ताऊ पहेली - 53

प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम और सभी मुस्लिम भाई बहनो को 'इस्लामिक नव वर्ष 'की शुभकामनाएँ.

ताऊ पहेली अंक 53 में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते ही हैं कि अब से रामप्यारी का हिंट सिर्फ़ एक बार ही दिया जाता है. यानि सुबह 10:00 बजे ही रामप्यारी के ब्लाग पर मिलता है. बाकी सभी नियम कानून पहले जैसे ही हैं.


यह कौन सी जगह है?


ताऊ पहेली का प्रकाशन हर शनिवार सुबह आठ बजे होगा. ताऊ पहेली के जवाब देने का समय कल रविवार दोपहर १२:०० बजे तक है. इसके बाद आने वाले सही जवाबों को अधिकतम ५० अंक ही दिये जा सकेंगे


अब आप रामप्यारी के ब्लाग पर हिंट की पोस्ट सुबह दस बजे ही पढ सकते हैं! दूसरा हिंट नही दिया जायेगा.


इस अंक के आयोजक हैं ताऊ रामपुरिया और सु,अल्पना वर्मा



नोट : यह पहेली प्रतियोगिता पुर्णत:मनोरंजन, शिक्षा और ज्ञानवर्धन के लिये है. इसमे किसी भी तरह के नगद या अन्य तरह के पुरुस्कार नही दिये जाते हैं. सिर्फ़ सोहाद्र और उत्साह वर्धन के लिये प्रमाणपत्र एवम उपाधियां दी जाती हैं. किसी भी तरह की विवादास्पद परिस्थितियों मे आयोजकों का फ़ैसला ही अंतिम फ़ैसला होगा. एवम इस पहेली प्रतियोगिता में आयोजकों के अलावा कोई भी भाग ले सकता है.


मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम
मिस.रामप्यारी का ब्लाग

 

नोट : – ताऊजी डाट काम  पर हर सुबह 8:00 बजे और शाम 6:00 बजे नई पहेली प्रकाशित होती हैं. यहा से जाये।

"राज ब्लागर के पिछले जन्म के" खुशदीप ने उगलवाया ताऊ की शादी का राज

पिछले अंक मे आपने पढा था कि खुशदीप ने ताऊ को पिछले जन्म में लेजाकर सवाल पूछना शुरु किया. ताऊ अब अपने पिछले जन्म मे जब वो झंडू सियार था वहां पहुंच गया. अब यहां पर ताऊ को हम ताऊ झंडू नेता के नाम से जानेंगे... अब आगे पढिये.

पिछले जन्म में झंडू नेता तक पहुंचा ताऊ


खुशदीप : हां तो झंडू नेता जी, अब ये बताईये कि आपको क्या दिखाई दे रहा है?

ताऊ झंडू : जंगल मे विद्रोह...बगावत...मारकाट ..चारों तरफ़ आजादी की लडाई चल रही है.

खुशदीप : और क्या दिखाई देरहा है? आप क्या कर रहे हैं?

ताऊ झंडू : मैं...मैं...मेरे गले मे एक लेपटोप लटका हुआ है...मैं रिपोर्टिंग कर रहा हूं....

खुशदीप : हां ताऊ झंडू, आगे बता...क्या हुआ?

ताऊ झंडू : अभी अभी खबर आई है कि राजा शेरसिंह जी, जो कि महल मे घेर लिये गये थे उनको जनता ने महल मे घुसकर बंदी बना लिया है...चारो तरफ़ खुशी की तेज लहर सी दौडती दिख रही है....और अब सब तरफ़ शांति है...लोग अब अमन चैन से प्रजातंत्र मे रहने की सोच रहे हैं...अब सब तरफ़ जनता का राज होगा.

खुशदीप : हां तो ताऊ झंडू, नू बता कि अब वहां चुनाव हुये कि क्या हुआ? क्या दीख रहा है अब?

ताऊ झंडू : अब सब आजादी मे शामिल नेताओं की मिटींग चल रही है. एक मिनट...एक मिनट...

खुशदीप : हां ताऊ झंडू बोल..बोल के बोलरया था?

ताऊ झंडू : हां..अब साफ़ दिख भी रहा है और सुनाई बःई देरहा है...हमारा नेता कैसा हो? झंडू सियार जैसा हो? ये नारे तेज होते जारहे हैं. भीड सभा स्थल के आसपास इकठ्ठी हो रही है.

खुशदीप : हां और बता ताऊ झंडू..आगे क्या हो रहा है?

ताऊ : झंडू : हां तो आगे ....सभी के विरोध के बावजूद...एक रिटायर्ड और थके से स्वतंत्रता सेनानी रमलू हाथी को देख पा रहा हूं...एक मिनट...एक मिनट....

खुशदीप : हां बता ..आगे के हुआ?

ताऊ झंडू : हां अब रमलू दादा स्पीच दे रहे हैं...उन्होंने खडे होकर बोलना शुरु किया.....मेरी जंगल की प्यारी प्रजा....आप सबके सहयोग से और कुर्बानियों से हमने राजशाही को उखाड फ़ेंका है. आप मुझे सरपंच बना कर जंगल का राज सौपना चाहते हैं..पर मैं स्वेच्छा से झंडू नेताजी को सरपंच बनाना चाहता हूं..इनकी अथक रिपोर्टिंग और सूझबूझ से हम यह जंग जीतने मे कामयाब हुये हैं...मैं अब थक चुका हूं..आपकी सेवा मैं करता रहुंगा और इनको सब मार्गदर्शन भी देता रहुंगा...

खुशदीप : आगे बोल ताऊ झंडू..आगे बोल..इब के होरया सै?

ताऊ झंडू : इब आगे ...मुझको जंगल का सरपंच बना कर राजकाज सौंप दिया गया है. मैं एक उंचे से सिंहासन पर बैठा हूं...सब मेरा कहना मानते हैं..सब अमन चैन चल रहा है....

इतनी ही देर मे खुशदीप के मोबाईल की घंटी बजती है. ...वो फ़ोन उठाकर...हैल्लो..हैल्लो..अरे भाई मैं खुशदीप बोलरया सूं..थम कुण बोलरे हो?

उधर से आवाज आई - अरे खुशदीप भाई...मैं समीरलाल..बोलरया सूं कनाडे से...आवाज भी नही पीछाणते के
आजकल..

इधर से खुशदीप बोलने लगा --अरे रे समीरजी...रामराम..जी रामराम.....हुक्म करो जी मालकां..

समीरलाल जी - अरे भई हुक्म काहे का?..जरा ताऊ की पोलपट्टी अच्छी तरह खोलना..पहली बार चक्कर मे चढा है....कहां तक पूछताछ हुई?

खुशदीप : अजी पूछताछ मे तो ताऊ...कोई बहुत बडा स्वतंत्रता सेनानी लाग रया सै...इब लगता है..सीरीयल का भट्टा बैठना तय है...स्वतंत्रता सेनानी के किस्से कौन पसंद करेगा?

समीर जी - आप नू करो..जरा ताऊ के शादी विवाह के किस्से के बारे मे पूछना शुरु करो..कुछ ना कुछ उगलेगा ही..फ़िर नमक मिर्च लगा लेना.

खुशदीप : हां ये आपने बहुत सही सलाह दी..बस अब शुरु करता हूं उसी लाईन पर.....और अब पूछताछ का दौर आगे बढा.
..

खुशदीप : हां तो ताऊ झंडू..नू बता कि तेरी ताई..अरे मेरा मतलब..हमारी ताई और आपकी लुगाई कहां है इस वक्त?
ताऊ झंडू : मुझे दिख नही रही है अभी कहीं....

खुशदीप मन ही मन जाड (दांत) पीसते हुये बोला - ताऊ झंडू..तेरे से सारे राज उगलवा कर रहुंगा...और खुशदीप ने डाक्टर को इशारा किया ..और डाक्टर ने एक इंजेक्शन ताऊ के और ठोक दिया...और थोडी देर मे असर होते ही फ़िर बात चीत का सिलसिला शुरु हुआ.

खुशदीप : ताऊ झंडू..नू बता कि तेरी शादी किससे हुई?

ताऊ झंडू : अरे इब साफ़ साफ़ दिखण लाग रया सै....जब मैं सरपंच बन गया तब मेरी शादी झुनकू भेडिये की पांचवी रुपवती कन्या झुनिया से हुई?

