_ब्लॉगिंग

Comments

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " स्व॰ कर्नल डा॰ लक्ष्मी सहगल जी की ५ वीं पुण्यतिथि “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. तरह -तरह की बाढ़! रोचक और कटाक्षपूर्ण भी .
    'चिंटू भिया' नए पात्र taau मंडली में ? :)

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