खुशदीप : ताऊ झंडू , एक बात समझ ना आई कि तू सियार और वो भेडिया? यह बेमेल विवाह कैसे हुआ?

ताऊ झंडू : असल मे झुनकू भेडिया मुझे नीची जाति का समझ कर अपना दामाद नही बनाना चाहता था..पर जब मैं सरपंच बन गया तो..तो मैने ऐसी चाल चली की उसको अपनी कन्या कि शादी मुझसे करनी ही पडी.

खुशदीप : ताऊ झंडू...ये तो बडी रोचक बात हो गई? जरा याद करो ठीक से और बताओ...कि क्या हुआ था?

ताऊ झंडू : हुआ ये था कि जब मैं सरपंच बन गया तो पूरे जंगल की सत्ता पर मेरा अधिकार होगया. और अब मुझे सिर्फ़ झुनिया से शादी करनी थी. पर झुनकू भेडीय़ा तैयार नही था. उधर झुनिया की सगाई भी एक सुंदर और शरीफ़ पढे लिखे लडके से होगई. तो मेरी चिंता बढ गई. जबरदस्ती और अगवा करके शादी करने मे मेरी इमेज खराब होने का डर था. सो मैने एक चाल चली.

पिछले जन्म का ताऊ झंडू "सरपंच"


खुशदीप : वो क्या चाल थी ताऊ झंडू?

ताऊ झंडू : एक दिन मैं शाम को नदी किनार की उंची चट्टन पर अपने अंगरक्षकों के साथ खडा था कि वो लडका उधर आ निकला, जिसकी झुनिया के साथ सगाई हुई थी.

खुशदीप : फ़िर क्या हुआ ?

ताऊ झंडू : हुआ ये कि उसको देखते ही मेरे अंदर का नेता जाग उठा...मैने तुरंत उसको रोका और पूछा...इधर क्यों आया है?

वो बोला - सर, पानी पीने आया हूं.

मैने कहा : क्यों बे साले? गाली देता है?

वो बोला - सर गाली तो आप देरहे हैं, साफ़ साफ़ "साले" बोल रहे हैं? मैने कहां गाली दी आपको?

मैने कहा : अबे, फ़िर "सर" कहके गाली दी? हरामजादे ठहर तेरे को तो मैं बताता हूं? अबे हम नेता हैं..हम साले, हरामजादे की कुछ भी गाली दे सकते हैं..पर तू कौन? हमको सर की गाली देने वाला?

वो बोला - जबान संभालिये अपनी...आप साला हरामजादा..बोले जा रहे हैं...

मैने कहा - अबे ठहर साले ..तेरे को तो मैं बताता हूं...और मैने मेरे अंगरक्षकों को इशारा किया..उस कच्चे से बालक को पकड कर मूंडी मरोड दी गई और हम और हमारे अंगरक्षक उसको वहीं चट कर गये..

खुशदीप : इसके बाद क्या हुआ ताऊ?

ताऊ झंडू : बस नेताओं की तरह जंगल थाने मे मेरे अंगरक्षकों ने रिपोर्ट लिखवा दी कि झुनकू का होने वाला दामाद पानी पीने नदी किनारे आया था. तेज बहाव मे पैर फ़िसल गया और झंडू नेताजी और उनके अंगरक्षकों के लाख कोशीश करने पर भी वो बचाया नही जा सका....मेरे अंगरक्षकों को इस बात पर सेवा मेडल दिलवा दिये गये.

खुशदीप : आगे क्या हुआ झंडू ताऊ?

झंडू ताऊ : उधर झुनकू भेडिये के घर रोना पीटना मचा था. सब झुनिया जैसी सुंदर और रुपवती लडकी की किस्मत को कोस रहे थे. और झुनकू और उसकी बीबी इस सदमे मे थे कि अब इस लडकी से कौन शादी करेगा?

शाम को हम पहुंचे अपनी पूरी तैयारी के साथ झुनकू के यहां गम व्यक्त करने.वहां वही रोना पीटना...वही पुराना खटराग चल रहा था...अब झुनिया के हाथ कैसे पीले होंगे? कौन इसका हाथ थामेगा?

हम तुरंत खडे हुये और सबको डांट लगाई...खबरदार किसी ने झुनियां की किस्मत को कोसा तो...अरे अब हम वो लडका तो वापस नही ला सकते, पर हम मर थोडी गये?

खुशदीप : हां हां..ताऊ झंडू, बता बता और आगे चल..अब आई असली बात..जो इस सीरीयल को हिट करवायेगी...

ताऊ झंडू : अब इसके बाद हमने घोषणा कर दी कि हम करेंगे झुनिया से शादी...हमारे इतनी घोषणा करते ही हमारे चेले चमचे जो कि ट्रेंड थे, उन्होने हमारी जयजय कार के नारे बुलंद कर दिये और किसी को कुछ समझ आता उसके पहले ही पंडित चंपू बंदर जी ने झुनिया का हाथ पकडकर हमारे हाथ मे दे दिया और सात चक्कर खिलवा दिये फ़ेरों के नाम पर...बस हमारे इस कार्य कि बहुत भूरी भूरी प्रशंशा हुई. अगले दिन जंगल के सारे अखबार जो कि हमारे ही सेट किये हुये थे...उन्होने जबरदस्त कवरेज दिया और हमारी ख्याति गरीब का मसीहा के तौर पर चहुं और फ़ैल गई....... (क्रमश:)


(शेष अगले भाग मे.....)

"राज ब्लागर के पिछले जन्म के" खुशदीप ने फ़ंसाया ताऊ को

शुक्रवार को शाम को हम रतनसिंह जी शेखावत के साथ घर के बरामदे में बैठे बैठे हुक्का पी रहे थे कि भतिजे खुशदीप सहगल का फ़ोन आया . बोले - ताऊ रामराम,

मैं बोल्या - भाई घणी रामराम...और सुणा के हाल चाल सैं?

खुशदीप : बस ताऊ नू समझ ले के हाल चाल तो ठीक ठाक सैं, बस तेरे तैं मिलना है. कब आजाऊं?

मैने कहा - यार मैं कौन सा तोपचंद हूं? मैं तो फ़ोकट चंद हूं जब तेरी मर्जी हो, आजा. ये भी तेराई घर सै.

और अगले ही दिन खुशदीप आ धमका.रामराम श्याम श्याम के बाद चाय वाय पी और फ़िर बात चीत शुरु हुई.

ताऊ, रतनसिंह शेखावत और खुशदीप बात करते हुये!


खुशदीप - ताऊ बात नू है कि मैं एक सीरीयल बणा रहा हूं "राज ब्लागर के पिछले जन्म के" बस इसी सिलसिले मे तेरे पास आया सूं. ताऊ नू समझ ले कि इसमे तेरा सहयोग मांगने ही आया सूं.

मैं बोल्या - भाई या तो घणीई बढिया बात सै. तू नू कर कि समीरलाल जी पै बणाले पहला ही एपिसोड... समझ ले कि सुपरहिट हो ज्येगा तेरा सीरीयल..और उसके बाद अरविंद मिश्रा जी को पकड ले.. मन्नै पक्का यकीन सै के दोनूआं के मूंह से ऐसे राज बाहर निकलेंगे कि तहलका मच जायेगा.

खुशदीप - अरे ताऊ , उन दोनों से बात की थी पर उनके पास शूटिंग के लिये समय नही है, और तू ठहरा बधाऊ (फ़ालतू) आदमी. तो यो पहला एपिसोड तेरे उपर ही बणा लेते हैं.

मैं बोल्या - यार खुशदीप, तू मेरे से क्युं दुश्मनी निकालण लागरया सै भाई? ताऊ नै तेरा के बिगाड राख्या सै? मेरे पीछे वैसे ही भतेरे कूंगर लागरे सैं. तेरे आगे दो जोडे हाथ... मन्नै माफ़ कर यार.

खुशदीप बोल्या - अरे ताऊ..तैं समझता कोनी..तेरा के बिगड ज्येगा? नू बता कि मूसल का मेह (बरसात) म्ह के भीजेगा ? बावलापन मतन्या करै. तन्नै पिस्से भी अच्छे दिलवा दूंगा प्रोड्युसर तैं.

इब भाई जब ये पता लगा कि पिस्से भी मिलेंगे तो हमने पूछा - अच्छा तो नू कह ना की कमाई आला काम सै? बता के दिलवा देगा?

खुशदीप बोल्या - ताऊ, देख तन्नै हवाईजहाज का तो रिटर्न टिकट दिलवा दूंगा. और दिल्ली पहुंच कै एक कार मिल ज्येगी घूमण खातिर. और के चहिये तन्नै? बता?

मैं बोल्या - भाई ये तो बात तेरी पसंद आई, पर नू बता कि कार कौन सी दिलवावेगा?

खुशदीप बोल्या - अरे ताऊ, कोई सी भी हो, जो बखत पै होगी वही भिजवा दूंगा. तन्नै कौन सी घर ल्यानी सै?

मैं बोल्या - अरे इब्बी तो तैं कहण लागरया था कि कार दिलवा देगा? इब के होगया? देख भाई , मेरे को तो वो लम्बी सी मारोती दिलवाता होये तो तेरे सीरीयल म्ह काम करुंगा नही तो नही.

खुशदीप बोल्या - अरे बावली बूच ताऊ, तू नू बता, के तू लाट साहब होरया सै? ना तू के दिलिपकुमार हो राख्या सै या अमिताभ बच्चन हो राख्या सै? मैं तो नू समझ के तेरे को काम दिलवा रहा था कि ताऊ आजकल बेकार ठाली (खाली) बैठ्या सै..दो पिस्से कमा लेगा..और तू तो भाव खावण लागरया सै?

बात बिगडती देख कर रतनसिंह जी शेखावत ने हमारा हाथ दबाकर इशारा किया कि ताऊ इस मौके को मत छोडना तो हम ने पूछा कि भाई साफ़ साफ़ बता कि के करना पडेगा? और कितने पिस्से दिलवा देगा?

खुशदीप बोल्या - देख ताऊ, साफ़ और सीधी बात सुण ले. तेरे को आवण जावण का जहाज का टिकट, और वहां दिल्ली का ठहरने और खाने पीने का सारा खर्च और साथ में डेढ लाख रुपये भी दिलवा दूंगा. और रुकने के लिये बिना मच्छरों वाले कमरे का इंतजाम भी मुफ़्त मे करवा दूंगा. हो मंजूर तो बोल ..नही तो तू जाने और तेरा काम.

अब डेढ लाख हाथ मे आने की बात तो दूर हमने कभी सोचा भी नही था कि - इस फ़ोकट से काम के कोई डेढ लाख रुपये और सारा खर्च भी देदेगा. और हवाईजहाज की सैर मुफ़्त में? बस सोचके ही मन हवा मे उडने लग गया. हमने तुरंत कहा - अरे भाई खुशदीप, इब तू भी के याद करेगा कि कोई ताऊ मिल्या था. इब नू बता के मन्नै के करना पडॆगा?

खुशदीप बोल्या - अरे ताऊ तन्नै कुछ भी ना करना सै? जो भी करेगा वो तो डाक्टर ही करेगा.

मैं बोल्या - भाई, यो सीरीयल बना रया सै या ताऊ का इलाज करवा रया सै? अरे डाक्टर का के काम इसमें?

खुशदीप बोल्या - ताऊ, तेरे को टेबल पै लिटा कर डाक्टर एक इंजेक्शन ठोकेगा...और फ़िर तेरे को तेरे पिछले जन्म म्ह लेजायेगा.

मैं बोल्या - यार, यो इंजेक्शन लगा के पिछले जन्म मे कोई किस तरियां ले जा सके सै? तेरी बात समझ म्ह नही आरही सै? तू कहीं मेरा नारको वारको करवाकै मेरी पोल खोल दे और बेइज्जती खराब करवादे मेरी?

खुशदीप बोल्या - ताऊ, ज्यादा समझण की जरुरत भी कोनी. तू तो यो पकड ५० हजार की गड्डी नगद एडवांस की और ये ले हवाईजहाज का टिकट...और सोमवार को दिल्ली आजाईयो..बाकी सब हम पर छोड दे. और काम पूरा होने पर तेरे को बाकी के पिस्से और दिलवा दूंगा.

और एक कांट्रेक्ट फ़ार्म सामने रखता हुआ खुशदीप बोला - ताऊ तन्नै अगर मंजूर हो तो ...यहां साईन मार और इब मैं चलूंगा..घणी देर हो ली सै इब.

अब जैसे ही खुशदीप ने ५० हजार की करारी गर्मा गर्म गड्डी हमारी हथेली पर रखी..हमारी हथेली उस गड्डी की गर्मी से जलने लग गई..क्योंकि इससे पहले हमने कभी ५०० का सिंगल नोट नही पकडा था. और ये तो पूरे सौ की कडक गड्डी थे..सो हमने कुछ आगा पीछा सोचे बिना उस कंट्रेक्ट फ़ार्म पर साईन मार दिये. और सोमवार को दिल्ली जाने की तैयारी करने लगे. ...

सोमवार को सबेरे सबेरे ही दिल्ली पहुंच गये. वहां पर हमको एक होटल मे ठहरा दिया गया. हम तैयार होकर स्टूडियो पहूंच गये. वहां खुशदीप ने हमारा सभी से परिचय कराया. उनमे एक हिप्नोटाईज करने वाला डाक्टर सरीखा भी था.

अब हमको वो एक स्टूडियो के अंदर लेगये. चारों तरफ़ वहां उपर कैमरे लगे थे. सामने एक टेबल जैसी थी. उस पर हमको लिटा दिया गया.

ताऊ को सम्मोहित करते हुये खुशदीप


अब हमसे वो हिप्नोटाईज करने वाला बोला - ताऊ, मैं जैसे जैसे कहूं, वैसे वैसे करना...

मैं बोल्या - ठीक सै भाई. इब बोल के करना सै..

वो बोलने लगा -- ताऊ आंख बंद करले...

मैने आंखे बंद करली.

वो बोला - ताऊ थोडा पीछे की और लौटो.

मैं बोल्या - अरे बावलीबूच सै के तू? नू बता पीछे की और कित लौटू? आडे जगह दिख सै के तेरे इस जरा से स्टूडियो में...पीछे की और निरी दीवार तन्नै दिखै कोनी के?

वो बोला - अरे मेरे ताऊ...पीछे की और यानि तेरी जिंदगी मे पीछे की और..

मैं बोल्या - यार तो नू साफ़ साफ़ कह ना...ले लौट गया पीछे..और बता कितनी पीछे जाऊं...?

अब खुशदीप बीच मे ही बोला - डाक्टर साब ..ये ताऊ बावली बूच है. इसको मैं ही सम्मोहित करुंगा. ये मेरी भाषा ही समझता है. सो अब ताऊ को सम्मोहित करने का काम खुशदीप ने संभाल लिया.

खुशदीप ने आदेश देने शुरु किये ...मैं करता रहा.....आखिर वो मुझे...मेरे बचपन के एक साल की अवस्था मे लौटा लेगया....और बोला - ताऊ अब तुम अपने पिछले जन्म मे लौटो...लौटो...कहां हो तुम?

मैं बोला - भाई..ये मैं तो जंगल मे आगया....मैं ...मैं...ये कहां आगया?

खुशदीप बोला - हां अब तुम कौन हो...?

मैं बोला - मैं...मैं सियार हूं....सियार....

खुशदीप ने पूछा - कौन सियार?

मैं बोला - अरे जानते नही क्या? मैं हूं जंगल का एक्स नेता सरपंच...और ब्लागर यानि कि झंडू नेता..

खुशदीप ने पूछा - हां और पीछे की लौटो...ये बताओ कि तुम ब्लागर कैसे बने?

मैं बोला - ये बहुत दुख: भरी लंबी कहानी है...

खुशदीप ने कहा - हां थोडा और पीछे ..और पीछे लौट चलो... हां अब सुनावो..

मैं बोला - लौट गया..अब जंगल मे शेर का राज है....चारों तरफ़....आजादी की लडाई चल रही है...मैं भी आजादी की लडाई मे शामिल हूं....सब अपनी तरह से आजादी की लडाई मे योगदान दे रहे हैं...मैं ब्लागिंग द्वारा योगदान दे रहा हूं.

खुशदीप बोला - हां अब ठीक है...यहां से हम सवाल पूछेंगे...तुम जवाब देते जाना...

खुशदीप ने पूछा - हां तो झंडू नेता जी, आप कहां के रहने वाले हो? घर मे कौन कौन हैं? अपना परिचय दिजिये नेताजी.

मैं बोला - झंडापुरम जंगल का...मेरा नाम झंडू नेता...हम घर मे चार भाई बहिन हैं...पिताजी राजा शेरसिंह जी के यहां सरकारी मुलाजिम हैं...मैं बागियों के साथ मिलकर जंगल को राजशाही से मुक्ति दिलाकर प्रजातंत्र स्थापित करने के लिये लडाई लड रहा हूं.....

(क्रमश:)

नोट : अगले भाग मे पढिये ..ताऊ के पिछले जन्म के गुप्त और सनसनीखेज राज..................

ताऊ पहेली - 52 :विजेता श्री काजलकुमार

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 52 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है शहीद 'यू कियांग नोंगबा का स्मारक ,मेघालय.

शहीद 'यू कियांग नोंगबा का स्मारक ,मेघालय


और इसके बारे मे संक्षिप्त सी जानकारी दे रही हैं सु. अल्पना वर्मा.

बहनों और भाईयो नमस्कार. आईये अब आज के पहेली के स्थान के बारे में कुछ जानते हैं.
मेघालय अर्थात 'मेघों का घर'!
21 जनवरी, 1972 को मेघालय ,भारत देश के एक पूर्ण राज्‍य के रूप में अस्तित्‍व में आया. जनसंख्या 2,318,822 है.


खासी, गारो तथा अंग्रेजी भाषाओं वाले इस राज्य की राजधानी शिलॉंग है.इस पहाड़ी राज्य के उत्तरी और पूर्वी सीमाएं असम से और दक्षिणी तथा पश्चिमी सीमाएं बंगलादेश से मिलती हैं.लगभग ८० प्रतिशत जनसंख्‍या आजीविका के लिए मुख्‍य रूप से खेती-बाड़ी पर निर्भर है.‘का पांबलांग-नोंगक्रेम’ ,शाद सुक मिनसीम, बेहदीनखलम जयंतिया तथा वांगला प्रमुख त्योहार हैं.

इस राज्य का एक मात्र हावई अड्डा उमरोई में हैं.

मुख्य पर्यटन स्थल हैं-शिलॉंग चोटी, वार्ड लेक, लेडी हैदरी पार्क, पोलो ग्राउंड, मिनी चिडियाघर, एलीफेंट जलप्रपात.यहां का गोल्‍फ कोर्स देश के बेहतरीन गोल्‍फ कोर्सों में से एक हैं.यहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती देखते ही बनती है.पर्यटकों के रहने के लिए प्राइवेट ही नहीं सरकार के गेस्ट हाउस भी उपलब्ध हैं.अधिक जानकारी के लिए अधिकारिक वेब साइट देखीए-
http://meghalaya.nic.in/


आईए अब शहीद 'यू कियांग नोंगाबा 'के बारे में जानते हैं-
तोगान संगमा,यू तिरोत गाओ,यू कियांग नोंगाबा -


राज्य के इन तीन वीर शहीदों के नाम भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में
सुनहरे अक्षरों में लिखे गये हैं.यू कियांग नोंगा बा ने १८५७ में अंग्रेजों के खिलाफ सिपाही विद्रोह में मेघालय के आदिवासियों का नेतृत्व किया था.

राजा राजेंद्र सिंह जयन्तीयापुर के राजा थे,ब्रिटिश सरकार ने धोके से उनका मैदानी राज्य हथिया लिया था.और उन्हे पहाड़ी इलाक़े का प्रशसन देने का विकल्प रखा जिसे राजा ने ठुकरा दिया.

१८३५ से १८५३ तक जैसे तैसे सब चलता रहा लेकिन जब १८६० में अँग्रेज़ी हुकूमत ने निवासीओं पर गृह कर लगा दिए तब उनके सब्र का बाँध टूट गया और विरोध की आवाज़ें गूंजने लगीं.उसी साल जब गृह कर के साथ साथ आयकर भी लगा दिया गया और यह भी अफवाहें घूमने लगी की पॅयन और सुपारी की बिक्री पर भी सरकार टेक्स लगाने जा रही है तब स्थानीय लोगों ने गुट बनाए और विद्रोह के आयोजन का नेतृत्व और मार्गदर्शन किया युवक यू कियांग नोंगा बा ने !

१८६२ में उठी क्रांति की लहरें इतनी तेज़ थी कि सात रेजिमेंटों और सैनिकों की टुकड़ी इनके विद्रोह को दबाने के लिए लगवाई गयी.यू कियांग नोंगा बा बेहद चतुर था वा अपना सभी कार्य बहुत सफाई से करता था जिस से वह काफ़ी समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा.यहाँ तक की ब्रिटिश गुप्तचर भी परेशान हो गये थे.मगर उसकी पहचान ना पा सके.दूसरा विद्रोह ३ सप्ताह चला और उस में बहुत से आदिवासी मारे गये.

३० दिसंबर ,१८६२ में यू कियोंग को धोखे से पकड़ लिया गया और सरे आम फाँसी दी गयी.यू कियांग ने फाँसी लगने से पहले साफ शब्दों में लोगों से कहा था कि फाँसी लगने के बाद रस्सी पर मेरा सिर अगर पूर्व की तरफ लटकता है तो यह देश १०० साल के भीतर आज़ाद हो जाएगा.और अगर यह पश्चिम की तरफ होता है तो यह देश अँग्रेज़ों से कभी आज़ाद नहीं हो पाएगा.

कितने सच उनके शब्द थे, उनके चेहरे के लिए पूर्व की ओर हो गया और भारत के एक सौ साल के भीतर मुक्त हो गया!

ऐसे वीर शहीदों को हमें कभी भूलना नहीं चाहीए जिनके बलिदान से ही आज हम खुली हवा में जी रहे हैं साथ ही अपनी इस आज़ादी को बचाए रखना और देश को एकता में बाँधे रखना भी बेहद आवश्यक है.

अभी के लिये इतना ही. अगले शनिवार एक नई पहेली मे आपसे फ़िर मुलाकात होगी. तब तक के लिये नमस्कार।



आज के सम्माननिय विजेता क्रमश: इस प्रकार हैं. सभी को हार्दिक बधाई!

 

 

  

 
  

  श्री काजलकुमार, अंक १०१ बधाई
 श्री प्रकाश गोविंद अंक १०० बधाई
 सुश्री सीमा गुप्ता  अंक ९९ बधाई
 श्री मीत अंक ९८ बधाई
 श्री संजय बेंगाणी अंक ९७ बधाई
 सुश्री प्रेमलता पांडे अंक ९६ बधाई
 श्री उडनतश्तरी अंक ९५ बधाई
  प.श्री डी.के. शर्मा "वत्स", अंक ९४ बधाई


निम्न महानुभावों के हम बहुत आभारी हैं जिन्होने इस अंक में भाग लेकर हमारा उत्साह बढाया. हार्दिक आभार.

श्री विवेक रस्तोगी
श्री ललित शर्मा,
श्री अविनाश वाचस्पति
सुश्री निर्मला कपिला
डा.रुपचंद्र शाश्त्री "मयंक,
श्री सुशील कुमार छौक्कंर
सुश्री वंदना
श्री रतनसिंह शेखावत
ब्लाग चर्चा मुन्नाभाई की
गौतम राजरिशी
श्री दिगम्बर नासवा
श्री मुरारी पारीक
श्री सैयद
अभिशेक ओझा

आप सभी का बहुत आभार !
अच्छा अब नमस्ते.सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. ताऊ पहेली – 52 का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया. अगली पहेली मे अगले शनिवार सुबह आठ बजे आपसे फ़िर मिलेंगे तब तक के लिये नमस्कार.

ताऊ पहेली - 52

प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम.

ताऊ पहेली अंक 52 में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. पिछले अंक से कुछ सामान्य से बदलाव हुये हैं. पहला बदलाव तो यह है कि रामप्यारी यहां की बजाए अपना सवाल सुबह 8:00 बजे ही ताऊजी डाट काम पर पूछेगी. अगर आप उसके सवाल का जवाब देना चाहे तों यहां जाकर जवाब दे सकते हैं और सही जवाब देकर 30 नंबर प्राप्त कर सकते हैं.

दूसरा और महत्वपुर्ण बदलाव यह है कि अब से रामप्यारी का हिंट सिर्फ़ एक बार ही दिया जायेगा जो कि सुबह 10:00 बजे ही उसके ब्लाग पर मिलेगा. बाकी सभी नियम कानून पहले जैसे ही हैं.


यह कौन सी जगह है?


ताऊ पहेली का प्रकाशन हर शनिवार सुबह आठ बजे होगा. ताऊ पहेली के जवाब देने का समय कल रविवार दोपहर १२:०० बजे तक है. इसके बाद आने वाले सही जवाबों को अधिकतम ५० अंक ही दिये जा सकेंगे


अब आप रामप्यारी के ब्लाग पर हिंट की पोस्ट सुबह दस बजे ही पढ सकते हैं! दूसरा हिंट नही दिया जायेगा.


इस अंक के आयोजक हैं ताऊ रामपुरिया और सु,अल्पना वर्मा



नोट : यह पहेली प्रतियोगिता पुर्णत:मनोरंजन, शिक्षा और ज्ञानवर्धन के लिये है. इसमे किसी भी तरह के नगद या अन्य तरह के पुरुस्कार नही दिये जाते हैं. सिर्फ़ सोहाद्र और उत्साह वर्धन के लिये प्रमाणपत्र एवम उपाधियां दी जाती हैं. किसी भी तरह की विवादास्पद परिस्थितियों मे आयोजकों का फ़ैसला ही अंतिम फ़ैसला होगा. एवम इस पहेली प्रतियोगिता में आयोजकों के अलावा कोई भी भाग ले सकता है.


मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम
मिस.रामप्यारी का ब्लाग

 

नोट : – ताऊजी डाट काम  पर हर सुबह 8:00 बजे और शाम 6:00 बजे नई पहेली प्रकाशित होती हैं. यहा से जाये।

अरे सत्यानाशी ताऊ..मैने तेरा क्या बिगाडा था?

इस दुनियां के दस्तूर बडे निराले हैं. असल मे जो खतरनाक दिखाई देता है वो खतरनाक नही होता. और जो शरीफ़ और नेक दिल दिखाई देता है वो उतना ही शातिर बदमाश और जानलेवा सिद्ध होता है. ये अनेकों बार की आजमाई हुई बात है.

चम्पा और रूपा जंगल की तरफ़ जाते हुये


अक्सर चंपा गधेडी को ईंधन वगैरह लेने जंगल जाना पडता था. उसके श्रीमान संतूनारायण जी गधे तो कमाने के लिये परदेश में ही ज्यादा रहा करते थे. चम्पा बहुत समझदार तथा बुद्धिमान शरीफ़ खातून थी. गांव गली के शोहदे भाभीजी ..भाभीजी..कह कर उससे बात जरुर लिया करते थे..पर उनको मालूम था कि चम्पा भाभी ने एक सीमा रेखा बना रखी थी अपने और दूसरों के बीच. उसका उल्लंघन एक बार अकडू गधे ने करने की कोशीश की थी. तब उस अकडू गधे की क्या दुर्गति चम्पा भाभी ने की थी वो किस्सा हम आपको बाद मे कभी सुनायेंगे. आज तो यह कहानी सुनाने का मकसद हमारा कुछ और है.

अब चम्पा भाभी की एक कन्या भी थी रुपकला. जिसे प्यार से सभी रुपा कह कर बुलाया करते थे. कुदरत की नायाब रचना थी रूपा. मां की तरह ही रुपा भी गुणों के अलावा रुप रंग मे भी आला दर्जे की थी. धीरे धीरे बचपन विदा ले रहा था और जवानी का आगमन होने लगा था. और यही कारण था कि चम्पा भाभी उसको कभी भी अपनी नजरों से ओझल नही होने देती थी. रुपा लाख समझदार हो पर इस उम्र मे बचपना नादानी और शोखियां तो स्वाभाविक तौर पर लडकियों मे होती ही है.

मोहल्ले के लौंडे लपाडे यानि किश्शू टाईप के लौंडे गधे तो घर के आसपास चक्कर काटा ही करते थे. कोई मौका ही ढूंढते रहते थे कि चम्पा भाभी उनको कोई काम बतादे और वो उसी बहाने रुपा से दो बातें ही करलें. और इनमे भी किश्शू गधे ने अपने थोबडे पर शेर का नकली चेहरा लगा रखा था.. लोगों को और खासकर जवान गधियों को आकर्षित और इंप्रेस करने के लिये..और गांव वालों मे एक दो लोग उसके जैसा जहीन किसी को नही मानते थे..क्योंकि उन मुर्खों के बीच एक दो शब्द अंग्रेजी के भी झाड लिया करता था. यानि अंधों मे काणा राजा था.. पर था निहायत और खालिश गधेडा ही.. पर चम्पा भाभी ने दुनियां देखी थी. इन लौंडो की क्या बिसात कि रुपकला की तरफ़ नजर भी उठा कर देख ले.

रुपा गधेडी पर डोरे डालने को शेर बना किश्शू गधेडा


रोज की तरह दोनों मां बेटी एक दिन जंगल जारही थी. कुछ ही समय बाद बरसात का मौसम शुरु होने वाला था सो चूल्हे मे जलाने को लकडियां इक्कठी करने नियमित जंगल जाना पडता था. और गांव के दूसरे गधे गधेडियां और उनके बाल बच्चे भी जंगल जाया करते थे. छोटे छोटे समूह मे सब अपनी लकडियां इक्कठी करके शाम तक लौट आते थे.

रुपकला और चम्पा के आसपास भी झुंड मे दूसरे गधेडे होते थे. अक्सर रुपकला को लकडी बीनने मे मदद कर देते थे. अगर कोई कांटा वगैरह रुपा गधेडी को लग जाये तो सब आंख बिछाये तैयार खडे रहते थे. बल्कि किश्शू टाईप के गधेडे तो भगवान से प्रार्थना ही करते रहते थे कि हे भगवान कब रुपा को कांटा चुभे और कब हम उसका कांटा निकालने के बहाने उसके नर्म नर्म और नाजुक पैरो को छू सके और अगर छूने का सौभाग्य ना मिले तो जब वो आय..आय करती हुई कांटा निकलवायेगी तब एकटक उसके पांवो को निहार कर ही धन्य हो सकें.

अब अचानक रुपा के जोर से चिल्लाने की आवाज आई...अरे कोई बचाईयो रे..मर गई..मम्मी..जल्दी आवो...तुरत फ़ुरत सब उधर भागे...देखा रुपा एक गहरे अंधे कुयें मे गिरी हुई है और जोर जोर से चिल्ला रही है.

उपर रुपकला ..हाय मेरी बच्ची..अब क्या करुं..अरे कोई निकालो इसको...का विलाप कर रही थी. कुयें के चारों तरफ़ भीड लग गई...शोहदे सांतवना देने लगे..अरे भाभीजी आप चिंता मत करिये...रुपा को कुछ नही होगा...हम सब हैं ना..मिल कर निकाल लेंगे उसको..इत्यादि..इत्यादि...

अब शोहदों की तो बांछे खिली हुई थी. जाने कितने दिनों की मुराद पूरी होगी? सब के मन मे लड्डू फ़ूट रहे थे..कि हाय कैसा लगेगा जब..रुपकला का हाथ पकडकर कुयें से बाहर खींचेगे? और सब बाहर निकालने की योजना बनाने लगे...सबके मन मे लड्डू फ़ूट रहे थे कि क्या पता किस पर रुपकला रीझ जाये और उसी की जीवन संगिनी बनने का निश्चय करले?

हर लौंडा अपनी भरसक योजना बना रहा था. अब ये राज तो बाद मे जाहिर हुआ कि इस अंधे कुये पर घास फ़ूस तो किश्शू गधे ने ही डलवाया था कि किसी तरह चम्पा भाभी और रुपकला को प्रभावित कर सके. बेचारा अभी तक कुंवारा बैठा था रुपकला की आस मे. हाय रे अंधे इश्क.....जो ना करवाये वो कम....इश्क तो कहते हैं कि अच्छे भले को पपलू बनवा देता है...तो किश्शू गधेडे की क्या औकात?

कुयें पर चारों तरफ़ भीड लगी थी. और सब अपना अपना सर्वश्रेष्ठ मत जाहिर कर रहे थे कि अचानक शेर के दहाडने की आवाज आई. बस सारे गधे और गधेडियां दुल्लत्ती झाडते हुये भाग लिये वहां से.

शेर के डर से भागे हुये गधों ने गांव के पास आकर सांस ली!


किश्शू गधेडा जो कुंये मे झुककर अपना हाथ रुपकला की तरफ़ बढा रहा था और उसको उचक कर अपना हाथ पकडने को कह रहा था ..वो भी भागने की तैयारी करने लगा...शेर धीरे धीरे नजदीक आता जा रहा था. चम्पा भाभी ने किश्शू से रुकने की बहुत गुजारिश की..पर आज किश्शू ने सिद्ध कर दिया कि लैला मजनूं का जमाना और रहा होगा..आज के जमाने मे..जान इश्क से उपर है. और सही भी है..जान बचेगी तो इश्क लडाने वालियां और बहुत मिल जायेंगी...सो किश्शू भी भाग लिया. वाह रे इश्कबाज..!

अब रुपकला कुयें के अंदर कुछ समझ ही नही पा रही थी कि उसको बचाने के लिये जो शोहदों की भीड टुट रही थी वो क्यों और कहां भाग गई? और ऊपर चम्पा भाभी ममता की मारी भाग कर जाये भी तो कैसे? सही है आज इश्क मुश्क तो नकली होगया पर मां की ममता आज भी वही है. धीरे धीरे शेर सामने आकर खडा हो गया. चम्पा हताश निराश और किसी अनहोनी के इंतजार मे..चुपचाप खडी देख रही है.

शेर के पीछे पीछे ही उसकी शेरनी और बच्चे भी आ पहुंचे. शेर ने देखा कि आज तो अच्छी मोटी ताजी गधेडी का शिकार मिला है. सारा कुनबा आराम से पेट भरकर खायेगा.

अब शेर रुपकला की गर्दन दबाने के लिये छलांग लगाने ही वाला था कि शेरनी बोली - अरे मुन्ने के पापा, कुछ याद आया?

शेर बोला - भागवान , शिकार के समय क्या याद आयेगा भला?

शेरनी बोली - अरे मुन्ने के बापू, आप भी अब लगता है जवानी खोते जा रहे हो? अरे अभी से दिखाई देना कम होगया क्या? या चश्मा लगवाना पडेगा? अरे ये देखो ये तो वो चम्पा गधेडी है.

शेर बोला - चम्पा गधेडी? वो जिसने अपने मुन्ने को दूध पिलाया था?

शेरनी बोली - अरे अब याद आया आपको सही मे. मैने तो सोचा तुम बुढ्ढे होगये हो? पर तुम तो अभी एकदम ही जवानों की माफ़िक याद दाश्त रखते हो? और शेरनी ने चम्पा गधेडी से हाल चाल पूछे. अचानक चम्पा को याद आया कि जब शेरनी ने बच्चे को जन्म दिया था तब शेरनी भयानक रुप से बीमार पड गई थी. और तब शेर चम्पा को ऊठा लेगया था जंगल में और शेर के बच्चे को तब चम्पा ने ही दूध पिलाया था दो सप्ताह तक. इस वजह से शेर और शेरनी चम्पा के बडे एहसानमंद थे.

रुपा गधेडी को कुयें से बाहर निकालने के बाद सब वहीं आराम करते हुये!


शेर, शेरनी और चम्पा ने मिलकर रुपा को कुयें से बाहर निकाला और थोडी देर वहीं विश्राम करके उनको अपने घर ले गये. वही रुपा की मरहम पट्टी करवाई और तीन चार दिन उन दोनों मां बेटी की अच्छी तरह खातिरदारी की. स्वस्थ होने पर शेर और शेरनी अपने निजी वाहन से उनको गांव छोड गये. ये देखकर गांव मे चम्पा का रुतबा और बढ गया.

अब ये सारा माजरा एक बाज (hawk) की बीबी देख रही थी. उसे विश्वास ही नही हुआ कि एक मांसाहारी शेर एक गधेडी और उसकी बेटी को खाने के बजाये उसकी मदद करते हुये खातिरदारी करेंगे और इलाज करवा कर सकुशल उसे उनके घर पहुंचा कर आयेंगे?

उससे जब नही रहा गया तो उसने तेजी से उडान भरी और आकर ताऊ से पूछने लगी कि आज उसने ऐसा आश्चर्य देखा. ऐसे कैसे हो सकता है?

ताऊ बोला - अरे बाजणी, यही तो सच्ची सेवा है? निस्वार्थ सेवा....इसके बदले में तो सीधे स्वर्ग की सीट रिजर्व होती है. यानि अपने से सक्षम की सेवा तो सब करते हैं..पर स्वर्ग मिलता है अपने से कमजोर और असहाय की सेवा करने से.

बाजणी बोली - ताऊ मौका पडने दे ..मैं इसी तरियां स्वर्ग की सीट बुक करवा लूंगी.

थोडे दिन बाद...जंगल मे पानी बरसा ..बहुत घनघोर...और एक चूहे के जरा जरा से चार बच्चे थे..वो भी बिल मे पानी भरने से बाहर आकर बहने लगे. वहीं पेड पर अपने घोंसले मे बाजणी बैठी इनको देख रही थी पानी मे बह्ते हुये...और वो इनको अपना आहार बनाने ही वाली थी कि अचानक बाजणी को, ताऊ द्वारा बताई, स्वर्ग की सीट बुक करवाने की याद आई... उसने सोचा कि इनसे ज्यादा असहाय और कमजोर अब और कौन मिलेगा? सो यह मौका नही छोडना चाहिये.

बाजणी ने तुरंत उन चूहे के छोटे बच्चों को सावधानी से उठाया और उनको अपने घोसलें में ले आई...और अपने पंखों से उन चूहे के बच्चों को ढका और खिलाया पिलाया. चूहे के बच्चे ..उसके पंखो की गर्मी पाकर सूख गये...और सूखते ही आदतानुसार .. उनके दांत कुलबुलाने लगे....और बाजणी उनको अपने पंखों के नीचे दबाये स्वर्ग के सपने देख रही थी..चूहे के बच्चों ने रात भर मे बाजणी के दोनों पंखों को कुतर खाया...

सुबह हुई..बाजणी ने सोचा ..कि जाकर ताऊ को बतादे..कि स्वर्ग की सीट बुक अब तो हो ही गई होगी? जैसे ही उसने उडान भरने की कोशीश की...उसका कलेजा धक से रह गया....अशक्त..बिल्कुल निसहाय..मुडकर देखा तो...उसके पंख ही गायब....और चूहे के बच्चे...उसके घोंसले से बाहर निकल कर पेड की शाखाओं पर खेल रहे थे....उसको ताऊ पर बहुत गुस्सा आया...पर क्या करें...?

इतनी ही देर मे ताऊ जंगल में आता हुआ दिखा और जैसे ही उस पेड के पास पहुंचा ...उपर से बाजणी ने आवाज लगाई..अरे सत्यानाशी ताऊ....मैने तेरा क्या बिगाडा था? मुझे ऐसी सलाह क्यों दे डाली? तेरा स्वर्ग तुझको मुबारक..मुझे मेरे पंख लौटा दे...मेरे को तो तूने जीते जी नरक मे पहुंचा दिया....तूने ये कौन से जन्म का बदला निकाला..

ताऊ बोला - देख बाजणी...मैं तो बिना बात ही बदनाम सूं...बदमाशों से बदले तो भगवान ही निकाल दिया करै सै..अपने आप... पर इसमे बदले वाली कोई बात नही सै. अरे तेरे को ये तो सोचना था कि मदद किसकी करनी चाहिये और किसकी नही? बिना सोचे समझे स्वर्ग की सीट बुक करवाने वालों की तो यही गति होती है.

ताऊ की चाय मे गिरकर मक्षिका सुंदरी का परलोकगमन

परसों ही सर्द सुबह मे बिस्तर में बैठे बैठे चाय पी रहा था. अचानक एक मक्षिका सुंदरी प्रकट होगई और हमारे कप के किनारे विराजमान होगई. आश्चर्य सर्दी की सुबह इनका क्या काम?

हमने उससे पूछा : हे सुंदरी आपका इस सर्द सुबह मे यहां आने का क्या प्रयोजन है?

मक्षिका सुंदरी बोली : ताऊ, मुझे आत्महत्या करनी है.

हमने घबराते हुये निवेदन किया : हे देवी, तू मुझे माफ़ कर, तेरे हाथ पैर जोडूं..क्युं सर्दी मे पुलिस थाने के चक्कर कटवाने का इंतजाम कर रही है?

वो बोली : ताऊ, सुना है सर्दी की सुबह ताऊ की चाय के कप मे डूबकर आत्महत्या करने से स्वर्ग नसीब होता है. सो आज बहुत दिन बाद तुमको चाय पीते हुये पकडा है, यह सुनहरी मौका मैं हाथ से गंवाना नही चाहती. और हम कुछ बोल पाते उसके पहले ही उस मक्खी सुंदरी ने चाय के गर्म कप मे छलांग मार दी और मर गई.

हमको घोर ग्लानि हुई और हमने वो मक्खी गिरी चाय का प्याला एक तरफ़ खिसका दिया और यह प्रण लेने की ठानी कि अब से हम चाय ही नही पियेंगे. यानि हमारे सबसे प्रिय शौक का त्याग कर देंगे. ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी.


इतनी ही देर मे श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी का आगमन हुआ. हमको उदास निराश और गमगीन बैठे देख कर बोले : बच्चा क्या बात है?

हमने बताया कि हमारी चाय मे गिरकर मक्षिका सुंदरी परलोकगमन कर गई हैं. इसलिये हमने चाय का हमेशा के लिये परित्याग कर दिया है.

इस पर बाबाजी बोले - बालक, चाय छोडने की मुर्खता मत करो. अब तुम चाय के लतियल हो चुके हो?

हमने कहा : महाराज, जिस चाय से किसी की जान जाती हो...किसी का दिल दुखता हो..हम ऐसी चाय, वो भी सिर्फ अपने मौज मजे के लिए, बिल्कुल नही पियेंगे..आज से ही चाय का परित्याग कर रहे हैं हम..

बाबा समीरानंदजी बोले : बालक, मोह ग्रस्त मत हो. जिसको मरना है वो मरेगा ही..तेरी चाय मे गिरकर मरेगा ..नही तो मेरी चाय मे गिरकर मरेगा...या फ़िर किसी और की चाय मे गिरकर मरेगा...पर मरेगा जरुर...मरने वाले को कौन रोक पाया है आज तक? तो ऐसे मे तुम्हारा चाय का परित्याग करना नितांत हास्यापद है. इसमे कसूर तुम्हारे चाय पीने का नही है बल्कि जबरन आकर आत्महत्या करने वाले का है. अत: अब उठ और चाय पीना शुरु कर.

बस हमने चाय का दूसरा गर्मागर्म कप तैयार किया और यह पोस्ट लिखने बैठ गये.

ताऊ पहेली - 51 विजेता श्री दिनेशराय द्विवेदी

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 51 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है मातृमंदिर ओरोविला पाँडिचेरी.

मातृमंदिर ओरोविला


और इसके बारे मे संक्षिप्त सी जानकारी दे रही हैं सु. अल्पना वर्मा

बहनों और भाईयो नमस्कार. इस अंक से कुछ समय के लिये रमप्यारी का और हीरामन का कालम स्थगित किया गया है. आप लोगों ने रामप्यारी की वापसी की मांग की है. आपकी भावनाएं हम समझते हैं. और आपको विश्वास दिलाते हैं कि रामप्यारी बहुत शीघ्र नये रंग रूप और अपनी चुलबुली हरकतों के साथ वापस आपके साथ होगी. बस थोडा सा इंतजार किजिये. आईये अब आज के पहेली के स्थान के बारे में कुछ जानते हैं.


महर्षि अरविन्द घोष का जन्म 15 august ,१८७२ कोलकता में हुआ .
वह एक महान योगी एवं दार्शनिक थे.बाल्यावस्था में कुछ समय दार्जिलिंग में शिक्षा ग्रहण करने के बाद वह सात साल की उम्र में अपने भाइयों के साथ शिक्षा के लिए इंग्लैंड चले गये थे. 1892 में भारत वापस लौट आये.

1905 के बंगाल विभाजन के बाद हुए क्रांतिकारी आंदोलन और 1908-09 में अलीपुर बम कांड मुकदमा चला. जेल में कई आध्यात्मिक अनुभव के बाद वे अंतत: सक्रिय राजनीति से अलविदा कह तत्कालीन फ्रांसीसी शासन वाले पांडिचेरी चले गए. पांडिचेरी में उन्होंने आध्यात्मिक साधनाएँ की और मृत्यु पर्यन्त [५ दिसम्बर १९५० को]तक वहीं रहे.पांडिचेरी में रहते हुए अरविन्द ने अपने महाकाव्य सावित्री और सबसे चर्चित पुस्तक ‘डिवाइन लाइफ’ ( हिन्दी में दिव्य जीवन के नाम से अनूदित) की रचना की थी.

पाँडिचेरी-भारत का केन्द्र शाषित प्रदेश पाँडिचेरी पिछले लम्बे काल से फ्रेंच कालोनी के रूप में चर्चित रहा है.इसका इतिहास १६७३ से तब प्रारंभ होता है जब चेन्नइ्रर् के पास सेंट होम के किलेबंद नगर में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी के एजेन्ट मार्टिन को डचों ने हरा दिया था। मार्टिन हार कर फ़्रांस नहीं लौटा। पांडिचेरी में आकर रहने लगा। कहते हैं उस समय यह छोटा सा गांव था। इस गांव को उसने जिंजी के राजा से खरीद लिया और धीरे-धीरे इसे एक समृद्ध नगर का रूप दिया।1954 में भारत व फ्रांस के मध्य एक समझौते के बाद पाँडिचेरी का प्रशासन भारत सरकार के अन्तर्गत है।अंतिम रूप से १ नवम्बर १९५६ को यह भारत संघ का अंग बन गया.

तमिल, तेलुगू, मलयालम व फ्रेंच भाषा सरकारी कामकाज के लिये स्वीकृत है.


'ओरोविला'-:
यहाँ महर्षि अरविन्द के नाम से 'ओरोविला'एक अन्तर्राष्ट्रीय नगर बसाया गया है. महर्षि अरविन्द आश्रम अन्तर्राष्ट्रीय योग शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र के रूप में भी विख्यात है.रूद्रेलाल मैरीन पर अरबिंदो ने फ्रांसीसी महिला मीरा अलफास्सा की सहायता से इस आश्रम की स्थापना की थी.यहाँ का मुख्य सूत्र मानव एकता है.


Auroville Dome


गोल गुंबद के आकार मे बना मातृमंदिर ओरोविला [उषा नगरी] से १० किलों मीटर दूर है.मंदिर के अंदर बने ध्यानकक्ष में रखा बडा क्रिस्टल बाल सूर्य की रोशनी में खूबसूरत आभा बिखेरता है.

यहीं एक बड़ा बरगद का पेड़ भी है जिसकी उम्र बहुत अधिक नहीं केवल १०० बरस बताई जाती है.यह मंदिर फ्रांसीसी महिला द मदर द्वारा स्थापित हुआ था.श्री अरविंद जी ने उन्हें ही आश्रम का संचालन सोन्पा हुआ था.उन्हें श्रीमाता के नाम से भी जानाजाता है.

यह स्थान युनेसको द्वारा संरक्षित है.

अधिक जानकारी के लिये -:

www.auroville.org

or-visit-:
La Boutique d’ Auroville,
38 J.Nehru Street,
Puducherry
Phone: 0413 – 2337264

अभी के लिये इतना ही. अगले शनिवार एक नई पहेली मे आपसे फ़िर मुलाकात होगी. तब तक के लिये नमस्कार।


आज के सम्माननिय विजेता क्रमश: इस प्रकार हैं. सभी को हार्दिक बधाई!

 

   श्री दिनेशराय द्विवेदी  अंक १०१
  श्री स्मार्ट इंडियन  अंक १००
सुश्री हीरल जौहरी अंक ९९
श्री दिलिप कवठेकर अंक ९८
श्री मुरारी पारीक अंक ९७
सुश्री सीमा गुप्ता  अंक ९६
श्री प्रकाश गोविंद अंक ९५
श्री शोभित जैन अंक ९४
श्री मीत अंक ९३
  श्री प. डी.के. शर्मा "वत्स", अंक ९२
श्री उडनतश्तरी अंक ९१
श्री संजय तिवारी ’संजू’ अंक ९०
सुश्री प्रेमलता पांडे अंक ८९

 

निम्न महानुभावों के हम बहुत आभारी हैं जिन्होने इस अंक में भाग लेकर हमारा उत्साह बढाया. हार्दिक आभार.

 

सुश्री M A Sharma “सेहर”, श्री विवेक रस्तोगी,  सुश्री निर्मला कपिला,  श्री रतनसिंह शेखावत,  श्री ललित शर्मा,  श्री संजय बेंगाणी,  श्री काजलकुमार,  श्री अविनाश वाचस्पति,  श्री अंतर सोहिल,  सुश्री वंदना,  डा. महेश सिन्हा,  डा. रुपचंद्र शाश्त्री,  श्री मुंबई टाईगर,  श्री दिगंबर नासवा,  श्री राज भाटिया,  हे प्रभु ये तेरा पथ,  श्री महावीर सेमलानी,  श्री दीपक तिवारी “साहब”,  श्री रामबाबू सिंह,  श्री योगिंद्र मोदगिल, श्री टेगस्की और सुश्री वाणीगीत.

 

आप सभी बहुत अभार.



अच्छा अब नमस्ते.सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. ताऊ पहेली – 51 का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया. अगली पहेली मे अगले शनिवार सुबह आठ बजे आपसे फ़िर मिलेंगे तब तक के लिये नमस्कार.

ताऊ पहेली - 51

प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम.

ताऊ पहेली अंक 51 में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. इस अंक से कुछ सामान्य से बदलाव हैं. पहला बदलाव तो यह है कि रामप्यारी यहां से कुछ दिन की छुट्टी ले रही है. तो उसके सवाल को स्थगित किया गया है.

दूसरा और महत्वपुर्ण बदलाव यह है कि अब से रामप्यारी का हिंट सिर्फ़ एक बार ही उसके ब्लाग पर दिया जायेगा जो कि सुबह 10:00 बजे ही उसके ब्लाग पर मिलेगा. बाकी सभी नियम कानून पहले जैसे ही हैं.


यह कौन सी जगह है?


ताऊ पहेली का प्रकाशन हर शनिवार सुबह आठ बजे होगा. ताऊ पहेली के जवाब देने का समय कल रविवार दोपहर १२:०० बजे तक है. इसके बाद आने वाले सही जवाबों को अधिकतम ५० अंक ही दिये जा सकेंगे


अब आप रामप्यारी के ब्लाग पर हिंट की पोस्ट सुबह दस बजे ही पढ सकते हैं! दूसरा हिंट नही दिया जायेगा.


इस अंक के आयोजक हैं ताऊ रामपुरिया और सु,अल्पना वर्मा



नोट : यह पहेली प्रतियोगिता पुर्णत:मनोरंजन, शिक्षा और ज्ञानवर्धन के लिये है. इसमे किसी भी तरह के नगद या अन्य तरह के पुरुस्कार नही दिये जाते हैं. सिर्फ़ सोहाद्र और उत्साह वर्धन के लिये प्रमाणपत्र एवम उपाधियां दी जाती हैं. किसी भी तरह की विवादास्पद परिस्थितियों मे आयोजकों का फ़ैसला ही अंतिम फ़ैसला होगा. एवम इस पहेली प्रतियोगिता में आयोजकों के अलावा कोई भी भाग ले सकता है.


मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम
मिस.रामप्यारी का ब्लाग

 

नोट : – ताऊजी डाट काम  पर हर सुबह 8:00 बजे और शाम 6:00 बजे नई पहेली प्रकाशित होती हैं. यहा से जाये।

ताऊ, करवा ले न्याय तेरे ब्लाग पंचों से ही.... !

हमने एक कहानी शुरु की थी सांड तो लड अलग भये : बछडे भये उदास शीर्षक से. जो क्रमश: पर जो छूटी तो आज तक छूटी हुई है. असल में ये रिपोर्टिंग का रोग ही कुछ ऐसा है कि आदमी को कहीं का नही छोडता यानि रामदयाल का गधा बनवा देता है. हमारी इस रिपोर्टिंग का नतीजा ये निकला कि कुछ अपने आपको अंग्रेज टाईप समझने वाले लोग तो ब्लडी..और हेल..तक उतर आये और कुछ ने हमारे पीछे खुल्ले सांड दौडा दिये...सुर्पणखां दौडा दी... हम ठहरे मुर्ख ..सो भैया..हाथ जौडे इस रिपोर्टिंग के धंधे से...कम कमायेंगे कम खा लेंगे..पर ऐसी सर्दी को इसमे उलझ कर क्यों खराब करे?


अभी पिछले दिनो संजय बेंगाणी जी का फ़ोन आया था कि ताऊ बीकानेर चलना है ...वहां शादी भी अटेंड करनी है और एक ब्लागर सम्मेलन का एजेंडा है उसकी रिपोर्टिंग भी करनी है..हमने उनसे माफ़ी मांग ली कि.. दिल्ली ब्लागर सम्मेलन के बाद ताऊ ने रिपोर्टिंग से तौबा करली.. हम पहले ही घोषणा कर चुके हैं..

इसलिये हम बीकानेर नही गये. बेंगाणी जी ने कहा भी कि ताऊ शादी मे तो चलो..आप रिपोर्टिंग भले मत करना तो हमने कहा की आपकी बात सही है पर हम अपने आपको आपसे ज्यादा अच्छी तरह से जानते हैं...

बेंगाणी जी बोले - बात कुछ समझ नही आई?

हमने कहा कि - इसमे समझने जैसी कोई बात ही नही है. जैसे गीदड जब दूसरे गीदडों को हूआं..हूआं..हूआं..हूआं.. करते सुनता है तो उसकी भी इच्छा हो ही जाती है हुआं..हुआं... करने की, तो यह संभव ही नही है कि ब्लागर सम्मेलन हो और ताऊ उसमे जाये और रिपोर्टिंग नही करे? ऐसा हो सकता है क्या?

और जब हम रिपोर्टिंग करेंगे...फ़िर कोई ब्लडी.. हेल...कहेगा...फ़िर कोई खुल्ला या बंधा सांड..और सुर्पणखां ताऊ के पीछे दौडायेगा...

तो भैया हमने तो रिपोर्टिंग से तौबा करली है. और अविनाश वाचस्पति जी..ताऊ तो आपके मुंबई ब्लागर मिटिंग को कवर करने भी मुंबई नही आयेगा..आप अपना इंतजाम खुद ही कर लेना....

हां तो हमने अपनी कहानी छोडी थी कि ताऊ से चिलम पीने के बहाने शेर ने ताऊ को अपनी मीठी मीठी बातों मे उलझा लिया. और ताऊ ठहरा बावली बूच...आगया शेर की बातों में..और खोल दिया शेर के पिंजरे का मूंह...और जैसे ही पिंजरे का मूंह खुला .. वो बेईमान शेर कूद कर बाहर आगया और बाहर आते ही ताऊ की गर्दन पर झपट पडा.

पिंजरे से छुटते ही बेईमान शेर ताऊ पर झपट पडा!


ताऊ हक्का बक्का रह गया..और बोला - यार शेर ये क्या बदतमीजी है? मैने तुझको बाहर निकाला और तू मेरी गर्दन पकड कर मुझे ही खाना चाहता है?

शेर बोला - अरे ताऊ तू बावली बूच है मुर्ख...अरे मुर्ख..मैं दस दिन से भूखा प्यासा इस पिंजरे मे पडा हूं..और मेरे अंदर अब तो इतनी ताकत भी नही बची है कि जाकर कहीं शिकार कर सकूं? इसलिये अब मैं तुझे ही खाऊंगा...

ताऊ बोला - तूने मुझे इनाम के लालच मे फ़ंसा लिया और अब इनाम देने की बजाये मुझे खाना चाहता है? यह अन्याय है यह नीति विरुद्ध है. ऐसा करके तुम अच्छा नही कर रहे हो? आगे से कोई किसी की मदद नही करेगा.

शेर बोला - अरे ओ बावलीबूच ताऊ...नीती यही है जो मैं कर रहा हूं..अब तू निपट गंवार आदमी जंगल के राजा को नीती पाठ पढायेगा क्या? अरे अगर मैं गलत कर रहा हूं तो करवाले न्याय तेरे ब्लाग पंचों से ही....

ताऊ ने जैसे ही ब्लाग पंचों से न्याय करवाने की बात शेर के मूंह से सुनी तो...कुछ आशा बंधी की..अब जान बच सकती है. ब्लाग जगत के मठाधीष पंच न्याय की बात करके ताऊ की जान बचा ही लेंगे....(क्रमश:)